11 Aug टीबी-मुक्त भारत: केंद्र सरकार ने कर्नाटक-केरल सांसदों के साथ उठाए कदम
✎ टीबी-मुक्त भारत अभियान का लक्ष्य 2025 तक देश से तपेदिक का उन्मूलन करना है, जिसके लिए सामुदायिक भागीदारी, नवीन रोगी-पहचान और मरीज-केंद्रित देखभाल पर जोर दिया जा रहा है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — स्वास्थ्य, सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – विकास और उनके अनुप्रयोग तथा रोज़मर्रा के जीवन पर प्रभाव
- Prelims: टीबी-मुक्त भारत अभियान, राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम, निक्षय पोर्टल, निक्षय पोषण योजना, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), क्षय रोग (Tuberculosis – TB), प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान
- Essay: भारत में जन स्वास्थ्य चुनौतियाँ और समाधान, टीबी उन्मूलन: एक स्वस्थ और समृद्ध भारत की दिशा में कदम
त्वरित पुनरावृत्ति: टीबी-मुक्त भारत अभियान का लक्ष्य 2025 तक देश से तपेदिक का उन्मूलन करना है, जिसके लिए सामुदायिक भागीदारी, नवीन रोगी-पहचान और मरीज-केंद्रित देखभाल पर जोर दिया जा रहा है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जे. पी. नड्डा ने हाल ही में कर्नाटक और केरल के सांसदों के साथ एक बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य टीबी-मुक्त भारत अभियान (TB-Mukt Bharat Abhiyaan) के प्रयासों को गति देना था। यह बैठक देश के विभिन्न राज्यों के सांसदों के साथ आयोजित किए जा रहे जागरूकता एवं परामर्श कार्यक्रमों की श्रृंखला का हिस्सा थी, जिसका लक्ष्य टीबी उन्मूलन के लिए राजनीतिक स्तर पर एकजुट संकल्प को मजबूत करना है। इस दौरान 100-दिवसीय टीबी-मुक्त भारत अभियान की प्रगति की भी समीक्षा की गई, जिसने देश में टीबी उन्मूलन के प्रयासों को महत्वपूर्ण बढ़ावा दिया है।
पृष्ठभूमि
- भारत ने वर्ष 2025 तक टीबी उन्मूलन का लक्ष्य रखा है, जो वैश्विक लक्ष्य (2030) से पाँच वर्ष पहले है।
- टीबी-मुक्त भारत अभियान को देश से तपेदिक (Tuberculosis – TB) के उन्मूलन के लिए एक जन आंदोलन के रूप में शुरू किया गया है।
- यह अभियान राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (National TB Elimination Programme – NTEP) के तहत टीबी रोगियों को सामुदायिक सहायता प्रदान करने पर केंद्रित है।
- वर्ष 2015 से 2024 के बीच देश में टीबी के मामलों में 21 प्रतिशत की कमी आई है, जो वैश्विक गति से लगभग दोगुनी है।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की वैश्विक टीबी रिपोर्ट 2025 के अनुसार, भारत ने 92 प्रतिशत उपचार कवरेज दर हासिल की है।
टीबी-मुक्त भारत अभियान क्या है?
- टीबी-मुक्त भारत अभियान भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया एक राष्ट्रीय अभियान है जिसका उद्देश्य देश से तपेदिक (टीबी) का उन्मूलन करना है।
- यह अभियान प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान (PM TB Mukt Bharat Abhiyaan) का एक महत्वपूर्ण घटक है, जिसे सितंबर 2022 में लॉन्च किया गया था।
- इसका मुख्य लक्ष्य वर्ष 2025 तक भारत को टीबी-मुक्त बनाना है, जो सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals – SDGs) के वैश्विक लक्ष्य (2030) से पाँच वर्ष पहले है।
- अभियान का उद्देश्य टीबी रोगियों को पोषण, निदान, व्यावसायिक और अतिरिक्त सहायता प्रदान करने के लिए सामुदायिक सहायता को बढ़ाना है।
- यह निक्षय मित्र (Nikshay Mitra) पहल के माध्यम से व्यक्तियों, गैर-सरकारी संगठनों (NGOs), सहकारी समितियों और कॉर्पोरेट संस्थानों को टीबी रोगियों को ‘दत्तक’ लेने और उन्हें सहायता प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
- अभियान रोगी-पहचान रणनीतियों, मरीज-केंद्रित देखभाल और गुणवत्तापूर्ण सेवाओं के लिए सहयोगात्मक निगरानी पर जोर देता है।
- इसमें टीबी की जांच, उपचार और मरीजों को सहायता उपलब्ध कराने की पहुंच का विस्तार करने के लिए राज्य और समुदाय स्तर पर सक्रिय भागीदारी शामिल है।
- निक्षय पोर्टल (Nikshay Portal) और निक्षय पोषण योजना (Nikshay Poshan Yojana) जैसे डिजिटल उपकरण और वित्तीय सहायता योजनाएं भी इस अभियान का अभिन्न अंग हैं, जो रोगियों को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से पोषण संबंधी सहायता प्रदान करती हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| सांसदों के साथ बैठक | टीबी उन्मूलन हेतु राजनीतिक प्रतिबद्धता और अंतर-मंत्रालयी समन्वय को मजबूत करना। |
| टीबी-मुक्त भारत अभियान | देशव्यापी स्तर पर टीबी की रोकथाम, पहचान और उपचार के प्रयासों को गति देना। |
| नवीन रोगी-पहचान रणनीतियाँ | उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों की सक्रिय पहचान और शीघ्र उपचार सुनिश्चित करना। |
| मरीज-केंद्रित देखभाल | टीबी रोगियों को गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करना। |
| समुदाय की भागीदारी | टीबी उन्मूलन को एक जन आंदोलन बनाना और जागरूकता बढ़ाना। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- टीबी जैसी संक्रामक बीमारी के उन्मूलन से सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार होगा और मृत्यु दर में कमी आएगी।
- गरीब और कमजोर वर्गों पर टीबी का अधिक प्रभाव होता है; इसके उन्मूलन से स्वास्थ्य असमानताओं को कम करने में मदद मिलेगी।
- समुदाय की सक्रिय भागीदारी से स्वास्थ्य कार्यक्रमों की सफलता सुनिश्चित होगी और स्वास्थ्य साक्षरता बढ़ेगी।
शासनिक महत्व
- सांसदों की भागीदारी से केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय मजबूत होगा, जिससे योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन संभव होगा।
- जिला कलेक्टरों और स्वास्थ्य संस्थानों के साथ समन्वय के लिए विशिष्ट निगरानी बिंदु स्थापित करने से जवाबदेही बढ़ेगी।
- यह ‘समग्र सरकारी दृष्टिकोण’ (Whole of Government Approach) का एक उदाहरण है, जहाँ विभिन्न स्तरों पर सरकार के अंग एक साझा लक्ष्य के लिए काम करते हैं।
आर्थिक महत्व
- टीबी के कारण होने वाली उत्पादकता हानि (productivity loss) को कम करने से देश की आर्थिक संवृद्धि (economic growth) में योगदान मिलेगा।
- स्वास्थ्य सेवाओं पर होने वाले व्यय में कमी आएगी, जिससे स्वास्थ्य बजट का बेहतर उपयोग हो सकेगा।
- स्वस्थ कार्यबल देश के मानव पूंजी सूचकांक (human capital index) को बेहतर बनाएगा।
चुनौतियाँ
1. टीबी का पता लगाने में चुनौतियाँ
- विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में टीबी के मामलों का पता लगाने के लिए पर्याप्त जांच सुविधाओं की कमी।
- टीबी के लक्षणों के बारे में जागरूकता की कमी और सामाजिक कलंक (social stigma) के कारण लोग जांच कराने से कतराते हैं।
यूपीएससी लिंक: स्वास्थ्य सेवाएँ, कमजोर वर्ग
2. उपचार का अनुपालन
- टीबी के उपचार की लंबी अवधि (6-9 महीने) के कारण मरीजों द्वारा बीच में ही उपचार छोड़ने की प्रवृत्ति।
- दवा प्रतिरोधक टीबी (Drug-resistant TB) के मामलों में उपचार अधिक जटिल और महंगा होता है।
यूपीएससी लिंक: स्वास्थ्य नीतियाँ, जन स्वास्थ्य
3. बुनियादी ढाँचा और मानव संसाधन
- स्वास्थ्य सुविधाओं में प्रशिक्षित कर्मियों और आवश्यक उपकरणों की कमी।
- टीबी के निदान और उपचार के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की उपलब्धता में असमानता।
यूपीएससी लिंक: स्वास्थ्य अवसंरचना, मानव संसाधन विकास
4. जागरूकता और जन भागीदारी
- टीबी के बारे में गलत धारणाएँ और अंधविश्वास, जो उपचार में बाधा डालते हैं।
- समुदायों को टीबी उन्मूलन अभियान में सक्रिय रूप से शामिल करने में चुनौतियाँ।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक जागरूकता, सरकारी योजनाएँ
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| उच्च-भार वाले राज्य | कर्नाटक और केरल जैसे राज्यों में टीबी के मामलों की उच्च संख्या, जो उन्मूलन लक्ष्य को प्रभावित कर सकती है। |
| जागरूकता की कमी | समुदाय स्तर पर टीबी के लक्षणों, रोकथाम और उपचार के बारे में अपर्याप्त जानकारी। |
| निगरानी और समन्वय | विभिन्न सरकारी स्तरों और स्वास्थ्य संस्थानों के बीच प्रभावी निगरानी और समन्वय की आवश्यकता। |
| मरीज-केंद्रित दृष्टिकोण | प्रत्येक मरीज की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने और उपचार के अनुपालन को सुनिश्चित करने की चुनौती। |
| संसाधनों का आवंटन | टीबी उन्मूलन के लिए पर्याप्त वित्तीय और मानव संसाधनों का प्रभावी ढंग से आवंटन सुनिश्चित करना। |
आगे की राह
- टीबी के मामलों की शीघ्र पहचान के लिए सक्रिय स्क्रीनिंग और नई निदान तकनीकों का व्यापक उपयोग किया जाए।
- टीबी के उपचार के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए प्रत्यक्ष प्रेक्षित उपचार लघु-पाठ्यक्रम (DOTS) और पोषण संबंधी सहायता को मजबूत किया जाए।
- स्वास्थ्य कर्मियों को टीबी के निदान, उपचार और परामर्श में प्रशिक्षित करने के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाए।
- टीबी के बारे में जागरूकता बढ़ाने और सामाजिक कलंक को दूर करने के लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाए जाएँ।
- टीबी उन्मूलन के प्रयासों में निजी क्षेत्र, गैर-सरकारी संगठनों और सामुदायिक स्वयंसेवकों की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाए।
- टीबी अनुसंधान और विकास में निवेश बढ़ाया जाए ताकि बेहतर टीके और उपचार के तरीके विकसित किए जा सकें।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करके वैश्विक टीबी उन्मूलन लक्ष्यों में योगदान दिया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
टीबी-मुक्त भारत अभियान · राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम · सामुदायिक भागीदारी · स्वास्थ्य नीति · जन आंदोलन · सतत विकास लक्ष्य · बहु-क्षेत्रीय दृष्टिकोण · रोग निगरानी
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 47’, ‘note’: ‘पोषण स्तर और लोक स्वास्थ्य में सुधार’}
अवधारणा प्रवाह
टीबी-मुक्त भारत अभियान की शुरुआत → सांसदों के साथ परामर्श और समन्वय → नवीन रोगी-पहचान रणनीतियाँ लागू करना → मरीज-केंद्रित देखभाल और उपचार सुनिश्चित करना → समुदाय की भागीदारी से जागरूकता बढ़ाना → टीबी के मामलों में कमी और उन्मूलन की दिशा में प्रगति
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. टीबी-मुक्त भारत अभियान के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अभियान का उद्देश्य भारत से वर्ष 2030 तक तपेदिक (Tuberculosis – TB) का उन्मूलन करना है।
2. अभियान के दूसरे चरण में देशभर के उच्च-जोखिम वाले गांवों और शहरी वार्डों को शामिल किया गया था।
3. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की वैश्विक टीबी रिपोर्ट 2025 के अनुसार, भारत ने 92 प्रतिशत उपचार कवरेज दर हासिल की है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 गलत है। भारत का लक्ष्य वर्ष 2025 तक टीबी का उन्मूलन करना है, जबकि वैश्विक लक्ष्य 2030 है। कथन 2 सही है, अभियान के दूसरे चरण में उच्च-जोखिम वाले क्षेत्रों को शामिल किया गया था। कथन 3 भी सही है, भारत ने 92 प्रतिशत उपचार कवरेज दर हासिल की है।
Q2. अभिकथन (A): भारत में टीबी उन्मूलन के प्रयासों में सांसदों की सक्रिय भागीदारी महत्वपूर्ण है।
कारण (R): सांसद जिला कलेक्टरों और स्वास्थ्य संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित कर जमीनी स्तर पर अभियान को गति दे सकते हैं।
सही विकल्प चुनिए:
- A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या करता है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं करता है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या करता है। — अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं। सांसदों की भागीदारी से जागरूकता बढ़ती है और स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में सुधार होता है, जो टीबी उन्मूलन के लिए महत्वपूर्ण है। कारण (R) अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में तपेदिक (टीबी) उन्मूलन के लिए ‘टीबी-मुक्त भारत अभियान’ की भूमिका का परीक्षण कीजिए। इस अभियान की सफलता सुनिश्चित करने में सामुदायिक भागीदारी और बहु-क्षेत्रीय दृष्टिकोण के महत्व पर भी प्रकाश डालिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** भारत में टीबी की स्थिति और ‘टीबी-मुक्त भारत अभियान’ (TB-Mukt Bharat Abhiyaan) के लक्ष्य (2025 तक उन्मूलन) का संक्षिप्त उल्लेख।
2. **टीबी-मुक्त भारत अभियान की भूमिका:**
* अभियान के चरण और कवरेज (उच्च-प्राथमिकता वाले जिले, उच्च-जोखिम वाले गांव/शहरी वार्ड)।
* नवाचार, संवेदनशीलता और राजनीतिक इच्छाशक्ति पर आधारित दृष्टिकोण।
* रोगी-पहचान रणनीतियाँ और मरीज-केंद्रित देखभाल।
* जागरूकता कार्यक्रमों का संचालन।
* टीबी के मामलों में कमी (2015-2024 के बीच 21% की कमी) और उपचार कवरेज दर (92%) जैसे डेटा का उल्लेख।
3. **सामुदायिक भागीदारी का महत्व:**
* जन आंदोलन के रूप में अभियान को बढ़ावा देना।
* जागरूकता बढ़ाना और कलंक (stigma) को कम करना।
* मरीजों की पहचान और उपचार में सहायता।
* निक्षय मित्र पहल का उल्लेख।
4. **बहु-क्षेत्रीय दृष्टिकोण का महत्व:**
* ‘समग्र सरकारी दृष्टिकोण’ (whole-of-government approach) का अर्थ।
* विभिन्न मंत्रालयों (स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण विकास आदि) और विभागों के बीच समन्वय।
* सांसदों, जिला कलेक्टरों और स्वास्थ्य संस्थानों के बीच समन्वय।
* पोषण सहायता और सामाजिक सुरक्षा जैसे गैर-स्वास्थ्य कारकों का महत्व।
5. **निष्कर्ष:** अभियान की चुनौतियों और आगे की राह पर संक्षिप्त टिप्पणी, जिसमें सतत प्रयासों और मजबूत निगरानी की आवश्यकता पर बल दिया जाए।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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