09 Sep डीआरआई ने 740 किलो गांजा-चरस जब्त कर 13 गिरफ्तार, जानिए कैसे चलाई गई कार्रवाई

✎ राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985 के तहत मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज की है, जिसमें हाल ही में 740 किलोग्राम गांजा और चरस जब्त की गई है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा | GS Paper III — अर्थव्यवस्था (अवैध व्यापार और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव) | GS Paper II — शासन (कानून प्रवर्तन और नियामक संस्थाएँ)
- Prelims: राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI), नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985, गांजा, चरस, मादक पदार्थों की तस्करी, सीमा पार अपराध
- Essay: भारत में मादक पदार्थों की तस्करी: आंतरिक सुरक्षा, सामाजिक ताने-बाने और आर्थिक विकास पर प्रभाव, नशीले पदार्थों के अवैध व्यापार से निपटने में कानून प्रवर्तन एजेंसियों की भूमिका और चुनौतियाँ
त्वरित पुनरावृत्ति: राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985 के तहत मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज की है, जिसमें हाल ही में 740 किलोग्राम गांजा और चरस जब्त की गई है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने हाल ही में देशभर में आठ अभियानों में लगभग 740 किलोग्राम गांजा और चरस जब्त की है, जिसमें 13 व्यक्तियों को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985 के तहत गिरफ्तार किया गया है। इन अभियानों में सड़क, रेल और हवाई मार्गों के माध्यम से होने वाली मादक पदार्थों की तस्करी को बाधित किया गया है, जिसमें विशेष रूप से बनाए गए गुप्त कक्षों और यात्रियों के सामान में छिपाए गए पदार्थ शामिल थे।
पृष्ठभूमि
- मादक पदार्थों की तस्करी भारत के लिए एक गंभीर चुनौती है, जो आंतरिक सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामाजिक व्यवस्था को प्रभावित करती है।
- भारत ‘गोल्डन क्रिसेंट’ (ईरान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान) और ‘गोल्डन ट्रायंगल’ (म्यांमार, लाओस, थाईलैंड) के बीच स्थित होने के कारण मादक पदार्थों की तस्करी के लिए एक पारगमन बिंदु बन गया है।
- नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985, भारत में मादक पदार्थों से संबंधित अपराधों को नियंत्रित करने वाला प्रमुख कानून है।
- राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) केंद्रीय वित्त मंत्रालय के तहत एक प्रमुख खुफिया और प्रवर्तन एजेंसी है, जो तस्करी विरोधी अभियानों में विशेषज्ञता रखती है, जिसमें नशीले पदार्थों की तस्करी भी शामिल है।
- अवैध मादक पदार्थों का व्यापार अक्सर अन्य संगठित अपराधों जैसे हथियार तस्करी, आतंकवाद और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा होता है, जिससे यह एक जटिल सुरक्षा मुद्दा बन जाता है।
- सरकार विभिन्न एजेंसियों के समन्वय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से मादक पदार्थों की तस्करी के खतरे से निपटने के लिए प्रतिबद्ध है।
नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985
- यह अधिनियम भारत में मादक पदार्थों से संबंधित गतिविधियों, जैसे उत्पादन, निर्माण, कब्जा, बिक्री, खरीद, परिवहन, भंडारण और उपभोग को नियंत्रित करता है।
- इसका मुख्य उद्देश्य मादक पदार्थों के दुरुपयोग को रोकना और अवैध व्यापार पर अंकुश लगाना है।
- अधिनियम में मादक पदार्थों और साइकोट्रॉपिक पदार्थों की विभिन्न श्रेणियों को परिभाषित किया गया है, जिनमें गांजा, चरस, अफीम, हेरोइन और कोकीन शामिल हैं।
- यह अधिनियम इन पदार्थों की अवैध गतिविधियों के लिए कठोर दंड का प्रावधान करता है, जिसमें कारावास और जुर्माना शामिल है, जो जब्त की गई मात्रा के आधार पर भिन्न होता है।
- अधिनियम के तहत, छोटी मात्रा के लिए कम दंड, वाणिज्यिक मात्रा के लिए अधिक कठोर दंड और बार-बार अपराध करने वालों के लिए और भी कठोर दंड का प्रावधान है।
- यह अधिनियम केंद्र सरकार को मादक पदार्थों के नियंत्रण के लिए नियम बनाने और विभिन्न एजेंसियों को शक्तियाँ प्रदान करने का अधिकार देता है।
- NDPS अधिनियम के तहत, राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI), नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और राज्य पुलिस बल जैसी एजेंसियाँ मादक पदार्थों से संबंधित अपराधों की जाँच और कार्रवाई करने के लिए अधिकृत हैं।
- यह अधिनियम कुछ शर्तों के तहत चिकित्सा और वैज्ञानिक उद्देश्यों के लिए मादक पदार्थों के नियंत्रित उपयोग की भी अनुमति देता है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) की कार्रवाई | नशीले पदार्थों की अवैध तस्करी के खिलाफ एक प्रमुख प्रवर्तन एजेंसी के रूप में DRI की भूमिका को दर्शाता है। |
| 740 किलोग्राम गांजा और चरस की जब्ती | देश में मादक पदार्थों के अवैध व्यापार की व्यापकता और इसके खिलाफ चल रहे अभियानों की सफलता को इंगित करता है। |
| 13 व्यक्तियों की गिरफ्तारी | नशीले पदार्थों के नेटवर्क को तोड़ने और इसमें शामिल व्यक्तियों को कानून के कटघरे में लाने के लिए एजेंसियों के प्रयासों को दर्शाता है। |
| विभिन्न मार्गों से तस्करी | सड़क, रेल और हवाई मार्गों का उपयोग करके तस्करों द्वारा अपनाई जाने वाली विविध रणनीतियों को उजागर करता है, जिसमें गुप्त डिब्बे और यात्रियों के सामान का उपयोग शामिल है। |
| NDPS अधिनियम, 1985 का प्रवर्तन | भारत में मादक पदार्थों से संबंधित अपराधों से निपटने के लिए कानूनी ढांचे की केंद्रीय भूमिका पर प्रकाश डालता है। |
महत्व
आंतरिक सुरक्षा
- मादक पदार्थों की तस्करी आंतरिक सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा है, क्योंकि यह संगठित अपराध, आतंकवाद और धन शोधन (Money Laundering) को बढ़ावा देती है।
- DRI की कार्रवाई इन खतरों को कम करने और देश में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान देती है।
सामाजिक प्रभाव
- नशीले पदार्थों का सेवन समाज, विशेषकर युवाओं के स्वास्थ्य और कल्याण पर विनाशकारी प्रभाव डालता है।
- इन पदार्थों की जब्ती और तस्करों की गिरफ्तारी से समाज को नशे के चंगुल से बचाने में मदद मिलती है।
अंतर्राष्ट्रीय संबंध
- मादक पदार्थों की तस्करी अक्सर सीमा पार से होती है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता होती है।
- DRI की कार्रवाई भारत की अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को पूरा करने और वैश्विक मादक पदार्थ विरोधी प्रयासों में योगदान करने में सहायक है।
आर्थिक प्रभाव
- अवैध मादक पदार्थों का व्यापार अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाता है, क्योंकि यह काले धन के सृजन और समानांतर अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देता है।
- इन अभियानों से अवैध वित्तीय प्रवाह को बाधित करने और वैध अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलती है।
चुनौतियाँ
1. सीमा पार तस्करी
- भारत की लंबी और छिद्रपूर्ण सीमाएँ मादक पदार्थों की तस्करी के लिए संवेदनशील हैं, खासकर पड़ोसी देशों से।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और सीमा सुरक्षा को मजबूत करना एक सतत चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा: सीमा प्रबंधन
2. तकनीकी प्रगति का दुरुपयोग
- तस्कर संचार और परिवहन के लिए नई तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं, जिससे उन्हें ट्रैक करना और पकड़ना मुश्किल हो जाता है।
- प्रवर्तन एजेंसियों को अपनी तकनीकी क्षमताओं को लगातार उन्नत करने की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: सुरक्षा में अनुप्रयोग
3. नेटवर्क का विखंडन
- मादक पदार्थों के नेटवर्क अक्सर जटिल और विकेन्द्रीकृत होते हैं, जिससे उनके शीर्ष नेताओं तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
- खुफिया जानकारी एकत्र करने और विश्लेषण करने की क्षमता को मजबूत करना महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा: संगठित अपराध
4. न्यायिक प्रक्रिया में देरी
- NDPS अधिनियम के तहत मामलों में अक्सर लंबी न्यायिक प्रक्रियाएँ होती हैं, जिससे अपराधियों को सजा मिलने में देरी होती है।
- त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक सुधारों की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: शासन: न्यायपालिका
5. पुनर्वास और जागरूकता
- केवल प्रवर्तन ही पर्याप्त नहीं है; मादक पदार्थों के सेवन को रोकने के लिए व्यापक पुनर्वास और जागरूकता कार्यक्रमों की भी आवश्यकता है।
- समाज के सभी वर्गों को शामिल करते हुए एक बहु-आयामी दृष्टिकोण आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: स्वास्थ्य और शिक्षा
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| ड्रग्स की उपलब्धता | बाजार में ड्रग्स की आसान उपलब्धता युवाओं को इसके सेवन के लिए प्रेरित करती है। |
| वित्तीय प्रोत्साहन | ड्रग्स तस्करी में शामिल भारी लाभ अपराधियों को इस अवैध व्यापार में बने रहने के लिए प्रोत्साहित करता है। |
| कानूनी ढांचे में कमियां | कभी-कभी कानूनी प्रक्रिया में कमियां अपराधियों को बच निकलने का मौका देती हैं। |
| जागरूकता की कमी | नशीले पदार्थों के खतरों के बारे में समाज में पर्याप्त जागरूकता की कमी एक बड़ी चुनौती है। |
| पुनर्वास सुविधाओं का अभाव | नशे के आदी व्यक्तियों के लिए पर्याप्त और सुलभ पुनर्वास सुविधाओं की कमी। |
आगे की राह
- खुफिया जानकारी एकत्र करने और विश्लेषण करने की क्षमताओं को मजबूत करना, विशेषकर सीमावर्ती क्षेत्रों में।
- विभिन्न प्रवर्तन एजेंसियों (जैसे DRI, NCB, राज्य पुलिस) के बीच समन्वय और सहयोग को बढ़ाना।
- मादक पदार्थों की तस्करी के लिए उपयोग की जाने वाली नई तकनीकों और तरीकों का मुकाबला करने के लिए तकनीकी क्षमताओं का उन्नयन।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना, विशेषकर पड़ोसी देशों के साथ, सीमा पार तस्करी को रोकने के लिए।
- NDPS अधिनियम, 1985 के तहत मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना।
- नशीले पदार्थों के सेवन के खिलाफ व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाना और पुनर्वास सुविधाओं को बढ़ाना।
- वित्तीय जांच को तेज करना ताकि मादक पदार्थों के व्यापार से अर्जित अवैध धन को जब्त किया जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) · नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985 · अवैध मादक पदार्थों की तस्करी · अंतर्राष्ट्रीय मादक पदार्थ व्यापार · सीमा पार अपराध · कानून प्रवर्तन एजेंसियां · मादक पदार्थों का दुरुपयोग · राष्ट्रीय सुरक्षा · खुफिया जानकारी आधारित अभियान · आपराधिक न्याय प्रणाली · मादक पदार्थ नियंत्रण · सामाजिक प्रभाव
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 47’, ‘note’: ‘राज्य का कर्तव्य: सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संघ और राज्यों के बीच विधायी संबंध’}
अवधारणा प्रवाह
खुफिया जानकारी प्राप्त करना → DRI द्वारा अभियान चलाना → नशीले पदार्थों की जब्ती → तस्करों की गिरफ्तारी → NDPS अधिनियम, 1985 के तहत कार्रवाई → अवैध मादक पदार्थ नेटवर्क को बाधित करना → आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक कल्याण में सुधार
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के अधीन कार्य करता है।
2. नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985, मादक पदार्थों के उत्पादन, कब्ज़े, बिक्री, खरीद, परिवहन, भंडारण और/या उपभोग को प्रतिबंधित करता है।
3. भारत में गांजा और चरस की खेती और व्यापार पूरी तरह से प्रतिबंधित है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। DRI वित्त मंत्रालय के तहत केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) की एक प्रमुख खुफिया और प्रवर्तन एजेंसी है। कथन 2 सही है। NDPS अधिनियम, 1985 भारत में मादक पदार्थों से संबंधित गतिविधियों को नियंत्रित करता है। कथन 3 सही है। NDPS अधिनियम के तहत गांजा और चरस की खेती, उत्पादन, कब्ज़े, बिक्री, खरीद, परिवहन, भंडारण और/या उपभोग को प्रतिबंधित किया गया है, हालांकि कुछ अपवादों के साथ (जैसे भांग के पत्तों का उपयोग कुछ राज्यों में)।
Q2. राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कार्य DRI का प्राथमिक कार्य नहीं है?
- स्मगलिंग विरोधी कानूनों को लागू करना।
- मादक पदार्थों की तस्करी को रोकना।
- सीमा शुल्क चोरी के मामलों की जांच करना।
- प्रत्यक्ष करों से संबंधित धोखाधड़ी की जांच करना।
उत्तर: प्रत्यक्ष करों से संबंधित धोखाधड़ी की जांच करना। — DRI मुख्य रूप से तस्करी, सीमा शुल्क चोरी और मादक पदार्थों की तस्करी से संबंधित मामलों की जांच करता है। प्रत्यक्ष करों से संबंधित धोखाधड़ी की जांच आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय (ED) जैसे अन्य निकायों द्वारा की जाती है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक ताने-बाने के लिए एक गंभीर चुनौती बनी हुई है। इस संदर्भ में, राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) जैसी कानून प्रवर्तन एजेंसियों की भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। मादक पदार्थों के दुरुपयोग को रोकने में NDPS अधिनियम, 1985 की प्रभावशीलता का भी मूल्यांकन कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर कंकाल:
1. परिचय: भारत में मादक पदार्थों की तस्करी की गंभीरता और इसके बहुआयामी प्रभावों का संक्षिप्त उल्लेख।
2. DRI की भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण:
a. DRI के कार्य: खुफिया जानकारी एकत्र करना, अभियान चलाना, जब्ती और गिरफ्तारी।
b. सफलताएँ: हालिया अभियानों और बड़ी मात्रा में मादक पदार्थों की जब्ती का उदाहरण (जैसे प्रस्तुत समाचार में)।
c. चुनौतियाँ: सीमा पार तस्करी, संगठित अपराध सिंडिकेट, तकनीकी प्रगति का दुरुपयोग, मानव संसाधन और बुनियादी ढांचे की सीमाएँ।
d. सुधार के सुझाव: अंतर-एजेंसी समन्वय, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, क्षमता निर्माण, प्रौद्योगिकी का उपयोग।
3. NDPS अधिनियम, 1985 की प्रभावशीलता का मूल्यांकन:
a. उद्देश्य और प्रावधान: मादक पदार्थों के उत्पादन, व्यापार और उपभोग पर प्रतिबंध, दंड के प्रावधान।
b. सकारात्मक प्रभाव: तस्करी पर अंकुश लगाने में मदद, अपराधियों को दंडित करना, निवारक प्रभाव।
c. कमियाँ/चुनौतियाँ: कठोर दंड के बावजूद तस्करी जारी, पुनर्वास पर कम जोर, छोटे अपराधियों और बड़े तस्करों के बीच भेद का अभाव, न्यायिक प्रक्रिया में देरी।
d. सुधार के सुझाव: पुनर्वास और डी-एडिक्शन पर अधिक ध्यान, अधिनियम में संशोधन की आवश्यकता, सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम।
4. निष्कर्ष: मादक पदार्थों की तस्करी से निपटने के लिए एक समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता, जिसमें प्रवर्तन, रोकथाम, उपचार और पुनर्वास शामिल हो।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
Related guides on our sites
- Anthropology VS PSIR
- Best PSIR optional coaching
- Best PSIR optional coaching online
- Best PSIR optional teacher
- यूपीएससी/पीसीएस के लिए लोथल में राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर की प्रगति समीक्षा - September 11, 2026
- Sarbananda Sonowal reviews 82% progress of National Maritime Heritage Complex in Lothal - September 11, 2026
- केरल उच्च न्यायालय ने चंदरकुंज आर्मी टावर्स के विध्वंस की निविदा प्रक्रिया को बरकरार रखा - September 11, 2026

No Comments