डीआरडीओ ने क्वांटम तकनीक के लिए 20 मिलीकेल्विन रेफ्रिजरेटर विकसित किया: जानिए क्यों है यह उपलब्धि महत्वपूर्ण

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने क्वांटम अनुप्रयोगों हेतु 20 मिलीकेल्विन क्षमता वाले डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर के स्वदेशी व — labelled illustration

डीआरडीओ ने क्वांटम तकनीक के लिए 20 मिलीकेल्विन रेफ्रिजरेटर विकसित किया: जानिए क्यों है यह उपलब्धि महत्वपूर्ण

✎ DRDO और एक स्टार्ट-अप के बीच डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर के स्वदेशी विकास का समझौता राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के अनुरूप है और यह भारत को क्वांटम प्रौद्योगिकी तथा उन्नत क्रायोजेनिक्स में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था (रक्षा विनिर्माण और नवाचार)
  • Prelims: डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर, क्वांटम अनुप्रयोग, क्रायोजेनिक प्रणाली, राष्ट्रीय क्वांटम मिशन, प्रौद्योगिकी विकास निधि (TDF) योजना, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO), आत्मनिर्भर भारत
  • Essay: भारत में वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने में सार्वजनिक-निजी भागीदारी की भूमिका, आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में रक्षा प्रौद्योगिकी का महत्व

त्वरित पुनरावृत्ति: DRDO और एक स्टार्ट-अप के बीच डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर के स्वदेशी विकास का समझौता राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के अनुरूप है और यह भारत को क्वांटम प्रौद्योगिकी तथा उन्नत क्रायोजेनिक्स में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने प्रौद्योगिकी विकास निधि (TDF) योजना के तहत जीरो एमके इंडिया प्राइवेट लिमिटेड नामक एक स्टार्ट-अप के साथ एक उच्च-मूल्य वाली गहन-प्रौद्योगिकी परियोजना समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते का उद्देश्य क्वांटम अनुप्रयोगों के लिए 20 मिलीकेल्विन क्षमता वाले डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर का देश में ही विकास करना है। यह 500 करोड़ रुपये के उस कोष के तहत पहला बड़ा परियोजना समझौता है, जिसे रक्षा मंत्री ने गहन-प्रौद्योगिकी और अत्याधुनिक परियोजनाओं के लिए मंजूरी दी थी।

पृष्ठभूमि

  • डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर विशेष प्रकार की क्रायोजेनिक प्रणालियां (Cryogenic Systems) हैं, जो तापमान को मिलीकेल्विन (millikelvin) स्तर तक बेहद कम करने में सक्षम होती हैं।
  • कई क्वांटम कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म (Quantum Computing Platforms) और उनसे जुड़ी क्वांटम प्रौद्योगिकियों के संचालन तथा परीक्षण के लिए ऐसे अत्यंत कम तापमान वाले वातावरण की आवश्यकता होती है।
  • 20 मिलीकेल्विन श्रेणी के डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर का स्वदेशी विकास राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (National Quantum Mission) के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य भारत को क्वांटम प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी बनाना है।
  • यह पहल क्वांटम प्रौद्योगिकी, उन्नत क्रायोजेनिक्स और रणनीतिक प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में भारत की क्षमताओं को मजबूत करेगी।
  • इस स्वदेशी विकास से आयातित क्रायोजेनिक बुनियादी ढांचे पर निर्भरता कम होगी और देश में क्वांटम प्रौद्योगिकी से जुड़े पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलेगी।
  • यह परियोजना रक्षा उद्योग जगत और DRDO के बीच भविष्य के सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम करेगी, विशेषकर उभरते प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में।

राष्ट्रीय क्वांटम मिशन और डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर

  • राष्ट्रीय क्वांटम मिशन भारत सरकार द्वारा अनुमोदित एक प्रमुख पहल है जिसका उद्देश्य क्वांटम प्रौद्योगिकी के विकास और अनुप्रयोगों को बढ़ावा देना है।
  • इस मिशन का लक्ष्य क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम संचार, क्वांटम संवेदन और मेट्रोलॉजी जैसे क्षेत्रों में भारत को आत्मनिर्भर बनाना है।
  • डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर वे उपकरण हैं जो अत्यंत कम तापमान (मिलीकेल्विन रेंज में) प्राप्त करने और बनाए रखने के लिए उपयोग किए जाते हैं, जो क्वांटम कंप्यूटरों और अन्य क्वांटम उपकरणों के संचालन के लिए आवश्यक हैं।
  • क्वांटम कंप्यूटिंग में, सुपरपोजिशन (superposition) और एंटेंगलमेंट (entanglement) जैसी क्वांटम घटनाओं का उपयोग करके जटिल गणनाएँ की जाती हैं, जिनके लिए इन क्वांटम अवस्थाओं को बनाए रखने हेतु अत्यंत कम तापमान की आवश्यकता होती है।
  • क्रायोजेनिक्स विज्ञान की वह शाखा है जो बहुत कम तापमान (आमतौर पर -150 डिग्री सेल्सियस से नीचे) के उत्पादन और व्यवहार से संबंधित है। डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर क्रायोजेनिक प्रणालियों का एक उन्नत रूप है।
  • प्रौद्योगिकी विकास निधि (TDF) योजना रक्षा मंत्रालय द्वारा शुरू की गई एक योजना है जिसका उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी अनुसंधान, विकास और नवाचार को बढ़ावा देना है, विशेषकर स्टार्ट-अप और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) के माध्यम से।
  • यह योजना रक्षा प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने और आयात पर निर्भरता कम करने के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर का स्वदेशी विकास क्वांटम अनुप्रयोगों के लिए आवश्यक अत्यंत कम तापमान (20 मिलीकेल्विन) प्राप्त करने की क्षमता। आयात पर निर्भरता कम होगी।
DRDO और स्टार्ट-अप (ज़ीरो एमके इंडिया प्राइवेट लिमिटेड) के बीच सहयोग प्रौद्योगिकी विकास निधि (TDF) योजना के तहत पहला उच्च-मूल्य वाला गहन-प्रौद्योगिकी परियोजना समझौता। निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा।
राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के अनुरूप भारत को क्वांटम प्रौद्योगिकी, उन्नत क्रायोजेनिक्स और रणनीतिक प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनाने में सहायक।
500 करोड़ रुपये का कोष गहन-प्रौद्योगिकी और अत्याधुनिक परियोजनाओं के लिए रक्षा मंत्री द्वारा अनुमोदित कोष का उपयोग, अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहन।
क्वांटम कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म के लिए महत्वपूर्ण क्वांटम कंप्यूटिंग और संबंधित क्वांटम प्रौद्योगिकियों के संचालन व परीक्षण के लिए आवश्यक वातावरण प्रदान करेगा।

महत्व

सामरिक महत्व

  • डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर का स्वदेशी विकास भारत को महत्वपूर्ण क्वांटम प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भर बनाएगा, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी।
  • यह उन्नत क्रायोजेनिक्स (Cryogenics) और रणनीतिक प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में भारत की क्षमताओं को मजबूत करेगा, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
  • क्वांटम-तैयार पारिस्थितिकी तंत्र के विकास को बढ़ावा मिलेगा, जिससे भविष्य की रक्षा प्रौद्योगिकियों में भारत की स्थिति मजबूत होगी।

आर्थिक महत्व

  • स्वदेशी विकास से आयातित क्रायोजेनिक बुनियादी ढांचे पर होने वाला खर्च बचेगा, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
  • यह परियोजना रक्षा उद्योग और स्टार्ट-अप्स के लिए नए अवसर पैदा करेगी, जिससे आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा मिलेगा।
  • गहन-प्रौद्योगिकी परियोजनाओं में निवेश से उच्च-कुशल रोजगारों का सृजन होगा और नवाचार को प्रोत्साहन मिलेगा।

वैज्ञानिक एवं तकनीकी महत्व

  • 20 मिलीकेल्विन श्रेणी के डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर का विकास क्वांटम कंप्यूटिंग और क्वांटम प्रौद्योगिकियों के अनुसंधान एवं विकास के लिए एक महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना प्रदान करेगा।
  • यह भारत को क्वांटम प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वैश्विक नेताओं में से एक बनने में मदद करेगा, जिससे वैज्ञानिक प्रगति में तेजी आएगी।
  • DRDO और निजी स्टार्ट-अप के बीच सहयोग से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और ज्ञान साझाकरण को बढ़ावा मिलेगा, जिससे नवाचार की गति तेज होगी।

चुनौतियाँ

1. तकनीकी जटिलताएँ

  • अत्यंत कम तापमान (मिलीकेल्विन स्तर) प्राप्त करने और बनाए रखने के लिए उन्नत क्रायोजेनिक इंजीनियरिंग और सामग्री विज्ञान की आवश्यकता होती है।
  • डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर के डिजाइन, निर्माण और परीक्षण में उच्च परिशुद्धता और विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है।

2. अनुसंधान एवं विकास में निवेश

  • गहन-प्रौद्योगिकी परियोजनाओं में अनुसंधान और विकास के लिए पर्याप्त और निरंतर वित्तीय निवेश की आवश्यकता होती है।
  • दीर्घकालिक अनुसंधान और विकास चक्रों के लिए धैर्य और प्रतिबद्धता बनाए रखना एक चुनौती हो सकती है।

3. कौशल विकास और मानव संसाधन

  • क्वांटम प्रौद्योगिकी और उन्नत क्रायोजेनिक्स के क्षेत्र में विशेषज्ञ वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की कमी एक चुनौती है।
  • इन क्षेत्रों में अनुसंधान और विकास के लिए आवश्यक कौशल सेट विकसित करने हेतु विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों की आवश्यकता है।

4. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और प्रतिस्पर्धा

  • क्वांटम प्रौद्योगिकी एक वैश्विक प्रतिस्पर्धा का क्षेत्र है, और भारत को इस क्षेत्र में अग्रणी देशों के साथ तालमेल बिठाना होगा।
  • महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की सीमाएं हो सकती हैं।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
अत्यंत कम तापमान का रखरखाव मिलीकेल्विन स्तर पर तापमान को स्थिर रखना और बाहरी हस्तक्षेप से बचाना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण है।
लागत और समय गहन-प्रौद्योगिकी विकास परियोजनाओं में अक्सर उच्च लागत और लंबा विकास चक्र होता है, जिससे परियोजना प्रबंधन जटिल हो जाता है।
विशेषज्ञता की कमी क्वांटम प्रौद्योगिकी और उन्नत क्रायोजेनिक्स में विशेषज्ञता वाले मानव संसाधनों की उपलब्धता सीमित है।
आपूर्ति श्रृंखला की निर्भरता कुछ विशिष्ट घटकों या सामग्रियों के लिए अभी भी विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता हो सकती है।
बौद्धिक संपदा अधिकार नवीन प्रौद्योगिकियों के विकास में बौद्धिक संपदा अधिकारों का प्रबंधन और संरक्षण महत्वपूर्ण है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • प्रौद्योगिकी विकास निधि (Technology Development Fund – TDF) योजना
  • राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (National Quantum Mission)

आगे की राह

  • क्वांटम प्रौद्योगिकी और उन्नत क्रायोजेनिक्स में अनुसंधान एवं विकास के लिए निरंतर और पर्याप्त वित्तीय सहायता सुनिश्चित करना।
  • शैक्षणिक संस्थानों, अनुसंधान प्रयोगशालाओं और निजी उद्योगों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना ताकि ज्ञान और संसाधनों का अधिकतम उपयोग हो सके।
  • क्वांटम प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विशेषज्ञता विकसित करने के लिए विशेष कौशल विकास कार्यक्रम और प्रशिक्षण पहल शुरू करना।
  • स्टार्ट-अप्स और छोटे तथा मध्यम उद्यमों (SMEs) को गहन-प्रौद्योगिकी परियोजनाओं में भाग लेने के लिए प्रोत्साहन और सहायता प्रदान करना।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और साझेदारी के अवसरों की तलाश करना ताकि नवीनतम तकनीकों और सर्वोत्तम प्रथाओं तक पहुंच बनाई जा सके।
  • क्वांटम प्रौद्योगिकी के लिए एक मजबूत नियामक और नीतिगत ढांचा विकसित करना, जो नवाचार को बढ़ावा दे और सुरक्षा सुनिश्चित करे।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

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अवधारणा प्रवाह

DRDO और स्टार्ट-अप के बीच समझौता  →  प्रौद्योगिकी विकास निधि (TDF) योजना के तहत वित्तपोषण  →  20 मिलीकेल्विन डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर का स्वदेशी विकास  →  क्वांटम अनुप्रयोगों के लिए अत्यंत कम तापमान का प्रावधान  →  राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के लक्ष्यों की प्राप्ति  →  क्वांटम प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता और क्षमता वृद्धि

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. प्रौद्योगिकी विकास निधि (TDF) योजना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा संचालित की जाती है।
2. इसका उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में गहन-प्रौद्योगिकी और अत्याधुनिक परियोजनाओं के स्वदेशी विकास को बढ़ावा देना है।
3. हाल ही में, इस योजना के तहत क्वांटम अनुप्रयोगों के लिए डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर के विकास हेतु एक स्टार्ट-अप के साथ समझौता किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि TDF योजना DRDO द्वारा संचालित है। कथन 2 सही है क्योंकि इस योजना का मुख्य उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकास को बढ़ावा देना है। कथन 3 भी सही है क्योंकि हाल ही में DRDO ने इसी योजना के तहत क्वांटम अनुप्रयोगों के लिए डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर के स्वदेशी विकास हेतु एक स्टार्ट-अप के साथ समझौता किया है।

Q2. निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर : अत्यंत कम तापमान प्राप्त करने वाली क्रायोजेनिक प्रणाली
2. राष्ट्रीय क्वांटम मिशन : क्वांटम प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की क्षमताओं को मजबूत करना
3. जीरो एमके इंडिया प्राइवेट लिमिटेड : रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की एक अनुसंधान प्रयोगशाला
उपर्युक्त युग्मों में से कितने सही सुमेलित हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — युग्म 1 सही सुमेलित है क्योंकि डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर ऐसी क्रायोजेनिक प्रणालियाँ हैं जो मिलीकेल्विन स्तर तक अत्यंत कम तापमान प्राप्त कर सकती हैं। युग्म 2 भी सही सुमेलित है क्योंकि राष्ट्रीय क्वांटम मिशन का लक्ष्य क्वांटम प्रौद्योगिकी में भारत की क्षमताओं को बढ़ाना है। युग्म 3 गलत सुमेलित है क्योंकि जीरो एमके इंडिया प्राइवेट लिमिटेड एक स्टार्ट-अप है, न कि DRDO की अनुसंधान प्रयोगशाला।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ क्वांटम प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर के स्वदेशी विकास के महत्व पर चर्चा कीजिए। यह पहल ‘राष्ट्रीय क्वांटम मिशन’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्यों को प्राप्त करने में किस प्रकार सहायक होगी? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** क्वांटम प्रौद्योगिकी और डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर का संक्षिप्त परिचय। DRDO द्वारा हालिया समझौते का उल्लेख।
2. **डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर का महत्व:**
* क्वांटम कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म और क्वांटम प्रौद्योगिकियों के संचालन व परीक्षण के लिए आवश्यक अत्यंत कम तापमान (मिलीकेल्विन स्तर) प्रदान करना।
* क्वांटम अनुसंधान और विकास के लिए महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचा।
* संवेदनशील क्वांटम उपकरणों की स्थिरता और प्रदर्शन सुनिश्चित करना।
3. **स्वदेशी विकास का महत्व:**
* आयातित क्रायोजेनिक अवसंरचना पर निर्भरता कम करना।
* देश में क्वांटम प्रौद्योगिकी से जुड़े पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती प्रदान करना।
* सामरिक स्वायत्तता और सुरक्षा।
4. **राष्ट्रीय क्वांटम मिशन से जुड़ाव:**
* मिशन के उद्देश्यों (क्वांटम प्रौद्योगिकी, उन्नत क्रायोजेनिक्स और सामरिक प्रौद्योगिकी में भारत की क्षमताओं को मजबूत करना) के अनुरूप।
* क्वांटम कंप्यूटिंग, संचार और संवेदन में प्रगति को बढ़ावा देना।
5. **आत्मनिर्भर भारत से जुड़ाव:**
* रक्षा और उच्च-प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में स्वदेशीकरण को बढ़ावा देना।
* घरेलू नवाचार और विनिर्माण को प्रोत्साहन।
* स्टार्ट-अप्स और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) की भागीदारी।
6. **निष्कर्ष:** भारत के वैज्ञानिक और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम, जो भविष्य की प्रौद्योगिकियों में देश की स्थिति को मजबूत करेगा।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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