07 Sep दूसरी पीढ़ी के जीएसटी सुधारों पर राष्ट्रीय सम्मेलन शुरू, जानिए मुख्य बिंदु
✎ GST 2.0 सुधारों का मुख्य उद्देश्य कर दरों को युक्तिसंगत बनाना, अनुपालन में सुधार करना और भारतीय अर्थव्यवस्था में GST के समग्र प्रभाव को अनुकूलित करना है, ताकि राजकोषीय संघवाद को मजबूत किया जा सके।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय। समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय। सरकारी बजट। | GS Paper II — संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघीय ढाँचे से संबंधित विषय एवं चुनौतियाँ, स्थानीय स्तर तक शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण तथा उसकी चुनौतियाँ।
- Prelims: GST 2.0, राजकोषीय संघवाद, राजस्व उत्पादकता, GST-GDP अनुपात, कराधान सुधार, राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान (NIPFP)
- Essay: भारत में आर्थिक सुधारों की दिशा और दशा, राजकोषीय संघवाद और राज्यों के वित्त पर इसका प्रभाव
त्वरित पुनरावृत्ति: GST 2.0 सुधारों का मुख्य उद्देश्य कर दरों को युक्तिसंगत बनाना, अनुपालन में सुधार करना और भारतीय अर्थव्यवस्था में GST के समग्र प्रभाव को अनुकूलित करना है, ताकि राजकोषीय संघवाद को मजबूत किया जा सके।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, भारत में वस्तु एवं सेवा कर (GST) में द्वितीय पीढ़ी के सुधारों पर एक दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन का आयोजन गुलाटी इंस्टीट्यूट ऑफ फाइनेंस एंड टैक्सेशन (GIFT) द्वारा इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च (ICSSR) के सहयोग से किया गया था। इसमें GST के प्रदर्शन, राजकोषीय संघवाद (Fiscal Federalism) और राजस्व उत्पादकता (Revenue Productivity) जैसे विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई, जिसमें GST 2.0 के तहत प्रभावी कर दर में कमी और GST-GDP अनुपात में गिरावट जैसे महत्वपूर्ण बिंदु सामने आए।
पृष्ठभूमि
- वस्तु एवं सेवा कर (GST) भारत में 1 जुलाई, 2017 को लागू किया गया एक अप्रत्यक्ष कर (Indirect Tax) है, जिसने केंद्र और राज्यों द्वारा लगाए गए कई अप्रत्यक्ष करों को प्रतिस्थापित किया।
- GST का उद्देश्य ‘एक राष्ट्र, एक कर’ की अवधारणा को साकार करना, करों के व्यापक प्रभाव (Cascading Effect) को समाप्त करना और भारतीय अर्थव्यवस्था को एकीकृत करना था।
- GST लागू होने के बाद से, कर दरों के युक्तिकरण (Rate Rationalisation), अनुपालन (Compliance) में सुधार और तकनीकी एकीकरण जैसे कई सुधार किए गए हैं, जिन्हें अक्सर GST 1.0 के तहत देखा जाता है।
- राजकोषीय संघवाद भारतीय संविधान की एक महत्वपूर्ण विशेषता है, जहाँ केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय शक्तियों और उत्तरदायित्वों का वितरण होता है। GST ने इस संघवाद पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाला है।
- राज्यों के वित्त पर GST के प्रभावों का लगातार मूल्यांकन किया जा रहा है, विशेषकर राजस्व संग्रह और क्षतिपूर्ति तंत्र (Compensation Mechanism) के संदर्भ में।
- द्वितीय पीढ़ी के GST सुधार (GST 2.0) का उद्देश्य मौजूदा प्रणाली की कमियों को दूर करना, कर आधार को व्यापक बनाना, अनुपालन को और सरल बनाना और राज्यों के राजस्व को स्थिर करना है।
वस्तु एवं सेवा कर (GST) क्या है?
- GST एक गंतव्य-आधारित उपभोग कर (Destination-Based Consumption Tax) है जो वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति पर लगाया जाता है।
- यह केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए कई अप्रत्यक्ष करों, जैसे केंद्रीय उत्पाद शुल्क, सेवा कर, वैट, मनोरंजन कर आदि को समाहित करता है।
- GST के तहत चार मुख्य कर स्लैब हैं: 5%, 12%, 18% और 28%, हालांकि कुछ वस्तुओं और सेवाओं पर शून्य या विशेष दरें भी लागू होती हैं।
- यह प्रणाली इनपुट टैक्स क्रेडिट (Input Tax Credit) की अनुमति देती है, जिससे व्यवसायों को उनके द्वारा खरीदे गए इनपुट पर भुगतान किए गए GST का क्रेडिट मिलता है, जिससे करों का व्यापक प्रभाव समाप्त हो जाता है।
- GST परिषद (GST Council) एक संवैधानिक निकाय है जो GST से संबंधित सभी महत्वपूर्ण निर्णय लेती है। इसकी अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री करते हैं और इसमें राज्यों के वित्त मंत्री सदस्य होते हैं।
- GST के प्रमुख घटकों में केंद्रीय GST (CGST), राज्य GST (SGST), एकीकृत GST (IGST) और केंद्र शासित प्रदेश GST (UTGST) शामिल हैं।
- इन सुधारों में दर युक्तिकरण, मूल्य और वितरण परिणाम, अनुपालन व्यवहार, प्रवर्तन, MSMEs के लिए प्रावधान, डिजिटल प्रशासन और संस्थागत क्षमता जैसे मुद्दे शामिल हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| GST 2.0 में प्रभावी कर दर में कमी | यह 11.6% से घटकर 9.5% हो गई है, जिससे उपभोक्ताओं पर कर का बोझ कम होने और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है। |
| GST-GDP अनुपात में गिरावट | 2022-23 में 6.07% से घटकर 2025-26 में 5.96% होना, कर संग्रह दक्षता और आर्थिक विकास के बीच संबंध पर चिंताएं बढ़ाता है। |
| राजकोषीय संघवाद (Fiscal Federalism) पर चर्चा | राज्यों के वित्त और राजकोषीय नीति पर GST के प्रभावों का विश्लेषण, केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। |
| दर युक्तिकरण (Rate Rationalisation) | GST दरों को तर्कसंगत बनाने से कीमतों, वितरण परिणामों और अनुपालन व्यवहार पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन किया जा रहा है। |
| सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs) पर प्रभाव | GST व्यवस्था के तहत MSMEs के अनुपालन और प्रवर्तन चुनौतियों पर विचार-विमर्श, इस महत्वपूर्ण क्षेत्र के विकास के लिए आवश्यक है। |
| डिजिटल प्रशासन और संस्थागत क्षमता | GST के कुशल कार्यान्वयन के लिए डिजिटल बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- GST 2.0 में प्रभावी कर दर में कमी से वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें कम हो सकती हैं, जिससे उपभोक्ताओं को लाभ होगा और मांग में वृद्धि हो सकती है।
- कर आधार के विस्तार और अनुपालन में सुधार के माध्यम से राजस्व उत्पादकता बढ़ाने के प्रयासों से सरकार के राजकोषीय स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है।
- MSMEs के लिए अनुपालन प्रक्रियाओं को सरल बनाने और डिजिटल प्रशासन को मजबूत करने से इस क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता और विकास को बढ़ावा मिलेगा।
राजकोषीय महत्व
- GST-GDP अनुपात में गिरावट का विश्लेषण करके, सरकार कर नीतियों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन कर सकती है और राजस्व संग्रह को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक सुधार कर सकती है।
- राज्यों के वित्त पर GST के प्रभावों का अध्ययन राजकोषीय संघवाद को मजबूत करने और केंद्र और राज्यों के बीच राजस्व बंटवारे के तंत्र को अनुकूलित करने में मदद करेगा।
- राजकोषीय नीति के लिए GST सुधारों के निहितार्थों को समझना, व्यापक आर्थिक स्थिरता और सतत विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
शासनिक महत्व
- GST के डिजिटल प्रशासन और संस्थागत क्षमता को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करने से कर प्रणाली में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी।
- विभिन्न हितधारकों, जैसे कर प्रशासकों, अर्थशास्त्रियों और शोधकर्ताओं के बीच संवाद से GST व्यवस्था के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान खोजने में मदद मिलेगी।
- अनुपालन व्यवहार और प्रवर्तन तंत्र पर चर्चा से कर चोरी को कम करने और कर आधार को व्यापक बनाने के लिए प्रभावी रणनीतियाँ विकसित करने में सहायता मिलेगी।
चुनौतियाँ
1. राजस्व उत्पादकता में गिरावट
- GST-GDP अनुपात में गिरावट यह संकेत देती है कि GST व्यवस्था अपनी पूरी राजस्व क्षमता का दोहन नहीं कर पा रही है।
- राजस्व में कमी से राज्यों के वित्त पर दबाव पड़ सकता है और उन्हें विकास परियोजनाओं के लिए धन जुटाने में कठिनाई हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय अर्थव्यवस्था, राजकोषीय नीति
2. राजकोषीय संघवाद पर प्रभाव
- GST के तहत राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता और राजस्व संग्रह क्षमताओं पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।
- राजस्व बंटवारे और क्षतिपूर्ति तंत्र की प्रभावशीलता पर निरंतर मूल्यांकन की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय राजव्यवस्था, केंद्र-राज्य संबंध
3. दर युक्तिकरण और जटिलता
- GST दरों को तर्कसंगत बनाना एक जटिल कार्य है, जिसमें विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं पर पड़ने वाले प्रभावों को संतुलित करना होता है।
- बहुत अधिक दरें या बार-बार बदलाव अनुपालन को मुश्किल बना सकते हैं और व्यवसायों के लिए अनिश्चितता पैदा कर सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: भारतीय अर्थव्यवस्था, कर सुधार
4. MSMEs के लिए अनुपालन चुनौतियाँ
- छोटे व्यवसायों के लिए GST अनुपालन प्रक्रियाएं अभी भी जटिल और बोझिल हो सकती हैं, खासकर डिजिटल साक्षरता की कमी वाले क्षेत्रों में।
- प्रवर्तन तंत्र और MSMEs पर उनके प्रभाव का मूल्यांकन आवश्यक है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे अनावश्यक बाधाओं का सामना न करें।
यूपीएससी लिंक: भारतीय अर्थव्यवस्था, औद्योगिक नीति
5. डिजिटल प्रशासन और संस्थागत क्षमता
- GST के कुशल संचालन के लिए मजबूत डिजिटल बुनियादी ढांचे और प्रशिक्षित कर्मियों की आवश्यकता है।
- प्रौद्योगिकी के निरंतर उन्नयन और कर प्रशासकों के प्रशिक्षण में निवेश महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: ई-गवर्नेंस, संस्थागत सुधार
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| घटता GST-GDP अनुपात | संभावित राजस्व हानि और राजकोषीय दबाव। |
| राज्यों के वित्त पर प्रभाव | राजकोषीय स्वायत्तता और राजस्व स्थिरता पर असर। |
| दर युक्तिकरण की जटिलता | कीमतों, वितरण और अनुपालन पर अनपेक्षित परिणाम। |
| MSMEs के लिए अनुपालन बोझ | छोटे व्यवसायों के लिए परिचालन लागत और बाधाएं। |
| डिजिटल बुनियादी ढाँचा | प्रशासनिक दक्षता और डेटा सुरक्षा की आवश्यकता। |
| संस्थागत क्षमता का विकास | कर प्रशासकों के प्रशिक्षण और तकनीकी उन्नयन की आवश्यकता। |
आगे की राह
- GST दरों को और अधिक तर्कसंगत बनाना, जिससे कर स्लैब की संख्या कम हो और वस्तुओं तथा सेवाओं पर एक समान कर व्यवस्था सुनिश्चित हो।
- GST अनुपालन प्रक्रियाओं को सरल बनाना, विशेष रूप से MSMEs के लिए, ताकि उनके लिए कर भुगतान और रिटर्न दाखिल करना आसान हो।
- डिजिटल प्रशासन को मजबूत करना और GST नेटवर्क (GSTN) की दक्षता में सुधार करना, जिससे कर चोरी को कम किया जा सके और पारदर्शिता बढ़ाई जा सके।
- राज्यों के राजस्व हितों की रक्षा के लिए एक प्रभावी क्षतिपूर्ति तंत्र या राजस्व-साझाकरण मॉडल विकसित करना, जिससे राजकोषीय संघवाद मजबूत हो।
- कर आधार का विस्तार करने और कर चोरी को रोकने के लिए डेटा एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग करना।
- कर प्रशासकों और हितधारकों के बीच निरंतर संवाद और क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित करना, ताकि GST व्यवस्था की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से समाधान किया जा सके।
- GST के सामाजिक-आर्थिक प्रभावों का नियमित मूल्यांकन करना, ताकि नीति निर्माताओं को आवश्यक सुधार करने और समावेशी विकास सुनिश्चित करने में मदद मिल सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
वस्तु एवं सेवा कर (GST) · राजकोषीय संघवाद · राज्यों का वित्त · GST 2.0 सुधार · कर युक्तिकरण · राजस्व उत्पादकता · डिजिटल प्रशासन · MSME पर प्रभाव · कर अनुपालन · आर्थिक नीति
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 246A’, ‘note’: ‘GST से संबंधित कानून बनाने की शक्ति’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 269A’, ‘note’: ‘अंतर-राज्यीय व्यापार पर GST’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 279A’, ‘note’: ‘GST परिषद का गठन और कार्य’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 270’, ‘note’: ‘संघ द्वारा लगाए गए करों का वितरण’}
- {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘संघ और राज्य सूची में कर शक्तियाँ’}
अवधारणा प्रवाह
GST 2.0 सुधारों पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन → प्रभावी कर दर में कमी और GST-GDP अनुपात में गिरावट पर चर्चा → राजकोषीय संघवाद और राज्यों के वित्त पर GST के प्रभावों का विश्लेषण → दर युक्तिकरण, अनुपालन व्यवहार और MSMEs पर विचार-विमर्श → डिजिटल प्रशासन और संस्थागत क्षमता को मजबूत करने पर जोर → GST व्यवस्था की चुनौतियों और आगे की राह पर सिफारिशें
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. वस्तु एवं सेवा कर (GST) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. GST 2.0 सुधारों के तहत प्रभावी कर दर में कमी देखी गई है।
2. GST-GDP अनुपात 2022-23 से 2025-26 के बीच बढ़ा है।
3. GST भारत में राजकोषीय संघवाद (Fiscal Federalism) को प्रभावित करता है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल एक — कथन 1 सही है क्योंकि GST 2.0 में प्रभावी कर दर 11.6% से घटकर 9.5% हो गई है। कथन 2 गलत है क्योंकि GST-GDP अनुपात 2022-23 में 6.07% से घटकर 2025-26 में 5.96% हो गया है। कथन 3 सही है क्योंकि GST राज्यों के वित्त और राजस्व उत्पादकता पर सीधा प्रभाव डालकर राजकोषीय संघवाद को प्रभावित करता है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन सा/से कारक GST 2.0 सुधारों के तहत चर्चा का विषय रहा/रहे है/हैं?
1. दर युक्तिकरण (Rate rationalisation)
2. MSME पर प्रभाव
3. डिजिटल प्रशासन और संस्थागत क्षमता
4. राजकोषीय घाटा (Fiscal deficit)
सही विकल्प चुनें:
- केवल 1 और 2
- केवल 2, 3 और 4
- केवल 1, 2 और 3
- उपर्युक्त सभी
उत्तर: केवल 1, 2 और 3 — दर युक्तिकरण, MSME पर प्रभाव और डिजिटल प्रशासन GST 2.0 सुधारों के तहत चर्चा के मुख्य विषय रहे हैं। राजकोषीय घाटा एक व्यापक आर्थिक संकेतक है, हालांकि यह GST राजस्व से अप्रत्यक्ष रूप से संबंधित हो सकता है, यह सीधे तौर पर GST 2.0 सुधारों के तहत चर्चा का प्राथमिक विषय नहीं था।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में वस्तु एवं सेवा कर (GST) के दूसरे चरण के सुधारों (GST 2.0) की प्रमुख विशेषताओं का विश्लेषण करें। ये सुधार राज्यों के वित्त और राजकोषीय संघवाद को किस प्रकार प्रभावित कर सकते हैं? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** GST 2.0 सुधारों की पृष्ठभूमि और उद्देश्य का संक्षिप्त परिचय।
2. **GST 2.0 की प्रमुख विशेषताएँ:** प्रभावी कर दर में कमी (11.6% से 9.5%), दर युक्तिकरण, अनुपालन व्यवहार में सुधार, प्रवर्तन तंत्र, MSME पर प्रभाव, डिजिटल प्रशासन और संस्थागत क्षमता में वृद्धि जैसे बिंदुओं पर चर्चा।
3. **राज्यों के वित्त पर प्रभाव:** राजस्व उत्पादकता (GST-GDP अनुपात में गिरावट का उल्लेख), राज्यों की राजस्व स्वायत्तता, क्षतिपूर्ति तंत्र की समाप्ति के बाद की स्थिति, और राज्यों के बजटीय प्रबंधन पर संभावित प्रभावों का विश्लेषण।
4. **राजकोषीय संघवाद पर प्रभाव:** GST परिषद की भूमिका, केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों में परिवर्तन, राज्यों की नीति निर्माण क्षमता पर प्रभाव, और GST के तहत सहकारी संघवाद की अवधारणा पर चर्चा।
5. **चुनौतियाँ और आगे की राह:** GST 2.0 के कार्यान्वयन में संभावित चुनौतियाँ (जैसे राज्यों के राजस्व घाटे को पूरा करना, कर आधार का विस्तार) और इन चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक कदमों का उल्लेख।
6. **निष्कर्ष:** GST 2.0 के दीर्घकालिक लक्ष्यों और भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसके समग्र प्रभाव का संक्षिप्त सारांश।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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