नागार्जुनसागर श्रीशैलम टाइगर रिजर्व में एक और बाघ की मृत्यु, कारणों की होगी जांच

Another tiger found dead in Nagarjunasagar Srisailam Tiger Reserve — concept mind map

नागार्जुनसागर श्रीशैलम टाइगर रिजर्व में एक और बाघ की मृत्यु, कारणों की होगी जांच

Tiger death investigationTiger carcassNandikotkur reserved forestMissing paws & limbsForensic analysisNTCA SOPsWildlife Act 1972Patrol increaseNSTR divisionsGiddaalur BeatProject Tiger1973 launchMinistry oversight
Tiger death investigation

✎ नागार्जुनसागर श्रीशैलम बाघ अभयारण्य में बाघों की हालिया मृत्यु ने भारत में बाघ संरक्षण के प्रयासों और वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 तथा राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों के प्रभावी…

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव-विविधता  |  GS Paper III — आपदा प्रबंधन
  • Prelims: नागार्जुनसागर श्रीशैलम बाघ अभयारण्य (NSTR), बाघ संरक्षण, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA), प्रोजेक्ट टाइगर, बाघों की जनगणना
  • Essay: पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास: चुनौतियाँ और आगे की राह, भारत में वन्यजीव संरक्षण: नैतिक, पारिस्थितिक और आर्थिक अनिवार्यता

त्वरित पुनरावृत्ति: नागार्जुनसागर श्रीशैलम बाघ अभयारण्य में बाघों की हालिया मृत्यु ने भारत में बाघ संरक्षण के प्रयासों और वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 तथा राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों के प्रभावी कार्यान्वयन की आवश्यकता पर प्रकाश डाला है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, नागार्जुनसागर श्रीशैलम बाघ अभयारण्य (Nagarjunasagar Srisailam Tiger Reserve – NSTR) में कुछ ही दिनों के भीतर दो बाघ मृत पाए गए, जिससे वन्यजीव संरक्षण को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं। एक बाघिन का शव नंदिकोटकुर आरक्षित वन में मिला, जबकि एक वयस्क बाघ का शव गिद्दालूर डिवीजन के रचर्ला वन बीट में पाया गया, जिसके पंजे और अंग गायब थे। इस घटना के बाद आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और वन मंत्री ने गहन और पारदर्शी जाँच के आदेश दिए हैं, ताकि मृत्यु के कारणों का पता लगाया जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए गश्त व निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

पृष्ठभूमि

  • भारत विश्व की बाघ आबादी का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा रखता है, जो इसे बाघ संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण राष्ट्र बनाता है।
  • प्रोजेक्ट टाइगर (Project Tiger) को 1973 में शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य भारत में बाघों और उनके आवासों का संरक्षण करना है। यह पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की एक केंद्र प्रायोजित योजना है।
  • राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (National Tiger Conservation Authority – NTCA) वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (Wildlife (Protection) Act, 1972) के तहत स्थापित एक वैधानिक निकाय है, जो प्रोजेक्ट टाइगर के कार्यान्वयन की निगरानी करता है और बाघ संरक्षण के लिए दिशानिर्देश जारी करता है।
  • बाघों की मृत्यु के मुख्य कारणों में अवैध शिकार, मानव-वन्यजीव संघर्ष, आवास का नुकसान, बीमारियों और प्राकृतिक कारण शामिल हैं।
  • यह नल्लामाला पहाड़ियों में स्थित है और कृष्णा नदी इसके बीच से बहती है।
  • बाघों की जनगणना (Tiger Census) हर चार साल में की जाती है, जिसमें ‘कैमरा ट्रैपिंग’ और ‘डीएनए प्रोफाइलिंग’ जैसी वैज्ञानिक विधियों का उपयोग किया जाता है ताकि बाघों की संख्या और वितरण का सटीक अनुमान लगाया जा सके।

भारत में बाघ संरक्षण के प्रयास और चुनौतियाँ

  • भारत में बाघ संरक्षण के लिए ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ एक प्रमुख पहल है, जिसके तहत देश भर में 50 से अधिक बाघ अभयारण्य स्थापित किए गए हैं।
  • राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) बाघ संरक्षण से संबंधित नीतियों और कार्यक्रमों के निर्माण तथा कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह बाघों की मृत्यु की जाँच के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएँ (Standard Operating Procedures – SOPs) भी जारी करता है।
  • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 बाघों सहित विभिन्न वन्यजीव प्रजातियों के संरक्षण के लिए कानूनी ढाँचा प्रदान करता है। इस अधिनियम के तहत अवैध शिकार और वन्यजीव अपराधों के लिए कठोर दंड का प्रावधान है।
  • बाघों के आवासों का संरक्षण और उनके गलियारों (Corridors) को बनाए रखना महत्वपूर्ण है ताकि बाघों को एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में जाने में मदद मिल सके और आनुवंशिक विविधता बनी रहे।
  • मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए बफर ज़ोन (Buffer Zones) में रहने वाले समुदायों के साथ मिलकर काम करना, वैकल्पिक आजीविका प्रदान करना और जागरूकता कार्यक्रम चलाना आवश्यक है।
  • वन्यजीव अपराधों से निपटने के लिए वन विभाग, पुलिस और अन्य प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाना तथा आधुनिक तकनीक (जैसे ड्रोन और निगरानी कैमरे) का उपयोग करना महत्वपूर्ण है।
  • बाघों की आबादी की निगरानी के लिए वैज्ञानिक विधियों, जैसे M-STrIPES (Monitoring System for Tigers – Intensive Protection and Ecological Status) का उपयोग किया जाता है, जो गश्त और डेटा संग्रह को बेहतर बनाता है।
  • जलवायु परिवर्तन और वनों की कटाई जैसे पर्यावरणीय कारक बाघों के आवासों को प्रभावित कर रहे हैं, जिससे उनके अस्तित्व पर खतरा बढ़ रहा है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
बाघों की मृत्यु नागार्जुनसागर-श्रीशैलम टाइगर रिजर्व (NSTR) में कुछ ही दिनों के भीतर दो बाघों की मृत्यु चिंता का विषय है।
अंगों का गायब होना एक बाघ के पंजे सहित अंगों का गायब होना शिकार (Poaching) की संभावना को दर्शाता है।
जांच के आदेश उपमुख्यमंत्री और वन मंत्री द्वारा व्यापक और पारदर्शी जांच के आदेश दिए गए हैं।
NTCA SOPs राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) के अनुसार पोस्टमार्टम किया गया।
गश्त और निगरानी भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए वन क्षेत्रों में गश्त और क्षेत्र-स्तरीय निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 इस अधिनियम के तहत एक अपराध मामला दर्ज किया गया है, जो वन्यजीवों के संरक्षण के लिए कानूनी ढाँचा प्रदान करता है।

महत्व

पर्यावरण और पारिस्थितिकी

  • बाघ खाद्य श्रृंखला के शीर्ष पर होते हैं और पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य के संकेतक हैं। उनकी संख्या में कमी से जैव विविधता (Biodiversity) और पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ सकता है।
  • वन्यजीवों का संरक्षण प्राकृतिक संसाधनों और आवासों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, जो जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के प्रभावों को कम करने में भी सहायक है।

सामाजिक और आर्थिक

  • बाघ संरक्षण स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार के अवसर (जैसे इको-टूरिज्म) पैदा करता है।
  • वन्यजीवों का अवैध शिकार और व्यापार संगठित अपराधों को बढ़ावा देता है और कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती खड़ी करता है।

शासन और नीति

  • बाघों की मृत्यु वन विभाग की प्रभावशीलता और वन्यजीव संरक्षण नीतियों के कार्यान्वयन पर सवाल उठाती है।
  • सरकार की प्रतिबद्धता और त्वरित जांच के आदेश पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।

चुनौतियाँ

1. अवैध शिकार और वन्यजीव अपराध

  • बाघों के अंगों की तस्करी एक बड़ा खतरा है, जिससे उनकी आबादी को गंभीर नुकसान पहुँचता है।
  • वन्यजीव अपराधों का पता लगाना और अपराधियों को दंडित करना अक्सर मुश्किल होता है, जिससे वे बेखौफ होकर काम करते हैं।

2. पर्यावास का नुकसान और विखंडन

  • मानवीय गतिविधियों, जैसे कृषि विस्तार, शहरीकरण और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के कारण बाघों का प्राकृतिक आवास सिकुड़ रहा है।
  • पर्यावास के विखंडन से बाघों की आबादी अलग-थलग पड़ जाती है, जिससे आनुवंशिक विविधता कम होती है और प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है।

3. मानव-वन्यजीव संघर्ष

  • जैसे-जैसे बाघों के आवास सिकुड़ते हैं, वे भोजन और स्थान की तलाश में मानव बस्तियों में प्रवेश करते हैं, जिससे संघर्ष बढ़ता है।
  • यह संघर्ष अक्सर बाघों के प्रति नकारात्मक धारणा पैदा करता है और प्रतिशोध में उन्हें मारने की घटनाओं को जन्म देता है।

4. कमजोर निगरानी और प्रवर्तन

  • वन क्षेत्रों में पर्याप्त गश्त, निगरानी और प्रौद्योगिकी की कमी अवैध शिकारियों को अवसर प्रदान करती है।
  • वन्यजीव संरक्षण कानूनों का कमजोर प्रवर्तन और न्यायिक प्रक्रिया में देरी अपराधियों को दंडित करने में बाधा डालती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
अवैध शिकार बाघों के अंगों की तस्करी और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में उनकी उच्च मांग।
पर्यावास का नुकसान मानवीय अतिक्रमण, वनों की कटाई और विकास परियोजनाओं के कारण बाघों के प्राकृतिक आवास का सिकुड़ना।
मानव-वन्यजीव संघर्ष वन्यजीवों के मानव बस्तियों में प्रवेश से जान-माल का नुकसान और प्रतिशोध में हत्याएँ।
कमजोर प्रवर्तन वन्यजीव संरक्षण कानूनों का प्रभावी ढंग से लागू न होना और अपराधियों को दंडित करने में देरी।
कर्मचारियों की कमी वन विभाग में कर्मचारियों की कमी और अपर्याप्त प्रशिक्षण, जिससे निगरानी प्रभावित होती है।
जलवायु परिवर्तन बदलते मौसम पैटर्न और प्राकृतिक आपदाएँ बाघों के आवास और शिकार को प्रभावित करती हैं।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • प्रोजेक्ट टाइगर (Project Tiger)

आगे की राह

  • वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत अपराधों की त्वरित और प्रभावी जांच सुनिश्चित करना।
  • वन क्षेत्रों में गश्त और निगरानी को आधुनिक तकनीक (जैसे ड्रोन, थर्मल इमेजिंग) का उपयोग करके मजबूत करना।
  • स्थानीय समुदायों को वन्यजीव संरक्षण प्रयासों में शामिल करना और उन्हें वैकल्पिक आजीविका के अवसर प्रदान करना।
  • वन्यजीव अपराधों से निपटने के लिए वन विभाग, पुलिस और अन्य प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाना।
  • बाघों के पर्यावास को बहाल करना और उनके लिए सुरक्षित गलियारे (Corridors) बनाना ताकि आनुवंशिक विविधता बनी रहे।
  • वन्यजीव अपराधों के लिए कठोर दंड सुनिश्चित करना और न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाना।
  • जन जागरूकता अभियान चलाना ताकि वन्यजीव संरक्षण के महत्व को समझाया जा सके।
  • वन विभाग के कर्मचारियों को बेहतर प्रशिक्षण, उपकरण और सुविधाएं प्रदान करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

बाघ संरक्षण · वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 · राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) · प्रोजेक्ट टाइगर · नागार्जुनसागर-श्रीशैलम बाघ अभयारण्य · मानव-वन्यजीव संघर्ष · वन्यजीव अपराध · जैव विविधता संरक्षण · पर्यावरण संतुलन · वन गश्त · फोरेंसिक विश्लेषण · संरक्षण नीतियां

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘अनुच्छेद 48A’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन’}
  • {‘अनुच्छेद 51A (g)’: ‘प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और संवर्धन’}
  • {‘सातवीं अनुसूची (समवर्ती सूची)’: ‘वन्यजीवों और पक्षियों का संरक्षण’}

अवधारणा प्रवाह

बाघों की मृत्यु और अंगों का गायब होना  →  अवैध शिकार की आशंका और वन्यजीव अपराध  →  वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत मामला दर्ज  →  NTCA SOPs के अनुसार जांच और फोरेंसिक विश्लेषण  →  वन क्षेत्रों में गश्त और निगरानी बढ़ाने के निर्देश  →  दीर्घकालिक वन्यजीव संरक्षण के लिए उपाय और नीतियां

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. नागार्जुनसागर-श्रीशैलम बाघ अभयारण्य भारत का सबसे बड़ा बाघ अभयारण्य है।
2. यह अभयारण्य आंध्र प्रदेश और तेलंगाना दोनों राज्यों में फैला हुआ है।
3. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 वन्यजीवों और उनके आवासों को कानूनी संरक्षण प्रदान करता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल तीन — कथन 1 सही है क्योंकि नागार्जुनसागर-श्रीशैलम बाघ अभयारण्य (NSTR) भारत का सबसे बड़ा बाघ अभयारण्य है। कथन 2 भी सही है क्योंकि यह आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों में फैला हुआ है। कथन 3 भी सही है क्योंकि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 भारत में वन्यजीवों के संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण कानून है।

Q2. राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. NTCA पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत एक वैधानिक निकाय है।
2. इसका गठन वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 में संशोधन के बाद किया गया था।
3. NTCA भारत में बाघ संरक्षण के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOPs) और दिशानिर्देश जारी करता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। NTCA पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत एक वैधानिक निकाय है। कथन 2 भी सही है। इसका गठन वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 में संशोधन के बाद किया गया था। कथन 3 भी सही है। NTCA भारत में बाघ संरक्षण के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOPs) और दिशानिर्देश जारी करता है, जिसमें बाघों की मृत्यु के बाद पोस्टमॉर्टम और जांच शामिल है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में बाघों के संरक्षण के लिए किए गए प्रयासों के बावजूद, बाघों की मृत्यु की घटनाएं चिंता का विषय बनी हुई हैं। नागार्जुनसागर-श्रीशैलम बाघ अभयारण्य में हाल ही में हुई बाघों की मृत्यु के संदर्भ में, भारत में बाघ संरक्षण के समक्ष प्रमुख चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए और इन चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक कदमों पर चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर कंकाल:
1. **परिचय:** भारत में बाघों की स्थिति और संरक्षण के महत्व पर संक्षिप्त प्रकाश डालें। नागार्जुनसागर-श्रीशैलम बाघ अभयारण्य (NSTR) में हाल की घटनाओं का उल्लेख करें।
2. **बाघ संरक्षण के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ:**
* **अवैध शिकार और वन्यजीव अपराध:** बाघों के अंगों की तस्करी, अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क।
* **आवास का नुकसान और विखंडन:** शहरीकरण, कृषि विस्तार, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के कारण वन क्षेत्रों का सिकुड़ना।
* **मानव-वन्यजीव संघर्ष:** वन क्षेत्रों के पास रहने वाले समुदायों के साथ संघर्ष, प्रतिशोध में हत्याएं।
* **पर्यावरणीय प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन:** प्राकृतिक आवासों पर प्रभाव।
* **प्रबंधन संबंधी चुनौतियाँ:** वन कर्मचारियों की कमी, अपर्याप्त निगरानी, क्षमता निर्माण का अभाव।
* **रोग और प्राकृतिक कारण:** प्राकृतिक मृत्यु दर का प्रबंधन।
* **आनुवंशिक विविधता का नुकसान:** छोटे, अलग-थलग आबादी में अंतःप्रजनन का जोखिम।
3. **चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक कदम:**
* **सख्त कानून प्रवर्तन:** वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 का प्रभावी कार्यान्वयन, त्वरित न्याय।
* **प्रौद्योगिकी का उपयोग:** ड्रोन, थर्मल इमेजिंग, AI आधारित निगरानी प्रणाली।
* **समुदाय की भागीदारी:** स्थानीय समुदायों को संरक्षण प्रयासों में शामिल करना, वैकल्पिक आजीविका प्रदान करना।
* **आवास बहाली और गलियारा प्रबंधन:** बाघों के लिए सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करना।
* **क्षमता निर्माण:** वन कर्मचारियों को प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरणों से लैस करना।
* **अंतर-राज्यीय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग:** वन्यजीव अपराधों से निपटने के लिए समन्वय।
* **वैज्ञानिक अनुसंधान और डेटा संग्रह:** बाघों की आबादी, स्वास्थ्य और व्यवहार पर नज़र रखना।
* **जागरूकता अभियान:** जन जागरूकता बढ़ाना।
4. **निष्कर्ष:** बाघ संरक्षण के महत्व को दोहराते हुए एक एकीकृत और बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दें।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

No Comments

Post A Comment