निफ्ट ने ‘विशेष अभियान 6’ में स्वच्छता, हरित परिसर और सतत विकास की उपलब्धियां हासिल कीं

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निफ्ट ने ‘विशेष अभियान 6’ में स्वच्छता, हरित परिसर और सतत विकास की उपलब्धियां हासिल कीं

निफ्ट विशेष अभियान 6 प्रक्रियाशुभारंभ2 अक्टूबर 2026स्वच्छता अभियानपरिसर सफाईकचरा प्रबंधनई-कचरा निपटानरिकॉर्ड डिजिटलीकरणई-फाइल व्यवस्थाजागरूकता गतिविधियांप्रतियोगिताएंसतत विकासहरित परिसर
निफ्ट विशेष अभियान 6 प्रक्रिया

✎ कचरे का स्रोत पर पृथक्करण, ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 के अंतर्गत अधिकृत निपटान और विस्तारित उत्पादक दायित्व (EPR) स्वच्छ और हरित संस्थागत परिसर की तीन मूल कड़ियां हैं।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी (ठोस अपशिष्ट और ई-कचरा प्रबंधन, संस्थागत पर्यावरण संरक्षण)  |  GS Paper II — शासन (सरकारी संस्थानों में प्रशासनिक सुधार और कार्य-संस्कृति)
  • Prelims: राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (NIFT) — वस्त्र मंत्रालय के अंतर्गत, ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016, विस्तारित उत्पादक दायित्व (Extended Producer Responsibility — EPR), जैविक अपशिष्ट से खाद (कम्पोस्टिंग), कचरे का पृथक्करण (Segregation at source), पुनर्चक्रण (Recycling) और अपसाइकलिंग (Upcycling), एचवीएसी (HVAC) प्रणाली
  • Essay: स्वच्छता केवल सफाई नहीं, नागरिक आदत और संस्थागत संस्कृति का प्रश्न है, सार्वजनिक संस्थानों में हरित कार्यप्रणाली: प्रयास से स्थायित्व तक

त्वरित पुनरावृत्ति: कचरे का स्रोत पर पृथक्करण, ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 के अंतर्गत अधिकृत निपटान और विस्तारित उत्पादक दायित्व (EPR) स्वच्छ और हरित संस्थागत परिसर की तीन मूल कड़ियां हैं।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

वस्त्र मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (National Institute of Fashion Technology — NIFT) ने ‘विशेष अभियान 6’ के तहत अपने परिसरों में स्वच्छता, कचरा प्रबंधन, अवसंरचना रखरखाव और पर्यावरणीय स्थायित्व से जुड़ी व्यापक पहलें चलाईं। यह अभियान 2 अक्टूबर 2026 को NIFT दिल्ली परिसर में वस्त्र मंत्रालय के सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में शुरू हुआ और 31 अक्टूबर 2026 तक चला। इसमें छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी रही। अभियान में ई-कचरे का निर्धारित प्रक्रिया से निपटान, ई-फाइलों और पुराने भौतिक रिकॉर्डों का छंटाई-आधारित प्रबंधन, वृक्षारोपण, जैविक खाद निर्माण का प्रदर्शन, ‘कचरे से कला’ गतिविधि और जागरूकता प्रतियोगिताएं शामिल थीं। इसे एक उदाहरण के रूप में देखा जा सकता है कि किसी सार्वजनिक संस्थान में पर्यावरण-अनुकूल आचरण को नियमित संस्थागत व्यवस्था में कैसे बदला जाता है।

पृष्ठभूमि

  • स्वच्छता और कचरा प्रबंधन भारत में केंद्र और राज्य स्तर पर नीति का विषय रहे हैं। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के अंतर्गत कचरे के स्रोत पर पृथक्करण, जैव-अपघटनीय और अ-जैव-अपघटनीय कचरे को अलग रखने की व्यवस्था है।
  • ई-कचरे के लिए ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 लागू हैं, जिनमें उत्पादकों, उपभोक्ताओं और संग्रहण-पुनर्चक्रण केंद्रों की जिम्मेदारियां तय की गई हैं। इन नियमों में विस्तारित उत्पादक दायित्व (EPR) की अवधारणा अपनाई गई है।
  • NIFT की स्थापना 1986 में हुई थी और इसे वैधानिक दर्जा राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान अधिनियम, 2006 से मिला है। यह वस्त्र मंत्रालय के अधीन डिज़ाइन, फैशन प्रबंधन और प्रौद्योगिकी से जुड़े शिक्षण का प्रमुख केंद्र है।
  • सार्वजनिक संस्थानों में रिकॉर्ड प्रबंधन का डिजिटलीकरण सरकारी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, भंडारण-दक्षता और फाइल-निपटान की व्यवस्था से जुड़ा है। इससे कागज़ की खपत और भौतिक भंडारण का दबाव कम होता है।
  • पर्यावरण संरक्षण के लिए भारत की प्रतिबद्धता जलवायु और सतत विकास से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतिज्ञाओं में भी दिखाई देती है, जिससे संस्थागत स्तर पर हरित व्यवहार का महत्व बढ़ा है।

संस्थागत स्वच्छता और हरित परिसर क्या है?

  • हरित परिसर से आशय ऐसे शैक्षणिक या प्रशासनिक परिसर से है जहां ऊर्जा, जल और कचरे के प्रबंधन में पर्यावरण-अनुकूल प्रथाएं नियमित रूप से अपनाई जाती हैं।
  • कचरे का स्रोत पर पृथक्करण इसका मूल आधार है। गीला (जैव-अपघटनीय) और सूखा (पुनर्चक्रण योग्य) कचरा अलग करने से उसका उचित उपचार संभव होता है।
  • जैव-अपघटनीय कचरे (पत्तियां, फल-सब्जी के छिलके, बचा हुआ भोजन) से खाद बनाना प्राकृतिक चक्र को बनाए रखने का सरल और प्रभावी तरीका है।
  • ई-कचरे में पुराने कंप्यूटर, प्रिंटर, बैटरी और बिजली के उपकरण आते हैं। इनमें सीसा और पारा जैसे विषैले तत्व होते हैं, इसलिए इनका निपटान केवल अधिकृत प्रक्रिया से ही होना चाहिए।
  • विस्तारित उत्पादक दायित्व (EPR) के अंतर्गत उत्पादकों की जिम्मेदारी उत्पाद के उपयोग के बाद के चरण तक बढ़ाई जाती है, ताकि उत्पाद का पुनर्चक्रण या सुरक्षित निपटान सुनिश्चित हो।
  • अपसाइकलिंग (Upcycling) में बेकार वस्तुओं को उनके मूल्य में वृद्धि कर नए उपयोगी या सजावटी रूप में बदला जाता है, जैसे ‘कचरे से कला’ गतिविधि में किया गया।
  • अवसंरचना रखरखाव (बिजली के तारों, स्विच, HVAC, एयर कंडीशनर और वायु निस्पंदन इकाइयों की नियमित जांच) भी सुरक्षा और ऊर्जा-दक्षता का अंग है।
  • वृक्षारोपण, बागवानी और छंटाई परिसर के सूक्ष्म-पर्यावरण और हरित आवरण को बनाए रखने में सहायक होते हैं।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
विशेष अभियान 6 (Special Campaign 6.0) 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक चला; छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी से संचालित
परिसर स्तर की स्वच्छता अकादमिक ब्लॉक, कार्यशालाएं, हॉस्टल, कैंटीन, छतें और भंडारण क्षेत्र; पानी की टंकियों और जल निकासी प्रणाली की सफाई
कचरा प्रबंधन और ई-कचरा निपटान स्रोत पर कचरे का पृथक्करण; ई-कचरे और कबाड़ का निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार निपटान
डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन ई-फाइलों का निपटान और पुराने भौतिक रिकॉर्डों की छंटाई, जिससे भंडारण स्थान का बेहतर उपयोग और रिकॉर्ड प्रबंधन में सुधार
हरित पहल वृक्षारोपण, बागवानी, छंटाई; पत्तियों, फलों और बचे भोजन से जैविक खाद; ‘कचरे से कला’ गतिविधि से पुन: उपयोग को बढ़ावा
अवसंरचना रखरखाव बिजली उपकरणों और लिफ्ट की मरम्मत, दीमक-रोधी उपाय, हीटर, गीजर, HVAC, AHU और वायु निस्पंदन इकाइयों की सफाई

महत्व

पर्यावरणीय महत्व

  • परिसर को छोटे पैमाने पर सतत विकास की प्रयोगशाला के रूप में देखा गया, जहां कचरा कम करने के सिद्धांत (reduce, reuse, recycle) व्यवहार में लागू हुए।
  • ई-कचरे का निर्धारित प्रक्रिया से निपटान ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 के अनुपालन की दिशा में कदम है।
  • कचरे का स्रोत पर पृथक्करण ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 की मूल अपेक्षा है, जिसे परिसर स्तर पर अपनाना व्यावहारिक मॉडल प्रस्तुत करता है।

संस्थागत एवं प्रशासनिक महत्व

  • ई-फाइलों और पुराने भौतिक रिकॉर्डों की छंटाई से प्रशासनिक दक्षता और अभिलेख-व्यवस्था में सुधार हुआ।
  • निफ्ट एक सांविधिक संस्थान है, जिसकी स्थापना राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान अधिनियम, 2006 के अंतर्गत हुई है और जो वस्त्र मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करता है।
  • सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में शुभारंभ से संस्थागत नेतृत्व की प्रतिबद्धता रेखांकित हुई।

शैक्षणिक एवं सामाजिक महत्व

  • ‘कचरे से कला’ गतिविधि डिज़ाइन-उन्मुख शिक्षा को पुन: उपयोग और चक्रीय अर्थव्यवस्था की अवधारणा से जोड़ती है।
  • नारा-लेखन, पेंटिंग और कविता प्रतियोगिताओं से छात्रों में स्वच्छता के प्रति नागरिक चेतना विकसित करने का प्रयास हुआ।
  • सफाई और रखरखाव कर्मियों के योगदान की मान्यता से श्रम की गरिमा और सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश गया।

सुरक्षा एवं स्वास्थ्य

  • बिजली के खराब स्विच, सॉकेट और लटकते तारों की मरम्मत से विद्युत दुर्घटनाओं का जोखिम घटता है।
  • दीमक-रोधी और कीट नियंत्रण उपायों से भवनों की संरचनात्मक सुरक्षा और आंतरिक स्वच्छता बनी रहती है।
  • HVAC, AHU और वायु निस्पंदन इकाइयों की सफाई से घरेलू और कार्यस्थल के वायु गुणवत्ता मानक सुधरते हैं।

चुनौतियाँ

1. अभियान-आधारित स्वच्छता की निरंतरता

  • अभियान समयबद्ध होता है, जबकि स्वच्छता एक सतत व्यवहार है; अभियान समाप्त होने पर पुरानी आदतें लौट सकती हैं।
  • सफाई का स्तर मुख्य रूप से कर्मियों की संख्या और निगरानी पर निर्भर रहता है।

2. ई-कचरे का वैज्ञानिक निपटान

  • ई-कचरे में सीसा, पारा और कैडमियम जैसे विषैले तत्व होते हैं, जो अनौपचारिक रूप से निपटाए जाने पर मिट्टी और जल को दूषित करते हैं।
  • उत्पादक विस्तारित उत्तरदायित्व (EPR) के अंतर्गत अधिकृत पुनर्चक्रणकर्ताओं तक पहुंच और दस्तावेजीकरण आवश्यक है।

3. जैविक कचरे का पैमाना और उपयोग

  • छोटे परिसर में बनी खाद की मात्रा सीमित होती है; बड़े पैमाने पर उपयोग के लिए स्थायी संरचना और उपयोगकर्ता चाहिए।
  • बचे हुए भोजन से खाद बनाने में गंध, कीट और स्वच्छता संबंधी सावधानियां रखनी पड़ती हैं।

4. पुराने भवनों का रखरखाव और ऊर्जा दक्षता

  • लिफ्ट, HVAC और बिजली प्रणालियों की आयु बढ़ने पर ऊर्जा खपत और खराबी का जोखिम बढ़ता है।
  • बार-बार की मरम्मत के बजाय नियोजित ऊर्जा लेखा परीक्षा आवश्यक है।

5. डिजिटल अभिलेखों की सुरक्षा

  • ई-फाइलों के निपटान में यह सुनिश्चित करना होता है कि महत्वपूर्ण अभिलेख नष्ट न हों और गोपनीय डेटा सुरक्षित रहे।
  • डिजिटल भंडारण में साइबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण के मानक लागू करना चुनौतीपूर्ण है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
अभियान की निरंतरता अभियान समाप्त होने के बाद स्वच्छता का स्तर गिरने का खतरा
ई-कचरे का अनौपचारिक निपटान विषैले तत्वों से मिट्टी और भूजल प्रदूषण; अधिकृत पुनर्चक्रण पर निर्भरता
जैविक खाद का सीमित पैमाना बड़े परिसरों में कचरे की मात्रा के अनुरूप खाद उत्पादन क्षमता का अभाव
भवनों की आयु और ऊर्जा खपत पुराने HVAC और बिजली तंत्र से ऊर्जा हानि और बार-बार खराबी
डिजिटल अभिलेखों की सुरक्षा ई-फाइलों के निपटान में अभिलेख हानि और साइबर जोखिम
व्यवहार परिवर्तन की गहराई प्रतियोगिताओं के बावजूद रोज़मर्रा के आचरण में स्थायी परिवर्तन सुनिश्चित करना

आगे की राह

  • कचरे का स्रोत पर पृथक्करण अनिवार्य नियम के रूप में लागू हो और प्रत्येक ब्लॉक में स्पष्ट डिब्बे व निगरानी व्यवस्था हो।
  • ई-कचरे के लिए अधिकृत पुनर्चक्रणकर्ता से औपचारिक अनुबंध हो और ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 के अनुसार प्रविष्टि व निपटान का रिकॉर्ड रखा जाए।
  • परिसर में नियमित ऊर्जा लेखा परीक्षा कराई जाए, ताकि HVAC और बिजली प्रणाली में सुधार की प्राथमिकता तय हो सके।
  • जैविक खाद इकाई को स्थायी ढांचे के रूप में विकसित किया जाए और उसका उपयोग परिसर के उद्यान में सुनिश्चित हो।
  • डिजिटल अभिलेखों के लिए अभिलेख-नीति, प्रतिधारण अवधि और साइबर सुरक्षा मानक स्पष्ट रूप से लिखित हों।
  • छात्रों और कर्मचारियों की हरित परिसर समिति बने, जो मासिक निरीक्षण और सुधार-सूची की निगरानी करे।
  • स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और ऊर्जा दक्षता के लिए मापने योग्य संकेतक (indicators) तय किए जाएं, ताकि वर्ष-दर-वर्ष तुलना संभव हो।
  • डिज़ाइन पाठ्यक्रम में सतत डिज़ाइन और पुन: उपयोग के मॉड्यूल जोड़े जाएं, ताकि ‘कचरे से कला’ जैसी गतिविधियां शिक्षण का स्थायी हिस्सा बनें।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

स्वच्छता अभियान · सतत विकास · हरित परिसर · कचरा प्रबंधन · ई-कचरा निपटान · वृक्षारोपण · जैविक खाद · कचरे से कला · संस्थागत प्रथाएँ · पर्यावरणीय स्थायित्व

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 48क: पर्यावरण संरक्षण व सुधार का राज्य-कर्तव्य (DPSP)
  • अनुच्छेद 51क(छ) (51A(g)): प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा का मूल कर्तव्य

अवधारणा प्रवाह

वस्त्र मंत्रालय के अधीन निफ्ट में 2 अक्टूबर 2026 को विशेष अभियान 6 का औपचारिक शुरुआत  →  परिसर में स्वच्छता, कचरे का पृथक्करण और ई-कचरे का निर्धारित प्रक्रिया से निपटान  →  ई-फाइलों का निपटान और पुराने भौतिक रिकॉर्डों की छंटाई से प्रशासनिक दक्षता में सुधार  →  वृक्षारोपण, जैविक खाद निर्माण और ‘कचरे से कला’ से पुन: उपयोग को बढ़ावा  →  बिजली, HVAC और वायु निस्पंदन प्रणालियों के रखरखाव से सुरक्षित और स्वस्थ आंतरिक वातावरण  →  प्रतियोगिताओं और जागरूकता कार्यक्रमों से छात्रों और कर्मचारियों में व्यवहार परिवर्तन  →  नियमित आदत बनने पर हरित और स्थायी परिसर का दीर्घकालिक लक्ष्य प्राप्त होने की दिशा में प्रगति

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (निफ्ट) द्वारा ‘विशेष अभियान 6’ के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. इस अभियान का उद्देश्य निफ्ट परिसरों में स्वच्छता, साफ-सफाई और पर्यावरणीय स्थायित्व को बढ़ावा देना था।
2. यह अभियान केवल निफ्ट दिल्ली परिसर में आयोजित किया गया था।
3. ‘कचरे से कला’ गतिविधि इस अभियान का एक हिस्सा थी, जिसका उद्देश्य रचनात्मकता और पुन: उपयोग को बढ़ावा देना था।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि अभियान का मुख्य उद्देश्य स्वच्छता, साफ-सफाई, कचरा प्रबंधन, अवसंरचना रखरखाव और पर्यावरणीय स्थायित्व था। कथन 2 गलत है क्योंकि यह अभियान निफ्ट के सभी परिसरों में चलाया गया था, न कि केवल दिल्ली परिसर में। कथन 3 सही है क्योंकि ‘कचरे से कला’ गतिविधि अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थी, जिसने पुन: उपयोग और पुनर्चक्रण को बढ़ावा दिया।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सी पहल ‘विशेष अभियान 6’ के तहत राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (निफ्ट) द्वारा की गई थी?
1. ई-कचरे का उचित निपटान।
2. जैविक कचरे से खाद बनाने का प्रदर्शन।
3. ‘स्वच्छता और ई-कचरा प्रबंधन का महत्व’ विषय पर नारे लेखन प्रतियोगिता।
4. केवल छात्रों की भागीदारी, कर्मचारियों की नहीं।
सही विकल्प चुनें:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2, 3 और 4
  3. केवल 1, 2 और 3
  4. उपरोक्त सभी

उत्तर: केवल 1, 2 और 3 — विकल्प 1, 2 और 3 सही हैं क्योंकि ये सभी पहलें अभियान के तहत की गई थीं। विकल्प 4 गलत है क्योंकि अभियान में छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों सभी की सक्रिय भागीदारी थी।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में उच्च शिक्षा संस्थानों में पर्यावरणीय स्थायित्व (Environmental Sustainability) और स्वच्छता को बढ़ावा देने में ‘विशेष अभियान 6’ जैसे कार्यक्रमों की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इन अभियानों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: ‘विशेष अभियान 6’ जैसे अभियानों का संक्षिप्त परिचय और उच्च शिक्षा संस्थानों में इनके महत्व पर प्रकाश।
2. भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण:
क. सकारात्मक प्रभाव: स्वच्छता, कचरा प्रबंधन, ई-कचरा निपटान, वृक्षारोपण, ‘कचरे से कला’ जैसी पहलों के माध्यम से पर्यावरणीय जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा देना। छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी का उल्लेख।
ख. चुनौतियाँ/सीमाएँ: ऐसे अभियानों की अल्पकालिक प्रकृति, दीर्घकालिक वित्तपोषण की कमी, निरंतर निगरानी और मूल्यांकन का अभाव, छात्रों और कर्मचारियों में स्थायी व्यवहार परिवर्तन लाने में चुनौतियाँ।
3. प्रभावशीलता बढ़ाने के उपाय:
क. पाठ्यक्रम में एकीकरण: पर्यावरणीय शिक्षा को औपचारिक पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाना।
ख. स्थायी वित्तपोषण: हरित पहलों के लिए समर्पित बजट और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) निधियों का उपयोग।
ग. प्रौद्योगिकी का उपयोग: स्मार्ट कचरा प्रबंधन प्रणालियाँ, ऊर्जा-कुशल प्रौद्योगिकियाँ।
घ. सामुदायिक भागीदारी: स्थानीय समुदायों और गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) के साथ सहयोग।
ङ. नीतिगत ढाँचा: संस्थानों के लिए अनिवार्य हरित दिशानिर्देश और प्रमाणन प्रणाली।
च. प्रोत्साहन और मान्यता: स्थायी प्रथाओं को अपनाने वाले संस्थानों और व्यक्तियों को पुरस्कृत करना।
4. निष्कर्ष: उच्च शिक्षा संस्थानों को पर्यावरणीय नेतृत्व के केंद्र के रूप में स्थापित करने में ऐसे अभियानों की क्षमता और भविष्य की राह।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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