02 Oct नीति आयोग ने कोलकाता में SDG बजट पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की, जानिए मुख्य बिंदु
✎ सतत विकास लक्ष्य (SDG) बजट टैगिंग एक महत्वपूर्ण उपकरण है जो सरकारी व्यय को SDG के साथ संरेखित करके पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रभावी संसाधन आवंटन सुनिश्चित करता है, जिससे भारत में समावेशी और सतत विकास को बढ़ावा मिलता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, संविधान, राजव्यवस्था, सामाजिक न्याय और अंतर्राष्ट्रीय संबंध | GS Paper III — आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा और आपदा प्रबंधन
- Prelims: सतत विकास लक्ष्य (SDG), नीति आयोग, राज्य सहायता मिशन (SSM), संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP), बजट टैगिंग, स्थानीयकरण, राजकोषीय संघवाद, CAG, MoSPI
- Essay: सतत विकास लक्ष्य: भारत के लिए चुनौतियाँ और अवसर, शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने में बजट की भूमिका, स्थानीयकरण के माध्यम से समावेशी विकास
त्वरित पुनरावृत्ति: सतत विकास लक्ष्य (SDG) बजट टैगिंग एक महत्वपूर्ण उपकरण है जो सरकारी व्यय को SDG के साथ संरेखित करके पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रभावी संसाधन आवंटन सुनिश्चित करता है, जिससे भारत में समावेशी और सतत विकास को बढ़ावा मिलता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
नीति आयोग ने पश्चिम बंगाल सरकार और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के तकनीकी सहयोग से अपनी राज्य सहायता मिशन (SSM) पहल के अंतर्गत कोलकाता में सतत विकास लक्ष्यों (SDG) के बजट पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य योजना और बजट प्रक्रियाओं को सतत विकास लक्ष्यों के साथ संरेखित करना तथा SDG बजट टैगिंग को संस्थागत रूप देना था, ताकि उप-राष्ट्रीय स्तर पर वित्तीय प्रतिबद्धताओं को मापने योग्य विकास परिणामों में परिवर्तित किया जा सके।
पृष्ठभूमि
- सतत विकास लक्ष्य (Sustainable Development Goals – SDGs) संयुक्त राष्ट्र द्वारा 2015 में अपनाए गए 17 वैश्विक लक्ष्य हैं, जिनका उद्देश्य गरीबी समाप्त करना, ग्रह की रक्षा करना और सभी के लिए शांति व समृद्धि सुनिश्चित करना है।
- भारत इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है और नीति आयोग देश में SDG के कार्यान्वयन, निगरानी और स्थानीयकरण के लिए एक नोडल संस्था के रूप में कार्य करता है।
- राज्य सहायता मिशन (SSM) नीति आयोग की एक पहल है जिसका उद्देश्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की क्षमता निर्माण में सहायता करना है, ताकि वे बेहतर नीतियां और कार्यक्रम तैयार कर सकें तथा उनका प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन कर सकें।
- SDG बजट टैगिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत सरकारी व्यय को विशिष्ट सतत विकास लक्ष्यों और उनके उप-लक्ष्यों के साथ जोड़ा जाता है, जिससे यह पता चल सके कि कितना धन किन लक्ष्यों पर खर्च किया जा रहा है।
- यह कार्यशाला ‘संपूर्ण समाज’ और ‘संपूर्ण सरकार’ के दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिसमें वित्त विभाग, राजनीतिक नेतृत्व, बहुपक्षीय संस्थाएं और निजी क्षेत्र सभी SDG प्राप्त करने के लिए मिलकर काम करते हैं।
- भारत में निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए एक सहायक ढांचा मौजूद है, जिसमें कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR), व्यावसायिक उत्तरदायित्व और सतत विकास रिपोर्टिंग, पूंजी बाजारों में ESG (पर्यावरण, सामाजिक और शासन) तथा सामाजिक स्टॉक एक्सचेंज शामिल हैं।
सतत विकास लक्ष्य (SDG) बजट टैगिंग क्या है?
- सतत विकास लक्ष्य (SDG) बजट टैगिंग एक वित्तीय प्रबंधन उपकरण है जो सरकारों को अपने बजट आवंटन को सतत विकास लक्ष्यों के साथ संरेखित करने में मदद करता है।
- यह प्रक्रिया सरकारी व्यय को विशिष्ट SDG लक्ष्यों और उप-लक्ष्यों के साथ जोड़ती है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कौन से कार्यक्रम और योजनाएं किन SDG को संबोधित कर रही हैं।
- इसका मुख्य उद्देश्य संसाधनों के प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करना, जवाबदेही बढ़ाना और यह आकलन करना है कि क्या वित्तीय संसाधन उन लोगों तक पहुँच रहे हैं जिन्हें उनकी सबसे अधिक आवश्यकता है।
- बजट टैगिंग के माध्यम से, सरकारें अपने विकास प्राथमिकताओं और वित्तीय प्रतिबद्धताओं के बीच की खाई को पाट सकती हैं, जिससे मापने योग्य विकास परिणाम प्राप्त हो सकें।
- यह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को SDG के स्थानीयकरण में सहायता करता है, क्योंकि यह उप-राष्ट्रीय स्तर पर लक्ष्यों के अनुरूप खर्च को ट्रैक करने की अनुमति देता है।
- यह पारदर्शिता बढ़ाता है और हितधारकों, जैसे नागरिक समाज संगठनों, विकास भागीदारों और आम जनता को यह समझने में मदद करता है कि सार्वजनिक धन का उपयोग SDG प्राप्त करने के लिए कैसे किया जा रहा है।
- CAG, MoSPI और CGA जैसे संस्थान इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, क्योंकि वे वित्तीय डेटा की सटीकता और रिपोर्टिंग मानकों को सुनिश्चित करते हैं।
- यह कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) और निजी निवेश को भी विकास प्राथमिकताओं के साथ संरेखित करने में मदद करता है, जिससे ‘संपूर्ण समाज’ दृष्टिकोण को बढ़ावा मिलता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| SDG बजट टैगिंग | यह सुनिश्चित करता है कि वित्तीय आवंटन सीधे सतत विकास लक्ष्यों (SDG) से जुड़े हों, जिससे जवाबदेही और परिणाम-उन्मुख व्यय को बढ़ावा मिलता है। |
| उप-राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान | राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को SDG के स्थानीयकरण और विशिष्ट क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुसार नीतियों को तैयार करने में सक्षम बनाता है। |
| बहु-हितधारक भागीदारी | सरकार, UNDP, CAG, MoSPI, निजी क्षेत्र और नागरिक समाज संगठनों को एक साथ लाता है, जिससे ‘संपूर्ण समाज’ और ‘संपूर्ण सरकार’ दृष्टिकोण को बढ़ावा मिलता है। |
| अनुभव साझा करना | हरियाणा, ओडिशा, मेघालय और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के सफल मॉडलों और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने का अवसर प्रदान करता है। |
| वित्तीय प्रतिबद्धताओं का मापन | यह आकलन करने में मदद करता है कि क्या संसाधन उन लोगों तक पहुँच रहे हैं जिन्हें उनकी सबसे अधिक आवश्यकता है, और विकास प्राथमिकताओं के साथ CSR और निवेश को संरेखित करता है। |
महत्व
शासन और नीति निर्माण
- SDG बजट टैगिंग शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ाती है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि सार्वजनिक धन का उपयोग विशिष्ट विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए किया जा रहा है।
- यह नीति निर्माताओं को संसाधनों के आवंटन और उनके प्रभाव का बेहतर मूल्यांकन करने में मदद करता है, जिससे साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को बढ़ावा मिलता है।
- उप-राष्ट्रीय स्तर पर SDG के स्थानीयकरण को बढ़ावा देता है, जिससे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपनी विशिष्ट आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के अनुसार विकास रणनीतियों को अनुकूलित करने की अनुमति मिलती है।
आर्थिक विकास और समावेशिता
- SDG के साथ बजट को संरेखित करके, यह समावेशी और सतत आर्थिक विकास को बढ़ावा देने वाले क्षेत्रों में निवेश को निर्देशित करता है, जैसे कि गरीबी उन्मूलन, स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वच्छ ऊर्जा।
- यह संसाधनों के अधिक कुशल उपयोग को प्रोत्साहित करता है, जिससे विकास परियोजनाओं की प्रभावशीलता बढ़ती है और वित्तीय बर्बादी कम होती है।
- निजी क्षेत्र की भागीदारी (CSR, ESG निवेश) को विकास प्राथमिकताओं के साथ संरेखित करने के लिए एक ढाँचा प्रदान करता है, जिससे सतत विकास के लिए अतिरिक्त वित्तपोषण जुटाया जा सकता है।
अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और भारत की भूमिका
- UNDP जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ सहयोग भारत को वैश्विक SDG एजेंडा को आगे बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में मदद करता है।
- यह भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है कि वह सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए राष्ट्रीय और उप-राष्ट्रीय स्तर पर ठोस कदम उठा रहा है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय मंच पर उसकी साख बढ़ती है।
- अन्य विकासशील देशों के लिए एक मॉडल प्रस्तुत करता है कि कैसे SDG को राष्ट्रीय बजट प्रक्रियाओं में एकीकृत किया जा सकता है, जिससे दक्षिण-दक्षिण सहयोग को बढ़ावा मिलता है।
चुनौतियाँ
1. डेटा उपलब्धता और गुणवत्ता
- SDG के साथ बजट आवंटन को सटीक रूप से टैग करने और प्रगति को मापने के लिए विश्वसनीय और विस्तृत डेटा की कमी एक बड़ी चुनौती है।
- विभिन्न विभागों और स्तरों पर डेटा संग्रह पद्धतियों में एकरूपता का अभाव परिणामों की तुलना और समग्र मूल्यांकन को जटिल बनाता है।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
2. संस्थागत क्षमता और समन्वय
- राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SDG बजट टैगिंग को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए आवश्यक तकनीकी विशेषज्ञता और मानव संसाधन की कमी।
- विभिन्न सरकारी विभागों और मंत्रालयों के बीच समन्वय और सहयोग स्थापित करना, जो अक्सर अलग-अलग प्राथमिकताओं और कार्यप्रणालियों के साथ काम करते हैं, एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: शासन के महत्वपूर्ण पहलू
3. राजनीतिक इच्छाशक्ति और निरंतरता
- SDG बजट टैगिंग जैसी दीर्घकालिक पहल के लिए राजनीतिक नेतृत्व से निरंतर समर्थन और प्रतिबद्धता की आवश्यकता होती है, जो अक्सर चुनावी चक्रों के साथ बदल सकती है।
- बजट प्रक्रियाओं में संरचनात्मक परिवर्तनों को लागू करने के लिए नौकरशाही प्रतिरोध और मौजूदा प्रणालियों को बदलने की अनिच्छा का सामना करना पड़ सकता है।
यूपीएससी लिंक: शासन में नैतिकता
4. निगरानी और मूल्यांकन तंत्र
- SDG के लिए आवंटित धन के उपयोग और उनके वास्तविक प्रभाव की प्रभावी ढंग से निगरानी और मूल्यांकन के लिए मजबूत तंत्रों का अभाव।
- परिणाम-आधारित बजट से आउटपुट-आधारित बजट की ओर संक्रमण में चुनौतियाँ, जहाँ केवल खर्च की गई राशि के बजाय प्राप्त परिणामों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।
यूपीएससी लिंक: विकास प्रक्रियाएँ और विकास उद्योग
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| डेटा मानकीकरण | विभिन्न राज्यों और विभागों में SDG से संबंधित वित्तीय डेटा के संग्रह और रिपोर्टिंग में एकरूपता का अभाव। |
| क्षमता निर्माण | SDG बजट टैगिंग को प्रभावी ढंग से लागू करने और विश्लेषण करने के लिए सरकारी अधिकारियों में आवश्यक कौशल और विशेषज्ञता की कमी। |
| अंतर-विभागीय समन्वय | SDG के बहु-क्षेत्रीय स्वरूप के कारण विभिन्न सरकारी विभागों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करने में कठिनाई। |
| निजी क्षेत्र की भागीदारी का एकीकरण | CSR और ESG निवेश को राष्ट्रीय और उप-राष्ट्रीय SDG प्राथमिकताओं के साथ प्रभावी ढंग से संरेखित करने के लिए स्पष्ट तंत्रों का अभाव। |
| परिणाम-आधारित मूल्यांकन | केवल व्यय के बजाय SDG परिणामों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए मूल्यांकन प्रणालियों को अनुकूलित करने में चुनौतियाँ। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राज्य सहायता मिशन (State Support Mission – SSM)
आगे की राह
- SDG बजट टैगिंग के लिए एक राष्ट्रीय ढाँचा विकसित करना जो राज्यों को अपनी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार अनुकूलन करने की अनुमति दे, जबकि एकरूपता भी सुनिश्चित करे।
- सरकारी अधिकारियों, विशेषकर वित्त और योजना विभागों में, SDG बजट टैगिंग और परिणाम-आधारित मूल्यांकन पर व्यापक क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित करना।
- डेटा संग्रह, विश्लेषण और रिपोर्टिंग के लिए एक मजबूत और मानकीकृत सूचना प्रौद्योगिकी (IT) मंच विकसित करना, जो विभिन्न सरकारी स्तरों पर डेटा एकीकरण को सुगम बनाए।
- SDG के स्थानीयकरण को बढ़ावा देने के लिए पंचायती राज संस्थानों और शहरी स्थानीय निकायों को सशक्त बनाना, उन्हें बजट प्रक्रिया में शामिल करना।
- निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश और प्रोत्साहन तंत्र स्थापित करना, जिसमें CSR, ESG निवेश और सामाजिक स्टॉक एक्सचेंज शामिल हैं।
- SDG बजट टैगिंग की प्रगति और प्रभाव का नियमित रूप से मूल्यांकन करने के लिए एक स्वतंत्र निगरानी और मूल्यांकन तंत्र स्थापित करना।
- राज्यों के बीच सर्वोत्तम प्रथाओं और सफल मॉडलों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना, ताकि एक-दूसरे के अनुभवों से सीखा जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
सतत विकास लक्ष्य (SDGs) · बजट टैगिंग · राज्य सहायता मिशन (SSM) · नीति आयोग · संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) · उप-राष्ट्रीय स्तर पर SDG का स्थानीयकरण · राजकोषीय प्रतिबद्धताएँ · समग्र सरकार दृष्टिकोण · सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन · CSR और ESG
अवधारणा प्रवाह
नीति आयोग द्वारा SDG बजट कार्यशाला का आयोजन → SDG के साथ योजना और बजट प्रक्रियाओं का संरेखण → SDG बजट टैगिंग का संस्थागतकरण → वित्तीय प्रतिबद्धताओं को मापने योग्य विकास परिणामों में बदलना → सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में तेजी लाना → समावेशी और सतत विकास को बढ़ावा देना
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सतत विकास लक्ष्यों को वर्ष 2015 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा अपनाया गया था और इन्हें 2030 तक प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है।
2. SDG बजट टैगिंग का उद्देश्य वित्तीय प्रतिबद्धताओं को मापने योग्य विकास परिणामों में बदलना है।
3. नीति आयोग का राज्य सहायता मिशन (SSM) राज्यों को SDG के कार्यान्वयन में तकनीकी सहायता प्रदान करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। SDG को 2015 में अपनाया गया और 2030 तक प्राप्त करने का लक्ष्य है। कथन 2 सही है। SDG बजट टैगिंग का मुख्य उद्देश्य वित्तीय आवंटन को विशिष्ट, मापने योग्य विकास परिणामों से जोड़ना है। कथन 3 सही है। नीति आयोग का राज्य सहायता मिशन राज्यों को SDG कार्यान्वयन में तकनीकी और नीतिगत सहायता प्रदान करता है, जैसा कि इस कार्यशाला से स्पष्ट है।
Q2. नीति आयोग द्वारा आयोजित SDG बजट पर राष्ट्रीय कार्यशाला के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?
- यह कार्यशाला पश्चिम बंगाल सरकार और UNDP के सहयोग से आयोजित की गई थी।
- कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य SDG के साथ योजना और बजट प्रक्रियाओं के संरेखण को सुदृढ़ करना था।
- इसमें केवल कुछ चुनिंदा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
- कार्यशाला में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) और सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।
उत्तर: इसमें केवल कुछ चुनिंदा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। — कथन ‘इसमें केवल कुछ चुनिंदा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया’ सही नहीं है। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस कार्यशाला में 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिभागियों ने भाग लिया, जो एक व्यापक भागीदारी को दर्शाता है। अन्य सभी कथन सही हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने में बजट टैगिंग की भूमिका का परीक्षण कीजिए। भारत में उप-राष्ट्रीय स्तर पर SDG के स्थानीयकरण में नीति आयोग और UNDP जैसे संस्थानों का योगदान कितना महत्वपूर्ण है? (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय में SDG और बजट टैगिंग की संक्षिप्त परिभाषा। मुख्य भाग में, बजट टैगिंग के महत्व को समझाएं: वित्तीय प्रतिबद्धताओं को मापने योग्य परिणामों से जोड़ना, जवाबदेही बढ़ाना, संसाधनों का कुशल आवंटन, लक्षित समूहों तक पहुँच सुनिश्चित करना। नीति आयोग की भूमिका पर प्रकाश डालें: राज्य सहायता मिशन (SSM), राज्यों को तकनीकी और नीतिगत सहायता, क्षमता निर्माण, ‘समग्र सरकार’ दृष्टिकोण को बढ़ावा देना। UNDP की भूमिका: तकनीकी सहयोग, वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करना, निजी क्षेत्र की भागीदारी (CSR, ESG) को बढ़ावा देना, ISO मानकों का उपयोग। उप-राष्ट्रीय स्तर पर स्थानीयकरण के महत्व पर जोर दें, जिसमें राज्यों के अनुभवों का उल्लेख हो। निष्कर्ष में, SDG प्राप्ति के लिए बजट टैगिंग और संस्थागत सहयोग के महत्व को दोहराएं।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
West Bengal PCS (WBPSC / WBCS) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: नीति आयोग द्वारा पश्चिम बंगाल सरकार और UNDP के सहयोग से आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला का मुख्य विषय क्या था?
- राज्य सहायता मिशन के अंतर्गत SDG के बजट पर राष्ट्रीय कार्यशाला
- पश्चिम बंगाल में कृषि सुधार पर राष्ट्रीय सम्मेलन
- कोलकाता में स्मार्ट सिटी मिशन पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी
- पश्चिम बंगाल में महिला सशक्तिकरण पर राज्य स्तरीय कार्यक्रम
उत्तर: राज्य सहायता मिशन के अंतर्गत SDG के बजट पर राष्ट्रीय कार्यशाला — इस कार्यशाला का आयोजन राज्य सहायता मिशन के अंतर्गत SDG (सतत विकास लक्ष्यों) के बजट पर केंद्रित था, जिसका आयोजन नीति आयोग, पश्चिम बंगाल सरकार और UNDP द्वारा किया गया था।
Mains: पश्चिम बंगाल में SDG (सतत विकास लक्ष्यों) की प्राप्ति में नीति आयोग, राज्य सरकार और UNDP की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए। राज्य सहायता मिशन के अंतर्गत कोलकाता में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला के महत्व पर प्रकाश डालिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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