28 Jul पंचायती राज संस्थाओं के सशक्तिकरण पर नवीनतम रिपोर्ट: UPSC के लिए महत्वपूर्ण


मानचित्र व माइंड-मैप: Empowerment of Panchayati Raj Institutions
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान: ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और आधारभूत संरचना। | GS Paper II — संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघीय ढाँचे से संबंधित विषय एवं चुनौतियाँ, स्थानीय स्तर पर शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण तथा उसकी चुनौतियाँ। | GS Paper II — शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्त्वपूर्ण पक्ष, ई-गवर्नेंस-अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएँ, सीमाएँ और संभावनाएँ; नागरिक चार्टर, पारदर्शिता एवं जवाबदेही तथा संस्थागत एवं अन्य उपाय।
- Prelims: पंचायती राज संस्थाएँ (PRI), संविधान का भाग-9, अनुच्छेद 243(छ), ग्यारहवीं अनुसूची (29 विषय), राज्य सूची (सातवीं अनुसूची), 15वां वित्त आयोग, राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA), ईग्रामस्वराज, ऑडिटऑनलाइन
- Essay: भारत में जमीनी स्तर पर लोकतंत्र का सशक्तिकरण: चुनौतियाँ और आगे की राह।, ई-गवर्नेंस और वित्तीय समावेशन के माध्यम से ग्रामीण विकास को बढ़ावा देना।
त्वरित पुनरावृत्ति: पंचायती राज संस्थाओं का सशक्तिकरण वित्तीय संसाधनों, प्रशासनिक अधिकारों और डिजिटल उपकरणों के माध्यम से जमीनी स्तर पर लोकतंत्र और स्थानीय विकास को सुदृढ़ करने के लिए महत्वपूर्ण है, जैसा कि पंचायती राज मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट और विभिन्न सरकारी पहलों से परिलक्षित होता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
पंचायती राज मंत्रालय ने फरवरी 2025 में ‘राज्यों में पंचायतों को अंतरण की स्थिति – एक सांकेतिक साक्ष्य-आधारित रैंकिंग, 2024’ नामक रिपोर्ट जारी की है। यह रिपोर्ट पंचायती राज संस्थाओं (PRI) के वित्तीय और प्रशासनिक सशक्तिकरण की स्थिति का मूल्यांकन करती है, जिसमें अंतरण की प्रभावशीलता और जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करने में स्थानीय सरकारों की भूमिका का आकलन किया गया है। यह रिपोर्ट अंतरण सूचकांक प्रस्तुत करती है, जो संविधान के भाग-9 के अंतर्गत आने वाले सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को छः आयामों – रूपरेखा, कार्य, वित्त, पदाधिकारी, क्षमता में वृद्धि और जवाबदेही – के आधार पर समग्र स्कोर और रैंक प्रदान करती है।
पृष्ठभूमि
- पंचायती राज संस्थाएँ (PRI) भारत में ग्रामीण स्थानीय स्वशासन की प्रणाली हैं, जिन्हें 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा संवैधानिक दर्जा दिया गया था।
- संविधान का भाग-9 ‘पंचायतें’ शीर्षक से अनुच्छेद 243 से 243(ण) तक पंचायतों से संबंधित प्रावधानों को समाहित करता है।
- अनुच्छेद 243(छ) राज्य विधानमंडल को पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएँ तैयार करने तथा ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध विषयों सहित ऐसी योजनाओं को क्रियान्वित करने के लिए शक्तियों और उत्तरदायित्वों के हस्तांतरण हेतु कानून बनाने का अधिकार देता है।
- ग्यारहवीं अनुसूची में 29 विषय सूचीबद्ध हैं, जिन पर पंचायतों को शक्तियाँ और उत्तरदायित्व सौंपे जा सकते हैं।
- ‘पंचायत’ और ‘स्थानीय सरकार’ संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची का विषय हैं, जिसका अर्थ है कि राज्य सरकारें इनके संबंध में कानून बनाने के लिए अधिकृत हैं।
- 15वें वित्त आयोग (वित्त वर्ष 2020-21 से 2025-26) ने पंचायती राज संस्थाओं को कुल 2,97,555 करोड़ रुपये आवंटित किए, जिसमें से 2,82,632 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं।
पंचायती राज संस्थाओं का सशक्तिकरण
- पंचायती राज संस्थाओं का सशक्तिकरण उन्हें स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को प्रभावी ढंग से लागू करने, जनशक्ति की आवश्यकताओं को पूरा करने, वित्तीय संसाधनों का प्रबंधन करने और प्रशासनिक स्वायत्तता बढ़ाने में सक्षम बनाने पर केंद्रित है।
- मंत्रालय की रिपोर्ट ‘राज्यों में पंचायतों को अंतरण की स्थिति’ छह आयामों – रूपरेखा, कार्य, वित्त, पदाधिकारी, क्षमता में वृद्धि और जवाबदेही – के आधार पर राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों का मूल्यांकन करती है।
- राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) योजना का उद्देश्य पंचायतों की क्षमता निर्माण और उन्हें शासन के लिए सशक्त बनाना है। पिछले पांच वर्षों में इस योजना के तहत राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को कुल 3601.77 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।
- पंचायती राज मंत्रालय ने पंचायतों में पारदर्शिता, जवाबदेही और कुशल वित्तीय प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए एक एकीकृत डिजिटल शासन पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित किया है।
- ईग्रामस्वराज (eGramSwaraj) एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है जिसे वर्ष 2020-21 में शुरू किया गया था। यह नियोजन, बजटन, लेखांकन, निगरानी और ऑनलाइन भुगतान में एंड-टू-एंड सहायता प्रदान करता है।
- ईग्रामस्वराज का सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS), सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) और ऑडिटऑनलाइन (AuditOnline) के साथ एकीकरण निर्बाध निधि प्रवाह, पारदर्शी खरीद, भुगतान और लेखापरीक्षण को सक्षम बनाता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| अंतरण सूचकांक रिपोर्ट, 2024 | राज्यों में पंचायतों को शक्तियों के अंतरण की स्थिति का आकलन, जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करने में सहायक। |
| छह आयामों पर मूल्यांकन | रूपरेखा, कार्य, वित्त, पदाधिकारी, क्षमता में वृद्धि और जवाबदेही के आधार पर समग्र स्कोर और रैंक प्रदान करना। |
| 15वें वित्त आयोग की सिफारिशें | पंचायती राज संस्थाओं (PRI) के लिए वित्तीय संसाधनों का आवंटन, स्थानीय विकास हेतु महत्वपूर्ण। |
| संशोधित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) | पंचायतों की क्षमता निर्माण और सशक्तिकरण के लिए केंद्र प्रायोजित योजना। |
| ईग्रामस्वराज प्लेटफॉर्म | पंचायतों में नियोजन, बजटन, लेखांकन, निगरानी और ऑनलाइन भुगतान में पारदर्शिता और दक्षता। |
| PFMS, GeM और AuditOnline के साथ एकीकरण | निधि प्रवाह, खरीद, भुगतान और लेखापरीक्षण में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना। |
महत्व
शासन और लोकतंत्र
- पंचायती राज संस्थाओं का सशक्तिकरण जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करता है, जिससे शासन में नागरिकों की भागीदारी बढ़ती है।
- स्थानीय स्तर पर विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से समावेशी विकास सुनिश्चित होता है।
आर्थिक विकास
- पंचायतों को पर्याप्त वित्तीय संसाधन और प्रशासनिक अधिकार मिलने से वे स्थानीय आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय की योजनाओं को बेहतर ढंग से लागू कर पाती हैं।
- डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे ईग्रामस्वराज वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता लाकर संसाधनों के कुशल उपयोग को बढ़ावा देता है।
सामाजिक न्याय
- पंचायती राज संस्थाएं समाज के कमजोर वर्गों और हाशिए पर पड़े लोगों की आवश्यकताओं को पहचानकर उनके लिए लक्षित योजनाएं बना सकती हैं।
- स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने से सामाजिक असमानताओं को दूर करने और न्यायपूर्ण समाज के निर्माण में मदद मिलती है।
संघवाद
- पंचायतों का सशक्तिकरण भारत के संघीय ढांचे को मजबूत करता है, जहां राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों के बीच शक्तियों का प्रभावी वितरण होता है।
- यह रिपोर्ट राज्य सरकारों को पंचायतों को अंतरण की स्थिति का आकलन करने और सुधार के क्षेत्रों की पहचान करने में मदद करती है।
चुनौतियाँ
1. अपर्याप्त वित्तीय संसाधन
- कई ग्राम पंचायतों को स्थानीय विकास कार्यों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए पर्याप्त धन की कमी का सामना करना पड़ता है।
- राज्य वित्त आयोगों की सिफारिशों का समय पर और पूर्ण कार्यान्वयन अक्सर एक चुनौती बना रहता है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय राजव्यवस्था – स्थानीय स्वशासन, वित्तीय संघवाद
2. कर्मचारियों की कमी और सीमित प्रशासनिक अधिकार
- पंचायतों के पास अक्सर आवश्यक तकनीकी और प्रशासनिक कर्मचारियों की कमी होती है, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधा आती है।
- सीमित प्रशासनिक अधिकार पंचायतों को स्वतंत्र रूप से कार्य करने से रोकते हैं और राज्य सरकार पर निर्भरता बढ़ाते हैं।
यूपीएससी लिंक: भारतीय राजव्यवस्था – स्थानीय स्वशासन, शासन
3. क्षमता निर्माण का अभाव
- पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों और कर्मचारियों के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों की कमी है।
- तकनीकी ज्ञान और कौशल की कमी डिजिटल उपकरणों के प्रभावी उपयोग में बाधा डालती है।
यूपीएससी लिंक: शासन – क्षमता निर्माण, ई-शासन
4. जवाबदेही और पारदर्शिता
- कुछ पंचायतों में वित्तीय प्रबंधन और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी देखी जाती है।
- सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) और जनभागीदारी को मजबूत करने की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: शासन – पारदर्शिता, जवाबदेही
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| निधि का अपर्याप्त अंतरण | राज्यों द्वारा पंचायतों को 11वीं अनुसूची के विषयों के लिए पर्याप्त धन हस्तांतरित न करना। |
| कार्यात्मक स्वायत्तता का अभाव | पंचायतों को सौंपे गए 29 विषयों पर पूर्ण कार्यात्मक स्वतंत्रता और निर्णय लेने की शक्ति का अभाव। |
| मानव संसाधन की कमी | पंचायतों में पर्याप्त और प्रशिक्षित कर्मचारियों (जैसे सचिव, लेखाकार) की अनुपलब्धता। |
| प्रशासनिक नियंत्रण | राज्य सरकारों का पंचायतों पर अत्यधिक प्रशासनिक नियंत्रण, जिससे उनकी स्वायत्तता प्रभावित होती है। |
| डिजिटल साक्षरता का अभाव | पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों और कर्मचारियों में डिजिटल उपकरणों के उपयोग के लिए आवश्यक साक्षरता की कमी। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- ईग्रामस्वराज
- सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS)
- सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM)
- ऑडिटऑनलाइन
आगे की राह
- राज्यों द्वारा 11वीं अनुसूची में सूचीबद्ध 29 विषयों पर पंचायतों को शक्तियों, कार्यों और वित्त का पूर्ण अंतरण सुनिश्चित किया जाए।
- पंचायतों के लिए राज्य वित्त आयोगों की सिफारिशों का समयबद्ध और प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
- पंचायतों में पर्याप्त और प्रशिक्षित कर्मचारियों की नियुक्ति की जाए तथा उनके क्षमता निर्माण के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
- ईग्रामस्वराज जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का व्यापक उपयोग सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल साक्षरता और तकनीकी सहायता प्रदान की जाए।
- सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) को अनिवार्य और प्रभावी बनाया जाए ताकि पंचायतों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
- पंचायतों को स्थानीय स्तर पर योजना बनाने और लागू करने में अधिक स्वायत्तता प्रदान की जाए, जिससे वे अपनी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार कार्य कर सकें।
- पंचायतों के राजस्व आधार को मजबूत करने के लिए उन्हें स्थानीय कर लगाने और एकत्र करने के अधिक अधिकार दिए जाएं।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
पंचायती राज संस्थाएँ · स्थानीय स्वशासन · वित्तीय हस्तांतरण · अनुच्छेद 243(छ) · ग्यारहवीं अनुसूची · 15वां वित्त आयोग · राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान · ई-ग्रामस्वराज · डिजिटल शासन · जवाबदेही
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 243 (छ): पंचायतों की शक्तियां और उत्तरदायित्व
- अनुच्छेद 243 (झ): राज्य वित्त आयोग का गठन
- अनुच्छेद 243 (ट): राज्य निर्वाचन आयोग का गठन
- सातवीं अनुसूची: ‘स्थानीय सरकार’ राज्य सूची का विषय
- ग्यारहवीं अनुसूची: पंचायतों के 29 कार्यात्मक विषय
अवधारणा प्रवाह
पंचायतों को अपर्याप्त संसाधन और अधिकार → स्थानीय विकास कार्यों के क्रियान्वयन में कठिनाई → अंतरण सूचकांक रिपोर्ट द्वारा मूल्यांकन → 15वें वित्त आयोग और RGSA द्वारा वित्तीय सहायता → ईग्रामस्वराज जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग → पारदर्शिता, जवाबदेही और कुशल वित्तीय प्रबंधन में सुधार → पंचायती राज संस्थाओं का सशक्तिकरण
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. पंचायती राज संस्थाओं (PRI) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत ‘पंचायत’ राज्य सूची का विषय है।
2. अनुच्छेद 243(छ) राज्य विधानमंडल को पंचायतों को ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 29 विषयों पर शक्तियाँ और उत्तरदायित्व सौंपने का अधिकार देता है।
3. 15वें वित्त आयोग ने पंचायती राज संस्थाओं के लिए वित्त वर्ष 2020-21 से वित्त वर्ष 2025-26 तक कुल 2,97,555 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि ‘पंचायत’ और ‘स्थानीय सरकार’ सातवीं अनुसूची की राज्य सूची के अंतर्गत आते हैं। कथन 2 सही है क्योंकि अनुच्छेद 243(छ) राज्य विधानमंडल को ग्यारहवीं अनुसूची के 29 विषयों पर पंचायतों को शक्तियाँ और उत्तरदायित्व सौंपने का अधिकार देता है। कथन 3 भी सही है, 15वें वित्त आयोग ने इस अवधि के लिए 2,97,555 करोड़ रुपये का आवंटन किया था।
Q2. पंचायती राज मंत्रालय द्वारा शुरू की गई ‘ई-ग्रामस्वराज’ पहल का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
- ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देना।
- पंचायतों में एंड-टू-एंड नियोजन, बजटन, लेखांकन और ऑनलाइन भुगतान को सक्षम करना।
- ग्राम पंचायतों के लिए एक केंद्रीकृत शिकायत निवारण प्रणाली स्थापित करना।
- ग्रामीण युवाओं के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान करना।
उत्तर: पंचायतों में एंड-टू-एंड नियोजन, बजटन, लेखांकन और ऑनलाइन भुगतान को सक्षम करना। — ई-ग्रामस्वराज एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है जिसे पंचायतों में पारदर्शिता, जवाबदेही और कुशल वित्तीय प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया है, जो नियोजन, बजटन, लेखांकन, निगरानी और ऑनलाइन भुगतान में मदद करता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ पंचायती राज संस्थाओं (PRI) के सशक्तिकरण में वित्तीय हस्तांतरण और डिजिटल शासन की भूमिका का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। इस संदर्भ में, स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने में राज्यों की भूमिका और चुनौतियों पर भी प्रकाश डालिए। (250 शब्द)
रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत पंचायती राज संस्थाओं के महत्व और उनके सशक्तिकरण की आवश्यकता पर संक्षिप्त परिचय से करें। पहले भाग में, 15वें वित्त आयोग के तहत वित्तीय हस्तांतरण और राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) जैसी योजनाओं के माध्यम से पंचायतों को प्राप्त वित्तीय सहायता का उल्लेख करें। दूसरे भाग में, ई-ग्रामस्वराज और अन्य डिजिटल पहलों जैसे PFMS, GeM, और AuditOnline के माध्यम से पारदर्शिता, जवाबदेही और कुशल वित्तीय प्रबंधन को कैसे बढ़ावा दिया गया है, इस पर चर्चा करें। तीसरे भाग में, संविधान के अनुच्छेद 243(छ) और सातवीं अनुसूची के तहत राज्यों की भूमिका को स्पष्ट करें, जिसमें पंचायतों को शक्तियाँ और उत्तरदायित्व सौंपने तथा उनके अधिनियमों के माध्यम से उन्हें संचालित करने की बात शामिल है। अंत में, अपर्याप्त वित्तीय संसाधनों, कर्मचारियों की कमी और सीमित प्रशासनिक अधिकारों जैसी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए एक संतुलित निष्कर्ष प्रस्तुत करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
- झारखंड का 1.36 लाख करोड़ का बकाया खत्म! केंद्र बनाम राज्य अब सुप्रीम कोर्ट में - September 14, 2026
- Jharkhand’s ₹1.36 Lakh Crore Dues: Supreme Court Battle Over MMDRA Amendment - September 14, 2026
- गुजरात में स्थापित होंगे भारत के 12 सेमीकंडक्टर संयंत्रों में से 6, जानिए कैसे? - September 14, 2026

No Comments