05 Sep पीएम-एसईटीयू योजना की सफलता के लिए सार्वजनिक-निजी क्षेत्रों का सक्रिय सहयोग आवश्यक: एम.बी. पाटिल

✎ पीएम-सेतु योजना देश भर के ITI को आधुनिक बनाने और कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वाकांक्षी केंद्र सरकार की पहल है, जो सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से कार्यान्वित की जाएगी।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, विकास प्रक्रियाएँ और विकास उद्योग | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधन जुटाना, वृद्धि, विकास और रोजगार
- Prelims: पीएम-सेतु योजना, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI), कौशल विकास, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP), हब-एंड-स्पोक मॉडल, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR), विशेष प्रयोजन वाहन (SPV)
- Essay: भारत में कौशल विकास: चुनौतियाँ और अवसर, आर्थिक विकास में सार्वजनिक-निजी भागीदारी की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: पीएम-सेतु योजना देश भर के ITI को आधुनिक बनाने और कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वाकांक्षी केंद्र सरकार की पहल है, जो सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से कार्यान्वित की जाएगी।
यह खबर चर्चा में क्यों?
कर्नाटक के बड़े और मध्यम उद्योग मंत्री एम.बी. पाटिल ने पीएम-सेतु योजना (प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड ITIs) की सफलता के लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के उद्योगों के बीच सक्रिय सहयोग का आह्वान किया है। इस योजना का उद्देश्य राज्य के 48 ITI को उन्नत करना है, जिसके लिए उद्योग प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक आयोजित की गई थी ताकि योजना के प्रभावी कार्यान्वयन में उनकी भागीदारी की संभावनाओं पर चर्चा की जा सके।
पृष्ठभूमि
- भारत में कौशल विकास एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्राथमिकता है, जिसका उद्देश्य युवाओं को रोजगार योग्य बनाना और उद्योगों की बढ़ती मांगों को पूरा करना है।
- औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) देश में व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करने वाले प्रमुख संस्थान हैं, जो विभिन्न ट्रेडों में कौशल विकास कार्यक्रम चलाते हैं।
- तकनीकी प्रगति और उद्योग की बदलती आवश्यकताओं के कारण ITI के पाठ्यक्रम और बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाना आवश्यक हो गया है।
- सरकार ने कौशल विकास को बढ़ावा देने और ITI को उन्नत करने के लिए कई पहल की हैं, जिनमें सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) एक प्रमुख घटक है।
- उद्योगों को कुशल कार्यबल की आवश्यकता होती है, और वे अक्सर मौजूदा शैक्षिक और प्रशिक्षण संस्थानों के साथ मिलकर काम करने के इच्छुक होते हैं।
- कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) पहल कंपनियों को सामाजिक और विकासात्मक परियोजनाओं में योगदान करने का अवसर प्रदान करती हैं, जिसमें कौशल विकास भी शामिल है।
पीएम-सेतु योजना क्या है?
- पीएम-सेतु योजना (प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड ITIs) केंद्र सरकार की एक पहल है जिसका उद्देश्य देश भर के 1,000 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) को उन्नत, उद्योग-नेतृत्व वाले कौशल केंद्रों में आधुनिक बनाना है।
- यह योजना ₹60,000 करोड़ की लागत से शुरू की गई है, जो कौशल विकास और रोजगार क्षमता को बढ़ाने पर केंद्रित है।
- योजना ‘हब-एंड-स्पोक’ मॉडल पर आधारित है, जिसके तहत प्रत्येक ‘हब’ से चार ITI ‘स्पोक’ संस्थानों के रूप में जुड़े होते हैं।
- योजना के कार्यान्वयन के लिए एक विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) का गठन किया जाएगा, जिसमें उद्योग के छह प्रतिनिधि सदस्य के रूप में शामिल होंगे।
- कंपनियों के CSR प्रभाग, फाउंडेशन और अन्य ऐसी संस्थाओं को भी पीएम-सेतु योजना का हिस्सा बनने का अवसर मिलेगा।
- इस योजना में भाग लेने के लिए पात्र कंपनियों का वार्षिक कारोबार कम से कम ₹500 करोड़ और 1,000 से अधिक कर्मचारी होने चाहिए।
- इस सहयोग के माध्यम से, कंपनियों को अपनी आवश्यकताओं के आधार पर पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण कार्यक्रम और कौशल-विकास ढांचे को डिजाइन करने में मदद करने का अवसर मिलेगा।
- योजना के लिए केंद्र सरकार ₹112 करोड़, राज्य सरकार ₹98 करोड़ और औद्योगिक क्षेत्र ₹31 करोड़ का योगदान देगा।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| PM-SETU योजना (प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड ITIs) | देश भर में 1,000 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITIs) का आधुनिकीकरण कर उन्हें उन्नत, उद्योग-आधारित कौशल केंद्रों में बदलना। |
| सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) | योजना की सफलता के लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के बीच सक्रिय सहयोग पर बल। निजी क्षेत्र को पाठ्यक्रम डिजाइन, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और कौशल विकास ढांचे में शामिल करना। |
| हब-एंड-स्पोक मॉडल | प्रत्येक हब से चार ITI जुड़े होंगे। कर्नाटक में 12 हब और 48 ITI का लक्ष्य, जिससे कौशल विकास का विकेंद्रीकरण होगा। |
| विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) | योजना के कार्यान्वयन के लिए एक SPV का गठन, जिसमें छह उद्योग प्रतिनिधि सदस्य होंगे। यह उद्योगों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करेगा। |
| वित्तपोषण | केंद्र सरकार (112 करोड़ रुपये), राज्य सरकार (98 करोड़ रुपये) और औद्योगिक क्षेत्र (31 करोड़ रुपये) द्वारा संयुक्त वित्तपोषण, जो साझा स्वामित्व और प्रतिबद्धता को दर्शाता है। |
| उद्योगों द्वारा ITIs को गोद लेना | उद्योगों को ITIs को गोद लेने और उन्हें बेहतर बनाने के लिए प्रोत्साहित करना, जिससे उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण मिल सके। |
महत्व
आर्थिक संवृद्धि और रोजगार
- उन्नत ITIs के माध्यम से उद्योग-विशिष्ट कौशल प्रदान करके, यह योजना युवाओं की रोजगार क्षमता में वृद्धि करेगी, जिससे आर्थिक संवृद्धि को बढ़ावा मिलेगा।
- कुशल कार्यबल की उपलब्धता उद्योगों के लिए निवेश को आकर्षित करेगी और विनिर्माण तथा सेवा क्षेत्रों के विस्तार में सहायक होगी।
मानव पूंजी विकास
- यह योजना देश की मानव पूंजी को मजबूत करेगी, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर एक कुशल कार्यबल प्रदाता के रूप में उभर सकेगा।
- आधुनिक तकनीकों और उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण प्रदान करके, यह श्रमिकों को भविष्य के लिए तैयार करेगी।
औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता
- उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप कुशल श्रमिक उपलब्ध होने से भारतीय उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
- सार्वजनिक-निजी सहयोग से पाठ्यक्रम डिजाइन में उद्योगों की भागीदारी यह सुनिश्चित करेगी कि प्रशिक्षण प्रासंगिक और प्रभावी हो।
समावेशी विकास
- यह योजना ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के युवाओं को भी गुणवत्तापूर्ण कौशल प्रशिक्षण प्रदान करके समावेशी विकास में योगदान देगी।
- महिलाओं के लिए विशेष ITIs (जैसे कलबुर्गी में) लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देंगे।
चुनौतियाँ
1. निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित करना
- उद्योगों को ITIs को गोद लेने और SPV में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित करना एक चुनौती हो सकती है।
- छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) की भागीदारी सुनिश्चित करना, क्योंकि वे अक्सर बड़े कॉर्पोरेट की तुलना में कम संसाधन रखते हैं।
यूपीएससी लिंक: शासन, सार्वजनिक-निजी भागीदारी
2. प्रशिक्षण की गुणवत्ता और प्रासंगिकता
- यह सुनिश्चित करना कि ITIs में प्रदान किया जाने वाला प्रशिक्षण उद्योग की नवीनतम मांगों और प्रौद्योगिकियों के अनुरूप हो।
- प्रशिक्षकों के कौशल को नियमित रूप से अद्यतन करना और उन्हें आधुनिक औद्योगिक प्रथाओं से परिचित कराना।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन विकास, कौशल विकास
3. बुनियादी ढांचे का उन्नयन
- कई ITIs में पुराने उपकरण और अपर्याप्त बुनियादी ढांचा है, जिसे आधुनिक उद्योग-मानकों के अनुरूप अपग्रेड करने के लिए पर्याप्त निवेश की आवश्यकता होगी।
- दूरदराज के क्षेत्रों में ITIs तक पहुंच और उनके उन्नयन को सुनिश्चित करना।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढांचा, क्षेत्रीय असंतुलन
4. निगरानी और मूल्यांकन
- योजना के कार्यान्वयन और परिणामों की प्रभावी ढंग से निगरानी करना ताकि लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित की जा सके।
- प्रशिक्षण के बाद रोजगार दर और उद्योग में स्नातकों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए मजबूत तंत्र स्थापित करना।
यूपीएससी लिंक: शासन, नीति कार्यान्वयन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| निजी क्षेत्र की अनिच्छा | उद्योगों को ITIs में निवेश करने और पाठ्यक्रम विकास में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए पर्याप्त प्रोत्साहन की कमी। |
| तकनीकी अंतराल | ITIs के पाठ्यक्रम और उपकरणों का उद्योगों की वर्तमान तकनीकी आवश्यकताओं के साथ तालमेल न होना। |
| प्रशिक्षकों की क्षमता | आधुनिक औद्योगिक तकनीकों और शिक्षण पद्धतियों में प्रशिक्षित और अनुभवी प्रशिक्षकों की कमी। |
| क्षेत्रीय असमानताएं | शहरी और ग्रामीण ITIs के बीच बुनियादी ढांचे और प्रशिक्षण गुणवत्ता में अंतर, जिससे क्षेत्रीय कौशल अंतर बढ़ सकता है। |
| स्थिर वित्तपोषण | दीर्घकालिक और सतत वित्तपोषण सुनिश्चित करना, विशेषकर निजी क्षेत्र के योगदान को बनाए रखना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड ITIs (PM-SETU) योजना
आगे की राह
- निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए आकर्षक प्रोत्साहन पैकेज और कर लाभ प्रदान किए जाएं।
- उद्योगों के साथ नियमित संवाद और कार्यशालाएं आयोजित की जाएं ताकि उनकी आवश्यकताओं को समझा जा सके और पाठ्यक्रम को अद्यतन किया जा सके।
- प्रशिक्षकों के लिए नियमित रूप से ‘ट्रेन द ट्रेनर’ कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, जिसमें उन्हें नवीनतम औद्योगिक तकनीकों और शिक्षण पद्धतियों से अवगत कराया जाए।
- ITIs में आधुनिक प्रयोगशालाओं और कार्यशालाओं की स्थापना के लिए पर्याप्त बजटीय आवंटन सुनिश्चित किया जाए।
- एक मजबूत निगरानी और मूल्यांकन ढांचा विकसित किया जाए, जिसमें रोजगार दर, कौशल अधिग्रहण और उद्योग की प्रतिक्रिया जैसे प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों को ट्रैक किया जाए।
- छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) को भी PM-SETU योजना में शामिल करने के लिए विशेष प्रावधान किए जाएं, जैसे कि क्लस्टर-आधारित दृष्टिकोण।
- ITIs और स्थानीय उद्योगों के बीच मजबूत संबंध स्थापित करने के लिए ‘उद्योग-ITI संपर्क प्रकोष्ठ’ (Industry-ITI Liaison Cells) बनाए जाएं।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
PM-SETU योजना · औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) · सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) · कौशल विकास · रोजगारपरक शिक्षा · हब-एंड-स्पोक मॉडल · विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) · कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) · उद्योग-संस्थान सहयोग · आर्थिक संवृद्धि · मानव पूंजी निर्माण · युवा सशक्तिकरण
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 41: काम, शिक्षा और सार्वजनिक सहायता का अधिकार
- अनुच्छेद 46: अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य कमजोर वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों को बढ़ावा
अवधारणा प्रवाह
कौशल अंतराल की पहचान → PM-SETU योजना का शुभारंभ (ITIs का उन्नयन) → सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) और SPV का गठन → उद्योग-आधारित पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण → कुशल कार्यबल का निर्माण → रोजगार में वृद्धि और आर्थिक संवृद्धि
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. PM-SETU योजना का उद्देश्य देश भर के 1,000 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITIs) का आधुनिकीकरण करना है।
2. यह योजना सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर आधारित है।
3. PM-SETU योजना के तहत, उद्योगों को पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को डिजाइन करने में मदद करने का अवसर मिलेगा।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। PM-SETU (प्रधानमंत्री कौशल और रोजगारपरकता परिवर्तन उन्नयन ITIs के माध्यम से) योजना का लक्ष्य देश भर के 1,000 ITIs को उन्नत, उद्योग-नेतृत्व वाले कौशल केंद्रों में आधुनिक बनाना है। कथन 2 सही है। योजना की सफलता के लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के बीच सक्रिय सहयोग आवश्यक है, जो PPP मॉडल को दर्शाता है। कथन 3 सही है। इस सहयोग के माध्यम से, कंपनियों को अपनी आवश्यकताओं के आधार पर पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और कौशल-विकास ढांचे को डिजाइन करने में मदद करने का अवसर मिलेगा।
Q2. PM-SETU योजना के संदर्भ में, ‘हब-एंड-स्पोक मॉडल’ का क्या अर्थ है?
- यह एक ऐसा मॉडल है जहाँ सभी ITIs सीधे केंद्र सरकार द्वारा प्रबंधित होते हैं।
- यह एक ऐसा मॉडल है जहाँ एक केंद्रीय ITI (हब) कई छोटे ITIs (स्पोक) से जुड़ा होता है, जिससे संसाधनों और विशेषज्ञता का साझाकरण होता है।
- यह एक ऐसा मॉडल है जहाँ केवल निजी क्षेत्र ITIs के उन्नयन के लिए जिम्मेदार होता है।
- यह एक ऐसा मॉडल है जहाँ ITIs को केवल ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित किया जाता है।
उत्तर: यह एक ऐसा मॉडल है जहाँ एक केंद्रीय ITI (हब) कई छोटे ITIs (स्पोक) से जुड़ा होता है, जिससे संसाधनों और विशेषज्ञता का साझाकरण होता है। — हब-एंड-स्पोक मॉडल में, एक केंद्रीय ITI (हब) कई छोटे ITIs (स्पोक) से जुड़ा होता है। यह मॉडल संसाधनों, विशेषज्ञता और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने की सुविधा प्रदान करता है, जिससे कौशल विकास कार्यक्रमों की दक्षता और प्रभावशीलता बढ़ती है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ प्रधानमंत्री कौशल और रोजगारपरकता परिवर्तन उन्नयन ITIs (PM-SETU) योजना के उद्देश्यों पर चर्चा कीजिए। कौशल विकास में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल की भूमिका का भी विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: PM-SETU योजना के उद्देश्यों को विस्तार से समझाएं, जिसमें ITIs का आधुनिकीकरण, उद्योग-नेतृत्व वाले कौशल केंद्र बनाना और रोजगारपरकता बढ़ाना शामिल है। इसके बाद, कौशल विकास में PPP मॉडल के महत्व पर प्रकाश डालें। इसमें निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता, संसाधनों का उपयोग, पाठ्यक्रम डिजाइन में उद्योग की भागीदारी, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) का योगदान और विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) की भूमिका जैसे बिंदुओं को शामिल करें। चुनौतियों और सफल कार्यान्वयन के लिए आवश्यक उपायों का भी संक्षिप्त उल्लेख करें।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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