28 Jul फेम-II योजना: 912.50 करोड़ रुपये में ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापना, राज्यों को अलग आवंटन नहीं


मानचित्र व माइंड-मैप: FAME-II EV charging stations in West Bengal
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अर्थव्यवस्था | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी | GS Paper III — पर्यावरण
- Prelims: फेम-II योजना, पीएम ई-ड्राइव योजना, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन (EVCS), भारी उद्योग मंत्रालय, तेल विपणन कंपनियाँ (OMCs), भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL)
- Essay: भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा: चुनौतियाँ और अवसर, सतत परिवहन और ऊर्जा सुरक्षा में इलेक्ट्रिक वाहनों की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: फेम-II योजना भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने और चार्जिंग अवसंरचना के विकास को बढ़ावा देने के लिए भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित एक महत्वपूर्ण सरकारी पहल है, जिसके तहत सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों के लिए 912.50 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, भारी उद्योग मंत्रालय ने जानकारी दी है कि फेम-II (FAME-II) योजना के अंतर्गत देशभर में सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन (EVCS) स्थापित करने के लिए 912.50 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिसमें राज्यों के लिए कोई पृथक आवंटन नहीं किया गया है। पश्चिम बंगाल में फेम-II के अंतर्गत कुल 482 सार्वजनिक EVCS स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 463 संचालित हैं, जो देश में इलेक्ट्रिक वाहन अवसंरचना के विस्तार को दर्शाता है।
पृष्ठभूमि
- भारत सरकार देश में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को अपनाने को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं और नीतियों के माध्यम से सक्रिय रूप से कार्य कर रही है।
- इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने का मुख्य उद्देश्य जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना, वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाना है।
- चार्जिंग अवसंरचना की कमी को इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में एक प्रमुख बाधा माना जाता है, जिसे दूर करने के लिए सरकार विभिन्न योजनाओं के तहत सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना पर जोर दे रही है।
- फेम इंडिया योजना (Faster Adoption and Manufacturing of Electric Vehicles in India) को 2015 में लॉन्च किया गया था, जिसका उद्देश्य देश में इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों के विनिर्माण और त्वरित अपनाने को बढ़ावा देना है।
- फेम-II योजना, जो फेम इंडिया योजना का दूसरा चरण है, 1 अप्रैल 2019 से प्रभावी हुई और इसका मुख्य ध्यान सार्वजनिक और साझा परिवहन के विद्युतीकरण पर है।
- सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन (EVCS) की स्थापना एक अनुज्ञप्ति-रहित गतिविधि है, जिसका अर्थ है कि निजी संस्थाएँ भी भारत में कहीं भी EVCS स्थापित करने, संचालित करने और उनका रखरखाव करने के लिए स्वतंत्र हैं।
फेम-II योजना क्या है?
- फेम-II योजना (Faster Adoption and Manufacturing of Electric Vehicles in India Phase II) भारत सरकार द्वारा देश में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के त्वरित अंगीकरण और विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई एक प्रमुख योजना है।
- यह योजना 1 अप्रैल 2019 से प्रभावी हुई और इसका कुल परिव्यय 10,000 करोड़ रुपये है।
- योजना का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक और साझा परिवहन के विद्युतीकरण पर ध्यान केंद्रित करना है, जिसमें इलेक्ट्रिक बसों, तिपहिया वाहनों और दोपहिया वाहनों को प्रोत्साहन देना शामिल है।
- फेम-II योजना के तहत, इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर अग्रिम प्रोत्साहन (upfront incentive) प्रदान किया जाता है ताकि उनकी प्रारंभिक लागत को कम किया जा सके।
- यह योजना देश भर में इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग अवसंरचना के विकास पर भी विशेष जोर देती है, जिसमें सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
- इस योजना का कार्यान्वयन भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा किया जाता है।
- योजना का लक्ष्य देश में लगभग 7,000 ई-बसें, 5 लाख ई-तिपहिया वाहन, 55,000 ई-चार पहिया यात्री कारें और 10 लाख ई-दोपहिया वाहन खरीदने के लिए सहायता प्रदान करना है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| FAME-II योजना के तहत आवंटन | देशभर में सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशनों (ईवीपीसीएस) की स्थापना के लिए 912.50 करोड़ रुपये का आवंटन, जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में तेजी आएगी। |
| राज्यों के लिए पृथक आवंटन नहीं | यह दर्शाता है कि आवंटन राज्य-विशिष्ट न होकर राष्ट्रीय स्तर पर किया गया है, जिससे पूरे देश में चार्जिंग अवसंरचना का समान विकास सुनिश्चित हो सके। |
| PM ई-ड्राइव योजना | FAME-II के अतिरिक्त, PM ई-ड्राइव योजना के तहत 2,000 करोड़ रुपये का आवंटन भी ईवीपीसीएस के विकास के लिए किया गया है, जो इस क्षेत्र में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। |
| निजी संस्थाओं की भूमिका | विद्युत वाहन चार्जिंग स्टेशन (ईवीसीएस) की स्थापना एक अनुज्ञप्ति-रहित गतिविधि है, जिससे निजी क्षेत्र को इस अवसंरचना के विकास में भाग लेने के लिए प्रोत्साहन मिलता है। |
| तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) की भागीदारी | भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL), इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) जैसी प्रमुख ओएमसी इस योजना के कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को अपनाने से जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी, जिससे कच्चे तेल के आयात बिल में कमी आएगी और विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
- चार्जिंग अवसंरचना के विकास से नए व्यवसायों और रोजगार के अवसरों का सृजन होगा, विशेषकर विनिर्माण, स्थापना और रखरखाव क्षेत्रों में।
- यह योजना बैटरी प्रौद्योगिकी और संबंधित उद्योगों में निवेश को आकर्षित करेगी, जिससे ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को बढ़ावा मिलेगा।
पर्यावरणीय महत्व
- इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग से वायु प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी, जिससे शहरी क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता में सुधार होगा और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में मदद मिलेगी।
- यह भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक होगा, जिसके तहत 2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता का 50% तक विस्तार करना है।
सामाजिक महत्व
- सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों की उपलब्धता से उपभोक्ताओं का इलेक्ट्रिक वाहनों पर विश्वास बढ़ेगा, जिससे उनकी स्वीकार्यता और मांग में वृद्धि होगी।
- बेहतर वायु गुणवत्ता से सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार होगा, विशेषकर श्वसन संबंधी बीमारियों में कमी आएगी।
रणनीतिक महत्व
- यह भारत को वैश्विक इलेक्ट्रिक वाहन क्रांति में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करेगा, जिससे तकनीकी नवाचार और अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा मिलेगा।
- चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करेगा और परिवहन क्षेत्र को अधिक लचीला बनाएगा।
चुनौतियाँ
1. चार्जिंग अवसंरचना का असमान वितरण
- हालांकि राष्ट्रीय आवंटन है, लेकिन शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच चार्जिंग स्टेशनों की उपलब्धता में बड़ा अंतर हो सकता है।
- कुछ राज्यों या जिलों में चार्जिंग स्टेशनों की संख्या अपर्याप्त हो सकती है, जिससे EV अपनाने में बाधा आ सकती है।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढाँचा विकास, क्षेत्रीय असंतुलन
2. तकनीकी मानकीकरण और अंतर-संचालनीयता
- विभिन्न चार्जर प्रकारों (AC, DC, फास्ट चार्जर) और कनेक्टर मानकों के कारण उपभोक्ताओं को असुविधा हो सकती है।
- चार्जिंग स्टेशनों के बीच डेटा साझाकरण और भुगतान प्रणालियों में एकरूपता का अभाव एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, ऊर्जा अवसंरचना
3. ग्रिड पर दबाव और ऊर्जा स्रोत
- बड़ी संख्या में EV चार्जिंग स्टेशनों के संचालन से विद्युत ग्रिड पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है, विशेषकर पीक आवर्स में।
- यदि चार्जिंग के लिए बिजली का उत्पादन जीवाश्म ईंधन से होता है, तो EV के पर्यावरणीय लाभ कम हो सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: ऊर्जा सुरक्षा, विद्युत क्षेत्र सुधार
4. भूमि अधिग्रहण और नियामक बाधाएँ
- सार्वजनिक स्थानों पर चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना के लिए उपयुक्त भूमि की उपलब्धता एक चुनौती हो सकती है।
- स्थानीय निकायों से आवश्यक अनुमतियों और स्वीकृतियों को प्राप्त करने में समय लग सकता है।
यूपीएससी लिंक: शहरी नियोजन, नियामक ढाँचा
5. वित्तीय व्यवहार्यता और निवेश
- चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की प्रारंभिक लागत अधिक होती है, और जब तक EV की संख्या पर्याप्त न हो, तब तक उनकी वित्तीय व्यवहार्यता सुनिश्चित करना मुश्किल हो सकता है।
- निजी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए स्पष्ट और आकर्षक नीतिगत ढाँचे की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: सार्वजनिक-निजी भागीदारी, निवेश मॉडल
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| चार्जिंग अवसंरचना की कमी | EV अपनाने में सबसे बड़ी बाधा, ‘रेंज एंग्जायटी’ (Range Anxiety) को बढ़ावा देती है। |
| उच्च प्रारंभिक लागत | EV और चार्जिंग उपकरणों की उच्च लागत उपभोक्ताओं और निवेशकों दोनों के लिए एक चुनौती है। |
| तकनीकी एकरूपता का अभाव | विभिन्न चार्जिंग मानकों और प्रोटोकॉल के कारण उपयोगकर्ता अनुभव में जटिलता। |
| ग्रिड अवसंरचना पर दबाव | बढ़ती EV चार्जिंग मांग को पूरा करने के लिए मौजूदा विद्युत ग्रिड की क्षमता। |
| रखरखाव और विश्वसनीयता | सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों के नियमित रखरखाव और उनकी विश्वसनीयता सुनिश्चित करना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- FAME-II योजना (Faster Adoption and Manufacturing of Electric Vehicles in India Phase II)
- PM ई-ड्राइव योजना
आगे की राह
- चार्जिंग अवसंरचना के विकास में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल को और मजबूत करना, विशेषकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में।
- चार्जिंग स्टेशनों के लिए एक समान राष्ट्रीय मानक और प्रोटोकॉल विकसित करना ताकि अंतर-संचालनीयता सुनिश्चित हो सके।
- स्मार्ट ग्रिड प्रौद्योगिकियों को अपनाना और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से चार्जिंग स्टेशनों को बिजली प्रदान करने को प्रोत्साहित करना।
- उपभोक्ताओं को EV और चार्जिंग अवसंरचना के लाभों के बारे में शिक्षित करने के लिए जागरूकता अभियान चलाना।
- चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाना और एकल-खिड़की मंजूरी प्रणाली (Single-Window Clearance System) लागू करना।
- बैटरी स्वैपिंग (Battery Swapping) जैसी वैकल्पिक चार्जिंग तकनीकों को बढ़ावा देना, जिससे चार्जिंग समय कम हो सके।
- चार्जिंग स्टेशनों के लिए एक मजबूत निगरानी और शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करना ताकि उनकी विश्वसनीयता और उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
फेम-II योजना · विद्युत वाहन (EV) · चार्जिंग अवसंरचना · राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन · ऊर्जा संक्रमण · जलवायु परिवर्तन · आर्थिक संवृद्धि · आत्मनिर्भर भारत · सार्वजनिक निजी भागीदारी · सतत विकास
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन’}
अवधारणा प्रवाह
सरकार द्वारा EV को बढ़ावा देने हेतु नीतियाँ और योजनाएँ (जैसे FAME-II, PM ई-ड्राइव) → सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना के लिए वित्तीय आवंटन → चार्जिंग अवसंरचना का विस्तार और उपलब्धता में वृद्धि → उपभोक्ताओं द्वारा इलेक्ट्रिक वाहनों को अधिक अपनाना → जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता में कमी और वायु प्रदूषण नियंत्रण → आर्थिक संवृद्धि, रोजगार सृजन और पर्यावरणीय स्थिरता
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. फेम-II योजना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना केवल विद्युत दोपहिया वाहनों और तिपहिया वाहनों को प्रोत्साहन प्रदान करती है।
2. इस योजना के तहत सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना के लिए राज्यों को पृथक रूप से वित्तीय आवंटन किया जाता है।
3. इसका उद्देश्य देश में विद्युत वाहनों को तेजी से अपनाने और उनके विनिर्माण को बढ़ावा देना है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 3
- केवल 2 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 3 — कथन 1 गलत है क्योंकि फेम-II योजना विद्युत बसों, चार-पहिया वाहनों और हल्के वाणिज्यिक वाहनों सहित अन्य श्रेणियों को भी कवर करती है। कथन 2 गलत है क्योंकि फेम-II योजना के तहत सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों के लिए राज्यों को पृथक आवंटन नहीं किया जाता है, बल्कि यह देशभर में किया जाता है। कथन 3 सही है, क्योंकि योजना का मुख्य उद्देश्य देश में विद्युत वाहनों को तेजी से अपनाने और उनके विनिर्माण को प्रोत्साहन देना है।
Q2. भारत में विद्युत वाहन चार्जिंग स्टेशन (EVCS) की स्थापना के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा सही है?
- EVCS की स्थापना के लिए केंद्र सरकार से विशेष लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य है।
- केवल सरकारी एजेंसियां ही EVCS स्थापित कर सकती हैं।
- EVCS की स्थापना एक अनुज्ञप्ति-रहित गतिविधि है और कोई भी संस्था इसे स्थापित कर सकती है।
- EVCS की स्थापना केवल मेट्रो शहरों तक ही सीमित है।
उत्तर: EVCS की स्थापना एक अनुज्ञप्ति-रहित गतिविधि है और कोई भी संस्था इसे स्थापित कर सकती है। — विद्युत वाहन चार्जिंग स्टेशन (EVCS) की स्थापना एक अनुज्ञप्ति-रहित गतिविधि है। निजी संस्थाओं सहित कोई भी संस्था भारत में कहीं भी EVCS की स्थापना, संचालन एवं अनुरक्षण के लिए स्वतंत्र है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में विद्युत वाहनों (EV) को अपनाने में तेजी लाने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। इस संदर्भ में, चार्जिंग अवसंरचना के विकास में सार्वजनिक-निजी भागीदारी के महत्व पर प्रकाश डालिए। (250 शब्द)
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में, फेम-II योजना, पीएम ई-ड्राइव योजना जैसे सरकारी कार्यक्रमों और नीतियों का उल्लेख करें, जो EV को बढ़ावा देने के लिए लागू की गई हैं। इन पहलों के सकारात्मक प्रभावों और चुनौतियों, जैसे कि सीमित चार्जिंग अवसंरचना और उच्च प्रारंभिक लागत, का विश्लेषण करें। दूसरे भाग में, चार्जिंग अवसंरचना के विकास में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) की आवश्यकता और महत्व पर चर्चा करें। बताएं कि कैसे PPP निवेश आकर्षित कर सकती है, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा दे सकती है और देशव्यापी चार्जिंग नेटवर्क के त्वरित विस्तार में मदद कर सकती है, जिससे EV को अपनाने में तेजी आएगी।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

No Comments