बिहार में नया औद्योगिक गढ़: गया आईएमसी से 4,200 करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद

बिहार में नया औद्योगिक गढ़: गया आईएमसी से 4,200 करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद

बिहार में नया औद्योगिक गढ़: गया आईएमसी से 4,200 करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद

बिहार में औद्योगिक विकास प्रक्रियापरियोजना मंजूरी28 अगस्त 2024कंपनी गठन6 जनवरी 2025समझौता ज्ञापन12 MoUनिवेश प्रस्ताव4,200 करोड़ रुपयेरोजगार सृजन16,095 नौकरियां
बिहार में औद्योगिक विकास प्रक्रिया

✎ बीआईएमसीजीएल NICDC, BIADA और NICDIT के बीच बराबर हिस्सेदारी वाला संयुक्त उद्यम है, जो राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम के अंतर्गत अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक गलियारे में गया के डोभी ब्लॉक में IMC का कार्यान्वयन करता है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — राजव्यवस्था और शासन (संघ-राज्य संबंध, संविधान की सातवीं अनुसूची, भूमि अधिग्रहण से जुड़े विधिक प्रावधान)  |  GS Paper II — शासन (सार्वजनिक-निजी भागीदारी, विशेष प्रयोजन वाहन, पारदर्शिता और ई-शासन)  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था (औद्योगिक नीति, विनिर्माण, आधारिक संरचना, रोजगार सृजन, क्षेत्रीय संतुलन)
  • Prelims: राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम (NICDC) — कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत पंजीकृत, राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम (NICDP), अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक गलियारा (AKIC), विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) और इसकी संरचना, बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (BIADA), राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास एवं कार्यान्वयन ट्रस्ट (NICDIT), भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013, संविधान की सूची I (संघ सूची) की प्रविष्टि 52 और सूची II (राज्य सूची) की प्रविष्टि 24
  • Essay: औद्योगिक गलियारे क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने का कारगर माध्यम कहाँ तक हैं?, सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से औद्योगिक भूमि आवंटन: अवसर और चुनौतियाँ

त्वरित पुनरावृत्ति: बीआईएमसीजीएल NICDC, BIADA और NICDIT के बीच बराबर हिस्सेदारी वाला संयुक्त उद्यम है, जो राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम के अंतर्गत अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक गलियारे में गया के डोभी ब्लॉक में IMC का कार्यान्वयन करता है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम (NICDC) ने बोधगया में बिहार इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग सिटी गया लिमिटेड (BIMCGL) की औपचारिक शुरुआत की है। इस अवसर पर गया स्थित इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग सिटी (IMC) में लगभग 300 एकड़ औद्योगिक भूमि के लिए 12 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए, जिनमें लगभग 4,200 करोड़ रुपये के निवेश और 16,095 रोजगार अवसरों का प्रस्ताव है। इसके अतिरिक्त कार्यक्रम में बिहार बिजनेस कनेक्ट 2027 का शुरुआती आयोजन हुआ, तथा कंपनी की वेबसाइट और एकीकृत भूमि आवंटन पोर्टल का शुभारंभ किया गया। इन कदमों का उद्देश्य औद्योगिक भूमि आवंटन की प्रक्रिया को पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाना तथा निवेशकों की सुविधा बढ़ाना बताया गया है। यह घटनाक्रम इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि यह राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा कार्यक्रम के अंतर्गत एक क्षेत्रीय परियोजना के क्रियान्वयन के चरण को दर्शाता है।

पृष्ठभूमि

  • राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम (NICDP) के अंतर्गत देश में औद्योगिक गलियारों और उनमें औद्योगिक शहरों (Industrial Smart Cities) के विकास की योजना बनाई गई है, जिसका उद्देश्य विनिर्माण क्षमता बढ़ाना और आधुनिक आधारिक संरचना उपलब्ध कराना है।
  • अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक गलियारा (AKIC) इसी कार्यक्रम का एक प्रमुख गलियारा है, और गया स्थित बीआईएमसीजीएल इसी का हिस्सा है। भारत सरकार ने गया जिले के डोभी ब्लॉक में लगभग 1,670 एकड़ क्षेत्र में फैली इस परियोजना को 28 अगस्त 2024 को मंजूरी दी थी।
  • परियोजना की कुल लागत लगभग 1,339 करोड़ रुपये बताई गई है, जिसमें भूमि की लागत भी शामिल है। इससे लगभग 16,500 करोड़ रुपये के निवेश और करीब 1.10 लाख लोगों के रोजगार की संभावना व्यक्त की गई है।
  • बीआईएमसीजीएल का गठन 6 जनवरी 2025 को हुआ और यह NICDC, बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (BIADA) तथा राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास एवं कार्यान्वयन ट्रस्ट (NICDIT) के बीच संयुक्त उद्यम है, जिसमें तीनों की बराबर हिस्सेदारी है।
  • भारतीय संविधान में भूमि और उद्योग दोनों विषय राज्य सूची से जुड़े हैं, जबकि कुछ उद्योगों पर संघ सूची की प्रविष्टि 52 के तहत संसद का नियंत्रण है। इसलिए ऐसी परियोजनाओं में केंद्र और राज्य के सहयोग की आवश्यकता होती है।

NICDC और बीआईएमसीजीएल क्या हैं?

  • राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम (NICDC) कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत पंजीकृत एक कंपनी है, जो राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम (NICDP) के क्रियान्वयन की नोडल संस्था के रूप में कार्य करती है।
  • औद्योगिक गलियारा एक ऐसा विस्तृत क्षेत्र होता है जिसमें औद्योगिक क्षेत्र, परिवहन मार्ग (सड़क, रेल, माल ढुलाई गलियारे), बिजली, जल और डिजिटल आधारिक संरचना को एक साथ विकसित किया जाता है।
  • विशेष प्रयोजन वाहन (Special Purpose Vehicle – SPV) एक ऐसी इकाई है जो किसी एक निर्दिष्ट परियोजना के लिए बनाई जाती है। बीआईएमसीजीएल इसी प्रकार का SPV है, जो गया में IMC के कार्यान्वयन के लिए उत्तरदायी है।
  • संयुक्त उद्यम में केंद्र-समर्थित और राज्य-आधारित संस्थाओं की भागीदारी से योजना, भूमि आवंटन और निवेश आकर्षण में समन्वय बढ़ाने का प्रयास किया जाता है।
  • भूमि आवंटन के लिए एकीकृत पोर्टल का उद्देश्य आवेदन, उपलब्धता और आवंटन की स्थिति को सार्वजनिक रूप से देखने योग्य बनाकर पारदर्शिता बढ़ाना है।
  • भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों में भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के प्रावधान प्रासंगिक होते हैं, क्योंकि इसमें प्रभावित परिवारों के हितों की रक्षा का ढांचा दिया गया है।
  • समझौता ज्ञापन (MoU) केवल इरादे की घोषणा होते हैं; वास्तविक निवेश और रोजगार तभी संभव होते हैं जब परियोजना भूमि पर उतरे और निवेशक उत्पादन शुरू करें।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
संस्था बिहार इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग सिटी गया लिमिटेड (Bihar Integrated Manufacturing City Gaya Limited – BIMCGL) एक विशेष प्रयोजन वाहन (Special Purpose Vehicle – SPV) है, जो गया में औद्योगिक नगर (IMC) के क्रियान्वयन के लिए उत्तरदायी है।
स्वामित्व ढाँचा यह कंपनी बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (BIADA), राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास एवं कार्यान्वयन ट्रस्ट (NICDIT) और एक संयुक्त उद्यम के रूप में है, जिसमें दोनों की बराबर हिस्सेदारी है। 6 जनवरी 2025 को इसका गठन हुआ।
परियोजना का भौगोलिक विस्तार गया जिले के डोभी ब्लॉक में लगभग 1,670 एकड़ भूमि पर यह औद्योगिक नगर प्रस्तावित है। भारत सरकार ने इसे 28 अगस्त 2024 को मंजूरी दी थी।
निवेश और रोजगार का लक्ष्य परियोजना की कुल लागत लगभग 1,339 करोड़ रुपये है। इससे लगभग 16,500 करोड़ रुपये के निवेश और लगभग 1.10 लाख लोगों के लिए रोजगार की संभावना जताई गई है।
भूमि आवंटन सुधार एकीकृत भूमि आवंटन पोर्टल और आधिकारिक वेबसाइट के शुभारंभ से निवेशकों के लिए आवेदन, पारदर्शिता और भूमि आवंटन की प्रक्रिया को सरल बनाने का लक्ष्य है।
समझौता ज्ञापनों का स्वरूप लगभग 300 एकड़ भूमि के लिए 12 समझौता ज्ञापनों (Memorandum of Understanding – MoU) पर हस्ताक्षर हुए, जिनमें 4,200 करोड़ रुपये के निवेश और 16,095 रोजगार का प्रस्ताव है। पहले के चरण में 2,586 एकड़ के लिए 31,750 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव थे।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • औद्योगिक नगर से विनिर्माण क्षमता का विस्तार होता है और राज्य की औद्योगिक आधार को मजबूत बनाने में सहायता मिलती है।
  • प्रस्तावित निवेश खाद्य प्रसंस्करण, ऑटोमोबाइल पुर्जे, औषधीय उत्पाद और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों से जुड़ा है, जिससे विविध औद्योगिक संरचना बनने की संभावना है।
  • आपूर्ति शृंखला में कृषि-आधारित उद्योगों का एकीकरण होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आर्थिक संवृद्धि में योगदान की संभावना बनती है।

रोजगार और सामाजिक महत्व

  • प्रस्तावित रोजगार अवसरों से कृषि पर निर्भर श्रमिकों के लिए गैर-कृषि रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।
  • औद्योगिक केंद्र के आसपास सेवा क्षेत्र, परिवहन और स्थानीय व्यापार का विस्तार होने से स्थानीय आय में वृद्धि की संभावना है।

संघीय और प्रशासनिक महत्व

  • केंद्र और राज्य की संयुक्त भागीदारी से यह मॉडल सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) की भावना को दर्शाता है।
  • विशेष प्रयोजन वाहन के माध्यम से परियोजना को अलग प्रशासनिक इकाई के रूप में चलाने से निर्णय प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्थित होती है।

व्यापक नीतिगत संदर्भ

  • यह परियोजना राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम (National Industrial Corridor Development Programme – NICDP) के तहत अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक गलियारा (Amritsar-Kolkata Industrial Corridor – AKIC) का हिस्सा है।
  • पूर्वी भारत में औद्योगिक विस्तार और क्षेत्रीय संतुलन के लक्ष्य से इसका सीधा संबंध है।

चुनौतियाँ

1. भूमि अधिग्रहण और भूमि उपलब्धता

  • औद्योगिक भूमि के लिए भूमि अधिग्रहण, स्वामित्व के दस्तावेज़ों और विवादों का समाधान समय-साध्य प्रक्रिया है।
  • समझौता ज्ञापन के बाद वास्तविक भूमि आवंटन और कब्जा सौंपने में देरी से परियोजना की गति प्रभावित हो सकती है।

2. समझौता ज्ञापनों से वास्तविक निवेश में रूपांतरण

  • समझौता ज्ञापन में घोषित निवेश और वास्तविक पूँजी प्रवाह में अंतर स्वाभाविक रूप से रहता है।
  • निवेशक की परियोजना-तैयारी, वित्तपोषण और अनुमति-प्रक्रिया पूरी होने पर ही घोषित निवेश वास्तविक होता है।

3. पर्यावरणीय स्वीकृति और संसाधन प्रबंधन

  • विनिर्माण इकाइयों के लिए जल आपूर्ति, अपशिष्ट प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण की व्यवस्था आवश्यक है।
  • औद्योगिक विस्तार को पर्यावरणीय स्वीकृति और सतत विकास के मानकों के अनुरूप रखना चुनौतीपूर्ण है।

4. कौशल विकास और मानव संसाधन

  • प्रस्तावित रोजगार के लिए स्थानीय युवाओं को उद्योग-अनुकूल कौशल प्रदान करना आवश्यक है।
  • कौशल अंतराल रहने पर बाहरी श्रमिकों पर निर्भरता बढ़ सकती है, जिससे स्थानीय लाभ सीमित होगा।

5. अवसंरचना और संस्थागत समन्वय

  • सड़क, बिजली, जल और लॉजिस्टिक्स की सुविधाओं का समय पर विकास औद्योगिक नगर की सफलता के लिए आवश्यक है।
  • केंद्र, राज्य और विशेष प्रयोजन वाहन के बीच स्पष्ट भूमिका-विभाजन और निर्णय-प्रक्रिया से परियोजना में विलंब कम हो सकता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
भूमि आवंटन में विलंब भूमि का कब्जा और स्वामित्व स्पष्ट न होने पर निवेशक प्रतिबद्धता कमजोर हो सकती है।
घोषित और वास्तविक निवेश में अंतर समझौता ज्ञापन में दर्शाया निवेश वास्तविक पूँजी में बदलने की गारंटी नहीं देता।
पर्यावरणीय अनुमतियाँ जल, अपशिष्ट और प्रदूषण से जुड़े मानकों का पालन परियोजना की लागत और समय बढ़ा सकता है।
कुशल श्रमबल की उपलब्धता कौशल अंतराल के कारण रोजगार का लाभ स्थानीय युवाओं तक सीमित रह सकता है।
अवसंरचना की तैयारी सड़क, बिजली और जल आपूर्ति के बिना औद्योगिक इकाइयों का संचालन कठिन होगा।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम (National Industrial Corridor Development Programme – NICDP)

आगे की राह

  • समझौता ज्ञापनों को चरणबद्ध भूमि आवंटन, वित्तीय समापन और अनुमति-समय-सीमा से जोड़कर वास्तविक निवेश की निगरानी की जाए।
  • एकीकृत भूमि आवंटन पोर्टल पर भूमि की स्थिति, स्वामित्व और उपलब्धता की जानकारी नियमित रूप से सार्वजनिक की जाए।
  • पर्यावरणीय स्वीकृति की प्रक्रिया पहले से तैयार कर, जल और अपशिष्ट प्रबंधन की सामूहिक सुविधाएँ विकसित की जाएँ।
  • स्थानीय युवाओं के लिए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों और निवेशकों के सहयोग से व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएँ।
  • सड़क, बिजली और लॉजिस्टिक्स की अवसंरचना को परियोजना के समानांतर विकसित कर समयबद्ध लक्ष्य तय किए जाएँ।
  • केंद्र, राज्य, BIADA और NICDIT के बीच भूमिकाओं का स्पष्ट विभाजन और नियमित समन्वय तंत्र बनाया जाए।
  • सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को आपूर्ति शृंखला में जोड़कर औद्योगिक नगर का स्थानीय आर्थिक प्रभाव बढ़ाया जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

औद्योगिक गलियारा · विनिर्माण क्षेत्र · निवेश प्रोत्साहन · रोजगार सृजन · बुनियादी ढाँचा विकास · विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) · राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम · अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक गलियारा · क्षेत्रीय विकास · ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 246 (Article 246) – उद्योग और भूमि विषय राज्य सूची में, जबकि कुछ उद्योग संघ नियंत्रण में

अवधारणा प्रवाह

राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम के तहत अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक गलियारा की परिकल्पना  →  भारत सरकार द्वारा 28 अगस्त 2024 को गया के डोभी ब्लॉक में औद्योगिक नगर परियोजना की मंजूरी  →  6 जनवरी 2025 को बीआईएमसीजीएल का गठन, जिसमें बीआईएडीए और एनआईसीडीआईटी की बराबर हिस्सेदारी  →  एकीकृत भूमि आवंटन पोर्टल और आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से भूमि आवंटन प्रक्रिया का सरलीकरण  →  12 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर से लगभग 300 एकड़ भूमि पर 4,200 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव  →  प्रस्तावित निवेश से उद्योग-स्थापना, रोजगार सृजन और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों का विस्तार

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एनआईसीडीसी) भारत में औद्योगिक गलियारों के विकास के लिए एक नोडल एजेंसी है।
2. बिहार इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग सिटी गया (आईएमसी गया) अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक गलियारे (AKIC) का हिस्सा है।
3. बिहार इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग सिटी गया लिमिटेड (बीआईएमसीजीएल) बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (बीआईएडीए) और राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास एवं कार्यान्वयन ट्रस्ट (एनआईसीडीआईटी) के बीच एक संयुक्त उद्यम है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1: एनआईसीडीसी भारत में औद्योगिक गलियारों के विकास और कार्यान्वयन के लिए प्रमुख संस्था है। यह कथन सही है।
कथन 2: आईएमसी गया को अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक गलियारे (AKIC) के हिस्से के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह कथन सही है।
कथन 3: बीआईएमसीजीएल, बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (बीआईएडीए) और राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास एवं कार्यान्वयन ट्रस्ट (एनआईसीडीआईटी) के बीच एक संयुक्त उद्यम है, जिसमें दोनों की बराबर हिस्सेदारी है। यह कथन सही है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट प्रोग्राम (एनआईसीडीपी) का/के प्राथमिक उद्देश्य है/हैं?
1. विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देना।
2. वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार करना।
3. क्षेत्रीय असंतुलन को कम करना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।

  1. केवल 1
  2. केवल 1 और 2
  3. केवल 2 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — एनआईसीडीपी का उद्देश्य विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे का निर्माण करके विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देना, भारतीय उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार करना और संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देना है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में औद्योगिक गलियारों के विकास में नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एनआईसीडीसी) की भूमिका का परीक्षण कीजिए। बिहार इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग सिटी गया (आईएमसी गया) परियोजना के संदर्भ में इसके महत्व पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: औद्योगिक गलियारों की अवधारणा और भारत के आर्थिक विकास में उनकी भूमिका का संक्षिप्त परिचय।
2. एनआईसीडीसी की भूमिका: एनआईसीडीसी के गठन, उद्देश्यों और प्रमुख कार्यों पर प्रकाश डालना। इसमें योजना, वित्तपोषण, समन्वय और कार्यान्वयन शामिल हैं।
3. प्रमुख विशेषताएं: एनआईसीडीसी द्वारा विकसित किए जा रहे विभिन्न औद्योगिक गलियारों (जैसे AKIC, DMIC आदि) का उल्लेख।
4. आईएमसी गया परियोजना का संदर्भ: बिहार इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग सिटी गया (आईएमसी गया) परियोजना का विस्तृत विवरण, जिसमें इसके उद्देश्य (निवेश आकर्षित करना, रोजगार सृजन), प्रमुख हितधारक (बीआईएडीए, एनआईसीडीआईटी), और अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक गलियारे के हिस्से के रूप में इसकी स्थिति शामिल है।
5. महत्व: आईएमसी गया परियोजना के माध्यम से बिहार के औद्योगिक विकास, क्षेत्रीय संतुलन, ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस में सुधार और केंद्र-राज्य सहयोग पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों का विश्लेषण।
6. चुनौतियाँ और आगे की राह: भूमि अधिग्रहण, बुनियादी ढाँचा विकास और निवेश आकर्षित करने में संभावित चुनौतियों का संक्षिप्त उल्लेख तथा उनके समाधान के लिए सुझाव।
7. निष्कर्ष: भारत के समग्र आर्थिक विकास और विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने में औद्योगिक गलियारों के महत्व को दोहराते हुए एक संतुलित निष्कर्ष।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)

Bihar PCS (BPSC) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: एनआईसीडीसी (राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम) द्वारा हाल ही में बिहार में शुरू की गई ‘बिहार इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग सिटी गया लिमिटेड’ का मुख्य उद्देश्य क्या है?

  1. बिहार में निर्यातोन्मुखी औद्योगिक पार्कों की स्थापना करना
  2. गया में एकीकृत विनिर्माण केंद्र स्थापित कर राज्य में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना
  3. बिहार में कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित करना
  4. राज्य में सूचना प्रौद्योगिकी पार्कों का विकास करना

उत्तर: गया में एकीकृत विनिर्माण केंद्र स्थापित कर राज्य में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना — इस परियोजना का उद्देश्य गया में एकीकृत विनिर्माण केंद्र स्थापित कर बिहार में औद्योगिक विकास को गति प्रदान करना है।

Mains: बिहार में ‘बिहार इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग सिटी गया लिमिटेड’ की स्थापना से राज्य के औद्योगिक विकास पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का विश्लेषण कीजिए। साथ ही, बिहार में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा उठाए जाने वाले अन्य आवश्यक कदमों पर प्रकाश डालिए। (अनुमानित शब्द सीमा: 250 शब्द) [‘परियोजना का उद्देश्य एवं गया में विनिर्माण केंद्र स्थापित करने का महत्व’, ‘राज्य में रोजगार सृजन एवं आर्थिक विकास पर प्रभाव’, ‘औद्योगिक अवसंरचना विकास में सुधार’, ‘बिहार में औद्योगिक विकास हेतु अन्य आवश्यक कदम (निवेश आकर्षित करना, कौशल विकास, नीति सुधार आदि)’]


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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