बीआरआईसीएस के 20 साल: वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव की कहानी

The BRICS at 20 — diagram

बीआरआईसीएस के 20 साल: वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव की कहानी

बीआरआईसीएस के 20 साल: वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव की कहानी — बीआरआईसीएस: 20 वर्षों का सफर
आरेख: बीआरआईसीएस: 20 वर्षों का सफर

✎ BRICS वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के उद्भव का प्रतीक एक महत्वपूर्ण आर्थिक और राजनीतिक समूह है, जो 'वैश्विक दक्षिण' के लिए एक मजबूत आवाज के रूप में कार्य करता है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था
  • Prelims: BRICS, न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB), बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था, वैश्विक दक्षिण, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, वैश्विक शासन
  • Essay: बदलती वैश्विक व्यवस्था में बहुपक्षीय संस्थानों की भूमिका, वैश्विक दक्षिण का उदय और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों पर इसके निहितार्थ

त्वरित पुनरावृत्ति: BRICS वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के उद्भव का प्रतीक एक महत्वपूर्ण आर्थिक और राजनीतिक समूह है, जो ‘वैश्विक दक्षिण’ के लिए एक मजबूत आवाज के रूप में कार्य करता है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

BRICS समूह ने हाल ही में अपनी स्थापना के 20 वर्ष पूरे किए हैं। इस अवधि में, यह समूह वैश्विक शक्ति संतुलन में एक महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में उभरा है, जो पश्चिमी-नेतृत्व वाली संस्थाओं से हटकर एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की ओर बदलाव का प्रतीक है। BRICS ने अपनी सदस्यता का विस्तार किया है और अब यह वैश्विक आबादी का लगभग आधा और वैश्विक GDP (क्रय शक्ति समता के आधार पर) का लगभग 40% प्रतिनिधित्व करता है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और आर्थिक साझेदारी के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बन गया है।

पृष्ठभूमि

  • BRIC शब्द 2001 में गोल्डमैन सैक्स के जिम ओ’नील द्वारा ब्राजील, रूस, भारत और चीन जैसी तेजी से बढ़ती उभरती अर्थव्यवस्थाओं को संदर्भित करने के लिए गढ़ा गया था।
  • इन चार देशों के विदेश मंत्रियों की पहली बैठक 2006 में हुई, जिसने समूह के औपचारिक गठन की नींव रखी।
  • पहला BRIC शिखर सम्मेलन जून 2009 में आयोजित किया गया था, जिसने इसे एक औपचारिक राजनीतिक और आर्थिक गठबंधन का रूप दिया।
  • 2011 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद यह समूह BRICS बन गया।
  • 2024-25 में मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात को पूर्ण सदस्यों के रूप में शामिल किया गया, जिससे इसकी सदस्यता बढ़कर 11 देश हो गई।
  • BRICS के दस ‘साझेदार देश’ भी हैं, जिनमें बेलारूस, बोलीविया, कजाकिस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम शामिल हैं, जो शिखर सम्मेलनों में भाग ले सकते हैं।

BRICS क्या है?

  • BRICS ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका सहित 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक अंतर-सरकारी संगठन है।
  • यह वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक परिदृश्य में ‘वैश्विक दक्षिण’ (Global South) के हितों का प्रतिनिधित्व करने और उसे बढ़ावा देने के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है।
  • इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग, व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना है, साथ ही वैश्विक शासन संरचनाओं में सुधार की वकालत करना है।
  • BRICS ने न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) की स्थापना की है, जो उभरती अर्थव्यवस्थाओं द्वारा स्थापित पहला बहुपक्षीय विकास बैंक है, जिसका उद्देश्य सदस्य देशों और अन्य विकासशील देशों में बुनियादी ढांचा और सतत विकास परियोजनाओं को वित्तपोषित करना है।
  • यह समूह वैश्विक चुनौतियों जैसे जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद और खाद्य सुरक्षा पर भी सहयोग करता है, और एक अधिक समावेशी और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के निर्माण की दिशा में काम करता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
विस्तार और समावेशन BRICS अब 11 देशों का समूह है, जिसमें मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे नए सदस्य शामिल हैं। यह वैश्विक दक्षिण (Global South) के व्यापक प्रतिनिधित्व को दर्शाता है।
वैश्विक आर्थिक प्रभाव क्रय शक्ति समता (Purchasing Power Parity) के संदर्भ में, BRICS वैश्विक GDP का लगभग 40% और दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है, जो G7 से कहीं अधिक है।
संस्थागत विकास न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) की स्थापना BRICS के संस्थागत विकास का एक प्रमुख उदाहरण है, जो उभरती अर्थव्यवस्थाओं द्वारा स्थापित पहला बहुपक्षीय विकास बैंक है।
बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था BRICS पश्चिमी-नेतृत्व वाली वैश्विक संस्थाओं को चुनौती देकर एक अधिक बहुध्रुवीय (Multipolar) विश्व व्यवस्था के उद्भव का प्रतीक है।
रणनीतिक स्वायत्तता यह समूह गैर-पश्चिमी देशों के लिए आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के विरुद्ध एक बचाव और रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) को आगे बढ़ाने का एक मंच प्रदान करता है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • BRICS देश वैश्विक आर्थिक उत्पादन और व्यापार में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं, विशेषकर क्रय शक्ति समता के आधार पर।
  • न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) सदस्य देशों और अन्य विकासशील देशों में बुनियादी ढांचा और सतत विकास परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण प्रदान करता है, जिससे वैश्विक वित्तीय वास्तुकला में विविधता आती है।

भू-राजनीतिक महत्व

  • BRICS वैश्विक शक्ति संतुलन के पुनर्संतुलन और एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के उद्भव का प्रतिनिधित्व करता है, जहाँ पश्चिमी प्रभुत्व कम हो रहा है।
  • यह समूह वैश्विक दक्षिण के लिए एक शक्तिशाली आवाज के रूप में कार्य करता है, जो अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उनकी चिंताओं और हितों को व्यक्त करता है।

सामरिक महत्व

  • BRICS सदस्य देशों को बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने और आर्थिक सहयोग को व्यापक बनाने के लिए एक मंच प्रदान करता है।
  • यह विभिन्न देशों को पश्चिमी-केंद्रित वैश्विक शासन संरचनाओं के विकल्प के रूप में शामिल होने के लिए आकर्षित करता है, जिसमें NATO सदस्य तुर्की और अमेरिकी नौसैनिक बलों के केंद्र बहरीन जैसे देश भी शामिल हैं।

चुनौतियाँ

1. आंतरिक विविधता और सामंजस्य

  • BRICS के सदस्य देशों के बीच आर्थिक विकास के स्तर, राजनीतिक प्रणालियों और भू-राजनीतिक हितों में महत्वपूर्ण अंतर हैं।
  • यह विविधता समूह के भीतर आम सहमति बनाने और एकजुट निर्णय लेने में चुनौतियां पैदा कर सकती है।

2. वैश्विक वित्तीय संस्थानों में सुधार

  • BRICS पश्चिमी-नेतृत्व वाली संस्थाओं जैसे IMF और विश्व बैंक में सुधार की वकालत करता रहा है, लेकिन इन सुधारों को प्राप्त करना एक जटिल प्रक्रिया है।
  • NDB जैसे वैकल्पिक संस्थानों का विकास महत्वपूर्ण है, लेकिन वे अभी भी मौजूदा वैश्विक वित्तीय प्रणाली के पैमाने और प्रभाव से मेल नहीं खा सकते हैं।

3. व्यापार और निवेश बाधाएं

  • सदस्य देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के बावजूद, अभी भी टैरिफ, गैर-टैरिफ बाधाएं और नियामक अंतर जैसी चुनौतियां मौजूद हैं।
  • इन बाधाओं को दूर करना समूह के भीतर आर्थिक एकीकरण को गहरा करने के लिए महत्वपूर्ण है।

4. भू-राजनीतिक तनाव और गुटबाजी

  • वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य में बढ़ते तनाव, विशेषकर कुछ BRICS सदस्यों के बीच, समूह के भीतर सहयोग और एकजुटता को प्रभावित कर सकते हैं।
  • विभिन्न गुटों में शामिल होने वाले सदस्य देशों की प्रवृत्ति समूह की समग्र प्रभावशीलता को कमजोर कर सकती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
सदस्य देशों की विविधता विभिन्न आर्थिक स्तरों, राजनीतिक प्रणालियों और भू-राजनीतिक हितों के कारण आम सहमति बनाना कठिन।
वैश्विक शासन में सुधार IMF और विश्व बैंक जैसे पश्चिमी-नेतृत्व वाले संस्थानों में सुधार की धीमी गति।
आंतरिक व्यापार बाधाएं सदस्य देशों के बीच टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाएं आर्थिक एकीकरण को बाधित करती हैं।
भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता कुछ BRICS सदस्यों के बीच बढ़ते तनाव समूह के भीतर सहयोग को प्रभावित कर सकते हैं।
पश्चिमी प्रभुत्व का प्रतिरोध वैश्विक व्यवस्था में पश्चिमी देशों का निरंतर प्रभाव BRICS के एजेंडे को चुनौती दे सकता है।

आगे की राह

  • BRICS को अपने संस्थागत ढांचे, विशेषकर न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) को मजबूत करना चाहिए, ताकि विकासशील देशों के लिए एक विश्वसनीय वित्तीय विकल्प प्रदान किया जा सके।
  • सदस्य देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए मौजूदा बाधाओं को दूर करने हेतु ठोस कदम उठाने चाहिए, जैसे कि व्यापार समझौतों को सुदृढ़ करना।
  • वैश्विक दक्षिण के हितों का प्रतिनिधित्व करने और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए अन्य क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ सहयोग बढ़ाना चाहिए।
  • जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा और गरीबी उन्मूलन जैसी वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने के लिए सदस्य देशों के बीच सहयोग को गहरा करना चाहिए।
  • BRICS को अपने विस्तार की प्रक्रिया को सावधानीपूर्वक प्रबंधित करना चाहिए ताकि नए सदस्यों को शामिल करते हुए समूह की एकजुटता और प्रभावशीलता बनी रहे।
  • सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों से लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा देना चाहिए ताकि आपसी समझ और विश्वास को मजबूत किया जा सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

BRICS · बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था · वैश्विक शासन · न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) · वैश्विक दक्षिण · आर्थिक सहयोग · अंतर्राष्ट्रीय संबंध · भू-राजनीतिक पुनर्संतुलन · उभरती अर्थव्यवस्थाएँ · रणनीतिक स्वायत्तता · वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) · क्रय शक्ति समता (PPP)

अवधारणा प्रवाह

BRICS का गठन और विस्तार  →  वैश्विक आर्थिक और जनसंख्या हिस्सेदारी में वृद्धि  →  पश्चिमी प्रभुत्व वाली वैश्विक व्यवस्था को चुनौती  →  बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का उद्भव  →  रणनीतिक स्वायत्तता और आर्थिक सहयोग का विस्तार

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. BRICS की अवधारणा मूल रूप से गोल्डमैन सैक्स के जिम ओ’नील द्वारा 2001 में चार तेजी से बढ़ती उभरती अर्थव्यवस्थाओं को दर्शाने के लिए गढ़ी गई थी।
2. न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) BRICS देशों द्वारा स्थापित पहला बहुपक्षीय विकास बैंक है, जहाँ संस्थापक BRICS सदस्यों के पास समान शेयर और मतदान अधिकार हैं।
3. BRICS में वर्तमान में G7 देशों की तुलना में वैश्विक जनसंख्या का अधिक हिस्सा और वैश्विक GDP (क्रय शक्ति समता के संदर्भ में) का अधिक हिस्सा है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। जिम ओ’नील ने 2001 में BRIC (ब्राजील, रूस, भारत, चीन) शब्द गढ़ा था। कथन 2 सही है। NDB एक बहुपक्षीय विकास बैंक है जिसमें BRICS के संस्थापक सदस्यों के पास समान शेयर और मतदान अधिकार हैं, जो इसे अन्य संस्थानों से अलग करता है। कथन 3 सही है। BRICS में अब वैश्विक जनसंख्या का लगभग आधा और वैश्विक GDP का 40% (PPP के संदर्भ में) शामिल है, जबकि G7 का हिस्सा कम है।

Q2. BRICS समूह के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?

  1. दक्षिण अफ्रीका 2011 में BRIC में शामिल होकर BRICS बना।
  2. BRICS का पहला शिखर सम्मेलन जून 2009 में आयोजित किया गया था।
  3. मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात 2024-25 में BRICS के पूर्ण सदस्य बने।
  4. BRICS के ‘साझेदार देशों’ में बेलारूस, बोलीविया, कजाकिस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम शामिल हैं।

उत्तर: मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात 2024-25 में BRICS के पूर्ण सदस्य बने। — मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात 2024-25 में BRICS के पूर्ण सदस्य बने, लेकिन इंडोनेशिया अभी तक पूर्ण सदस्य नहीं बना है, उसने केवल इसमें रुचि व्यक्त की है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ BRICS समूह की स्थापना के 20 वर्षों में, इसने वैश्विक शासन और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग में पश्चिमी-नेतृत्व वाली संस्थाओं को किस हद तक चुनौती दी है? वैश्विक दक्षिण के लिए इसके महत्व का भी विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** BRICS की संक्षिप्त पृष्ठभूमि (स्थापना, विस्तार, सदस्य देश) और वैश्विक भू-राजनीति में इसके उदय का उल्लेख।
2. **पश्चिमी-नेतृत्व वाली संस्थाओं को चुनौती:**
* **आर्थिक प्रभाव:** वैश्विक GDP (PPP) और जनसंख्या में BRICS का बढ़ता हिस्सा, G7 से तुलना।
* **बहुध्रुवीयता को बढ़ावा:** वैश्विक शक्ति के पुनर्संतुलन में भूमिका, एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के उद्भव का प्रतीक।
* **संस्थागत नवाचार:** न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) का उदाहरण, जो उभरती अर्थव्यवस्थाओं द्वारा स्थापित पहला बहुपक्षीय विकास बैंक है, जहाँ समान मतदान अधिकार हैं। IMF और विश्व बैंक में पश्चिमी प्रभुत्व के विपरीत।
* **वैकल्पिक मंच:** वैश्विक शासन के लिए एक वैकल्पिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करना, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्थापित पश्चिमी-केंद्रित संस्थानों पर निर्भरता को कम करना।
3. **वैश्विक दक्षिण के लिए महत्व:**
* **रणनीतिक स्वायत्तता:** गैर-पश्चिमी देशों के लिए आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के खिलाफ एक बचाव के रूप में कार्य करना।
* **आर्थिक सहयोग:** व्यापार, निवेश और विकास के लिए एक मंच प्रदान करना।
* **प्रतिनिधित्व:** वैश्विक दक्षिण की आवाज को सशक्त बनाना और उनके हितों को अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर उठाना।
* **जुड़ने की उत्सुकता:** कई देशों द्वारा सदस्यता के लिए आवेदन या रुचि व्यक्त करना, जो इसकी बढ़ती स्वीकार्यता और प्रभाव को दर्शाता है।
* **साझेदार देशों का ढाँचा:** सहयोग के नेटवर्क का विस्तार करना और सामंजस्य बनाए रखते हुए वैश्विक दक्षिण का प्रतिनिधित्व करने की क्षमता को मजबूत करना।
4. **निष्कर्ष:** BRICS की उपलब्धियों और चुनौतियों का संक्षिप्त सारांश, वैश्विक व्यवस्था के भविष्य पर इसके संभावित प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए।

स्रोत: orissapost.com


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