06 Aug ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की 13वीं बैठक: ओडिशा में प्रमुख मुद्दों पर चर्चा
✎ ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की बैठक ने सदस्य देशों के बीच प्रारंभिक बचपन देखभाल और शिक्षा, कौशल विकास और योग्यताओं की आपसी मान्यता जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध | GS Paper II — सामाजिक न्याय (शिक्षा)
- Prelims: ब्रिक्स (BRICS), ब्रिक्स शिक्षा ट्रैक, प्रारंभिक बचपन देखभाल और शिक्षा (ECCE), कौशल विकास, आपसी योग्यताओं की मान्यता, शैक्षणिक नेतृत्व
- Essay: वैश्विक सहयोग और भारत की भूमिका, 21वीं सदी में शिक्षा का महत्व और चुनौतियाँ
त्वरित पुनरावृत्ति: ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की बैठक ने सदस्य देशों के बीच प्रारंभिक बचपन देखभाल और शिक्षा, कौशल विकास और योग्यताओं की आपसी मान्यता जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, ओडिशा के भुवनेश्वर में 13वीं ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की बैठक आयोजित की गई, जिसमें भारत के केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने भाग लिया। इस बैठक में प्रारंभिक बचपन देखभाल और शिक्षा (ECCE), कौशल विकास, अनुसंधान और नवाचार, योग्यताओं की आपसी मान्यता और शैक्षणिक नेतृत्व जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया गया। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता (BRICS Chairship) के तहत, इस बैठक ने सदस्य देशों के बीच शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया।
पृष्ठभूमि
- इस बैठक से पहले, 5 अगस्त को भुवनेश्वर में तीसरी ब्रिक्स वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक भी आयोजित की गई थी, जिसमें ब्रिक्स शिक्षा ट्रैक के तहत सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।
- चर्चाओं का मुख्य केंद्र ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की घोषणा के मसौदे पर था, जिसका उद्देश्य सदस्य देशों की सामूहिक आकांक्षाओं और प्राथमिकताओं को दर्शाना था।
- बैठक में समावेशी, लचीली और भविष्य के लिए तैयार शिक्षा प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए सदस्य देशों की साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की गई।
- ब्रिक्स के पारंपरिक और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों पर मार्गदर्शक सिद्धांतों पर भी चर्चा की गई, जो शिक्षा में सांस्कृतिक विविधता और विरासत के महत्व को रेखांकित करता है।
ब्रिक्स (BRICS) क्या है?
- ब्रिक्स पांच प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है: ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका।
- यह मूल रूप से 2001 में ‘ब्रिक’ के रूप में गढ़ा गया था, जिसमें दक्षिण अफ्रीका 2010 में शामिल हुआ, जिससे यह ‘ब्रिक्स’ बन गया।
- यह समूह वैश्विक आबादी का 40 प्रतिशत से अधिक और वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 25 प्रतिशत प्रतिनिधित्व करता है।
- ब्रिक्स का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देना है, साथ ही वैश्विक शासन संरचनाओं में सुधार करना है।
- ब्रिक्स शिखर सम्मेलन प्रतिवर्ष आयोजित किए जाते हैं, जिसमें सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष या सरकार के प्रमुख भाग लेते हैं।
- ब्रिक्स न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) की स्थापना 2014 में ब्रिक्स और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं में बुनियादी ढांचा और सतत विकास परियोजनाओं के लिए संसाधन जुटाने के उद्देश्य से की गई थी।
- ब्रिक्स शिक्षा ट्रैक शिक्षा के क्षेत्र में सदस्य देशों के बीच सहयोग, ज्ञान के आदान-प्रदान और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने के लिए एक मंच प्रदान करता है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ECCE) | बच्चों के समग्र विकास की नींव रखने और भविष्य की शिक्षा के लिए तैयार करने हेतु महत्वपूर्ण। |
| कौशल विकास (Skill Development) | युवाओं को रोजगार योग्य बनाने और अर्थव्यवस्था की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आवश्यक। |
| अनुसंधान और नवाचार (Research and Innovation) | ज्ञान अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने, नई प्रौद्योगिकियों को विकसित करने और वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने में सहायक। |
| योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता (Mutual Recognition of Qualifications) | BRICS देशों के बीच छात्रों और पेशेवरों की आवाजाही को सुगम बनाने, सहयोग और आदान-प्रदान को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण। |
| शैक्षणिक नेतृत्व (Academic Leadership) | शिक्षा प्रणालियों में सुधार लाने, गुणवत्ता सुनिश्चित करने और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी नेतृत्व का विकास। |
| पारंपरिक और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियाँ (Traditional and Indigenous Knowledge Systems) | सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और शिक्षा में विविधता को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण। |
महत्व
शैक्षणिक सहयोग और आदान-प्रदान
- BRICS देशों के बीच शिक्षा के क्षेत्र में सर्वोत्तम प्रथाओं, नीतियों और अनुभवों का आदान-प्रदान होता है, जिससे सभी सदस्य देशों को लाभ मिलता है।
- यह बैठक सदस्य देशों को शिक्षा के क्षेत्र में साझा चुनौतियों का समाधान खोजने और सामूहिक रूप से नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एक मंच प्रदान करती है।
मानव संसाधन विकास
- प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा, कौशल विकास तथा अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित करके, BRICS देश अपने मानव संसाधनों की गुणवत्ता में सुधार कर सकते हैं, जिससे आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) और सामाजिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
- योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता से BRICS देशों के बीच छात्रों और पेशेवरों की गतिशीलता बढ़ेगी, जिससे प्रतिभा पूल का विस्तार होगा और ज्ञान का प्रसार होगा।
अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव और बहुपक्षवाद
- BRICS शिक्षा मंत्रियों की बैठक वैश्विक शिक्षा एजेंडे को प्रभावित करने और बहुपक्षीय मंचों पर सदस्य देशों की सामूहिक आवाज़ को मजबूत करने का अवसर प्रदान करती है।
- यह भारत की BRICS अध्यक्षता 2026 की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो शिक्षा में सहयोग को मजबूत करता है।
चुनौतियाँ
1. शिक्षा में असमानताएँ
- BRICS देशों में शिक्षा तक पहुँच और गुणवत्ता में महत्वपूर्ण असमानताएँ मौजूद हैं, विशेषकर ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में।
- डिजिटल डिवाइड (Digital Divide) एक बड़ी चुनौती है, जो ऑनलाइन शिक्षा और डिजिटल कौशल तक पहुँच को प्रभावित करता है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: शिक्षा, मानव संसाधन
2. कौशल अंतराल
- उद्योग की बदलती मांगों और शिक्षा प्रणालियों द्वारा प्रदान किए जाने वाले कौशल के बीच एक बड़ा अंतराल है, जिससे बेरोजगारी बढ़ रही है।
- तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण (TVET) को मुख्यधारा की शिक्षा के साथ एकीकृत करने की चुनौती।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: कौशल विकास, रोजगार
3. अनुसंधान और नवाचार का वित्तपोषण
- अनुसंधान और नवाचार के लिए पर्याप्त वित्तपोषण की कमी, विशेष रूप से बुनियादी अनुसंधान के लिए, एक बड़ी बाधा है।
- उद्योग और अकादमिक जगत के बीच सहयोग को बढ़ावा देने में चुनौतियाँ।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: नवाचार, अनुसंधान
4. योग्यताओं की मान्यता में बाधाएँ
- विभिन्न BRICS देशों की शिक्षा प्रणालियों और गुणवत्ता आश्वासन तंत्रों में अंतर के कारण योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता में चुनौतियाँ आती हैं।
- मानकीकरण और तुल्यता स्थापित करने की आवश्यकता।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध: बहुपक्षीय समूह, शिक्षा सहयोग
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुँच | ग्रामीण-शहरी असमानताएँ, डिजिटल साक्षरता की कमी। |
| रोजगारोन्मुखी कौशल का अभाव | उद्योग की आवश्यकताओं और पाठ्यक्रम के बीच बेमेल। |
| अनुसंधान और विकास में निवेश | पर्याप्त वित्तपोषण और उद्योग-अकादमिक सहयोग की कमी। |
| योग्यताओं की अंतर्राष्ट्रीय मान्यता | विभिन्न शिक्षा प्रणालियों के बीच सामंजस्य का अभाव। |
| शिक्षक प्रशिक्षण और विकास | शिक्षकों के कौशल और क्षमता निर्माण की आवश्यकता। |
आगे की राह
- BRICS देशों को प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ECCE) में निवेश बढ़ाना चाहिए और समावेशी पहुँच सुनिश्चित करनी चाहिए।
- कौशल विकास कार्यक्रमों को उद्योग की बदलती मांगों के अनुरूप अद्यतन किया जाना चाहिए और तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
- अनुसंधान और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए और क्रॉस-कंट्री अनुसंधान सहयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
- योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता के लिए एक मानकीकृत ढाँचा विकसित किया जाना चाहिए, जिससे छात्रों और पेशेवरों की गतिशीलता आसान हो सके।
- शैक्षणिक नेतृत्व विकास कार्यक्रमों को मजबूत किया जाना चाहिए ताकि शिक्षा प्रणालियों में प्रभावी परिवर्तन और नवाचार को बढ़ावा मिल सके।
- पारंपरिक और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों को शिक्षा के पाठ्यक्रम में एकीकृत करने के तरीकों का पता लगाया जाना चाहिए, जिससे सांस्कृतिक विविधता और विरासत का सम्मान हो सके।
- डिजिटल शिक्षा के बुनियादी ढाँचे को मजबूत किया जाना चाहिए और डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा दिया जाना चाहिए ताकि शिक्षा में डिजिटल डिवाइड को कम किया जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
BRICS शिक्षा मंत्री बैठक · प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ECCE) · कौशल विकास · अनुसंधान और नवाचार · योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता · शैक्षणिक नेतृत्व · पारंपरिक और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियाँ · बहुपक्षीय सहयोग · सतत विकास लक्ष्य 4 (SDG 4) · वैश्विक शिक्षा एजेंडा
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21A’, ‘note’: ‘शिक्षा का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 45’, ‘note’: ‘प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल का प्रावधान’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 46’, ‘note’: ‘कमजोर वर्गों की शिक्षा को बढ़ावा’}
अवधारणा प्रवाह
BRICS शिक्षा मंत्रियों की बैठक → प्रमुख प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श (ECCE, कौशल विकास, अनुसंधान) → BRICS शिक्षा ट्रैक के तहत सहयोग को मजबूत करना → शिक्षा मंत्रियों की घोषणा का मसौदा तैयार करना → समावेशी, लचीली और भविष्य-तैयार शिक्षा प्रणालियों को बढ़ावा देना
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. BRICS शिक्षा मंत्रियों की बैठक के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 13वीं BRICS शिक्षा मंत्रियों की बैठक ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित की गई।
2. इस बैठक में प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ECCE) तथा कौशल विकास जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर चर्चा की गई।
3. BRICS समूह में वर्तमान में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 और 2 सही हैं। 13वीं BRICS शिक्षा मंत्रियों की बैठक ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित की गई, जिसमें ECCE और कौशल विकास जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर चर्चा हुई। कथन 3 गलत है क्योंकि BRICS में वर्तमान में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अतिरिक्त इंडोनेशिया, ईरान, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात भी शामिल हैं (समाचार के अनुसार, भारत की अध्यक्षता में हुई वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में इन देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया)।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से BRICS शिक्षा ट्रैक के तहत सहयोग के प्रमुख प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में शामिल है/हैं?
1. तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण (TVET)
2. योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता
3. पारंपरिक और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियाँ
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — दिए गए सभी तीनों क्षेत्र (तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण, योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता, और पारंपरिक और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियाँ) BRICS शिक्षा ट्रैक के तहत सहयोग के प्रमुख प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में शामिल हैं, जैसा कि समाचार में बताया गया है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ BRICS शिक्षा मंत्रियों की बैठक में जिन प्रमुख प्राथमिकताओं पर चर्चा की गई, उनका विश्लेषण कीजिए। वैश्विक शिक्षा एजेंडा और सतत विकास लक्ष्य 4 (SDG 4) को प्राप्त करने में BRICS देशों के बीच सहयोग किस प्रकार महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: BRICS शिक्षा मंत्रियों की बैठक का संक्षिप्त परिचय और उसके महत्व का उल्लेख।
2. बैठक की प्रमुख प्राथमिकताएँ: समाचार में उल्लिखित प्रमुख प्राथमिकताओं का विस्तृत विश्लेषण करें, जैसे:
* प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ECCE)
* कौशल विकास (Skill Development) और तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण (TVET)
* अनुसंधान और नवाचार (Research and Innovation)
* योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता (Mutual Recognition of Qualifications)
* शैक्षणिक नेतृत्व (Academic Leadership)
* पारंपरिक और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियाँ (Traditional and Indigenous Knowledge Systems)
3. वैश्विक शिक्षा एजेंडा और SDG 4 में BRICS सहयोग का महत्व:
* SDG 4 (गुणवत्तापूर्ण शिक्षा) के विभिन्न लक्ष्यों (जैसे समावेशी और समान शिक्षा, आजीवन सीखने के अवसर) को प्राप्त करने में BRICS देशों के सामूहिक प्रयासों की भूमिका।
* ज्ञान और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान से सदस्य देशों की शिक्षा प्रणालियों का सुदृढ़ीकरण।
* साझा चुनौतियों (जैसे डिजिटल विभाजन, शिक्षा में असमानता) का समाधान करने में सहयोग।
* अनुसंधान और विकास में निवेश को बढ़ावा देना।
* क्षमता निर्माण और संस्थागत तंत्रों को मजबूत करना।
4. निष्कर्ष: BRICS सहयोग के माध्यम से समावेशी, लचीली और भविष्य के लिए तैयार शिक्षा प्रणालियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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