24 Sep भारत-आसियान व्यापार 128 अरब डॉलर तक पहुंचा, जानिए क्या हुआ 14वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में

✎ भारत की पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन और आसियान-भारत आर्थिक मंत्री परामर्श में भागीदारी क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण और आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौते (AITIGA) की समीक्षा के माध्यम से व्यापार संबंधों को मजबूत करने की भारत की प्रतिबद्धता…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध: भारत के द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह तथा समझौते | GS Paper III — अर्थव्यवस्था: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधन जुटाना, वृद्धि, विकास और रोजगार
- Prelims: पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (EAS), आसियान (ASEAN), आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौता (AITIGA), क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (RCEP), भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति, द्विपक्षीय व्यापार
- Essay: भारत की विदेश नीति में क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग का महत्व, बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत-आसियान संबंध और आर्थिक एकीकरण
त्वरित पुनरावृत्ति: भारत की पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन और आसियान-भारत आर्थिक मंत्री परामर्श में भागीदारी क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण और आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौते (AITIGA) की समीक्षा के माध्यम से व्यापार संबंधों को मजबूत करने की भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारत ने मनीला, फिलीपींस में आयोजित 14वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन के आर्थिक मंत्रियों की बैठक (EAS-EMM) और 23वें आसियान-भारत आर्थिक मंत्री परामर्श में भाग लिया। इन बैठकों में क्षेत्रीय और वैश्विक आर्थिक विकास पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ, जिसमें आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौते (AITIGA) की समीक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया, जिसका उद्देश्य व्यापार प्रवाह को बढ़ाना और व्यापार असंतुलन को दूर करना है।
पृष्ठभूमि
- पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (EAS) एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक प्रमुख नेताओं के नेतृत्व वाला मंच है जो क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और समृद्धि को बढ़ावा देता है।
- आसियान (ASEAN) दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों का एक क्षेत्रीय अंतर-सरकारी संगठन है जो अंतर-सरकारी सहयोग को बढ़ावा देता है और आर्थिक, राजनीतिक, सुरक्षा, सैन्य, शैक्षिक और सामाजिक-सांस्कृतिक एकीकरण की सुविधा प्रदान करता है।
- भारत आसियान का एक संवाद भागीदार है और दोनों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक संबंध मजबूत हैं।
- आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौता (AITIGA) भारत और आसियान देशों के बीच व्यापार को सुगम बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता है, जिसकी वर्तमान में समीक्षा की जा रही है।
- वर्ष 2025-26 में भारत और आसियान के बीच द्विपक्षीय व्यापार 128.38 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया, जो भारत के कुल वैश्विक व्यापार का 10.55 प्रतिशत है।
- भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति (Act East Policy) का उद्देश्य आसियान देशों के साथ आर्थिक, रणनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना है, और ये बैठकें इस नीति के क्रियान्वयन का हिस्सा हैं।
पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (EAS) और आसियान-भारत आर्थिक मंत्री परामर्श
- EAS की स्थापना 2005 में हुई थी और यह क्षेत्रीय चुनौतियों पर चर्चा करने और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक मंच प्रदान करता है।
- आसियान-भारत आर्थिक मंत्री परामर्श भारत और आसियान के आर्थिक मंत्रियों के बीच एक वार्षिक बैठक है जो व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करने पर केंद्रित है।
- इन बैठकों में क्षेत्रीय और वैश्विक आर्थिक प्रवृत्तियों, व्यापार और निवेश प्रवाह पर चर्चा की जाती है, और सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए रणनीतियों पर विचार किया जाता है।
- आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौता (AITIGA) की समीक्षा का उद्देश्य इसे अधिक प्रभावी, उपयोगकर्ता-अनुकूल और व्यापार को सुगम बनाने वाला बनाना है, जिससे दोनों पक्षों के लिए परस्पर लाभकारी परिणाम सुनिश्चित हो सकें।
- बैठकों में ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक समूहों के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण पर भी चर्चा की गई, जिसमें ऊर्जा अवसंरचना, डिजिटल और औद्योगिक मांग, तथा सुसंगत व्यापार और निवेश नीतियों को एक साथ लाने पर जोर दिया गया।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| 14वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन के आर्थिक मंत्रियों की बैठक (EAS-EMM) | क्षेत्रीय और वैश्विक आर्थिक विकास पर विचारों का आदान-प्रदान, ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक समूहों पर शोध पत्र की प्रस्तुति। |
| 23वां आसियान-भारत आर्थिक मंत्री परामर्श | भारत और आसियान के बीच मजबूत व्यापारिक साझेदारियों को बढ़ावा देना, क्षेत्रीय व्यापार समझौतों को परस्पर लाभकारी बनाना। |
| आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौते (AITIGA) की समीक्षा | व्यापार प्रवाह को बढ़ाना, मौजूदा व्यापार असंतुलन को दूर करना, समझौते को संतुलित और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाना। |
| द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि | 2025-26 में भारत और आसियान के बीच द्विपक्षीय व्यापार 128.38 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचा, भारत के कुल वैश्विक व्यापार में आसियान की 10.55 प्रतिशत हिस्सेदारी। |
| आसियान-भारत व्यावसायिक मंच 2026 में भागीदारी | व्यावसायिक समुदाय के साथ सीधे संवाद और व्यापारिक समस्याओं पर चर्चा। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- भारत और आसियान के बीच बढ़ते द्विपक्षीय व्यापार से आर्थिक एकीकरण और क्षेत्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूती मिलती है।
- AITIGA की समीक्षा व्यापार बाधाओं को कम करने और व्यापार असंतुलन को दूर करने में सहायक होगी, जिससे दोनों पक्षों के लिए आर्थिक लाभ बढ़ेंगे।
- ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक समूहों पर केंद्रित शोध पत्र क्षेत्रीय आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) के लिए नई दिशाएँ प्रदान कर सकता है।
सामरिक महत्व
- पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (EAS) में भागीदारी भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति (Act East Policy) को मजबूत करती है, जिससे भारत की क्षेत्रीय और वैश्विक भूमिका बढ़ती है।
- आसियान के साथ मजबूत आर्थिक संबंध भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific Region) में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में स्थापित करते हैं।
- क्षेत्रीय स्थिरता और सहयोग को बढ़ावा देने में आर्थिक मंचों की भूमिका महत्वपूर्ण है, खासकर भू-राजनीतिक परिवर्तनों के संदर्भ में।
व्यापार और निवेश
- आसियान भारत के लिए चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है, जो भारत के कुल वैश्विक व्यापार में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
- AITIGA की समीक्षा का उद्देश्य व्यापार को सुगम बनाना, व्यवसायों के लिए अधिक प्रभावी और उपयोगकर्ता-अनुकूल वातावरण बनाना है।
- भारतीय व्यवसायों के साथ बातचीत से निर्यात में आने वाली समस्याओं को समझने और उनका समाधान करने में मदद मिलेगी, जिससे व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
चुनौतियाँ
1. व्यापार असंतुलन
- भारत और आसियान के बीच व्यापार में असंतुलन एक चुनौती है, जिसे AITIGA की समीक्षा के माध्यम से संबोधित करने का प्रयास किया जा रहा है।
- यह असंतुलन कुछ क्षेत्रों में भारत के निर्यात को प्रभावित कर सकता है और घरेलू उद्योगों पर दबाव डाल सकता है।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और निवेश
2. गैर-टैरिफ बाधाएँ
- भारतीय व्यवसायों को आसियान देशों में वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात में गैर-टैरिफ बाधाओं (Non-Tariff Barriers) का सामना करना पड़ सकता है, जैसे नियामक आवश्यकताएँ और सीमा शुल्क प्रक्रियाएँ।
- ये बाधाएँ व्यापार प्रवाह को बाधित कर सकती हैं और व्यापार लागत बढ़ा सकती हैं।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय व्यापार समझौते
3. क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा
- पूर्वी एशिया क्षेत्र में चीन जैसे अन्य बड़े आर्थिक खिलाड़ियों की उपस्थिति भारत के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ाती है।
- भारत को अपने उत्पादों और सेवाओं को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए नवाचार और दक्षता पर ध्यान केंद्रित करना होगा।
यूपीएससी लिंक: वैश्विक आर्थिक प्रतिस्पर्धा
4. आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन
- वैश्विक घटनाओं जैसे महामारी या भू-राजनीतिक तनाव के कारण आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान का जोखिम बना रहता है।
- क्षेत्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक लचीला और विविध बनाने की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| AITIGA समीक्षा का परिणाम | यह सुनिश्चित करना कि समीक्षा परस्पर लाभकारी हो और सभी हितधारकों की चिंताओं को संबोधित करे। |
| ऊर्जा सुरक्षा | क्षेत्र की बढ़ती ऊर्जा मांगों को पूरा करने के लिए स्थायी और एकीकृत दृष्टिकोण विकसित करना। |
| औद्योगिक क्लस्टर विकास | क्षेत्र में औद्योगिक संवृद्धि को बढ़ावा देने के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण अपनाना, जिसमें ऊर्जा, डिजिटल और व्यापार नीतियाँ शामिल हों। |
| व्यापार सुविधा | सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सरल बनाना और व्यापार को सुगम बनाने के लिए डिजिटल समाधानों का उपयोग करना। |
| क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण | आसियान के 11 देशों और अन्य EAS साझेदारों के बीच आर्थिक एकीकरण को गहरा करना। |
आगे की राह
- AITIGA की समीक्षा को शीघ्रता से पूरा करना ताकि व्यापार बाधाओं को कम किया जा सके और एक संतुलित, प्रभावी तथा उपयोगकर्ता-अनुकूल समझौता सुनिश्चित किया जा सके।
- ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक क्लस्टर विकास के लिए ERIA द्वारा प्रस्तावित एकीकृत दृष्टिकोण को अपनाना, जिसमें ऊर्जा बुनियादी ढाँचे, डिजिटल मांग और सुसंगत व्यापार नीतियाँ शामिल हों।
- भारतीय व्यवसायों के साथ नियमित संवाद स्थापित करना ताकि निर्यात में आने वाली समस्याओं को समझा जा सके और उनका समाधान किया जा सके।
- डिजिटल व्यापार और ई-कॉमर्स (E-commerce) को बढ़ावा देना ताकि व्यापार प्रक्रियाओं को सुगम बनाया जा सके और दक्षता बढ़ाई जा सके।
- क्षेत्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं के लचीलेपन को बढ़ाने के लिए आसियान देशों के साथ सहयोग करना।
- सेवा व्यापार (Services Trade) और निवेश को बढ़ावा देने के लिए नए क्षेत्रों की पहचान करना, जिससे आर्थिक संबंधों में विविधता आए।
- मानक निर्धारण और नियामक सामंजस्य (Regulatory Harmonisation) पर सहयोग करना ताकि गैर-टैरिफ बाधाओं को कम किया जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (EAS) · आसियान-भारत आर्थिक मंत्री परामर्श · आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौता (AITIGA) · क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण · व्यापार असंतुलन · ऊर्जा सुरक्षा · औद्योगिक समूह · भारत की एक्ट ईस्ट नीति · द्विपक्षीय व्यापार · क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (RCEP)
अवधारणा प्रवाह
भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने EAS-EMM और आसियान-भारत आर्थिक मंत्री परामर्श में भाग लिया। → बैठकों में क्षेत्रीय और वैश्विक आर्थिक विकास पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ। → AITIGA की समीक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया, जिसका उद्देश्य व्यापार प्रवाह को बढ़ाना और असंतुलन दूर करना है। → भारत ने मजबूत व्यापारिक साझेदारियों और परस्पर लाभकारी क्षेत्रीय व्यापार समझौतों पर जोर दिया। → द्विपक्षीय व्यापार 2025-26 में 128.38 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचा, जो साझेदारी के महत्व को दर्शाता है। → समीक्षा का लक्ष्य AITIGA को संतुलित, प्रभावी और व्यापार सुगम बनाने वाला बनाना है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (EAS) में आसियान के सदस्य देशों के साथ-साथ भारत, ऑस्ट्रेलिया, चीन, जापान, न्यूजीलैंड, कोरिया, रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका भी शामिल हैं।
2. आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौता (AITIGA) का उद्देश्य व्यापार प्रवाह को बढ़ाना और मौजूदा व्यापार असंतुलन को दूर करना है।
3. वर्ष 2025-26 में भारत और आसियान के बीच द्विपक्षीय व्यापार 128.38 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि EAS में आसियान के 11 देश और 8 अन्य प्रमुख भागीदार शामिल हैं। कथन 2 सही है क्योंकि AITIGA समीक्षा का मुख्य उद्देश्य व्यापार असंतुलन को संबोधित करना और व्यापार को सुगम बनाना है। कथन 3 सही है क्योंकि PIB विज्ञप्ति के अनुसार 2025-26 में द्विपक्षीय व्यापार 128.38 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया।
Q2. आसियान (ASEAN) के सदस्य देशों के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन सा/से देश आसियान का सदस्य है/हैं?
1. ब्रुनेई
2. तिमोर-लेस्ते
3. म्यांमार
4. लाओस
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1, 2 और 3
- केवल 2, 3 और 4
- केवल 1, 3 और 4
- 1, 2, 3 और 4
उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — ब्रुनेई, म्यांमार और लाओस आसियान के संस्थापक सदस्यों में से हैं या बाद में शामिल हुए हैं। तिमोर-लेस्ते आसियान का 11वां सदस्य देश है, जो हाल ही में शामिल हुआ है। अतः सभी चार देश आसियान के सदस्य हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (EAS) और आसियान-भारत आर्थिक मंत्री परामर्श में भारत की भागीदारी क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को कैसे दर्शाती है? आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौता (AITIGA) की समीक्षा के महत्व और इसके संभावित प्रभावों पर भी चर्चा करें। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: EAS और आसियान-भारत आर्थिक मंत्री परामर्श में भारत की भागीदारी का संक्षिप्त उल्लेख और भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ से इसका संबंध।
2. क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण के प्रति प्रतिबद्धता: भारत की भागीदारी के माध्यम से क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देने के विभिन्न पहलुओं को उजागर करें, जैसे-
क. व्यापार और निवेश प्रवाह पर विचारों का आदान-प्रदान।
ख. क्षेत्रीय और वैश्विक आर्थिक दृष्टिकोण पर चर्चा में सक्रिय भूमिका।
ग. ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक समूहों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग पर बल।
घ. बहुपक्षीय मंचों पर भारत की बढ़ती भूमिका।
3. AITIGA समीक्षा का महत्व:
क. व्यापार असंतुलन को दूर करना: भारत और आसियान के बीच बढ़ते व्यापार घाटे को संबोधित करने की आवश्यकता।
ख. व्यापार प्रवाह को बढ़ाना: टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करके व्यापार को सुगम बनाना।
ग. समझौते को अधिक प्रभावी और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाना: व्यवसायों के लिए प्रक्रियात्मक सरलता और दक्षता।
घ. परस्पर लाभकारी परिणाम सुनिश्चित करना: दोनों पक्षों के हितों का ध्यान रखना।
4. संभावित प्रभाव:
क. द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि और विविधीकरण।
ख. आपूर्ति श्रृंखलाओं का लचीलापन और क्षेत्रीय मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकरण।
ग. भारतीय उद्योगों के लिए नए बाजार के अवसर।
घ. ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी पहलों को बढ़ावा।
5. निष्कर्ष: भारत-आसियान साझेदारी के रणनीतिक और आर्थिक महत्व को रेखांकित करें और भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डालें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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