भारत ने जी20 ऊर्जा सहमति में किया शामिल, जानिए प्रमुख समझौते

India joins G20 energy consensus — diagram

भारत ने जी20 ऊर्जा सहमति में किया शामिल, जानिए प्रमुख समझौते

Map of India, USA, G20 Members highlighted on the map of India — जी20 ऊर्जा समझौते 2026
मानचित्र व माइंड-मैप: भारत जी20 ऊर्जा सहमति में शामिल

✎ G20 ऊर्जा सहमति वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, सतत विकास और महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने के लिए भारत सहित सदस्य देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देती है।

💬 Doubt on this topic? Ask Aanya, your free AI study-buddy, for an instant explanation. Ask Aanya →

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS पेपर II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध  |  GS पेपर III — अर्थव्यवस्था  |  GS पेपर III — पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी
  • Prelims: G20 ऊर्जा प्रचुरता मंत्रिस्तरीय बैठक, घरेलू ऊर्जा पहुंच, महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखला, बुनियादी ढांचा परियोजनाएं, जल पुन:उपयोग पहल
  • Essay: ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास: वैश्विक सहयोग की आवश्यकता, महत्वपूर्ण खनिज: भू-राजनीति और आर्थिक निहितार्थ

त्वरित पुनरावृत्ति: G20 ऊर्जा सहमति वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, सतत विकास और महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने के लिए भारत सहित सदस्य देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देती है।

💬 Doubt on this topic? Ask Aanya, your free AI study-buddy, for an instant explanation. Ask Aanya →

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, भारत ने G20 ऊर्जा प्रचुरता मंत्रिस्तरीय बैठक में अन्य G20 सदस्यों के साथ चार प्रमुख सहमति परिणामों को अपनाया। ये परिणाम घरेलू ऊर्जा पहुंच, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए अनुमोदन प्रक्रिया, जल पुन:उपयोग और महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखलाओं से संबंधित हैं। यह बैठक अमेरिका के ह्यूस्टन में आयोजित की गई थी, और इसमें ऊर्जा सुरक्षा, वहनीय आधारभूत शक्ति, नियामक दक्षता और लचीली महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

पृष्ठभूमि

  • G20 ऊर्जा प्रचुरता कार्य समूह की तीन प्राथमिकताएं हैं: ऊर्जा सुरक्षा और वहनीय आधारभूत शक्ति, परमिटिंग और नियामक दक्षता, तथा लचीली महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाएं।
  • घरेलू ऊर्जा पहुंच के संबंध में, मंत्रियों ने व्यक्तिगत देशों की स्थितियों के अनुरूप वहनीय और मापनीय दृष्टिकोणों का समर्थन किया। इसमें तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) को पारंपरिक बायोमास के विकल्प के रूप में मान्यता दी गई, खासकर विकासशील देशों के लिए।
  • बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए, सहमति में अधिक कुशल, अनुमानित और प्रभावी घरेलू परमिटिंग तथा नियामक प्रक्रियाओं का आह्वान किया गया।
  • मंत्रियों ने समुदायों, ऊर्जा उत्पादन, विनिर्माण और कृषि सहित अन्य आवश्यक क्षेत्रों को कवर करने वाली एक स्वैच्छिक जल-पुन:उपयोग पहल को भी अपनाया। यह पहल पुन:उपयोग किए गए पानी की गुणवत्ता और उद्देश्य के आधार पर दृष्टिकोणों को बढ़ावा देती है।
  • चौथा समझौता लचीली, वहनीय, सुरक्षित और विविध महत्वपूर्ण खनिज मूल्य श्रृंखला स्थापित करने के लिए स्वैच्छिक सहयोग का आह्वान करता है। इसमें सूचना-साझाकरण, नवाचार, निवेश, क्षमता-निर्माण और स्थानीय मूल्य संवर्धन शामिल है।
  • इन समझौतों का उद्देश्य किसी एक आपूर्तिकर्ता पर अत्यधिक निर्भरता को कम करना, अधिक टिकाऊ आपूर्ति श्रृंखलाएं बनाना और अधिक आर्थिक अवसर पैदा करना है।

G20 और ऊर्जा क्षेत्र में इसका महत्व

  • G20 (बीस का समूह) विश्व की प्रमुख विकसित और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं का एक अंतर-सरकारी मंच है। यह वैश्विक आर्थिक मुद्दों पर चर्चा और सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है।
  • ऊर्जा क्षेत्र G20 के एजेंडे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए केंद्रीय हैं।
  • G20 ऊर्जा मंत्रिस्तरीय बैठकें ऊर्जा नीतियों, निवेश, प्रौद्योगिकियों और सहयोग पर चर्चा करने के लिए एक मंच प्रदान करती हैं, जिसका उद्देश्य वैश्विक ऊर्जा बाजारों को स्थिर करना और सतत ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करना है।
  • घरेलू ऊर्जा पहुंच सुनिश्चित करना विकासशील देशों के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती है, और G20 इस मुद्दे पर साझा समाधान खोजने में मदद करता है।
  • महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals) आधुनिक प्रौद्योगिकियों, नवीकरणीय ऊर्जा और रक्षा उद्योगों के लिए आवश्यक हैं। इनकी आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुरक्षा और विविधीकरण भू-राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।
  • बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए कुशल नियामक प्रक्रियाएं आर्थिक विकास को गति देने और निवेश को आकर्षित करने में सहायक होती हैं।
  • जल पुन:उपयोग पहल जल संसाधनों के सतत प्रबंधन और संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां पानी की कमी एक गंभीर समस्या है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
घरेलू ऊर्जा तक पहुंच विकासशील देशों में स्वच्छ खाना पकाने के ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना, विशेष रूप से पारंपरिक बायोमास के स्थान पर LPG जैसे किफायती विकल्पों को बढ़ावा देना।
बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए अनुमोदन बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए घरेलू अनुमति और नियामक प्रक्रियाओं को अधिक कुशल, अनुमानित और प्रभावी बनाना, जिससे निवेश और कार्यान्वयन में तेजी आए।
जल पुन: उपयोग पहल समुदायों, ऊर्जा उत्पादन, विनिर्माण और कृषि सहित आवश्यक क्षेत्रों में जल पुन: उपयोग को बढ़ावा देना, जल गुणवत्ता और उद्देश्य के अनुरूप दृष्टिकोण अपनाना।
महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला लचीली, सस्ती, सुरक्षित और विविध महत्वपूर्ण खनिज मूल्य श्रृंखला स्थापित करने के लिए स्वैच्छिक सहयोग, किसी एक आपूर्तिकर्ता पर अत्यधिक निर्भरता कम करना।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • ऊर्जा सुरक्षा और किफायती बेसलोड बिजली को बढ़ावा देकर आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को गति देना।
  • बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए कुशल नियामक प्रक्रियाओं से निवेश आकर्षित करना और रोजगार सृजन को बढ़ावा देना।
  • महत्वपूर्ण खनिजों की विविध आपूर्ति श्रृंखलाओं से वैश्विक व्यापार और विनिर्माण को स्थिरता प्रदान करना।

सामरिक महत्व

  • महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाकर भू-राजनीतिक जोखिमों को कम करना और देशों की ऊर्जा स्वतंत्रता को बढ़ाना।
  • G20 मंच पर भारत की सक्रिय भागीदारी वैश्विक ऊर्जा नीति निर्धारण में उसकी भूमिका को मजबूत करती है।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और जलवायु परिवर्तन शमन प्रयासों को बल मिलता है।

पर्यावरणीय महत्व

  • घरेलू ऊर्जा पहुंच में स्वच्छ ईंधन (जैसे LPG) को बढ़ावा देकर वायु प्रदूषण और वनों की कटाई को कम करना।
  • जल पुन: उपयोग पहल से जल संसाधनों का स्थायी प्रबंधन सुनिश्चित करना और जल तनाव को कम करना।
  • ऊर्जा प्रणालियों को अधिक लचीला और टिकाऊ बनाने के लिए नवाचार और निवेश को प्रोत्साहित करना।

चुनौतियाँ

1. ऊर्जा पहुंच में असमानता

  • विकासशील देशों में अभी भी बड़ी आबादी के पास स्वच्छ और किफायती ऊर्जा तक पहुंच नहीं है।
  • पारंपरिक बायोमास पर निर्भरता स्वास्थ्य और पर्यावरण संबंधी चुनौतियां पैदा करती है।

2. बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में देरी

  • अनुमति और नियामक प्रक्रियाओं में जटिलता और अक्षमता अक्सर परियोजनाओं में देरी और लागत वृद्धि का कारण बनती है।
  • भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय मंजूरी संबंधी मुद्दे भी बाधाएं उत्पन्न करते हैं।

3. जल संसाधनों का प्रबंधन

  • बढ़ती जनसंख्या और औद्योगिकीकरण के कारण जल संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है।
  • जल पुन: उपयोग के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे और प्रौद्योगिकियों में निवेश की कमी।

4. महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला की भेद्यता

  • कुछ महत्वपूर्ण खनिजों के उत्पादन और प्रसंस्करण में कुछ देशों का प्रभुत्व आपूर्ति श्रृंखला को कमजोर बनाता है।
  • भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार बाधाएं इन खनिजों की उपलब्धता और कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
स्वच्छ घरेलू ऊर्जा की कमी ग्रामीण क्षेत्रों में खाना पकाने के लिए बायोमास पर निर्भरता से स्वास्थ्य और पर्यावरणीय समस्याएं।
बुनियादी ढांचा अनुमोदन में लालफीताशाही परियोजनाओं में अनावश्यक देरी, जिससे लागत में वृद्धि और आर्थिक विकास में बाधा।
जल पुन: उपयोग का सीमित प्रचलन जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त निवेश और जागरूकता की कमी।
महत्वपूर्ण खनिजों पर एकाधिकार कुछ देशों पर अत्यधिक निर्भरता से आपूर्ति में व्यवधान का जोखिम और मूल्य अस्थिरता।

आगे की राह

  • घरेलू ऊर्जा पहुंच बढ़ाने के लिए LPG और अन्य स्वच्छ ईंधन विकल्पों के वितरण नेटवर्क का विस्तार करना।
  • बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए एकल-खिड़की मंजूरी प्रणाली (Single-Window Clearance System) को मजबूत करना और नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाना।
  • जल पुन: उपयोग प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना तथा औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों में इसके उपयोग को प्रोत्साहित करना।
  • महत्वपूर्ण खनिजों की खोज, खनन और प्रसंस्करण में घरेलू क्षमताओं को बढ़ाना तथा अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना।
  • नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) स्रोतों में निवेश में वृद्धि करना ताकि ऊर्जा मिश्रण में विविधता लाई जा सके और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम हो।
  • तकनीकी हस्तांतरण (Technology Transfer) और क्षमता निर्माण के माध्यम से विकासशील देशों को ऊर्जा संक्रमण में सहायता प्रदान करना।
  • G20 जैसे बहुपक्षीय मंचों पर ऊर्जा सुरक्षा, स्थिरता और पहुंच के मुद्दों पर भारत की नेतृत्वकारी भूमिका को जारी रखना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

G20 ऊर्जा सहमति · घरेलू ऊर्जा पहुँच · बुनियादी ढाँचा अनुमोदन · जल पुनर्चक्रण · महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखला · ऊर्जा सुरक्षा · किफायती बेसलोड पावर · नियामक दक्षता · सतत विकास लक्ष्य · अंतर्राष्ट्रीय सहयोग

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘स्वच्छ पर्यावरण और स्वास्थ्य का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 243G’, ‘note’: ‘पंचायतों की आर्थिक विकास की योजनाएं’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 243W’, ‘note’: ‘नगरपालिकाओं की आर्थिक विकास की योजनाएं’}

अवधारणा प्रवाह

G20 ऊर्जा बहुतायत मंत्रिस्तरीय बैठक  →  चार प्रमुख सहमति परिणामों पर सहमति  →  घरेलू ऊर्जा पहुंच, बुनियादी ढांचा, जल पुन: उपयोग, महत्वपूर्ण खनिज  →  ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक संवृद्धि और पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा  →  भारत की ऊर्जा नीतियों और वैश्विक सहयोग में योगदान

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. G20 ऊर्जा प्रचुरता मंत्रिस्तरीय बैठक के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. इस बैठक में घरेलू ऊर्जा पहुँच, बुनियादी ढाँचा अनुमोदन, जल पुनर्चक्रण और महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं को कवर करने वाली चार सहमति बनीं।
2. तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) को पारंपरिक बायोमास को तेजी से बदलने के लिए एक विकल्प के रूप में मान्यता दी गई, खासकर विकासशील देशों के लिए।
3. महत्वपूर्ण खनिज मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करने के लिए सूचना-साझाकरण, नवाचार और निवेश को बढ़ावा देने पर सहमति हुई।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1, 2 और 3 तीनों सही हैं। G20 ऊर्जा प्रचुरता मंत्रिस्तरीय बैठक में ये सभी बिंदु सहमति का हिस्सा थे।

Q2. निम्नलिखित में से कौन सा G20 ऊर्जा प्रचुरता कार्य समूह की प्राथमिकताओं में शामिल नहीं था?

  1. ऊर्जा सुरक्षा और किफायती बेसलोड पावर
  2. अनुमति और नियामक दक्षता
  3. लचीली महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाएं
  4. परमाणु ऊर्जा का पूर्ण परित्याग

उत्तर: परमाणु ऊर्जा का पूर्ण परित्याग — G20 ऊर्जा प्रचुरता कार्य समूह की प्राथमिकताओं में ऊर्जा सुरक्षा और किफायती बेसलोड पावर, अनुमति और नियामक दक्षता, और लचीली महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाएं शामिल थीं। परमाणु ऊर्जा का पूर्ण परित्याग इसकी प्राथमिकता नहीं था।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ G20 ऊर्जा सहमति के प्रमुख परिणामों पर चर्चा करें और भारत के ऊर्जा सुरक्षा लक्ष्यों तथा सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने में इन समझौतों के महत्व का मूल्यांकन करें। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर कंकाल:
1. परिचय: G20 ऊर्जा सहमति का संक्षिप्त परिचय, बैठक का स्थान और भारत की भागीदारी का उल्लेख।
2. G20 ऊर्जा सहमति के प्रमुख परिणाम:
क. घरेलू ऊर्जा पहुँच: LPG जैसे विकल्पों पर जोर, विकासशील देशों के लिए प्रासंगिकता।
ख. बुनियादी ढाँचा अनुमोदन: प्रक्रियाओं को कुशल, अनुमानित और प्रभावी बनाने की आवश्यकता।
ग. जल पुनर्चक्रण पहल: समुदायों, ऊर्जा उत्पादन, विनिर्माण और कृषि में जल के पुनः उपयोग को बढ़ावा।
घ. महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाएं: लचीली, सस्ती, सुरक्षित और विविध मूल्य श्रृंखलाओं के लिए स्वैच्छिक सहयोग (सूचना-साझाकरण, नवाचार, निवेश, क्षमता-निर्माण)।
3. भारत के ऊर्जा सुरक्षा लक्ष्यों के लिए महत्व:
क. ऊर्जा मिश्रण में विविधता: स्वच्छ ईंधन (LPG) को बढ़ावा, पारंपरिक बायोमास पर निर्भरता कम करना।
ख. बुनियादी ढाँचा विकास: परियोजनाओं के लिए नियामक बाधाओं को कम करना, निवेश आकर्षित करना।
ग. महत्वपूर्ण खनिजों तक पहुँच: इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा आदि के लिए आवश्यक खनिजों की सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करना।
घ. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: तकनीकी हस्तांतरण, सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान।
4. सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने में महत्व:
क. SDG 7 (किफायती और स्वच्छ ऊर्जा): घरेलू ऊर्जा पहुँच और स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा।
ख. SDG 6 (स्वच्छ जल और स्वच्छता): जल पुनर्चक्रण पहल का सीधा योगदान।
ग. SDG 9 (उद्योग, नवाचार और बुनियादी ढाँचा): बुनियादी ढाँचा अनुमोदन और महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं का सुदृढीकरण।
घ. SDG 17 (लक्ष्यों के लिए भागीदारी): G20 जैसे मंचों पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का महत्व।
5. निष्कर्ष: भारत के लिए इन सहमतियों के दीर्घकालिक लाभ और वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में इसकी भूमिका पर संक्षिप्त टिप्पणी।

स्रोत: orissapost.com


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


Related guides on our sites

No Comments

Post A Comment