06 Aug मंत्रिमंडल ने गोबरधन योजना को 23,731 करोड़ रुपये की मंजूरी दी, जानिए पूरा विवरण
✎ गोबरधन योजना भारत की जैविक संपदा को स्वच्छ ऊर्जा और ग्रामीण समृद्धि में बदलने के लिए एक महत्वाकांक्षी पहल है, जो संपीड़ित बायोगैस उत्पादन को बढ़ावा देकर देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अर्थव्यवस्था | GS Paper III — पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
- Prelims: गोबरधन योजना, संपीड़ित बायोगैस (CBG), चक्रीय जैव-अर्थव्यवस्था, सतत वैकल्पिक किफायती परिवहन (SATAT) पहल, राष्ट्रीय जैव ऊर्जा कार्यक्रम, अपशिष्ट से धन
- Essay: भारत में ग्रामीण विकास और ऊर्जा सुरक्षा में नवीकरणीय ऊर्जा की भूमिका।, चक्रीय अर्थव्यवस्था: अपशिष्ट प्रबंधन से आर्थिक संवृद्धि तक।
त्वरित पुनरावृत्ति: गोबरधन योजना भारत की जैविक संपदा को स्वच्छ ऊर्जा और ग्रामीण समृद्धि में बदलने के लिए एक महत्वाकांक्षी पहल है, जो संपीड़ित बायोगैस उत्पादन को बढ़ावा देकर देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 23,731 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ राष्ट्रीय चक्रीय जैव ऊर्जा योजना, गोबरधन को मंजूरी दी है। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2035-36 तक लागू की जाएगी, जिसका उद्देश्य देश में संपीड़ित बायोगैस (CBG) उत्पादन को लगभग दस गुना बढ़ाना और एक जीवंत चक्रीय जैव-अर्थव्यवस्था का निर्माण करना है। यह पहल भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और ग्रामीण समृद्धि को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पृष्ठभूमि
- भारत में प्राकृतिक गैस की मांग लगातार बढ़ रही है, जिसे घरेलू नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से पूरा करना ऊर्जा स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।
- संपीड़ित बायोगैस (CBG) रासायनिक रूप से प्राकृतिक गैस के समतुल्य है और इसे मौजूदा गैस प्रणाली में एकीकृत किया जा सकता है, जिससे नवीकरणीय ईंधन के लाभों को भारत के बढ़ते गैस अवसंरचना के साथ जोड़ा जा सकता है।
- सरकार ने पिछले कई वर्षों में संपीड़ित बायोगैस क्षेत्र की नींव को मजबूत करने के लिए कई पहलें की हैं, जैसे सतत वैकल्पिक किफायती परिवहन (SATAT) पहल और राष्ट्रीय जैव ऊर्जा कार्यक्रम के तहत केंद्रीय वित्तीय सहायता (CFA)।
- इन पूर्ववर्ती पहलों के परिणामस्वरूप 200 से अधिक संपीड़ित बायोगैस संयंत्र स्थापित हुए हैं, जिससे उत्पादन और निकासी प्रणालियाँ स्थापित हुई हैं तथा जैविक खाद मूल्य श्रृंखला मजबूत हुई है।
- गोबरधन योजना इन सभी प्रयासों को एक एकीकृत मंच पर लाती है, जिससे त्वरित कार्यान्वयन, बेहतर परियोजना अर्थशास्त्र और निवेशकों के लिए अधिक निश्चितता सुनिश्चित होगी।
- यह योजना कृषि अवशेषों, पशु गोबर और अन्य जैविक संसाधनों के इर्द-गिर्द एक स्थानीय चक्रीय अर्थव्यवस्था का निर्माण करती है, जिससे चारा आपूर्ति, परिवहन, संयंत्र संचालन और जैविक खाद उत्पादन में नए अवसर पैदा होते हैं।
गोबरधन योजना क्या है?
- गोबरधन योजना एक राष्ट्रीय चक्रीय जैव ऊर्जा योजना है जिसका उद्देश्य देश की जैविक संपदा को स्वच्छ ऊर्जा, ग्रामीण समृद्धि और आर्थिक विकास में परिवर्तित करना है।
- इसका कुल परिव्यय 23,731 करोड़ रुपये है और यह वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2035-36 तक लागू की जाएगी।
- यह योजना कृषि अवशेषों, गोबर, प्रेस मड (गन्ने की मैली), नगरपालिका के जैविक कचरे और अन्य जैव-द्रव्यमान संसाधनों को स्वच्छ ईंधन (संपीड़ित बायोगैस), जैविक खाद, ग्रामीण आय और राष्ट्रीय आर्थिक मूल्य में परिवर्तित करेगी।
- योजना का लक्ष्य घरेलू संपीड़ित बायोगैस (CBG) उत्पादन को लगभग दस गुना बढ़ाना और बड़े पैमाने पर निजी निवेश को आकर्षित करके एक जीवंत चक्रीय जैव-अर्थव्यवस्था का निर्माण करना है।
- यह सुनिश्चित खरीद, लाभकारी और स्थिर मूल्य निर्धारण, पूंजी सहायता, पाइपलाइन अवसंरचना, ऋण समर्थन और प्रौद्योगिकी विकास के माध्यम से CBG क्षेत्र को मजबूत करेगी।
- पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा प्रशासित यह योजना संपूर्ण CBG मूल्य श्रृंखला में एक एकीकृत मंच तैयार करती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| कुल परिव्यय | 23,731 करोड़ रुपये (वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2035-36 तक) |
| लक्ष्य | घरेलू संपीड़ित बायोगैस (CBG) उत्पादन में लगभग दस गुना वृद्धि |
| कवरेज | कृषि अवशेष, गोबर, प्रेस मड, नगरपालिका जैविक कचरा और अन्य जैव-द्रव्यमान संसाधन |
| मुख्य घटक | सुनिश्चित CBG निकासी, लाभकारी मूल्य निर्धारण, पूंजीगत सहायता, पाइपलाइन अवसंरचना, ऋण समर्थन, प्रौद्योगिकी विकास |
| प्रशासनिक मंत्रालय | पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय |
| उद्देश्य | स्वच्छ ऊर्जा, ग्रामीण समृद्धि, आर्थिक विकास और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देना |
महत्व
आर्थिक महत्व
- यह योजना देश की जैविक संपदा को स्वच्छ ऊर्जा, ग्रामीण आय और राष्ट्रीय आर्थिक मूल्य में परिवर्तित करके ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगी।
- यह बड़े पैमाने पर निजी निवेश को आकर्षित करेगी, जिससे रोजगार सृजन और ‘अपशिष्ट-से-धन’ (Waste-to-Wealth) मॉडल को बढ़ावा मिलेगा।
- यह किसानों और ग्रामीण उद्यमियों को अतिरिक्त आय के अवसर प्रदान करेगी, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।
पर्यावरणीय महत्व
- यह कृषि अवशेषों और पशुधन अपशिष्ट के उचित प्रबंधन में सहायता करेगी, जिससे वायु प्रदूषण और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी आएगी।
- यह जैविक खाद के उत्पादन को बढ़ावा देगी, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी और मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार होगा।
- यह स्वच्छ अपशिष्ट प्रबंधन को प्रोत्साहित करेगी, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता का स्तर बढ़ेगा।
ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक महत्व
- घरेलू संपीड़ित बायोगैस उत्पादन में वृद्धि से आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
- CBG प्राकृतिक गैस के समतुल्य है और इसे मौजूदा गैस अवसंरचना में एकीकृत किया जा सकता है, जिससे नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग का विस्तार होगा।
- यह भारत को स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और वैश्विक जलवायु परिवर्तन लक्ष्यों में योगदान देगा।
चुनौतियाँ
1. फीडस्टॉक की उपलब्धता और एकत्रीकरण
- विभिन्न प्रकार के कृषि अवशेषों, गोबर और अन्य जैविक कचरे की निरंतर और पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना एक चुनौती हो सकती है।
- छोटे और बिखरे हुए स्रोतों से फीडस्टॉक का कुशल एकत्रीकरण और परिवहन लागत प्रभावी ढंग से करना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: कृषि, अवसंरचना, ग्रामीण विकास
2. तकनीकी और अवसंरचनात्मक बाधाएँ
- CBG संयंत्रों की स्थापना और संचालन के लिए आवश्यक उन्नत तकनीक और कुशल जनशक्ति की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
- उत्पादित CBG को उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त पाइपलाइन अवसंरचना और वितरण नेटवर्क का विकास करना।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, अवसंरचना विकास
3. वित्तीय व्यवहार्यता और निवेश
- उच्च प्रारंभिक पूंजी लागत और लंबी पेबैक अवधि के कारण निजी निवेशकों को आकर्षित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
- परियोजनाओं के लिए समय पर और पर्याप्त ऋण सहायता सुनिश्चित करना तथा जोखिमों को कम करना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था, निवेश मॉडल
4. बाजार और मूल्य निर्धारण
- CBG के लिए एक स्थिर और लाभकारी बाजार सुनिश्चित करना, विशेष रूप से प्राकृतिक गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव के संदर्भ में।
- जैविक खाद के लिए भी एक व्यवहार्य बाजार विकसित करना ताकि सह-उत्पाद का मूल्य प्राप्त हो सके।
यूपीएससी लिंक: कृषि विपणन, ऊर्जा बाजार
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| फीडस्टॉक प्रबंधन | जैविक कचरे की निरंतर आपूर्ति और कुशल एकत्रीकरण |
| प्रौद्योगिकी और कौशल | उन्नत CBG उत्पादन तकनीक और प्रशिक्षित मानव संसाधन की कमी |
| वित्तपोषण | उच्च पूंजीगत लागत और निजी निवेश को आकर्षित करने की चुनौती |
| बाजार एकीकरण | CBG और जैविक खाद के लिए स्थिर मांग और मूल्य निर्धारण |
| अवसंरचना | पाइपलाइन कनेक्टिविटी और वितरण नेटवर्क का अपर्याप्त विकास |
| नीति कार्यान्वयन | विभिन्न मंत्रालयों और हितधारकों के बीच समन्वय की आवश्यकता |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- सतत वैकल्पिक किफायती परिवहन (SATAT) पहल
- जैविक खाद के लिए बाजार विकास सहायता (MDA) योजना
- बायोमास एकत्रीकरण मशीनरी (BAM) योजना
- पाइपलाइन अवसंरचना विकास (DPI) योजना
- राष्ट्रीय जैव ऊर्जा कार्यक्रम
आगे की राह
- फीडस्टॉक की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को शामिल करना।
- CBG संयंत्रों के लिए अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना, विशेष रूप से विभिन्न प्रकार के फीडस्टॉक के लिए अनुकूलित प्रौद्योगिकियों में।
- निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए आकर्षक वित्तीय प्रोत्साहन, कर छूट और आसान ऋण उपलब्धता सुनिश्चित करना।
- CBG के लिए एक समर्पित ऑफटेक नीति और मूल्य निर्धारण तंत्र विकसित करना जो उत्पादकों के लिए लाभकारी और स्थिर हो।
- CBG संयंत्रों के संचालन और रखरखाव के लिए ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षित करने हेतु कौशल विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा देना।
- विभिन्न मंत्रालयों (पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, कृषि, ग्रामीण विकास, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा) के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना।
- जैविक खाद के लिए बाजार को बढ़ावा देने हेतु जागरूकता अभियान चलाना और किसानों को इसके लाभों के बारे में शिक्षित करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
गोबरधन योजना · संपीड़ित बायोगैस (CBG) · चक्रीय जैव-अर्थव्यवस्था · अपशिष्ट-से-धन · ऊर्जा सुरक्षा · ग्रामीण समृद्धि · जलवायु परिवर्तन · नवीकरणीय ऊर्जा · आत्मनिर्भर भारत · कृषि अवशेष प्रबंधन
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 48क’, ‘note’: ‘पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 39(ख)’, ‘note’: ‘सामुदायिक संसाधनों का समान वितरण’}
अवधारणा प्रवाह
जैविक अपशिष्ट (गोबर, कृषि अवशेष) का एकत्रीकरण → गोबरधन योजना के तहत CBG संयंत्रों में प्रसंस्करण → संपीड़ित बायोगैस (CBG) और जैविक खाद का उत्पादन → CBG का ऊर्जा स्रोत के रूप में उपयोग, जैविक खाद का कृषि में उपयोग → ऊर्जा सुरक्षा, ग्रामीण आय और पर्यावरणीय स्थिरता में वृद्धि
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. गोबरधन योजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह योजना पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा प्रशासित है।
2. इसका उद्देश्य घरेलू संपीड़ित बायोगैस (CBG) उत्पादन को लगभग दस गुना बढ़ाना है।
3. यह योजना केवल पशु गोबर के उपयोग पर केंद्रित है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। गोबरधन योजना पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा प्रशासित है। कथन 2 सही है। योजना का उद्देश्य घरेलू संपीड़ित बायोगैस उत्पादन को लगभग दस गुना बढ़ाना है। कथन 3 गलत है। यह योजना कृषि अवशेषों, गोबर, प्रेस मड, नगरपालिका के जैविक कचरे और अन्य जैव-द्रव्यमान संसाधनों का उपयोग करती है, न कि केवल पशु गोबर का।
Q2. अभिकथन (A): गोबरधन योजना भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
कारण (R): संपीड़ित बायोगैस (CBG) रासायनिक रूप से प्राकृतिक गैस के समतुल्य है और इसे मौजूदा गैस प्रणाली में एकीकृत किया जा सकता है, जिससे आयातित पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम होगी।
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि CBG घरेलू नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के माध्यम से प्राकृतिक गैस की बढ़ती मांग को पूरा कर सकता है, जिससे ऊर्जा स्थिरता मजबूत होगी। कारण (R) भी सही है और A की सही व्याख्या करता है, क्योंकि CBG की प्राकृतिक गैस के साथ रासायनिक समानता इसे मौजूदा गैस अवसंरचना में एकीकृत करने और आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करने में सक्षम बनाती है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ गोबरधन योजना भारत की चक्रीय जैव-अर्थव्यवस्था के निर्माण और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में कैसे योगदान देगी? इसके प्रमुख घटकों और संभावित प्रभावों का विश्लेषण करें। (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: गोबरधन योजना का संक्षिप्त परिचय, इसके उद्देश्य और परिव्यय का उल्लेख।
मुख्य भाग:
1. चक्रीय जैव-अर्थव्यवस्था में योगदान: कृषि अवशेषों, गोबर और अन्य जैविक कचरे को स्वच्छ ईंधन और जैविक खाद में परिवर्तित करने की प्रक्रिया का वर्णन। ‘अपशिष्ट-से-धन’ मॉडल पर जोर।
2. ऊर्जा सुरक्षा में योगदान: संपीड़ित बायोगैस (CBG) को प्राकृतिक गैस के विकल्प के रूप में प्रस्तुत करना, आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना, घरेलू नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि।
3. प्रमुख घटक: योजना के छह विकास इंजन घटकों का उल्लेख – सुनिश्चित CBG निकासी, लाभकारी मूल्य निर्धारण, पूंजी सहायता, पाइपलाइन अवसंरचना, ऋण समर्थन और प्रौद्योगिकी विकास।
4. संभावित प्रभाव: ग्रामीण आय में वृद्धि, रोजगार सृजन, स्वच्छ अपशिष्ट प्रबंधन, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी, किसानों और ग्रामीण उद्यमियों को प्रोत्साहन, निजी निवेश को आकर्षित करना।
निष्कर्ष: योजना के व्यापक लाभों और ‘आत्मनिर्भर भारत’ तथा ‘स्वच्छ ऊर्जा’ लक्ष्यों की प्राप्ति में इसकी भूमिका का सारांश।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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