29 Jul मानसून सत्र: राहुल गांधी के बयान हटाए गए, राज्यसभा में ‘वंदे मातरम’ बिल पर विपक्ष का प्रदर्शन
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय राजव्यवस्था, संसद और राज्य विधायिकाएँ – संरचना, कार्य-संचालन, शक्तियों और विशेषाधिकार एवं इनसे उत्पन्न होने वाले विषय | GS Paper II — सरकार की नीतियाँ और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय
- Prelims: संसद सत्र, लोकसभा, राज्यसभा, संसदीय विशेषाधिकार, विधेयक पारित करने की प्रक्रिया, एंटी-पेपर लीक बिल, वंदे मातरम बिल, अनुच्छेद 105, नियम 377
- Essay: भारतीय लोकतंत्र में संसद की भूमिका और चुनौतियाँ, विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच शक्ति संतुलन
त्वरित पुनरावृत्ति: संसद सत्र विधायी कार्यों, सरकार की जवाबदेही और सार्वजनिक महत्व के मुद्दों पर चर्चा के लिए महत्वपूर्ण मंच हैं, जहाँ विधेयक कानून का रूप लेते हैं और संसदीय विशेषाधिकार सदस्यों को स्वतंत्र रूप से कार्य करने में सक्षम बनाते हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
संसद का मानसून सत्र विभिन्न महत्वपूर्ण विधायी कार्यों और राजनीतिक घटनाक्रमों के कारण चर्चा में रहा। इस सत्र के दौरान, लोकसभा में ‘एंटी-पेपर लीक बिल’ (Anti-Paper Leak Bill) पारित किया गया, जबकि राज्यसभा में ‘वंदे मातरम बिल’ (Vande Mataram Bill) पर विपक्ष के वॉकआउट के बीच इसे पारित किया गया। सत्र में विपक्षी सदस्यों द्वारा सरकार पर तीखे हमले और कुछ सदस्यों की टिप्पणियों को कार्यवाही से हटाए जाने (expunged) जैसे मुद्दे भी सामने आए, जिससे संसदीय कार्यवाही और विशेषाधिकारों पर बहस छिड़ गई।
पृष्ठभूमि
- भारतीय संविधान के अनुसार, संसद के एक वर्ष में कम से कम तीन सत्र आयोजित किए जाते हैं: बजट सत्र (फरवरी-मई), मानसून सत्र (जुलाई-सितंबर) और शीतकालीन सत्र (नवंबर-दिसंबर)।
- संसद का मुख्य कार्य कानून बनाना, सरकार के कामकाज पर नियंत्रण रखना, बजट पारित करना और सार्वजनिक महत्व के मुद्दों पर चर्चा करना है।
- विधेयक (Bill) संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है (धन विधेयक को छोड़कर, जो केवल लोकसभा में पेश होता है)। दोनों सदनों से पारित होने के बाद, यह राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए जाता है और उनकी सहमति के बाद कानून (Act) बन जाता है।
- संसदीय विशेषाधिकार (Parliamentary Privileges) संसद के सदस्यों को उनके कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए कुछ अधिकार और उन्मुक्तियाँ प्रदान करते हैं, ताकि वे बिना किसी भय या पक्षपात के कार्य कर सकें। ये अनुच्छेद 105 (संसद के सदस्यों के लिए) और अनुच्छेद 194 (राज्य विधानमंडलों के सदस्यों के लिए) में निहित हैं।
- संसदीय कार्यवाही से किसी सदस्य की टिप्पणी को हटाना (expunge करना) अध्यक्ष या सभापति के विवेक पर आधारित होता है, यदि वे टिप्पणी असंसदीय, मानहानिकारक या आपत्तिजनक पाई जाती है।
- विपक्ष द्वारा वॉकआउट (walkout) संसदीय विरोध का एक सामान्य तरीका है, जिसमें सदस्य किसी मुद्दे पर असहमति या विरोध दर्ज कराने के लिए सदन से बाहर चले जाते हैं।
एंटी-पेपर लीक बिल और वंदे मातरम बिल क्या हैं?
- **एंटी-पेपर लीक बिल (सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक):** इस विधेयक का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों जैसे प्रश्नपत्र लीक, नकल और अन्य अनियमितताओं को रोकना है। यह ऐसे अपराधों के लिए कठोर दंड का प्रावधान करता है, जिसमें जेल और भारी जुर्माना शामिल है, ताकि परीक्षा प्रणाली की शुचिता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
- यह विधेयक केंद्र सरकार की भर्ती परीक्षाओं (जैसे UPSC, SSC, रेलवे) और अन्य सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं द्वारा आयोजित परीक्षाओं पर लागू होता है।
- इसका लक्ष्य छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करना और उन लोगों को दंडित करना है जो संगठित तरीके से परीक्षा प्रणाली को बाधित करते हैं।
- **वंदे मातरम बिल:** इस विधेयक का सटीक विवरण सार्वजनिक डोमेन में अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह नाम ‘वंदे मातरम’ से जुड़ा है, जो भारत का राष्ट्रीय गीत है।
- ऐतिहासिक रूप से, ‘वंदे मातरम’ बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित है और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण प्रेरणा स्रोत रहा है।
- संविधान सभा ने 24 जनवरी, 1950 को ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया था।
- इस बिल का उद्देश्य संभवतः राष्ट्रीय गीत के सम्मान, गायन या इससे संबंधित किसी विशेष प्रावधान को मजबूत करना हो सकता है, हालांकि इसके विशिष्ट प्रावधानों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| संसद का मानसून सत्र | यह विधायी कार्यों, महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा और सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने का एक प्रमुख मंच है। |
| प्रश्नपत्र लीक विरोधी विधेयक | यह विधेयक परीक्षाओं में अनुचित साधनों पर रोक लगाने और पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से लाया गया है, जो छात्रों के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है। |
| विपक्षी दलों का विरोध | यह लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका को दर्शाता है, जहाँ वे सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हैं और जनता के मुद्दों को उठाते हैं। |
| संसदीय कार्यवाही में व्यवधान | यह अक्सर सदन के सुचारू कामकाज को बाधित करता है, जिससे महत्वपूर्ण विधायी कार्य प्रभावित होते हैं और सार्वजनिक धन का अपव्यय होता है। |
| सदस्यों की टिप्पणियों को हटाना | यह संसदीय नियमों के तहत अध्यक्ष/सभापति की शक्ति है, जिसका उद्देश्य सदन की गरिमा और मर्यादा बनाए रखना है। |
| वंदे मातरम विधेयक | यह विधेयक राष्ट्रीय भावना और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा है, जिस पर सदन में व्यापक बहस और असहमति देखी गई। |
महत्व
लोकतांत्रिक महत्व
- संसद भारतीय लोकतंत्र का सर्वोच्च विधायी निकाय है, जहाँ विभिन्न मुद्दों पर बहस और चर्चा होती है, जो नीति-निर्माण की प्रक्रिया का एक अभिन्न अंग है।
- विपक्षी दलों का विरोध सरकार को जनता के प्रति जवाबदेह बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे नीतियों में सुधार की संभावना बढ़ती है।
- संसदीय कार्यवाही में व्यवधान और सदस्यों की टिप्पणियों को हटाना संसदीय मर्यादा और नियमों के महत्व को रेखांकित करता है, जो स्वस्थ लोकतंत्र के लिए आवश्यक हैं।
सामाजिक महत्व
- प्रश्नपत्र लीक विरोधी विधेयक का पारित होना लाखों छात्रों के भविष्य और उनकी कड़ी मेहनत के सम्मान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो शिक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करेगा।
- शिक्षा क्षेत्र में कथित हस्तक्षेप या अनियमितताओं पर चर्चा छात्रों और अभिभावकों की चिंताओं को उजागर करती है, जो सामाजिक न्याय और समानता के लिए आवश्यक है।
शासन और प्रशासन
- प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए कानून बनाना सुशासन की दिशा में एक कदम है, जो निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करता है।
- संसद में गृह मंत्री की उपस्थिति और उनके विभागों से संबंधित मुद्दों पर चर्चा सरकार के विभिन्न अंगों की जवाबदेही को दर्शाती है।
चुनौतियाँ
1. संसदीय कार्यवाही में व्यवधान
- लगातार व्यवधानों के कारण महत्वपूर्ण विधेयकों पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो पाती, जिससे कानून की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
- यह सार्वजनिक धन का अपव्यय करता है और संसद की उत्पादकता को कम करता है, जिससे जनता का विश्वास घटता है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय संसद और इसकी कार्यप्रणाली
2. प्रश्नपत्र लीक की समस्या
- यह लाखों छात्रों के भविष्य को बर्बाद करता है और उनकी कड़ी मेहनत को निरर्थक बनाता है, जिससे उनमें निराशा और हताशा फैलती है।
- यह शिक्षा प्रणाली और भर्ती प्रक्रियाओं में जनता के विश्वास को कमजोर करता है, जिससे सामाजिक अशांति बढ़ सकती है।
यूपीएससी लिंक: शिक्षा प्रणाली में चुनौतियाँ और सुधार
3. संसदीय मर्यादा और भाषा
- कुछ सदस्यों द्वारा असंसदीय भाषा का प्रयोग सदन की गरिमा को ठेस पहुँचाता है और सार्वजनिक बहस के स्तर को गिराता है।
- इससे राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ता है और रचनात्मक संवाद की संभावना कम हो जाती है।
यूपीएससी लिंक: संसदीय विशेषाधिकार और आचार संहिता
4. संघीय ढाँचे में शिक्षा का विनियमन
- शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है, जिससे केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय की आवश्यकता होती है, लेकिन कभी-कभी इसमें चुनौतियाँ आती हैं।
- शिक्षा संस्थानों में कथित बाहरी हस्तक्षेप से उनकी स्वायत्तता और अकादमिक स्वतंत्रता पर सवाल उठते हैं।
यूपीएससी लिंक: केंद्र-राज्य संबंध और शिक्षा नीति
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| संसदीय गतिरोध | विधायी कार्यों में देरी, महत्वपूर्ण विधेयकों पर अपर्याप्त चर्चा। |
| प्रश्नपत्र लीक | छात्रों का भविष्य, शिक्षा प्रणाली में विश्वास की कमी, सामाजिक न्याय का हनन। |
| असंसदीय भाषा | सदन की गरिमा का क्षरण, सार्वजनिक बहस का निम्न स्तर। |
| विपक्ष का बहिर्गमन | संसदीय बहस से महत्वपूर्ण आवाजों का अभाव, सर्वसम्मति निर्माण में बाधा। |
| शिक्षा क्षेत्र में हस्तक्षेप | शैक्षणिक संस्थानों की स्वायत्तता पर प्रश्न, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर प्रभाव। |
| वंदे मातरम विधेयक पर विवाद | राष्ट्रीय प्रतीकों पर राजनीतिक ध्रुवीकरण, सर्वसम्मत राष्ट्रीय भावना को कमजोर करना। |
आगे की राह
- संसदीय कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार और विपक्ष के बीच रचनात्मक संवाद और सहयोग को बढ़ावा देना चाहिए।
- प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कानून के साथ-साथ मजबूत तकनीकी समाधान और प्रभावी प्रवर्तन तंत्र लागू किए जाने चाहिए।
- संसदीय सदस्यों को सदन की गरिमा बनाए रखने और असंसदीय भाषा के प्रयोग से बचने के लिए आचार संहिता का पालन करना चाहिए।
- अध्यक्ष/सभापति को नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करते हुए सभी पक्षों को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर देना चाहिए।
- शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए स्वतंत्र नियामक निकायों को मजबूत किया जाना चाहिए।
- राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर आम सहमति बनाने के लिए राजनीतिक दलों को संकीर्ण राजनीतिक हितों से ऊपर उठकर व्यापक राष्ट्रीय हित में काम करना चाहिए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
संसदीय कार्यवाही · संसद सत्र · विधेयक पारित होना · विपक्षी दल · संसदीय विशेषाधिकार · लोकसभा · राज्यसभा · संसदीय मर्यादा · अध्यादेश · शिक्षा नीति · संघवाद · न्यायिक समीक्षा
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 105’, ‘note’: ‘संसद सदस्यों के विशेषाधिकार और उन्मुक्तियाँ’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 118’, ‘note’: ‘संसद के प्रत्येक सदन को नियम बनाने की शक्ति’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 122’, ‘note’: ‘संसदीय कार्यवाही की अदालतों द्वारा जाँच नहीं’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संसद और राज्य विधानमंडलों की विधायी शक्तियाँ (समवर्ती सूची)’}
अवधारणा प्रवाह
प्रश्नपत्र लीक की घटनाएँ → छात्रों और विपक्ष द्वारा विरोध प्रदर्शन → संसद में प्रश्नपत्र लीक विरोधी विधेयक पर चर्चा → विपक्षी सदस्यों द्वारा सरकार पर आरोप और व्यवधान → अध्यक्ष द्वारा आपत्तिजनक टिप्पणियों को हटाना → सदन में विधेयक का पारित होना और अन्य मुद्दों पर बहस
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लोकसभा में ‘एंटी-पेपर लीक विधेयक’ पारित किया गया।
2. राज्यसभा में ‘वंदे मातरम विधेयक’ विपक्ष के बहिर्गमन के बीच पारित किया गया।
3. संसदीय कार्यवाही के दौरान किसी सदस्य द्वारा दिए गए आपत्तिजनक बयानों को अध्यक्ष या सभापति द्वारा हटाया जा सकता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 और 2 समाचार के अनुसार सही हैं। कथन 3 भी सही है, क्योंकि अध्यक्ष/सभापति को सदन की कार्यवाही से असंसदीय या आपत्तिजनक शब्दों को हटाने का अधिकार होता है, जिसे ‘एक्सपंज’ करना कहते हैं।
Q2. अभिकथन (A): संसद के मानसून सत्र के दौरान विभिन्न विधेयकों पर चर्चा और उन्हें पारित किया जाता है।
कारण (R): संसद सत्र का मुख्य उद्देश्य विधायी कार्य करना और सरकार के कामकाज पर नियंत्रण रखना है।
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है, क्योंकि संसद सत्रों में विधायी कार्य प्रमुखता से किए जाते हैं। कारण (R) भी सही है और यह अभिकथन की सही व्याख्या करता है, क्योंकि विधायी कार्य और सरकार पर नियंत्रण ही संसद सत्रों के मुख्य उद्देश्य होते हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारतीय संसद में विधायी प्रक्रिया और विपक्ष की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। क्या हालिया घटनाएँ संसदीय मर्यादाओं के क्षरण का संकेत देती हैं? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** भारतीय संसद की विधायी प्रक्रिया का संक्षिप्त परिचय (विधेयक का प्रस्तुतीकरण, बहस, समिति चरण, मतदान, दोनों सदनों से पारित होना, राष्ट्रपति की सहमति)।
2. **विधायी प्रक्रिया:** सामान्य विधायी प्रक्रिया (अनुच्छेद 107-111) और धन विधेयक (अनुच्छेद 110) तथा संविधान संशोधन विधेयक (अनुच्छेद 368) की विशिष्टताओं का उल्लेख।
3. **विपक्ष की भूमिका:** लोकतंत्र में विपक्ष के महत्व पर प्रकाश (सरकार पर नियंत्रण, जवाबदेही सुनिश्चित करना, वैकल्पिक नीतियां प्रस्तुत करना, जनहित के मुद्दों को उठाना)।
4. **हालिया घटनाएँ और संसदीय मर्यादाएँ:**
* ‘एंटी-पेपर लीक विधेयक’ और ‘वंदे मातरम विधेयक’ जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों पर हंगामे और बहिर्गमन के बीच पारित होने का संदर्भ।
* संसदीय कार्यवाही से सदस्यों की टिप्पणियों को ‘एक्सपंज’ करने की घटना।
* सदन में लगातार व्यवधान, नारेबाजी और चर्चा के अभाव का विश्लेषण।
* संसदीय मर्यादाओं (जैसे गरिमापूर्ण बहस, नियमों का पालन, अध्यक्ष/सभापति के निर्णयों का सम्मान) के क्षरण के संभावित कारण (राजनीतिक ध्रुवीकरण, चुनावी दबाव, मीडिया की भूमिका)।
5. **निष्कर्ष:** संसदीय लोकतंत्र की मजबूती के लिए विधायी प्रक्रिया में सार्थक चर्चा और विपक्ष की रचनात्मक भूमिका के महत्व पर बल। मर्यादाओं के पालन और स्वस्थ परंपराओं को बढ़ावा देने के लिए सभी हितधारकों की जिम्मेदारी।
स्रोत: Hindustan Times
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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