11 Aug मासिक धर्म स्वच्छता: सरकारी पहलों और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की भूमिका
✎ मासिक धर्म स्वच्छता योजना (MHS) राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य किशोरियों में मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता को बढ़ावा देना है, जिसमें जागरूकता, किफायती उत्पादों की उपलब्धता और…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — सामाजिक न्याय, स्वास्थ्य, मानव संसाधन | GS Paper I — समाज और महिला सशक्तिकरण
- Prelims: मासिक धर्म स्वच्छता योजना (MHS), राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम, महिला स्वास्थ्य, स्वच्छता पहल, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय
- Essay: भारत में महिला स्वास्थ्य और सशक्तिकरण: चुनौतियाँ और समाधान, सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियाँ और उनका सामाजिक-आर्थिक प्रभाव
त्वरित पुनरावृत्ति: मासिक धर्म स्वच्छता योजना (MHS) राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य किशोरियों में मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता को बढ़ावा देना है, जिसमें जागरूकता, किफायती उत्पादों की उपलब्धता और सुरक्षित निपटान पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने हाल ही में राज्यसभा में मासिक धर्म संबंधी स्वास्थ्य और स्वच्छता (MHM) को बढ़ावा देने के लिए की गई विभिन्न पहलों की जानकारी दी। मंत्रालय ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को मासिक धर्म स्वच्छता योजनाओं के लिए सहायता प्रदान की जाती है, और किशोरियों में मासिक धर्म स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए मासिक धर्म स्वच्छता योजना (MHS) का कार्यान्वयन किया जा रहा है। यह जानकारी मासिक धर्म स्वास्थ्य के महत्व और सरकार के प्रयासों को रेखांकित करती है।
पृष्ठभूमि
- भारत में मासिक धर्म स्वच्छता एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है, विशेषकर ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में, जहाँ जागरूकता, पहुंच और सामर्थ्य की कमी है।
- मासिक धर्म से जुड़ी सामाजिक वर्जनाएं और मिथक महिलाओं और लड़कियों के स्वास्थ्य और शिक्षा पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं।
- खराब मासिक धर्म स्वच्छता प्रथाएं प्रजनन पथ के संक्रमण (RTI) और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती हैं।
- संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) में लैंगिक समानता (SDG 5) और अच्छे स्वास्थ्य व कल्याण (SDG 3) शामिल हैं, जो मासिक धर्म स्वास्थ्य से सीधे संबंधित हैं।
- सरकार ने विभिन्न कार्यक्रमों और नीतियों के माध्यम से मासिक धर्म स्वच्छता को संबोधित करने का प्रयास किया है, जिसमें शिक्षा, सैनिटरी उत्पादों की उपलब्धता और सुरक्षित निपटान पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
- मासिक धर्म स्वास्थ्य एवं स्वच्छता प्रबंधन (MHM) एक बहुआयामी विषय है जिसके लिए विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता होती है।
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) भारत सरकार का एक प्रमुख कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य देश में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करना है।
मासिक धर्म स्वच्छता योजना (MHS) और संबंधित पहलें क्या हैं?
- मासिक धर्म स्वच्छता योजना (MHS) स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा किशोरियों में मासिक धर्म स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए लागू की गई है।
- यह योजना जागरूकता पैदा करने, गुणवत्तापूर्ण और किफायती सैनिटरी नैपकिन की उपलब्धता सुनिश्चित करने, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल निपटान को बढ़ावा देने और सुरक्षित मासिक धर्म संबंधी प्रक्रियाओं पर परामर्श प्रदान करने पर केंद्रित है।
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को उनके वार्षिक कार्यक्रम कार्यान्वयन योजनाओं (PIP) के प्रस्तावों के आधार पर मासिक धर्म स्वच्छता योजनाओं के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान की जाती है।
- मंत्रालय स्वास्थ्य सुविधाओं, सामुदायिक मंचों, अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, डिजिटल प्रसार तंत्र और किशोर-केंद्रित कार्यक्रम प्लेटफार्मों के माध्यम से सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) गतिविधियों का संचालन करता है।
- NHM के तहत निगरानी एक सुदृढ़, बहुस्तरीय प्रारूप के माध्यम से की जाती है, जिसमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य परिषद (NPCC) की बैठकों के दौरान अनुमोदित लक्ष्यों के सापेक्ष राज्यवार प्रमुख उपलब्धियों की समीक्षा शामिल है।
- वार्षिक साझा समीक्षा मिशन (CRM) कार्यक्रम कार्यान्वयन, स्वास्थ्य प्रणाली सुदृढ़ीकरण और प्रमुख संकेतकों पर प्रगति का स्वतंत्र, जमीनी आकलन प्रदान करते हैं।
- स्कूली छात्राओं के लिए मासिक धर्म स्वच्छता नीति को राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा संबंधित मंत्रालयों के सहयोग से लागू किया जाता है, ताकि स्कूलों में सुरक्षित, प्रभावी और किफायती मासिक धर्म स्वच्छता उपायों तक पहुंच को बढ़ावा दिया जा सके।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| बहुआयामी एवं अंतर-मंत्रालयी विषय | मासिक धर्म स्वास्थ्य एवं स्वच्छता प्रबंधन (MHM) की जटिल प्रकृति को दर्शाता है, जिसके लिए विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच समन्वय की आवश्यकता होती है। |
| राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत सहायता | राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को मासिक धर्म स्वच्छता योजनाओं के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करता है, जिससे जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन संभव होता है। |
| किशोरियों पर विशेष ध्यान | स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा किशोरियों में मासिक धर्म स्वच्छता को बढ़ावा देने पर केंद्रित है, जो इस आयु वर्ग की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करता है। |
| जागरूकता और शिक्षा पर बल | सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) गतिविधियों, जागरूकता सृजन और संवेदीकरण कार्यक्रमों के माध्यम से गलत धारणाओं को दूर करने और सही जानकारी प्रदान करने का प्रयास। |
| सुरक्षित निपटान और परामर्श | केवल सैनिटरी नैपकिन की उपलब्धता ही नहीं, बल्कि उनके सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल निपटान तथा सुरक्षित मासिक धर्म प्रक्रियाओं पर परामर्श भी प्रदान करता है। |
| सुदृढ़ निगरानी तंत्र | NHM के तहत बहुस्तरीय निगरानी प्रारूप और वार्षिक साझा समीक्षा मिशन (CRM) कार्यक्रम के प्रभावी कार्यान्वयन और प्रगति सुनिश्चित करते हैं। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- मासिक धर्म से जुड़ी वर्जनाओं और मिथकों को तोड़कर महिलाओं और लड़कियों के स्वास्थ्य और गरिमा को बढ़ावा देता है।
- किशोरियों में स्कूल छोड़ने की दर को कम करने में मदद करता है, क्योंकि खराब मासिक धर्म स्वच्छता अक्सर अनुपस्थिति का कारण बनती है।
- महिलाओं और लड़कियों को सामाजिक गतिविधियों में अधिक सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए सशक्त बनाता है।
स्वास्थ्य महत्व
- खराब मासिक धर्म स्वच्छता से होने वाले संक्रमणों (जैसे मूत्र पथ के संक्रमण) के जोखिम को कम करता है।
- महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य में सुधार करता है और दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं से बचाता है।
- सुरक्षित और स्वच्छ उत्पादों तक पहुंच सुनिश्चित करके समग्र स्वास्थ्य परिणामों में सुधार करता है।
आर्थिक महत्व
- महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी को बढ़ावा देता है, जिससे आर्थिक उत्पादकता में वृद्धि होती है।
- स्वास्थ्य देखभाल लागतों को कम करता है जो खराब स्वच्छता प्रथाओं से उत्पन्न होने वाली बीमारियों के इलाज पर खर्च होती हैं।
- स्थानीय स्तर पर सैनिटरी उत्पादों के उत्पादन और वितरण से रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
शासनिक महत्व
- विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच समन्वय के महत्व को रेखांकित करता है, जो समग्र नीति निर्माण और कार्यान्वयन के लिए आवश्यक है।
- केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोगात्मक संघवाद (Cooperative Federalism) का एक उदाहरण प्रस्तुत करता है, जहां राज्य अपनी वार्षिक कार्यक्रम कार्यान्वयन योजनाओं (PIP) के माध्यम से प्रस्ताव प्रस्तुत करते हैं।
चुनौतियाँ
1. जागरूकता और शिक्षा की कमी
- मासिक धर्म से जुड़ी सामाजिक वर्जनाएं और गलत धारणाएं अभी भी व्यापक हैं, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में।
- सही जानकारी और शिक्षा की कमी के कारण अस्वच्छ प्रथाएं जारी रहती हैं।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक मुद्दे, स्वास्थ्य
2. स्वच्छता उत्पादों की पहुंच और सामर्थ्य
- ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण और किफायती सैनिटरी नैपकिन की उपलब्धता एक चुनौती बनी हुई है।
- गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों के लिए इन उत्पादों की लागत एक बाधा हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, स्वास्थ्य
3. बुनियादी ढांचे का अभाव
- स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों पर पर्याप्त और कार्यात्मक शौचालय सुविधाओं की कमी, विशेषकर लड़कियों के लिए।
- इस्तेमाल किए गए सैनिटरी उत्पादों के सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल निपटान के लिए उचित अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों का अभाव।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक मुद्दे, बुनियादी ढांचा
4. अंतर-मंत्रालयी समन्वय
- मासिक धर्म स्वास्थ्य एक बहुआयामी विषय है, जिसके लिए विभिन्न मंत्रालयों (स्वास्थ्य, शिक्षा, जल शक्ति, ग्रामीण विकास) के बीच प्रभावी समन्वय की आवश्यकता होती है।
- जमीनी स्तर पर विभिन्न विभागों के बीच तालमेल बिठाना एक चुनौती हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: शासन, नीति निर्माण
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| सामाजिक वर्जनाएं और मिथक | मासिक धर्म को अपवित्र मानने की धारणाएं लड़कियों को स्कूल जाने और सामाजिक गतिविधियों में भाग लेने से रोकती हैं। |
| स्वच्छता उत्पादों की अनुपलब्धता | विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में, गुणवत्तापूर्ण और किफायती सैनिटरी उत्पादों तक पहुंच का अभाव। |
| अपर्याप्त अपशिष्ट निपटान | इस्तेमाल किए गए सैनिटरी उत्पादों के अनुचित निपटान से पर्यावरणीय प्रदूषण और स्वास्थ्य जोखिम होते हैं। |
| स्कूलों में बुनियादी ढांचे की कमी | लड़कियों के लिए अलग शौचालयों और पानी की अनुपलब्धता मासिक धर्म के दौरान स्कूल छोड़ने का एक प्रमुख कारण है। |
| पुरुषों और लड़कों में जागरूकता की कमी | मासिक धर्म के बारे में पुरुषों और लड़कों में समझ की कमी से समर्थन और संवेदनशीलता का अभाव होता है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (National Health Mission – NHM)
- मासिक धर्म स्वच्छता योजना (Menstrual Hygiene Scheme – MHS)
आगे की राह
- जागरूकता अभियानों को और अधिक व्यापक बनाना, विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में, पुरुषों और लड़कों को भी शामिल करते हुए।
- किफायती और गुणवत्तापूर्ण सैनिटरी उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय उत्पादन और वितरण नेटवर्क को मजबूत करना।
- स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों पर मासिक धर्म के अनुकूल बुनियादी ढांचे (जैसे कार्यात्मक शौचालय, पानी और निपटान सुविधाएं) का निर्माण और रखरखाव करना।
- इस्तेमाल किए गए सैनिटरी उत्पादों के सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल निपटान के लिए प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों को लागू करना।
- पाठ्यक्रम में मासिक धर्म स्वास्थ्य शिक्षा को शामिल करना ताकि कम उम्र से ही सही जानकारी प्रदान की जा सके।
- गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और सामुदायिक आधारित संगठनों (CBOs) के साथ साझेदारी को मजबूत करना ताकि जमीनी स्तर पर पहुंच और प्रभावशीलता बढ़ाई जा सके।
- मासिक धर्म स्वास्थ्य से संबंधित नीतियों और कार्यक्रमों के लिए अंतर-मंत्रालयी समन्वय को और अधिक सुदृढ़ करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
मासिक धर्म स्वच्छता योजना · राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन · किशोरियों का स्वास्थ्य · जन जागरूकता · स्वच्छता प्रबंधन · अंतर-मंत्रालयी समन्वय · स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय · सतत विकास लक्ष्य
अवधारणा प्रवाह
मासिक धर्म से जुड़ी वर्जनाएं और जागरूकता की कमी → अस्वच्छ मासिक धर्म प्रथाएं और स्वास्थ्य जोखिम → राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत मासिक धर्म स्वच्छता योजना (MHS) → जागरूकता, किफायती उत्पादों और सुरक्षित निपटान पर ध्यान → महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य और गरिमा में सुधार
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. मासिक धर्म स्वच्छता योजना (MHS) का उद्देश्य केवल सैनिटरी नैपकिन की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
2. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत मासिक धर्म स्वच्छता योजनाओं के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को सहायता प्रदान की जाती है।
3. मासिक धर्म स्वास्थ्य एवं स्वच्छता प्रबंधन (MHM) एक बहुआयामी और अंतर-मंत्रालयी विषय है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि मासिक धर्म स्वच्छता योजना का उद्देश्य जागरूकता पैदा करना, गुणवत्तापूर्ण और किफायती सैनिटरी नैपकिन की उपलब्धता सुनिश्चित करना, सुरक्षित निपटान और परामर्श प्रदान करना है। कथन 2 सही है क्योंकि NHM के तहत राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को उनके वार्षिक कार्यक्रम कार्यान्वयन योजनाओं के प्रस्तावों के आधार पर सहायता प्रदान की जाती है। कथन 3 सही है क्योंकि MHM एक बहुआयामी और अंतर-मंत्रालयी विषय है जिसके लिए विभिन्न हितधारक मंत्रालयों/विभागों और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा समन्वित कार्यवाही की आवश्यकता होती है।
Q2. अभिकथन (A): केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय किशोरियों में मासिक धर्म स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए मासिक धर्म स्वच्छता योजना (MHS) का कार्यान्वयन करता है।
कारण (R): यह योजना जागरूकता पैदा करने, गुणवत्तापूर्ण और किफायती सैनिटरी नैपकिन की उपलब्धता सुनिश्चित करने और सुरक्षित निपटान पर केंद्रित है।
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय किशोरियों में मासिक धर्म स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए MHS लागू करता है। कारण (R) भी सही है और यह A की सही व्याख्या करता है क्योंकि योजना के मुख्य उद्देश्य जागरूकता, नैपकिन की उपलब्धता और सुरक्षित निपटान पर केंद्रित हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ मासिक धर्म स्वास्थ्य एवं स्वच्छता प्रबंधन (MHM) को बढ़ावा देने में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की भूमिका का परीक्षण करें। इस संदर्भ में, भारत में किशोरियों के स्वास्थ्य में सुधार के लिए अंतर-मंत्रालयी समन्वय के महत्व पर भी चर्चा करें। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: मासिक धर्म स्वास्थ्य एवं स्वच्छता प्रबंधन (MHM) का संक्षिप्त परिचय और इसके बहुआयामी स्वरूप पर प्रकाश डालें।
2. NHM की भूमिका: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत मासिक धर्म स्वच्छता योजना (MHS) के कार्यान्वयन की व्याख्या करें। इसमें NHM द्वारा प्रदान की जाने वाली सहायता, जागरूकता कार्यक्रम, सैनिटरी नैपकिन की उपलब्धता सुनिश्चित करना, सुरक्षित निपटान और परामर्श सेवाओं का उल्लेख करें।
3. निगरानी तंत्र: NHM के तहत निगरानी के सुदृढ़, बहुस्तरीय प्रारूप (जैसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य परिषद (NPCC) की बैठकें और वार्षिक साझा समीक्षा मिशन (CRM)) का वर्णन करें।
4. अंतर-मंत्रालयी समन्वय का महत्व: MHM को एक अंतर-मंत्रालयी विषय के रूप में पहचानें। शिक्षा मंत्रालय (स्कूली छात्राओं के लिए नीति), जल शक्ति मंत्रालय (स्वच्छता सुविधाओं), महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (जागरूकता) जैसे विभिन्न मंत्रालयों/विभागों की भूमिका और उनके बीच समन्वित कार्यवाही की आवश्यकता पर बल दें।
5. किशोरियों के स्वास्थ्य पर प्रभाव: बताएं कि कैसे यह समन्वय किशोरियों के समग्र स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण में सुधार कर सकता है।
6. चुनौतियाँ और आगे की राह: कार्यान्वयन में संभावित चुनौतियों (जैसे जागरूकता की कमी, ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंच, सांस्कृतिक वर्जनाएं) और उन्हें दूर करने के लिए सुझाव (जैसे सामुदायिक भागीदारी, नवाचार) का संक्षिप्त उल्लेख करें।
7. निष्कर्ष: MHM को बढ़ावा देने में NHM और अंतर-मंत्रालयी समन्वय के महत्व को दोहराते हुए एक संतुलित निष्कर्ष प्रस्तुत करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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