20 Jul मिल्लत्ती बीईएसएस परियोजना: अक्टूबर में होगी शुरू, जानें पूरा अपडेट
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अर्थव्यवस्था, आधारभूत संरचना (ऊर्जा) | GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी (नवीकरणीय ऊर्जा)
- Prelims: बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS), नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण, ग्रिड स्थिरीकरण, पीक मांग प्रबंधन, सौर ऊर्जा भंडारण, राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, ऊर्जा सुरक्षा
- Essay: भारत की ऊर्जा सुरक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा का भविष्य, सतत विकास के लिए प्रौद्योगिकी की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण, ग्रिड स्थिरीकरण और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीक है, जो अतिरिक्त बिजली को संग्रहीत कर पीक मांग के समय आपूर्ति करती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
बिजली मंत्री सनी जोसेफ ने घोषणा की है कि केरल के कासरगोड जिले में माइलट्टी और मुल्लेरिया में बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) परियोजनाएं अक्टूबर 2026 तक चालू हो जाएंगी। ये परियोजनाएं राज्य में बिजली संकट को कम करने, वितरण नेटवर्क को अधिक कुशल बनाने और नवीकरणीय ऊर्जा-आधारित बिजली प्रणाली का समर्थन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। माइलट्टी परियोजना 125 MW/500 MWh क्षमता वाली भारत की पहली चार घंटे की बैटरी भंडारण परियोजना है।
पृष्ठभूमि
- भारत में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है, विशेषकर आर्थिक विकास और शहरीकरण के कारण।
- नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) स्रोतों, जैसे सौर और पवन ऊर्जा, का तेजी से विस्तार हो रहा है, लेकिन इनकी आंतरायिकता (Intermittency) ग्रिड स्थिरीकरण के लिए चुनौतियां पैदा करती है।
- पारंपरिक बिजली संयंत्रों पर निर्भरता कम करने और कार्बन उत्सर्जन को घटाने के लिए ऊर्जा भंडारण समाधानों की आवश्यकता है।
- पीक मांग (Peak Demand) के समय बिजली की कमी को पूरा करने और महंगी बाहरी बिजली खरीद पर निर्भरता कम करने के लिए प्रभावी भंडारण प्रणालियां महत्वपूर्ण हैं।
- भारत सरकार ने नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न नीतियां और योजनाएं शुरू की हैं, जिनमें ऊर्जा भंडारण को बढ़ावा देना भी शामिल है।
बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) क्या है?
- बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) एक ऐसी तकनीक है जो रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा के रूप में संग्रहीत करती है और आवश्यकता पड़ने पर इसे वापस ग्रिड में छोड़ती है।
- यह प्रणाली मुख्य रूप से नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों, जैसे सौर और पवन ऊर्जा से उत्पन्न अतिरिक्त बिजली को दिन के समय संग्रहीत करती है।
- संग्रहीत बिजली का उपयोग शाम को या पीक मांग के समय किया जाता है, जब बिजली की खपत अधिक होती है और नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन कम होता है।
- BESS वोल्टेज को स्थिर करने, बिजली की कमी को रोकने और ग्रिड की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद करती है।
- यह बिजली वितरण नेटवर्क को अधिक कुशल बनाती है और बिजली खरीद पर होने वाले वित्तीय बोझ को कम करती है।
- माइलट्टी परियोजना ‘बिल्ड-ओन-ऑपरेट’ (Build-Own-Operate – BOO) मॉडल पर आधारित है, जिसमें डेवलपर परियोजना का निर्माण, स्वामित्व और संचालन करता है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) | अतिरिक्त सौर ऊर्जा का भंडारण और मांग के समय आपूर्ति। |
| क्षमता | 125 MW/500 MWh (मैलट्टी), 15 MW/60 MWh (मुल्लेरिया)। |
| दैनिक भंडारण क्षमता | 5 लाख यूनिट (मैलट्टी), 60,000 यूनिट (मुल्लेरिया)। |
| भारत की पहली 4-घंटे बैटरी भंडारण परियोजना | ऊर्जा भंडारण में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर। |
| परियोजना जीवन | 12 वर्ष। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- महंगी बाहरी बिजली खरीद पर निर्भरता कम होगी, जिससे केरल राज्य विद्युत बोर्ड (KSEBL) का वित्तीय बोझ घटेगा।
- उद्योग, IT, पर्यटन और कृषि क्षेत्रों के विकास को बढ़ावा मिलेगा, जिससे आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) होगी।
- इलेक्ट्रिक वाहन (EV) चार्जिंग अवसंरचना का विस्तार होगा, जो हरित परिवहन को बढ़ावा देगा।
ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता
- राज्य में बिजली संकट को कम करने में मदद मिलेगी।
- वोल्टेज स्थिरीकरण (Voltage Stabilization) सुनिश्चित होगा और बिजली की कमी को रोका जा सकेगा।
- नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) स्रोतों पर आधारित आधुनिक बिजली प्रणाली का समर्थन करेगा।
पर्यावरणीय लाभ
- सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देगा, जिससे कार्बन उत्सर्जन (Carbon Emission) में कमी आएगी।
- जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) पर निर्भरता कम होगी, जो जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के शमन में सहायक है।
तकनीकी प्रगति
- भारत में बड़े पैमाने पर बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रौद्योगिकियों के विकास और अपनाने को बढ़ावा देगा।
- ग्रिड आधुनिकीकरण (Grid Modernization) और स्मार्ट ग्रिड (Smart Grid) समाधानों के लिए मार्ग प्रशस्त करेगा।
चुनौतियाँ
1. उच्च प्रारंभिक लागत
- बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों की स्थापना में प्रारंभिक निवेश काफी अधिक होता है।
- यह परियोजना की वित्तीय व्यवहार्यता (Financial Viability) को प्रभावित कर सकता है, विशेषकर विकासशील देशों में।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था – ऊर्जा क्षेत्र
2. तकनीकी चुनौतियाँ
- बैटरी जीवनकाल, दक्षता और सुरक्षा सुनिश्चित करना एक महत्वपूर्ण चुनौती है।
- विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में व्यवधान का कारण बन सकती है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – ऊर्जा भंडारण
3. भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय मंजूरी
- बड़े पैमाने की परियोजनाओं के लिए पर्याप्त भूमि का अधिग्रहण एक जटिल प्रक्रिया हो सकती है।
- पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (Environmental Impact Assessment) और संबंधित मंजूरियों में देरी परियोजना को बाधित कर सकती है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण – अवसंरचना परियोजनाएँ
4. ग्रिड एकीकरण
- मौजूदा बिजली ग्रिड के साथ BESS का निर्बाध एकीकरण (Seamless Integration) सुनिश्चित करना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
- ग्रिड स्थिरता बनाए रखने के लिए उन्नत नियंत्रण प्रणालियों की आवश्यकता होती है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था – ऊर्जा अवसंरचना
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| लागत व्यवहार्यता | बैटरी प्रौद्योगिकी की उच्च लागत और दीर्घकालिक रखरखाव व्यय। |
| आपूर्ति श्रृंखला निर्भरता | बैटरी घटकों और इनवर्टर के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता। |
| तकनीकी एकीकरण | मौजूदा ग्रिड अवसंरचना के साथ BESS का प्रभावी एकीकरण। |
| नीतिगत और नियामक ढाँचा | ऊर्जा भंडारण के लिए स्पष्ट और सहायक नीतिगत ढाँचे की आवश्यकता। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission)
- नवीकरणीय खरीद दायित्व (Renewable Purchase Obligation – RPO)
आगे की राह
- बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान और विकास (R&D) को बढ़ावा देना, विशेषकर स्वदेशी समाधानों पर ध्यान केंद्रित करना।
- ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं के लिए आकर्षक वित्तीय प्रोत्साहन (Financial Incentives) और सब्सिडी प्रदान करना।
- ग्रिड आधुनिकीकरण और स्मार्ट ग्रिड प्रौद्योगिकियों में निवेश बढ़ाना ताकि BESS का प्रभावी ढंग से एकीकरण किया जा सके।
- ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के लिए एक स्पष्ट और स्थिर नियामक ढाँचा विकसित करना।
- कौशल विकास (Skill Development) कार्यक्रमों के माध्यम से ऊर्जा भंडारण क्षेत्र में प्रशिक्षित कार्यबल तैयार करना।
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnerships) मॉडल को बढ़ावा देना ताकि बड़े पैमाने पर परियोजनाओं को तेजी से लागू किया जा सके।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (Technology Transfer) के माध्यम से सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) · नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण · ग्रिड स्थिरीकरण · ऊर्जा सुरक्षा · पीक डिमांड प्रबंधन · राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन · ऊर्जा संक्रमण · वितरण नेटवर्क दक्षता · सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) · बिल्ड-ओन-ऑपरेट (BOO) मॉडल
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 282’, ‘note’: ‘संघ या राज्य द्वारा अनुदान’}
अवधारणा प्रवाह
सौर ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि → अतिरिक्त ऊर्जा का BESS में भंडारण → शाम की चरम मांग के दौरान आपूर्ति → ग्रिड स्थिरता और विश्वसनीयता में सुधार → बिजली संकट में कमी और वित्तीय बोझ में कटौती → आर्थिक विकास और हरित ऊर्जा को बढ़ावा
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. BESS दिन के समय उत्पन्न अधिशेष सौर ऊर्जा को संग्रहीत कर सकता है और शाम को पीक डिमांड के दौरान इसकी आपूर्ति कर सकता है।
2. यह ग्रिड को स्थिर करने और बिजली की कमी को रोकने में सहायता करता है।
3. भारत में अपनी तरह की पहली चार घंटे की बैटरी भंडारण परियोजना 220 kV मायलट्टी सबस्टेशन, केरल में स्थापित की जा रही है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि BESS का प्राथमिक कार्य अधिशेष ऊर्जा का भंडारण और आवश्यकता पड़ने पर उसकी आपूर्ति करना है। कथन 2 भी सही है, क्योंकि यह ग्रिड को स्थिर करने और बिजली की कमी को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कथन 3 भी सही है, क्योंकि मायलट्टी परियोजना भारत की पहली चार घंटे की बैटरी भंडारण परियोजना है।
Q2. भारत में ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के विकास को बढ़ावा देने के लिए निम्नलिखित में से कौन-सी सरकारी पहलें हैं?
1. राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission)
2. उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना
3. राष्ट्रीय ऊर्जा भंडारण मिशन (National Energy Storage Mission)
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का उद्देश्य हरित हाइड्रोजन के उत्पादन को बढ़ावा देना है, जिसमें ऊर्जा भंडारण एक महत्वपूर्ण घटक है। उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना उन्नत रसायन सेल (ACC) बैटरी के निर्माण के लिए प्रोत्साहन प्रदान करती है, जो ऊर्जा भंडारण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। राष्ट्रीय ऊर्जा भंडारण मिशन का उद्देश्य देश में ऊर्जा भंडारण के विकास को बढ़ावा देना है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण और ग्रिड स्थिरीकरण में बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (BESS) की भूमिका का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। इस संदर्भ में, सरकार द्वारा ऊर्जा भंडारण को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए कदमों पर भी प्रकाश डालिए। (250 शब्द)
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में BESS की भूमिका का विश्लेषण करें, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण, ग्रिड स्थिरीकरण, पीक डिमांड प्रबंधन और ऊर्जा सुरक्षा में इसके महत्व पर जोर दिया जाए। दूसरे भाग में, भारत सरकार द्वारा ऊर्जा भंडारण को बढ़ावा देने के लिए की गई पहलों का उल्लेख करें, जैसे राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, PLI योजना और राष्ट्रीय ऊर्जा भंडारण मिशन। निष्कर्ष में, भारत के ऊर्जा संक्रमण लक्ष्यों को प्राप्त करने में BESS के महत्व को रेखांकित करें।
स्रोत: The Hindu
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