22 Sep यूएस एफ-35 सहित वैश्विक हवाई ताकतों का जोधपुर में ‘तरंग शक्ति’ युद्धाभ्यास में प्रदर्शन
✎ अभ्यास तरंग शक्ति भारतीय वायु सेना द्वारा आयोजित एक बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास है जिसका उद्देश्य अंतर-संचालनीयता बढ़ाना और मित्र देशों के साथ रक्षा सहयोग को मजबूत करना है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS पेपर II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह तथा भारत से जुड़े और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार। | GS पेपर III — आंतरिक सुरक्षा: विभिन्न सुरक्षा बल और एजेंसियां तथा उनके अधिदेश।
- Prelims: अभ्यास तरंग शक्ति, भारतीय वायु सेना (IAF), बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास, F-35 स्टील्थ फाइटर जेट, अंतर-संचालनीयता (Interoperability), वीर गार्जियन अभ्यास
- Essay: भारत की बढ़ती वैश्विक रणनीतिक साझेदारी और सुरक्षा सहयोग।, रक्षा कूटनीति: शांति और सुरक्षा के लिए एक उपकरण।
त्वरित पुनरावृत्ति: अभ्यास तरंग शक्ति भारतीय वायु सेना द्वारा आयोजित एक बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास है जिसका उद्देश्य अंतर-संचालनीयता बढ़ाना और मित्र देशों के साथ रक्षा सहयोग को मजबूत करना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारतीय वायु सेना (IAF) ने घोषणा की है कि दूसरा ‘अभ्यास तरंग शक्ति’ 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक जोधपुर वायु सेना स्टेशन पर आयोजित किया जाएगा। इस बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास में संयुक्त राज्य अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, श्रीलंका और संयुक्त अरब अमीरात सहित सात विदेशी राष्ट्र भाग लेंगे। इस अभ्यास का उद्देश्य भारत की रक्षा शक्ति का प्रदर्शन करना और विभिन्न वायु सेनाओं के बीच अंतर-संचालनीयता (Interoperability) को बढ़ावा देना है।
पृष्ठभूमि
- ‘अभ्यास तरंग शक्ति’ भारतीय वायु सेना द्वारा आयोजित एक प्रमुख बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास है।
- इस अभ्यास का पहला संस्करण 2024 में दो चरणों में सुलूर (तमिलनाडु) और जोधपुर में आयोजित किया गया था, जिसमें यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी और फ्रांस सहित कई देशों के लड़ाकू विमानों ने भाग लिया था।
- यह अभ्यास भारत की रक्षा कूटनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका उद्देश्य मित्र देशों के साथ सैन्य सहयोग और समन्वय को मजबूत करना है।
- इस तरह के अभ्यास विभिन्न देशों की वायु सेनाओं को एक-दूसरे की परिचालन प्रक्रियाओं, रणनीति और प्रौद्योगिकियों को समझने का अवसर प्रदान करते हैं।
- यह अभ्यास ‘वीर गार्जियन’ अभ्यास के तुरंत बाद हो रहा है, जो भारत और जापान की वायु सेनाओं के बीच एक द्विपक्षीय हवाई अभ्यास था, जो उसी स्थान पर 9 से 22 सितंबर तक आयोजित किया गया था।
अभ्यास तरंग शक्ति क्या है?
- ‘अभ्यास तरंग शक्ति’ भारतीय वायु सेना द्वारा आयोजित एक बहुराष्ट्रीय हवाई सैन्य अभ्यास है, जिसमें कई देशों की वायु सेनाएं भाग लेती हैं।
- इसका प्राथमिक उद्देश्य भाग लेने वाले देशों की वायु सेनाओं के बीच अंतर-संचालनीयता (Interoperability) को बढ़ाना और सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान करना है।
- यह अभ्यास संयुक्त सामरिक युद्धाभ्यास (Joint Tactical Manoeuvres) और हवाई युद्ध कौशल का प्रदर्शन करने का एक मंच प्रदान करता है।
- इस अभ्यास में भारतीय वायु सेना राफेल, मिराज-2000, जगुआर, तेजस, MiG-29 और Su-30 MKI जैसे अपने प्रमुख हवाई संपत्तियों का प्रदर्शन करेगी।
- विदेशी वायु सेनाएं भी अपने उन्नत विमानों का प्रदर्शन करेंगी, जैसे अमेरिका का F-35 स्टील्थ फाइटर, फ्रांस का राफेल, UAE का F-16 और बांग्लादेश का C-130J।
- यह अभ्यास भारत की बढ़ती रक्षा क्षमताओं और वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को रेखांकित करता है।
- यह भारत को एक प्रमुख रक्षा भागीदार के रूप में स्थापित करने में मदद करता है और क्षेत्रीय तथा वैश्विक सुरक्षा में योगदान देता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| बहुराष्ट्रीय वायु अभ्यास | विभिन्न देशों की वायु सेनाओं के बीच समन्वय और अंतरसंचालनीयता (Interoperability) में वृद्धि। |
| F-35 स्टील्थ फाइटर जेट की भागीदारी | अमेरिकी वायु सेना की उन्नत तकनीकों और क्षमताओं का प्रदर्शन, जो भारतीय वायु सेना के लिए सीखने का अवसर प्रदान करता है। |
| विभिन्न प्रकार के विमानों का प्रदर्शन | भारत (राफेल, मिराज-2000, जगुआर, तेजस, मिग-29, Su-30 MKI) और अन्य देशों के आधुनिक विमानों की क्षमताओं का प्रदर्शन। |
| जोधपुर वायु सेना स्टेशन पर आयोजन | भारत की रक्षा तैयारियों और रणनीतिक स्थानों के महत्व को उजागर करता है। |
| वीर गार्जियन अभ्यास के तुरंत बाद | भारत की लगातार सैन्य कूटनीति और क्षेत्रीय सुरक्षा में सक्रिय भूमिका को दर्शाता है। |
महत्व
सामरिक महत्व
- अंतरसंचालनीयता में वृद्धि: यह अभ्यास विभिन्न देशों की वायु सेनाओं के बीच समन्वय और अंतरसंचालनीयता को बढ़ाता है, जो भविष्य के संयुक्त अभियानों के लिए महत्वपूर्ण है।
- रक्षा कूटनीति: यह भारत को एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय शक्ति के रूप में स्थापित करता है और मित्र देशों के साथ रक्षा संबंधों को मजबूत करता है।
- तकनीकी आदान-प्रदान: उन्नत लड़ाकू विमानों, जैसे F-35, की भागीदारी से भारतीय वायु सेना को नवीनतम सैन्य प्रौद्योगिकियों और रणनीतियों को समझने का अवसर मिलता है।
सुरक्षा महत्व
- वायु रक्षा क्षमताओं का प्रदर्शन: यह अभ्यास भारतीय वायु सेना की परिचालन तत्परता और विभिन्न प्रकार के विमानों को संभालने की क्षमता को प्रदर्शित करता है।
- क्षेत्रीय स्थिरता: संयुक्त अभ्यास क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देते हैं, जिससे किसी भी संभावित खतरे का मुकाबला करने की सामूहिक क्षमता बढ़ती है।
आर्थिक महत्व
- रक्षा उद्योग को प्रोत्साहन: ऐसे अभ्यासों में स्वदेशी विमानों (जैसे तेजस) का प्रदर्शन भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देता है और निर्यात के अवसर पैदा करता है।
- निवेश और सहयोग: रक्षा सहयोग से संबंधित समझौतों और निवेश के अवसरों को बढ़ावा मिल सकता है।
चुनौतियाँ
1. तकनीकी एकीकरण
- विभिन्न देशों के विमानों और प्रणालियों के बीच तकनीकी अंतर को पाटना एक चुनौती हो सकती है।
- संचार प्रोटोकॉल और डेटा साझाकरण में मानकीकरण की आवश्यकता होती है।
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा और रक्षा प्रौद्योगिकी
2. लॉजिस्टिक्स और समन्वय
- इतने बड़े पैमाने पर बहुराष्ट्रीय अभ्यास के लिए व्यापक लॉजिस्टिक्स योजना और समन्वय की आवश्यकता होती है।
- विभिन्न देशों के कर्मियों और उपकरणों का प्रबंधन एक जटिल कार्य है।
यूपीएससी लिंक: रक्षा प्रबंधन और आपदा प्रबंधन
3. गोपनीयता और सूचना सुरक्षा
- संवेदनशील सैन्य जानकारी और रणनीतियों को साझा करते समय गोपनीयता बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
- साइबर सुरक्षा खतरों से बचाव भी एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: साइबर सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा
4. भू-राजनीतिक संवेदनशीलता
- कुछ देशों की भागीदारी अन्य क्षेत्रीय शक्तियों के लिए भू-राजनीतिक संवेदनशीलता पैदा कर सकती है।
- अभ्यास के उद्देश्यों को स्पष्ट रूप से संप्रेषित करना महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध और भारत की विदेश नीति
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| विभिन्न प्रणालियों की अंतरसंचालनीयता | विभिन्न देशों के विमानों और संचार प्रणालियों के बीच सहज एकीकरण सुनिश्चित करना। |
| सुरक्षा प्रोटोकॉल का मानकीकरण | संयुक्त अभियानों के दौरान सभी प्रतिभागियों के लिए एक समान सुरक्षा मानकों को बनाए रखना। |
| संसाधन आवंटन | बड़े पैमाने पर अभ्यास के लिए आवश्यक वित्तीय और मानवीय संसाधनों का कुशल प्रबंधन। |
| प्रशिक्षण का स्तर | विभिन्न देशों के पायलटों और ग्राउंड क्रू के प्रशिक्षण स्तरों में भिन्नता को समायोजित करना। |
| पर्यावरणीय प्रभाव | सैन्य अभ्यासों से होने वाले पर्यावरणीय प्रभावों को कम करना और स्थायी प्रथाओं को अपनाना। |
आगे की राह
- अंतरसंचालनीयता बढ़ाने के लिए मानकीकृत प्रक्रियाओं और प्रोटोकॉल पर ध्यान केंद्रित करना।
- संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से तकनीकी और सामरिक ज्ञान का आदान-प्रदान बढ़ाना।
- रक्षा कूटनीति को मजबूत करने और क्षेत्रीय सुरक्षा में भारत की भूमिका को और बढ़ाने के लिए ऐसे अभ्यासों की आवृत्ति बढ़ाना।
- स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों और प्लेटफार्मों को ऐसे बहुराष्ट्रीय अभ्यासों में अधिक प्रमुखता से प्रदर्शित करना।
- साइबर सुरक्षा और सूचना साझाकरण के लिए मजबूत तंत्र विकसित करना।
- अभ्यास के पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने के लिए हरित प्रौद्योगिकियों और टिकाऊ प्रथाओं को अपनाना।
- छोटे और मध्यम आकार के देशों के साथ रक्षा सहयोग को बढ़ावा देना ताकि उनकी क्षमताओं का निर्माण हो सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
बहुपक्षीय सैन्य अभ्यास · अभ्यास तरंग शक्ति · वायु सेना · रक्षा सहयोग · अंतर-संचालनीयता · सैन्य कूटनीति · रणनीतिक साझेदारी · भारत की रक्षा क्षमताएँ
अवधारणा प्रवाह
बहुराष्ट्रीय वायु अभ्यास ‘तरंग शक्ति’ का आयोजन → विभिन्न देशों की वायु सेनाओं की भागीदारी → अंतरसंचालनीयता और रक्षा कूटनीति में वृद्धि → तकनीकी ज्ञान और सामरिक क्षमताओं का आदान-प्रदान → भारत की क्षेत्रीय सुरक्षा भूमिका का सुदृढीकरण
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. अभ्यास तरंग शक्ति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह भारतीय वायु सेना द्वारा आयोजित एक द्विपक्षीय हवाई अभ्यास है।
2. इस अभ्यास का उद्देश्य भाग लेने वाले देशों के बीच अंतर-संचालनीयता को बढ़ावा देना है।
3. F-35 स्टील्थ फाइटर जेट पहली बार इस अभ्यास में प्रदर्शित किया जाएगा।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि अभ्यास तरंग शक्ति एक बहुपक्षीय हवाई अभ्यास है, द्विपक्षीय नहीं। कथन 2 सही है क्योंकि अभ्यास का मुख्य उद्देश्य अंतर-संचालनीयता (interoperability) को बढ़ावा देना है। कथन 3 सही है क्योंकि F-35 स्टील्थ फाइटर जेट पहली बार अभ्यास तरंग शक्ति में प्रदर्शित किया जाएगा, हालांकि यह पहले Aero India 2025 में भाग ले चुका है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा देश अभ्यास तरंग शक्ति के दूसरे संस्करण में भाग नहीं ले रहा है?
- बांग्लादेश
- श्रीलंका
- जापान
- संयुक्त अरब अमीरात
उत्तर: जापान — जापान ने हाल ही में भारत के साथ ‘वीर गार्जियन’ नामक द्विपक्षीय हवाई अभ्यास में भाग लिया था, लेकिन वह अभ्यास तरंग शक्ति के दूसरे संस्करण में भाग लेने वाले सात विदेशी राष्ट्रों में शामिल नहीं है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ बहुपक्षीय सैन्य अभ्यास भारत की रक्षा कूटनीति और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अभ्यास तरंग शक्ति के संदर्भ में इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए और भारत की रक्षा क्षमताओं पर इसके प्रभावों पर चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर कंकाल:
1. **परिचय:** बहुपक्षीय सैन्य अभ्यासों का महत्व और भारत के लिए उनकी प्रासंगिकता का संक्षिप्त परिचय। अभ्यास तरंग शक्ति का उल्लेख।
2. **अभ्यास तरंग शक्ति का संदर्भ:**
* आयोजन स्थल और अवधि (जोधपुर, 26 सितंबर से 12 अक्टूबर)।
* भाग लेने वाले देश (अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, श्रीलंका, यूएई)।
* भारत द्वारा प्रदर्शित विमान (राफेल, मिराज-2000, जगुआर, तेजस, मिग-29, Su-30 MKI)।
* विदेशी विमानों की भागीदारी (F-35, राफेल, F-16, C-130J)।
3. **रक्षा कूटनीति और रणनीतिक साझेदारी में भूमिका:**
* **अंतर-संचालनीयता (Interoperability):** विभिन्न वायु सेनाओं के बीच समन्वय और संचार में वृद्धि।
* **सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान:** तकनीकी ज्ञान और सामरिक कौशल साझा करना।
* **विश्वास निर्माण:** भाग लेने वाले देशों के बीच आपसी समझ और विश्वास को बढ़ावा देना।
* **क्षेत्रीय सुरक्षा:** साझा सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए सामूहिक क्षमता का प्रदर्शन।
* **भारत की वैश्विक स्थिति:** एक जिम्मेदार और सक्षम रक्षा भागीदार के रूप में भारत की छवि को मजबूत करना।
4. **भारत की रक्षा क्षमताओं पर प्रभाव:**
* **आधुनिकीकरण और उन्नयन:** नवीनतम सैन्य तकनीकों और रणनीतियों से परिचित होना।
* **प्रशिक्षण और अनुभव:** भारतीय पायलटों और कर्मियों के लिए उच्च-तीव्रता वाले संयुक्त सामरिक युद्धाभ्यास का अनुभव।
* **स्वदेशीकरण को प्रोत्साहन:** स्वदेशी रक्षा उत्पादन (जैसे तेजस) को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने का अवसर।
* **खतरे का निवारण:** संभावित विरोधियों के लिए एक मजबूत निवारक के रूप में कार्य करना।
5. **समालोचनात्मक परीक्षण/चुनौतियाँ:**
* तकनीकी जानकारी के रिसाव का जोखिम।
* विभिन्न देशों के बीच सामरिक सिद्धांतों में अंतर।
* भू-राजनीतिक संवेदनशीलताएँ और गठबंधन की धारणाएँ।
* लागत और संसाधनों का उपयोग।
6. **निष्कर्ष:** बहुपक्षीय अभ्यासों का समग्र महत्व और भारत की रक्षा और विदेश नीति के लिए उनका भविष्य का दृष्टिकोण।
स्रोत: orissapost.com
Rajasthan PCS (RPSC / RAS) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: राजस्थान के जोधपुर में आयोजित होने वाले बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास ‘तरंग शक्ति’ में शामिल होने वाले अमेरिकी स्टील्थ फाइटर विमान ‘F-35’ के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (1) F-35 पांचवी पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान है। (2) यह विमान अमेरिका द्वारा विकसित किया गया है। (3) इस अभ्यास में F-35 विमान की भागीदारी भारत के लिए रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल (1) और (2)
- केवल (2) और (3)
- केवल (1) और (3)
- सभी (1), (2) और (3)
उत्तर: सभी (1), (2) और (3) — F-35 पांचवी पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान है, जिसे अमेरिका द्वारा विकसित किया गया है। इस अभ्यास में इसकी भागीदारी रक्षा क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को दर्शाती है, न कि सीधे आत्मनिर्भरता को।
Mains: अभ्यास ‘तरंग शक्ति’ में अमेरिकी स्टील्थ फाइटर विमान F-35 की भागीदारी राजस्थान के सैन्य एवं रणनीतिक महत्व को किस प्रकार बढ़ाती है? अपने उत्तर में F-35 की तकनीकी विशेषताओं तथा अभ्यास के उद्देश्यों का विश्लेषण कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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