18 Sep यूपी सीएम योगी और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री की बैठक: एनसीआर प्रदूषण नियंत्रण पर ध्यान
✎ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें वाहन उत्सर्जन, औद्योगिक प्रदूषण, धूल और अपशिष्ट प्रबंधन पर केंद्रित एक समन्वित कार्य योजना पर काम कर रही हैं, जिसका समन्वय वायु गुणवत्ता प्रबंधन…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी | GS Paper II — शासन और नीतियां
- Prelims: वायु प्रदूषण, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR), वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM), वाहनों से होने वाला उत्सर्जन, औद्योगिक प्रदूषण, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, निर्माण और विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन नियम
- Essay: पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास, संघवाद और अंतर-राज्यीय सहयोग
त्वरित पुनरावृत्ति: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें वाहन उत्सर्जन, औद्योगिक प्रदूषण, धूल और अपशिष्ट प्रबंधन पर केंद्रित एक समन्वित कार्य योजना पर काम कर रही हैं, जिसका समन्वय वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) द्वारा किया जा रहा है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) से जुड़े उत्तर प्रदेश के आठ जिलों में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए एक समन्वित कार्य योजना पर चर्चा की गई। इस बैठक में वाहन उत्सर्जन, औद्योगिक प्रदूषण, धूल प्रदूषण और अपशिष्ट प्रबंधन जैसे प्रमुख मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया गया। केंद्र और राज्य सरकारें NCR में वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए मिलकर काम कर रही हैं।
पृष्ठभूमि
- राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण एक गंभीर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी चिंता का विषय है, खासकर सर्दियों के महीनों में।
- वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में वाहनों से होने वाला उत्सर्जन, औद्योगिक गतिविधियाँ, निर्माण और विध्वंस कार्य से उत्पन्न धूल, फसल अवशेष जलाना (पराली जलाना) और ठोस अपशिष्ट शामिल हैं।
- केंद्र सरकार ने NCR में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) का गठन किया है, जो विभिन्न राज्यों और हितधारकों के साथ समन्वय स्थापित करता है।
- उत्तर प्रदेश के आठ जिले (नोएडा, गाजियाबाद, हापुड़, मेरठ, बुलंदशहर आदि) NCR का हिस्सा हैं और यहाँ की वायु गुणवत्ता का सीधा प्रभाव दिल्ली-NCR पर पड़ता है।
- प्रदूषण नियंत्रण के लिए पुरानी गाड़ियों पर कार्रवाई, नई इलेक्ट्रिक वाहन (EV) नीति का कार्यान्वयन, इलेक्ट्रिक बसों की तैनाती और अनिवार्य प्रदूषण प्रमाण पत्र जैसे उपाय विचाराधीन हैं।
- औद्योगिक प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए लगभग 80 प्रतिशत उद्योगों में ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (OCEMS) और वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरण स्थापित किए गए हैं।
वायु प्रदूषण नियंत्रण हेतु प्रमुख पहलें और उपाय
- वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM): यह आयोग NCR और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए एक वैधानिक निकाय है, जो विभिन्न राज्यों के बीच समन्वय स्थापित करता है और प्रदूषण नियंत्रण के लिए नीतियां व कार्य योजनाएं बनाता है।
- वाहनों से होने वाला उत्सर्जन नियंत्रण: इसमें पुरानी गाड़ियों को चरणबद्ध तरीके से हटाना, इलेक्ट्रिक वाहन नीति को बढ़ावा देना, सार्वजनिक परिवहन में इलेक्ट्रिक बसों का उपयोग बढ़ाना और एग्रीगेटर द्वारा संचालित वाहनों के लिए प्रदूषण मानकों को विनियमित करना शामिल है।
- औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण: उद्योगों में ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (OCEMS) और वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों को अनिवार्य करना तथा शेष उद्योगों में भी इनके कार्यान्वयन को सुनिश्चित करना।
- धूल प्रदूषण नियंत्रण: मशीनीकृत और डीप क्लीनिंग के माध्यम से सड़कों और सार्वजनिक स्थानों से धूल हटाने के लिए विस्तृत कार्य योजनाएं तैयार करना। निर्माण और विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का सख्ती से पालन करना।
- अपशिष्ट प्रबंधन: ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम (Solid Waste Management Rules) और निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन नियम (Construction and Demolition Waste Management Rules) का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करना, जिसमें हितधारकों के साथ परामर्श कार्यक्रम आयोजित करना शामिल है।
- पराली प्रबंधन: केंद्र सरकार विभिन्न राज्यों के कृषि विभागों के साथ मिलकर फसल अवशेष जलाने (पराली जलाने) की समस्या के समाधान के लिए समन्वय कर रही है।
- अंतर-राज्यीय सहयोग: NCR के भीतर आने वाले सभी राज्यों (उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, पंजाब) के मुख्यमंत्रियों और संबंधित विभागों के साथ नियमित बैठकें आयोजित कर प्रदूषण नियंत्रण उपायों को मजबूत करना।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| समन्वित कार्य योजना | वायु प्रदूषण से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोग को बढ़ावा देती है। |
| NCR के 8 जिलों पर ध्यान | राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए लक्षित दृष्टिकोण सुनिश्चित करता है। |
| वाहनों से होने वाले उत्सर्जन पर नियंत्रण | पुराने वाहनों पर कार्रवाई, EV नीति और इलेक्ट्रिक बसों के माध्यम से प्रदूषण के एक प्रमुख स्रोत को संबोधित करता है। |
| औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण | उद्योगों में ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (OCEMS) और वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों के उपयोग को बढ़ावा देता है। |
| धूल प्रदूषण में कमी | यांत्रिक और गहन सफाई के माध्यम से धूल के कणों को कम करने पर केंद्रित है। |
| ठोस अपशिष्ट और निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन | अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के प्रभावी कार्यान्वयन पर जोर देता है, जो समग्र वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए महत्वपूर्ण है। |
महत्व
पर्यावरण
- राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु गुणवत्ता में सुधार होगा, जिससे निवासियों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
- वाहनों, उद्योगों और धूल से होने वाले प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों को लक्षित करके समग्र पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा।
- ठोस अपशिष्ट और निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट (Construction and Demolition Waste) के बेहतर प्रबंधन से प्रदूषण में कमी आएगी और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण होगा।
शासन
- केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोग और समन्वय को मजबूत करता है, जो जटिल पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक है।
- विभिन्न विभागों और हितधारकों के साथ परामर्श कार्यक्रमों के माध्यम से नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करता है।
- कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) जैसी संस्थाओं की भूमिका को मजबूत करता है, जो क्षेत्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
सामाजिक
- स्वच्छ वायु तक पहुंच में सुधार करके नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाता है, विशेषकर संवेदनशील आबादी के लिए।
- प्रदूषण से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं जैसे श्वसन संबंधी बीमारियों और अन्य दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभावों को कम करने में मदद करता है।
- पर्यावरण के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देता है, जिससे सामुदायिक भागीदारी में वृद्धि होती है।
चुनौतियाँ
1. अंतर-राज्यीय समन्वय
- NCR में कई राज्य शामिल हैं, और प्रभावी प्रदूषण नियंत्रण के लिए सभी राज्यों के बीच मजबूत समन्वय की आवश्यकता है।
- विभिन्न राज्यों की प्राथमिकताएं और संसाधन भिन्न हो सकते हैं, जिससे एक समान कार्यान्वयन में बाधा आ सकती है।
यूपीएससी लिंक: शासन, संघवाद
2. कार्यान्वयन और प्रवर्तन
- कठोर नियमों और नीतियों के बावजूद, जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्यान्वयन और प्रवर्तन एक चुनौती बना हुआ है।
- पर्याप्त जनशक्ति, तकनीकी विशेषज्ञता और निगरानी प्रणालियों की कमी कार्यान्वयन को प्रभावित कर सकती है।
यूपीएससी लिंक: शासन, पर्यावरण संरक्षण
3. तकनीकी और वित्तीय बाधाएं
- प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों की स्थापना, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और अपशिष्ट प्रबंधन बुनियादी ढांचे के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय निवेश की आवश्यकता है।
- पुरानी तकनीकों को बदलने और नई, स्वच्छ तकनीकों को अपनाने में तकनीकी चुनौतियां आ सकती हैं।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
4. जन जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन
- लोगों के व्यवहार में बदलाव लाना, जैसे कि व्यक्तिगत वाहनों का कम उपयोग या अपशिष्ट का उचित निपटान, एक बड़ी चुनौती है।
- पराली जलाने (Stubble burning) जैसी कृषि पद्धतियों को बदलने के लिए किसानों के बीच जागरूकता और वैकल्पिक समाधानों की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक मुद्दे, पर्यावरण
5. डेटा की उपलब्धता और सटीकता
- प्रदूषण के स्रोतों की पहचान करने और नीतियों की प्रभावशीलता का आकलन करने के लिए सटीक और वास्तविक समय के डेटा की आवश्यकता होती है।
- डेटा संग्रह और विश्लेषण में अंतराल प्रभावी निर्णय लेने में बाधा डाल सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: शासन, डेटा आधारित निर्णय
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| वाहनों से होने वाला उत्सर्जन | पुराने वाहनों, प्रदूषण प्रमाण पत्रों की कमी और एग्रीगेटर्स द्वारा संचालित वाहनों का विनियमन एक चुनौती है। |
| औद्योगिक प्रदूषण | सभी उद्योगों में ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (OCEMS) और वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों की स्थापना सुनिश्चित करना। |
| धूल प्रदूषण | निर्माण गतिविधियों, सड़कों और खुले स्थानों से उत्पन्न धूल को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी यांत्रिक और गहन सफाई की आवश्यकता। |
| ठोस अपशिष्ट प्रबंधन | ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का प्रभावी कार्यान्वयन और अपशिष्ट के अनुचित निपटान को रोकना। |
| निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन | निर्माण और विध्वंस अपशिष्ट के उचित निपटान और पुनर्चक्रण के लिए नियमों का पालन सुनिश्चित करना। |
| पराली जलाना | कृषि अवशेषों को जलाने से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए वैकल्पिक समाधानों और किसानों के साथ समन्वय की आवश्यकता। |
आगे की राह
- NCR के सभी राज्यों के बीच एक मजबूत और संस्थागत समन्वय तंत्र स्थापित करना।
- प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों, जैसे वाहनों, उद्योगों और निर्माण गतिविधियों पर कठोर निगरानी और प्रवर्तन सुनिश्चित करना।
- इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को अपनाने के लिए प्रोत्साहन और बुनियादी ढांचे का विस्तार करना।
- अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करना और अपशिष्ट से ऊर्जा (Waste-to-Energy) परियोजनाओं को बढ़ावा देना।
- पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए किसानों को वैकल्पिक फसल अवशेष प्रबंधन तकनीकों के लिए प्रोत्साहित करना और सहायता प्रदान करना।
- वायु गुणवत्ता डेटा संग्रह, विश्लेषण और सार्वजनिक रिपोर्टिंग प्रणालियों को मजबूत करना।
- नागरिकों और हितधारकों के बीच वायु प्रदूषण के खतरों और नियंत्रण उपायों के बारे में जागरूकता बढ़ाना।
- प्रदूषण नियंत्रण के लिए अनुसंधान और विकास में निवेश करना तथा नई तकनीकों को अपनाना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण · वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) · वाहनों से होने वाला उत्सर्जन · औद्योगिक प्रदूषण · धूल प्रदूषण · ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम · निर्माण और विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन नियम · राज्य और केंद्र समन्वय · पराली जलाना · सतत विकास
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और सुधार’}
अवधारणा प्रवाह
NCR में वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या → केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय बैठक → वाहनों, उद्योगों, धूल और अपशिष्ट पर केंद्रित कार्य योजना → प्रदूषण नियंत्रण उपायों का कार्यान्वयन और निगरानी → NCR में वायु गुणवत्ता में सुधार → नागरिकों के स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता में वृद्धि
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) एक सांविधिक निकाय है जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण से संबंधित मुद्दों से निपटने के लिए स्थापित किया गया है।
2. CAQM के पास केवल सलाहकारी शक्तियाँ हैं और यह प्रदूषण नियंत्रण के लिए बाध्यकारी निर्देश जारी नहीं कर सकता।
3. ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016, शहरी स्थानीय निकायों के लिए अपशिष्ट के पृथक्करण, संग्रहण, प्रसंस्करण और निपटान को अनिवार्य बनाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। CAQM एक सांविधिक निकाय है जिसे वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 के तहत स्थापित किया गया है। कथन 2 गलत है। CAQM के पास व्यापक शक्तियाँ हैं, जिसमें निर्देश जारी करना और नियमों को लागू करना शामिल है, जो बाध्यकारी होते हैं। कथन 3 सही है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016, शहरी स्थानीय निकायों के लिए अपशिष्ट प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं को अनिवार्य करते हैं। अतः, केवल दो कथन सही हैं।
Q2. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण के प्रमुख कारणों में शामिल हैं:
1. वाहनों से होने वाला उत्सर्जन
2. औद्योगिक प्रदूषण
3. धूल प्रदूषण (निर्माण और विध्वंस गतिविधियों से)
4. पराली जलाना
उपर्युक्त में से कौन से कारक NCR में वायु प्रदूषण के लिए उत्तरदायी हैं?
- केवल 1, 2 और 3
- केवल 2, 3 और 4
- केवल 1, 3 और 4
- 1, 2, 3 और 4
उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — NCR में वायु प्रदूषण के लिए वाहनों से होने वाला उत्सर्जन, औद्योगिक प्रदूषण, धूल प्रदूषण (निर्माण और विध्वंस गतिविधियों से), और पराली जलाना सभी प्रमुख कारक हैं। ये सभी मिलकर क्षेत्र की वायु गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण एक गंभीर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। इस समस्या से निपटने में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** NCR में वायु प्रदूषण की गंभीरता और इसके बहुआयामी प्रभावों का संक्षिप्त उल्लेख।
2. **समस्या के कारण:** वाहनों का उत्सर्जन, औद्योगिक प्रदूषण, धूल प्रदूषण, पराली जलाना, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की कमी जैसे प्रमुख कारणों को रेखांकित करें।
3. **केंद्र और राज्य समन्वय की आवश्यकता:**
* वायु प्रदूषण की सीमा-पार प्रकृति (inter-state nature) पर जोर दें।
* राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) जैसे सांविधिक निकायों की भूमिका।
* विभिन्न राज्यों (उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, पंजाब) के बीच साझा रणनीति और नीतियों की आवश्यकता।
4. **समन्वय के प्रमुख क्षेत्र:**
* **वाहनों से होने वाला उत्सर्जन:** पुरानी गाड़ियों पर कार्रवाई, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) नीति का कार्यान्वयन, सार्वजनिक परिवहन का विस्तार, प्रदूषण प्रमाण पत्र।
* **औद्योगिक प्रदूषण:** ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (OCEMS), प्रदूषण नियंत्रण उपकरण, स्वच्छ ईंधन का उपयोग।
* **धूल प्रदूषण:** मशीनीकृत सफाई, निर्माण और विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का सख्त कार्यान्वयन।
* **अपशिष्ट प्रबंधन:** ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का प्रभावी कार्यान्वयन, अपशिष्ट-से-ऊर्जा संयंत्र।
* **पराली प्रबंधन:** कृषि विभागों के साथ समन्वय, वैकल्पिक फसलें, इन-सीटू और एक्स-सीटू प्रबंधन तकनीकें।
5. **चुनौतियाँ और बाधाएँ:** राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी, धन की कमी, कार्यान्वयन में अंतर-राज्यीय असमानताएँ, तकनीकी क्षमता का अभाव।
6. **आगे की राह/सुझाव:** दीर्घकालिक समाधानों पर जोर, जनभागीदारी, अनुसंधान और विकास, कठोर निगरानी और प्रवर्तन, अंतर-राज्यीय विवादों का समाधान।
7. **निष्कर्ष:** सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने और नागरिकों के स्वस्थ जीवन के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी समन्वय के महत्व पर बल।
स्रोत: The Indian Express
Uttar Pradesh PCS (UPPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में प्रदूषण नियंत्रण हेतु केंद्र सरकार के साथ हाल ही में आयोजित बैठक का मुख्य उद्देश्य क्या था?
- A. एनसीआर में उद्योगों को बंद करने संबंधी निर्णय लेना
- B. एनसीआर प्रदूषण नियंत्रण के लिए केंद्र-राज्य समन्वय एवं कार्य योजना तैयार करना
- C. उत्तर प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के उपायों पर चर्चा करना
- D. राज्य में नई पर्यावरणीय योजनाओं के लिए धन आवंटन करना
उत्तर: B. एनसीआर प्रदूषण नियंत्रण के लिए केंद्र-राज्य समन्वय एवं कार्य योजना तैयार करना — इस बैठक का मुख्य उद्देश्य एनसीआर क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण हेतु केंद्र एवं राज्य सरकारों के बीच समन्वय स्थापित कर एक प्रभावी कार्य योजना तैयार करना था।
Mains: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में प्रदूषण नियंत्रण हेतु अपनाई जा रही रणनीतियों का वर्णन करें। साथ ही, बताएं कि राज्य प्रशासन इस चुनौती से निपटने के लिए किन प्रशासनिक एवं तकनीकी उपायों को लागू कर रहा है।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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