यूपीएससी तैयारी: परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ाने हेतु सरकार का 2047 रोडमैप

यूपीएससी तैयारी: परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ाने हेतु सरकार का 2047 रोडमैप — India's Nuclear Energy Capacity Roadmap to 2047

यूपीएससी तैयारी: परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ाने हेतु सरकार का 2047 रोडमैप

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — अर्थव्यवस्था  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी  |  GS Paper III — पर्यावरण एवं आपदा प्रबंधन
  • Prelims: परमाणु ऊर्जा मिशन, शुद्ध-शून्य कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य, दाबित भारी जल रिएक्टर (PHWR), लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR), न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL), भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC)
  • Essay: भारत की ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के लक्ष्य में परमाणु ऊर्जा की भूमिका, विकसित भारत के दृष्टिकोण को प्राप्त करने में परमाणु ऊर्जा का योगदान

त्वरित पुनरावृत्ति: भारत सरकार ने वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है, जिसमें स्वदेशी दाबित भारी जल रिएक्टरों और लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों की तैनाती एक प्रमुख रणनीति है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, संसद में एक प्रश्न के उत्तर में सरकार ने बताया कि उसने वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता प्राप्त करने के लिए एक रोडमैप तैयार किया है। यह लक्ष्य केन्द्रीय बजट 2025-26 में परमाणु ऊर्जा मिशन के अंतर्गत घोषित किया गया था, जिसका उद्देश्य देश के ऊर्जा मिश्रण में परमाणु ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाना और वर्ष 2070 तक शुद्ध-शून्य कार्बन उत्सर्जन (Net-Zero Carbon Emission) के लक्ष्य को प्राप्त करना है।

पृष्ठभूमि

  • भारत का लक्ष्य वर्ष 2070 तक शुद्ध-शून्य कार्बन उत्सर्जन प्राप्त करना है, जिसके लिए स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों का विस्तार महत्वपूर्ण है।
  • परमाणु ऊर्जा एक विश्वसनीय, निम्न-कार्बन आधार-भार (Base-Load) ऊर्जा स्रोत है, जो देश की बढ़ती ऊर्जा मांगों को पूरा करने में सहायक है।
  • वर्तमान में भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता 8.78 गीगावाट है, जिसे वर्ष 2031-32 तक लगभग 22 गीगावाट तक बढ़ाने की योजना है।
  • न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) द्वारा वर्ष 2047 तक कुल 54 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता स्थापित करने की परिकल्पना की गई है।
  • शेष 46 गीगावाट क्षमता विभिन्न व्यावसायिक मॉडलों के तहत अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (केंद्र और राज्य), निजी क्षेत्र तथा संयुक्त उपक्रमों द्वारा स्थापित की जाएगी।
  • केन्द्रीय बजट 2025-26 में परमाणु ऊर्जा मिशन के अंतर्गत स्वदेशी लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMR) के विकास और तैनाती का लक्ष्य रखा गया है।

परमाणु ऊर्जा मिशन और लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR)

  • परमाणु ऊर्जा मिशन का लक्ष्य वर्ष 2047 तक भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 गीगावाट तक बढ़ाना है, जो विकसित भारत के दृष्टिकोण और शुद्ध-शून्य उत्सर्जन लक्ष्यों के अनुरूप है।
  • यह रोडमैप दो-आयामी रणनीति पर आधारित है: स्वदेशी 700 मेगावाट क्षमता वाले दाबित भारी जल रिएक्टरों (Pressurised Heavy Water Reactors – PHWR) और हरित क्षेत्रों में बड़े आयातित उन्नत रिएक्टरों की स्थापना।
  • इसके अतिरिक्त, पुराने जीवाश्म ईंधन आधारित विद्युत संयंत्रों के पुनः उपयोग (Brownfield Uses), ऊर्जा-गहन उद्योगों के लिए कैप्टिव विद्युत उत्पादन (Captive Power Generation) तथा ऑफ-ग्रिड अनुप्रयोगों (Off-Grid Applications) जैसे ब्राउनफील्ड उपयोगों के लिए लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMR) के विकास और तैनाती पर भी कार्य किया जाएगा।
  • लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) उन्नत परमाणु रिएक्टर हैं, और इन्हें मॉड्यूलर तरीके से कारखाने में निर्मित किया जा सकता है।
  • भारत ने वर्ष 2033 तक कम-से-कम पाँच स्वदेशी SMR को परिचालन में लाने का लक्ष्य रखा है।
  • भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (Bhabha Atomic Research Centre – BARC) ने दाबित जल रिएक्टर (Pressurised Water Reactor – PWR) प्रौद्योगिकी पर आधारित SMR के डिजाइन एवं विकास का कार्य प्रारंभ किया है, जिनमें भारत लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (BSMR-200) और उच्च तापमान गैस-शीतित रिएक्टर (HTGCR) शामिल हैं।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
लक्ष्य वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता प्राप्त करना।
रणनीति स्वदेशी PHWRs, आयातित उन्नत रिएक्टर, और लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs) का विकास।
SMRs का विकास भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) द्वारा 220 MW, 55 MW और 5 MW तापीय क्षमता वाले SMRs का डिजाइन एवं विकास।
क्षमता वृद्धि का अनुमान वर्तमान 8.78 GW से 2031-32 तक 22 GW, और 2047 तक कुल 100 GW।
वित्तपोषण मॉडल NPCIL, अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (केंद्र और राज्य), निजी क्षेत्र और संयुक्त उद्यमों द्वारा निवेश।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • ऊर्जा सुरक्षा: देश की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक स्थिर और विश्वसनीय आधार-भार ऊर्जा स्रोत प्रदान करना।
  • रोजगार सृजन: परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के निर्माण, संचालन और अनुसंधान एवं विकास में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
  • विनिर्माण को बढ़ावा: स्वदेशी रिएक्टरों के विकास से ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को बल मिलेगा और घरेलू विनिर्माण क्षमता में वृद्धि होगी।

पर्यावरणीय महत्व

  • शुद्ध-शून्य उत्सर्जन लक्ष्य: वर्ष 2070 तक शुद्ध-शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान, क्योंकि परमाणु ऊर्जा कार्बन-मुक्त है।
  • जलवायु परिवर्तन शमन: जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करके ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने में सहायता।
  • स्वच्छ ऊर्जा मिश्रण: देश के ऊर्जा मिश्रण में स्वच्छ और निम्न-कार्बन ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाना।

सामरिक महत्व

  • ऊर्जा स्वतंत्रता: विदेशी जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करके भारत की ऊर्जा स्वतंत्रता को बढ़ाना।
  • प्रौद्योगिकी आत्मनिर्भरता: लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMRs) के स्वदेशी विकास से परमाणु प्रौद्योगिकी में भारत की आत्मनिर्भरता और वैश्विक स्थिति मजबूत होगी।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: IAEA जैसे मंचों पर ज्ञान और अनुभव के आदान-प्रदान के माध्यम से परमाणु सुरक्षा और शांतिपूर्ण उपयोग में भारत की भूमिका।

चुनौतियाँ

1. उच्च पूंजीगत लागत

  • परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की प्रारंभिक स्थापना लागत बहुत अधिक होती है, जिससे परियोजनाओं का वित्तपोषण एक चुनौती बन जाता है।
  • SMRs की लागत भी, हालांकि पारंपरिक रिएक्टरों से कम, फिर भी पर्याप्त निवेश की आवश्यकता होती है।

2. सुरक्षा और अपशिष्ट प्रबंधन

  • परमाणु ऊर्जा संयंत्रों से जुड़े सुरक्षा जोखिम और रेडियोधर्मी अपशिष्ट के सुरक्षित निपटान की चुनौती एक बड़ी चिंता है।
  • जनता के बीच परमाणु ऊर्जा को लेकर सुरक्षा संबंधी आशंकाओं को दूर करना आवश्यक है।

3. परियोजना कार्यान्वयन में देरी

  • परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के निर्माण में अक्सर लंबी अवधि लगती है और इसमें देरी हो सकती है, जिससे लागत बढ़ जाती है।
  • भूमि अधिग्रहण और नियामक मंजूरियों में लगने वाला समय भी एक बाधा है।

4. मानव संसाधन और विशेषज्ञता

  • परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में उच्च कुशल मानव संसाधन और विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है, जिसकी उपलब्धता एक चुनौती हो सकती है।
  • अनुसंधान एवं विकास तथा संचालन के लिए निरंतर प्रशिक्षण और कौशल विकास की आवश्यकता।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
दीर्घकालिक भंडारण रेडियोधर्मी अपशिष्ट के सुरक्षित और दीर्घकालिक भंडारण की चुनौती।
सार्वजनिक स्वीकृति परमाणु ऊर्जा से जुड़े सुरक्षा जोखिमों के कारण जनता के बीच स्वीकृति प्राप्त करना।
तकनीकी जटिलता उन्नत रिएक्टरों और SMRs के विकास एवं संचालन में उच्च तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता।
अंतर्राष्ट्रीय नियामक ढांचा परमाणु अप्रसार संधि (NPT) और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संधियों के तहत भारत की प्रतिबद्धताएं।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • परमाणु ऊर्जा मिशन

आगे की राह

  • परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए एक सुव्यवस्थित और त्वरित नियामक अनुमोदन प्रक्रिया स्थापित करना।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) और संयुक्त उद्यमों के माध्यम से परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करना।
  • परमाणु सुरक्षा मानकों को और मजबूत करना तथा रेडियोधर्मी अपशिष्ट के सुरक्षित निपटान के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों का विकास करना।
  • परमाणु ऊर्जा के लाभों और सुरक्षा उपायों के बारे में जन जागरूकता बढ़ाना ताकि सार्वजनिक स्वीकृति में वृद्धि हो।
  • परमाणु विज्ञान और इंजीनियरिंग में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने के लिए शैक्षणिक संस्थानों और अनुसंधान केंद्रों के साथ सहयोग बढ़ाना।
  • SMRs जैसी नई प्रौद्योगिकियों के विकास और तैनाती में तेजी लाना ताकि ऊर्जा मिश्रण में उनकी हिस्सेदारी बढ़ाई जा सके।
  • अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के साथ सहयोग जारी रखना और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

परमाणु ऊर्जा मिशन · शुद्ध-शून्य कार्बन उत्सर्जन · दाबित भारी जल रिएक्टर (PHWR) · लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) · न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) · भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) · ऊर्जा मिश्रण · विकसित भारत · हरित हाइड्रोजन उत्पादन · सार्वजनिक-निजी भागीदारी · ऊर्जा सुरक्षा · निम्न-कार्बन ऊर्जा

अवधारणा प्रवाह

बढ़ती ऊर्जा मांग और जलवायु परिवर्तन के लक्ष्य  →  परमाणु ऊर्जा को बढ़ावा देने की सरकारी नीति  →  परमाणु ऊर्जा मिशन के तहत 2047 तक 100 GW क्षमता का लक्ष्य  →  स्वदेशी PHWRs, आयातित उन्नत रिएक्टरों और SMRs का विकास  →  NPCIL, अन्य PSU और निजी क्षेत्र द्वारा क्षमता विस्तार  →  ऊर्जा सुरक्षा, कार्बन उत्सर्जन में कमी और आर्थिक संवृद्धि

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत सरकार ने वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है।
2. परमाणु ऊर्जा मिशन के तहत, स्वदेशी लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMR) के विकास और तैनाती का लक्ष्य वर्ष 2033 तक कम-से-कम पाँच SMR को परिचालन में लाना है।
3. भारत लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (BSMR-200) 220 मेगावाट विद्युत क्षमता वाला एक दाबित जल रिएक्टर (PWR) प्रौद्योगिकी पर आधारित है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीनों
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीनों — कथन 1 और 2 सही हैं। भारत सरकार ने वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है, और परमाणु ऊर्जा मिशन के तहत वर्ष 2033 तक कम-से-कम पाँच स्वदेशी SMR को परिचालन में लाने का लक्ष्य है। कथन 3 गलत है क्योंकि BSMR-200 दाबित जल रिएक्टर (PWR) प्रौद्योगिकी पर आधारित है, लेकिन यह 220 मेगावाट विद्युत क्षमता वाला है, जो सही है।

Q2. परमाणु ऊर्जा के संदर्भ में, लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. SMR का उपयोग पुराने जीवाश्म ईंधन आधारित विद्युत संयंत्रों के पुनः उपयोग (ब्राउनफील्ड उपयोग) के लिए किया जा सकता है।
2. भारत में SMR प्रौद्योगिकी के विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की परिकल्पना नहीं की गई है क्योंकि आवश्यक विशेषज्ञता देश में उपलब्ध है।
3. उच्च तापमान गैस-शीतित रिएक्टर (HTGR) को हाइड्रोजन उत्पादन के लिए उपयुक्त ऊष्मा-रासायनिक चक्र के साथ जोड़ा जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — सभी तीनों कथन सही हैं। SMR का उपयोग ब्राउनफील्ड उपयोगों के लिए किया जा सकता है। भारत में SMR प्रौद्योगिकी के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की परिकल्पना नहीं की गई है क्योंकि देश में आवश्यक विशेषज्ञता उपलब्ध है। HTGR को हाइड्रोजन उत्पादन के लिए ऊष्मा-रासायनिक चक्र के साथ जोड़ा जा सकता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत के ऊर्जा मिश्रण में परमाणु ऊर्जा की बढ़ती भूमिका पर चर्चा कीजिए। साथ ही, देश के शुद्ध-शून्य कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य को प्राप्त करने में लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMR) की क्षमता का विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: भारत की ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन लक्ष्यों के संदर्भ में परमाणु ऊर्जा के महत्व का संक्षिप्त परिचय।
2. परमाणु ऊर्जा की बढ़ती भूमिका: सरकार के 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य का उल्लेख। वर्तमान क्षमता (8.78 गीगावाट) और 2031-32 तक अपेक्षित वृद्धि (22 गीगावाट)।
3. रणनीतिक दृष्टिकोण: दो-आयामी रणनीति का विवरण – स्वदेशी 700 मेगावाट दाबित भारी जल रिएक्टर (PHWR) और आयातित उन्नत रिएक्टरों की स्थापना।
4. NPCIL की भूमिका: NPCIL द्वारा 2047 तक 54 गीगावाट क्षमता स्थापित करने की परिकल्पना।
5. अन्य हितधारकों की भूमिका: केंद्र/राज्य के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, निजी क्षेत्र और संयुक्त उपक्रमों द्वारा शेष 46 गीगावाट क्षमता की स्थापना।
6. SMR की क्षमता और शुद्ध-शून्य लक्ष्य: SMR की परिभाषा और लाभ (छोटे पदचिह्न, कम निर्माण अवधि, लचीलापन)।
7. भारत में SMR विकास: परमाणु ऊर्जा मिशन के तहत 2033 तक पाँच स्वदेशी SMR को परिचालन में लाने का लक्ष्य। BARC द्वारा BSMR-200, SMR-55 और HTGR जैसे डिजाइनों का विकास।
8. SMR का अनुप्रयोग: ब्राउनफील्ड उपयोग, कैप्टिव विद्युत उत्पादन और ऑफ-ग्रिड अनुप्रयोगों में SMR की भूमिका। HTGR का हाइड्रोजन उत्पादन में उपयोग।
9. आत्मनिर्भरता: SMR प्रौद्योगिकी में स्वदेशी विशेषज्ञता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता का अभाव।
10. चुनौतियाँ और आगे की राह: सुरक्षा संबंधी चिंताएँ, सार्वजनिक स्वीकृति, वित्तपोषण और नियामक ढाँचा। इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए नीतिगत उपायों का सुझाव।
11. निष्कर्ष: भारत के ऊर्जा भविष्य और जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने में परमाणु ऊर्जा, विशेषकर SMR, के महत्वपूर्ण योगदान पर बल।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

No Comments

Post A Comment