26 Sep यूपीएससी तैयारी: विशेष अभियान 6 में ई-कचरा प्रबंधन पर केंद्रित सरकारी पहल
✎ विशेष अभियान 6.0 सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता, लंबित मामलों के निपटान और ई-कचरा प्रबंधन पर केंद्रित एक राष्ट्रव्यापी पहल है, जो दक्षता और पर्यावरणीय उत्तरदायित्व को बढ़ावा देती है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
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- Prelims: विशेष अभियान 6.0, भारी उद्योग मंत्रालय, केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम (CPSE), ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022, अपशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छता अभियान
- Essay: स्वच्छ भारत: शासन और नागरिक सहभागिता की भूमिका, सतत विकास और उत्तरदायी अपशिष्ट प्रबंधन
त्वरित पुनरावृत्ति: विशेष अभियान 6.0 सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता, लंबित मामलों के निपटान और ई-कचरा प्रबंधन पर केंद्रित एक राष्ट्रव्यापी पहल है, जो दक्षता और पर्यावरणीय उत्तरदायित्व को बढ़ावा देती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारी उद्योग मंत्रालय (Ministry of Heavy Industries – MHI) अपने केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (Central Public Sector Enterprises – CPSEs) और स्वायत्त निकायों (Autonomous Bodies – ABs) के साथ मिलकर विशेष अभियान 6.0 (Special Campaign 6.0) की तैयारी कर रहा है। इस अभियान का उद्देश्य लंबित मामलों का निपटान करना, कार्यस्थलों पर स्वच्छता सुनिश्चित करना और विशेष रूप से ई-कचरे (e-waste) के प्रभावी संग्रह, पृथक्करण और निपटान पर ध्यान केंद्रित करना है। यह पहल सरकारी कार्यालयों में बेहतर कार्य संस्कृति और जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पृष्ठभूमि
- भारत सरकार विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में दक्षता, पारदर्शिता और स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए नियमित रूप से विशेष अभियान चलाती है।
- ये अभियान आमतौर पर पुराने रिकॉर्ड की समीक्षा, अनुपयोगी वस्तुओं का निपटान, कार्यालय स्थान का अनुकूलन और लंबित प्रशासनिक मामलों को निपटाने पर केंद्रित होते हैं।
- हाल के वर्षों में, पर्यावरणीय स्थिरता पर बढ़ते जोर के साथ, इन अभियानों में अपशिष्ट प्रबंधन, विशेषकर इलेक्ट्रॉनिक कचरे के प्रबंधन को भी शामिल किया गया है।
- ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 (E-Waste (Management) Rules, 2022) भारत में ई-कचरे के वैज्ञानिक और पर्यावरण-अनुकूल प्रबंधन के लिए एक नियामक ढाँचा प्रदान करते हैं।
- भारी उद्योग मंत्रालय देश के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और इसके तहत कई बड़े CPSEs आते हैं, जहाँ बड़ी मात्रा में ई-कचरा उत्पन्न होने की संभावना होती है।
- विशेष अभियान 6.0 की तैयारी 15 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक चल रही है, जिसमें कार्यान्वयन चरण 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक चलेगा।
विशेष अभियान 6.0 क्या है?
- विशेष अभियान 6.0 भारत सरकार द्वारा अपने मंत्रालयों, विभागों, केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों और स्वायत्त निकायों में दक्षता और स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए चलाया जाने वाला एक राष्ट्रव्यापी अभियान है।
- इसका प्राथमिक उद्देश्य लंबित मामलों का निपटान करना, पुराने भौतिक और इलेक्ट्रॉनिक फाइलों की समीक्षा करना तथा अनुपयोगी वस्तुओं और कबाड़ का निपटान करना है।
- इस वर्ष, अभियान में ‘ई-कचरे के प्रभावी संग्रह, पृथक्करण और निपटान’ पर विशेष जोर दिया गया है, जो पर्यावरणीय स्थिरता के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- अभियान के तहत कार्यालय परिसरों और औद्योगिक इकाइयों में गहन स्वच्छता अभियान चलाए जाते हैं, जिससे स्वच्छ और व्यवस्थित कार्यस्थलों को बढ़ावा मिलता है।
- यह अभियान कार्यालय स्थान को खाली करने, रिकॉर्ड प्रबंधन में सुधार करने और जवाबदेही तथा जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन की संस्कृति को बढ़ावा देने में मदद करता है।
- ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 के अनुसार ई-कचरे की पहचान, पृथक्करण और निपटान सुनिश्चित किया जाता है।
- मंत्रालय नोडल अधिकारियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित करके अभियान की प्रगति की निगरानी करता है।
- इसका अंतिम लक्ष्य स्वच्छ और अधिक कुशल कार्यस्थल बनाना, अपशिष्ट निपटान की समस्या को कम करना और जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन प्रथाओं को मजबूत करना है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| विशेष अभियान 6 (SCDPM 6) | लंबित मामलों के निपटान, स्वच्छता और कार्यस्थल प्रबंधन में सुधार के लिए भारी उद्योग मंत्रालय की पहल। |
| ई-कचरा प्रबंधन पर विशेष जोर | ई-कचरे के प्रभावी संग्रह, पृथक्करण और निपटान पर केंद्रित, जो इस वर्ष के अभियान का मुख्य विषय है। |
| तैयारी चरण (15-30 सितंबर 2026) | पुराने भौतिक और इलेक्ट्रॉनिक फाइलों की समीक्षा, अनुपयोगी वस्तुओं, कबाड़ और ई-कचरे की पहचान व निपटान। |
| कार्यान्वयन चरण (2-31 अक्टूबर 2026) | तैयारी चरण में चिन्हित गतिविधियों का वास्तविक क्रियान्वयन। |
| लक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण | कार्यालय स्थान खाली करने, फाइलों की समीक्षा और ई-कचरा वस्तुओं की पहचान के लिए विशिष्ट लक्ष्य निर्धारित। |
महत्व
प्रशासनिक दक्षता
- यह अभियान सरकारी कार्यालयों में लंबित मामलों को कम करने और रिकॉर्ड प्रबंधन में सुधार करके प्रशासनिक दक्षता बढ़ाता है।
- कार्यस्थलों को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाकर कर्मचारियों की उत्पादकता और कार्य संस्कृति को बढ़ावा देता है।
पर्यावरण संरक्षण
- ई-कचरे के प्रभावी संग्रह और निपटान पर विशेष ध्यान पर्यावरण प्रदूषण को कम करने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में मदद करता है।
- ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 के अनुपालन को सुनिश्चित करता है, जिससे जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन प्रथाओं को बढ़ावा मिलता है।
संसाधन अनुकूलन
- अनुपयोगी वस्तुओं और कबाड़ को हटाकर कार्यालय स्थान को खाली करने से संसाधनों का बेहतर उपयोग होता है।
- भौतिक और इलेक्ट्रॉनिक फाइलों की समीक्षा से अनावश्यक कागजी कार्रवाई कम होती है और डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन को बढ़ावा मिलता है।
चुनौतियाँ
1. ई-कचरा प्रबंधन की जटिलता
- ई-कचरे में विभिन्न प्रकार के खतरनाक पदार्थ होते हैं, जिनके सुरक्षित पृथक्करण और निपटान के लिए विशेष तकनीकों और बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होती है।
- असंगठित क्षेत्र में ई-कचरा पुनर्चक्रण से जुड़े स्वास्थ्य और पर्यावरणीय जोखिमों को कम करना एक चुनौती है।
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2. कार्यान्वयन और निगरानी
- बड़े पैमाने पर सरकारी विभागों और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSEs) में अभियान के लक्ष्यों का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करना।
- नियमित निगरानी और मूल्यांकन तंत्र की आवश्यकता ताकि लक्ष्यों की प्राप्ति और अभियान की सफलता को मापा जा सके।
यूपीएससी लिंक: शासन: सरकारी नीतियों और हस्तक्षेपों का कार्यान्वयन
3. कर्मचारियों का प्रतिरोध
- पुराने रिकॉर्ड और कार्य प्रक्रियाओं में बदलाव के प्रति कर्मचारियों का प्रतिरोध हो सकता है, जिससे अभियान की गति धीमी हो सकती है।
- स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन की नई प्रथाओं को अपनाने के लिए निरंतर प्रशिक्षण और जागरूकता की आवश्यकता।
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4. तकनीकी और वित्तीय बाधाएँ
- ई-कचरा प्रबंधन के लिए आवश्यक उन्नत तकनीकों और बुनियादी ढांचे की स्थापना में वित्तीय संसाधनों की कमी एक बाधा हो सकती है।
- डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन और ई-कचरा ट्रैकिंग सिस्टम के लिए तकनीकी विशेषज्ञता और निवेश की आवश्यकता।
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चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| ई-कचरे की बढ़ती मात्रा | आधुनिक जीवनशैली और तकनीकी प्रगति के कारण ई-कचरे की मात्रा में लगातार वृद्धि, जिससे निपटान की चुनौती बढ़ रही है। |
| असंगठित पुनर्चक्रण | ई-कचरे का एक बड़ा हिस्सा असंगठित क्षेत्र द्वारा पुनर्चक्रित किया जाता है, जिससे पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य को गंभीर खतरा होता है। |
| जागरूकता की कमी | ई-कचरे के उचित निपटान और उसके खतरों के बारे में आम जनता और कुछ सरकारी विभागों में भी जागरूकता की कमी। |
| प्रौद्योगिकी और बुनियादी ढाँचा | ई-कचरे के वैज्ञानिक और सुरक्षित निपटान के लिए पर्याप्त अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी और बुनियादी ढाँचे की कमी। |
| अंतर-विभागीय समन्वय | विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSEs) के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022
आगे की राह
- ई-कचरा प्रबंधन के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय नीति विकसित करना जो सभी हितधारकों को शामिल करे।
- ई-कचरा पुनर्चक्रण के लिए संगठित क्षेत्र को बढ़ावा देना और अनौपचारिक क्षेत्र को औपचारिक बनाना।
- ई-कचरे के खतरों और उचित निपटान के तरीकों के बारे में जन जागरूकता अभियान चलाना।
- ई-कचरा प्रबंधन के लिए अनुसंधान और विकास में निवेश करना तथा नई प्रौद्योगिकियों को अपनाना।
- मंत्रालयों, विभागों और CPSEs के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना ताकि अभियान के लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से प्राप्त किया जा सके।
- अभियान की प्रगति की नियमित और पारदर्शी निगरानी सुनिश्चित करना तथा प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन प्रदान करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
विशेष अभियान 6 (SCDPM 6) · भारी उद्योग मंत्रालय (MHI) · केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम (CPSEs) · ई-कचरा प्रबंधन (E-waste Management) · ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 · स्वच्छता अभियान · रिकॉर्ड प्रबंधन · अपशिष्ट प्रबंधन · डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन · पर्यावरण संरक्षण
अवधारणा प्रवाह
भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा विशेष अभियान 6 की तैयारी → ई-कचरा प्रबंधन पर विशेष जोर → पुराने रिकॉर्ड और अनुपयोगी वस्तुओं की पहचान → ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 के अनुसार निपटान → स्वच्छ और कुशल कार्यस्थलों को बढ़ावा → पर्यावरण संरक्षण और संसाधन अनुकूलन
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विशेष अभियान 6 (SCDPM 6) का उद्देश्य केवल सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता को बढ़ावा देना है।
2. ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022, ई-कचरे के संग्रहण, पृथक्करण और निपटान के लिए दिशानिर्देश प्रदान करते हैं।
3. भारी उद्योग मंत्रालय (MHI) के तहत केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम (CPSEs) इस अभियान का हिस्सा नहीं हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल एक — कथन 1 गलत है क्योंकि अभियान का उद्देश्य स्वच्छता के साथ-साथ लंबित मामलों की संख्या में कमी, बेहतर कार्यस्थल प्रबंधन और ई-कचरे के प्रभावी निपटान पर भी है। कथन 2 सही है क्योंकि ये नियम ई-कचरा प्रबंधन के लिए विस्तृत प्रावधान करते हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि CPSEs और स्वायत्त निकाय इस अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
Q2. ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
1. ये नियम ई-कचरे के पुनर्चक्रण और निपटान के लिए उत्पादक की विस्तारित जिम्मेदारी (Extended Producer Responsibility – EPR) की अवधारणा को शामिल करते हैं।
2. ये नियम केवल बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों पर लागू होते हैं, छोटे व्यवसायों पर नहीं।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1
- केवल 2
- 1 और 2 दोनों
- न तो 1 और न ही 2
उत्तर: केवल 1 — कथन 1 सही है। ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 में EPR की अवधारणा शामिल है, जो उत्पादकों को उनके उत्पादों के जीवन-चक्र के अंत में उनके सुरक्षित निपटान के लिए जिम्मेदार ठहराती है। कथन 2 गलत है। ये नियम ई-कचरा उत्पन्न करने वाले सभी संस्थाओं पर लागू होते हैं, न कि केवल बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों पर।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ विशेष अभियान 6 (SCDPM 6) के उद्देश्यों और इसके कार्यान्वयन में भारी उद्योग मंत्रालय (MHI) तथा उसके संबद्ध निकायों की भूमिका पर चर्चा कीजिए। भारत में ई-कचरा प्रबंधन की चुनौतियों और ‘ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022’ की प्रासंगिकता का भी विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: विशेष अभियान 6 (SCDPM 6) का संक्षिप्त परिचय और इसके मुख्य उद्देश्य।
मुख्य भाग:
1. अभियान के उद्देश्य: स्वच्छता, लंबित मामलों में कमी, कार्यस्थल प्रबंधन में सुधार, ई-कचरे का प्रभावी संग्रह, पृथक्करण और निपटान।
2. MHI और संबद्ध निकायों की भूमिका: तैयारी चरण (फाइलों की समीक्षा, अनुपयोगी वस्तुओं की पहचान, ई-कचरे का चिह्नांकन) और कार्यान्वयन चरण (स्वच्छता अभियान, स्थान खाली करना, रिकॉर्ड प्रबंधन, ई-कचरा निपटान) में CPSEs और स्वायत्त निकायों की सक्रिय भागीदारी।
3. भारत में ई-कचरा प्रबंधन की चुनौतियाँ: अनौपचारिक क्षेत्र का प्रभुत्व, अपर्याप्त बुनियादी ढाँचा, जागरूकता की कमी, स्वास्थ्य और पर्यावरणीय जोखिम।
4. ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 की प्रासंगिकता: विस्तारित उत्पादक जिम्मेदारी (EPR), संग्रह लक्ष्य, पुनर्चक्रण को बढ़ावा देना, पर्यावरण के अनुकूल निपटान सुनिश्चित करना, औपचारिक क्षेत्र को मजबूत करना।
निष्कर्ष: अभियान के महत्व को रेखांकित करते हुए, स्वच्छ और कुशल कार्यस्थल तथा जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन की दिशा में इसके योगदान पर बल देना।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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