23 Jul यूपीएससी/पीसीएस परीक्षा: भारत के अंतरिक्ष प्रक्षेपण कार्यक्रम की उपलब्धियाँ (2023-2026)
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science & Technology) | GS Paper III — अर्थव्यवस्था (Economy)
- Prelims: चंद्रयान-3, आदित्य-एल1, SPADEX मिशन, SSLV, NISAR मिशन, LVM3, IN-SPACe, कुलसेकरपट्टिनम प्रक्षेपण स्थल
- Essay: भारत की अंतरिक्ष शक्ति: वैश्विक नेतृत्व की ओर, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत
त्वरित पुनरावृत्ति: भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम चंद्रयान-3 और आदित्य-एल1 जैसी महत्वपूर्ण उपलब्धियों के साथ तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिसमें नए प्रक्षेपण स्थलों का विकास और निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी एक मजबूत और प्रतिस्पर्धी अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण कर रही है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में संसद में प्रस्तुत एक प्रश्न के उत्तर में अंतरिक्ष विभाग ने पिछले तीन वर्षों (जुलाई 2023 से जून 2026) के दौरान भारत के अंतरिक्ष प्रक्षेपण कार्यक्रम की महत्वपूर्ण उपलब्धियों, विकसित किए गए प्रक्षेपण यानों, नई प्रक्षेपण अवसंरचना के विकास और अंतरिक्ष क्षेत्र में गैर-सरकारी संस्थाओं (NGE) की बढ़ती भागीदारी को सुदृढ़ करने हेतु सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर विस्तृत जानकारी प्रदान की है। यह जानकारी भारत के तेजी से विकसित हो रहे अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र को रेखांकित करती है।
पृष्ठभूमि
- भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत 1960 के दशक में हुई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय विकास के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का उपयोग करना था।
- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की स्थापना 1969 में हुई थी और तब से यह भारत के अंतरिक्ष प्रयासों का केंद्र बिंदु रहा है।
- भारत ने उपग्रहों के डिजाइन, निर्माण और प्रक्षेपण में महत्वपूर्ण क्षमताएँ विकसित की हैं, जिससे यह कुछ चुनिंदा देशों में से एक बन गया है जिनके पास यह क्षमता है।
- ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV) और भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान (GSLV) जैसे प्रक्षेपण यानों ने भारत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के लिए उपग्रहों को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित करने में सक्षम बनाया है।
- हाल के वर्षों में, सरकार ने अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी को बढ़ावा देने और भारत को वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में एक प्रमुख खिलाड़ी बनाने के लिए कई सुधार किए हैं।
- इन सुधारों में भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) जैसी संस्थाओं की स्थापना शामिल है, जो निजी संस्थाओं को इसरो की सुविधाओं और विशेषज्ञता तक पहुँच प्रदान करती है।
भारत का अंतरिक्ष प्रक्षेपण कार्यक्रम
- भारत ने पिछले तीन वर्षों में 12 प्रक्षेपण यान मिशन, 11 राष्ट्रीय उपग्रह और अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के लिए 9 उपग्रह सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किए हैं।
- चंद्रयान-3 मिशन के माध्यम से चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट सफल सॉफ्ट-लैंडिंग करने वाला भारत विश्व का पहला देश बना।
- आदित्य-एल1, भारत का पहला सौर वेधशाला मिशन, PSLV के माध्यम से प्रक्षेपित किया गया।
- SPADEX मिशन के माध्यम से भारत अंतरिक्ष में डॉकिंग/अनडॉकिंग का सफल प्रदर्शन करने वाला विश्व का चौथा देश बना।
- स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SSLV) का विकास पूरा हो गया है और इसकी प्रौद्योगिकी भारतीय उद्योग को हस्तांतरित की गई है।
- सरकार ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में इसरो के अगली पीढ़ी के प्रक्षेपण यानों के लिए तीसरे प्रक्षेपण परिसर (Third Launch Pad) की स्थापना को मंजूरी दी है।
- तमिलनाडु के कुलसेकरपट्टिनम में SSLV लॉन्च कॉम्प्लेक्स (SLC) का भी विकास किया जा रहा है, जो भारत का दूसरा रॉकेट प्रक्षेपण स्थल होगा और निजी अंतरिक्ष स्टार्ट-अप्स की आवश्यकताओं को पूरा करेगा।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| चंद्रयान-3 मिशन | चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफल सॉफ्ट-लैंडिंग करने वाला विश्व का पहला देश |
| आदित्य-एल1 मिशन | भारत का पहला सौर वेधशाला मिशन, PSLV द्वारा प्रक्षेपित |
| श्रीहरिकोटा से 100 प्रक्षेपण | भारत के अंतरिक्ष प्रक्षेपण केंद्र से महत्वपूर्ण उपलब्धि, प्रक्षेपण क्षमता का प्रदर्शन |
| SPADEX मिशन | अंतरिक्ष में डॉकिंग/अनडॉकिंग का सफल प्रदर्शन करने वाला विश्व का चौथा देश |
| स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SSLV) का विकास | भारतीय उद्योग के साथ प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, छोटे उपग्रहों के प्रक्षेपण में आत्मनिर्भरता |
| NISAR मिशन | NASA-ISRO का संयुक्त सिंथेटिक अपर्चर रडार मिशन, पृथ्वी अवलोकन में सहयोग |
महत्व
सामरिक महत्व
- चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर भारत की सफल लैंडिंग ने अंतरिक्ष अन्वेषण में भारत की अग्रणी भूमिका स्थापित की है, जो भविष्य के चंद्र मिशनों और संसाधनों की खोज के लिए महत्वपूर्ण है।
- SPADEX मिशन के माध्यम से अंतरिक्ष में डॉकिंग/अनडॉकिंग क्षमता का प्रदर्शन भारत को अंतरिक्ष में सैन्य और नागरिक दोनों अनुप्रयोगों के लिए महत्वपूर्ण सामरिक लाभ प्रदान करता है।
आर्थिक महत्व
- अंतर्राष्ट्रीय ग्राहकों के लिए उपग्रह प्रक्षेपण से विदेशी मुद्रा अर्जित होती है और भारत वैश्विक वाणिज्यिक अंतरिक्ष बाजार में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित होता है।
- SSLV का विकास और निजी क्षेत्र के साथ प्रौद्योगिकी हस्तांतरण से घरेलू अंतरिक्ष उद्योग को बढ़ावा मिलेगा, जिससे रोज़गार सृजन और आर्थिक संवृद्धि होगी।
- नए प्रक्षेपण परिसरों का विकास और निजी क्षेत्र की भागीदारी से प्रक्षेपण सेवाओं की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे लागत कम होगी और वाणिज्यिक अवसरों में वृद्धि होगी।
वैज्ञानिक एवं तकनीकी महत्व
- आदित्य-एल1 मिशन सूर्य के अध्ययन में महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करेगा, जिससे सौर भौतिकी और अंतरिक्ष मौसम की हमारी समझ में वृद्धि होगी।
- NISAR मिशन पृथ्वी की सतह में होने वाले परिवर्तनों, पारिस्थितिक तंत्रों और प्राकृतिक आपदाओं का विस्तृत अवलोकन प्रदान करेगा, जो जलवायु परिवर्तन अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण है।
- विभिन्न प्रक्षेपण यानों (PSLV, GSLV, LVM3, SSLV) का सफल विकास और संचालन भारत की उन्नत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी क्षमताओं को दर्शाता है।
अंतर्राष्ट्रीय संबंध
- NASA के साथ NISAR जैसे संयुक्त मिशन अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देते हैं और भारत की वैश्विक वैज्ञानिक साख को मजबूत करते हैं।
- अंतर्राष्ट्रीय ग्राहकों के लिए वाणिज्यिक प्रक्षेपण सेवाएँ प्रदान करके भारत वैश्विक अंतरिक्ष समुदाय में अपनी स्थिति को सुदृढ़ करता है।
चुनौतियाँ
1. अंतरिक्ष मलबे का प्रबंधन
- बढ़ते प्रक्षेपणों और उपग्रहों के कारण अंतरिक्ष मलबे (Space Debris) की समस्या बढ़ रही है, जिससे भविष्य के मिशनों के लिए खतरा उत्पन्न हो सकता है।
- मलबे की निगरानी और उसके शमन के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों तथा अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी
2. निजी क्षेत्र की भागीदारी का विनियमन
- अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी संस्थाओं की बढ़ती भागीदारी के लिए एक स्पष्ट और सुदृढ़ नियामक ढाँचे की आवश्यकता है ताकि सुरक्षा, उत्तरदायित्व और प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित की जा सके।
- सरकारी और निजी संस्थाओं के बीच भूमिकाओं और जिम्मेदारियों का स्पष्ट सीमांकन महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – अंतरिक्ष नीति
3. प्रौद्योगिकी विकास और आत्मनिर्भरता
- कुछ महत्वपूर्ण अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों में अभी भी विदेशी निर्भरता है, जिसे कम करने के लिए स्वदेशी अनुसंधान और विकास को और बढ़ावा देने की आवश्यकता है।
- उन्नत प्रणोदन प्रणालियों और पुनः प्रयोज्य रॉकेट प्रौद्योगिकियों में निवेश महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी
4. बुनियादी ढाँचे का विस्तार
- बढ़ती प्रक्षेपण मांगों को पूरा करने के लिए नए प्रक्षेपण परिसरों (जैसे कुलसेकरपट्टिनम) का समय पर विकास और मौजूदा सुविधाओं का उन्नयन आवश्यक है।
- प्रक्षेपण स्थलों तक पहुँच और संबद्ध लॉजिस्टिक्स का प्रबंधन एक चुनौती हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढाँचा – विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| अंतरिक्ष मलबे का बढ़ता खतरा | भविष्य के मिशनों के लिए जोखिम, टकराव की संभावना |
| निजी क्षेत्र के लिए नियामक स्पष्टता | सुरक्षा, उत्तरदायित्व और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना |
| उन्नत प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता | महत्वपूर्ण घटकों और प्रणालियों के लिए विदेशी निर्भरता कम करना |
| प्रक्षेपण अवसंरचना का तीव्र विस्तार | बढ़ती मांगों को पूरा करने के लिए समय पर विकास और आधुनिकीकरण |
| अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा | वैश्विक वाणिज्यिक अंतरिक्ष बाजार में अन्य देशों से प्रतिस्पर्धा |
आगे की राह
- अंतरिक्ष मलबे की निगरानी और शमन के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों में निवेश करना तथा अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना।
- निजी अंतरिक्ष स्टार्ट-अप्स और गैर-सरकारी संस्थाओं के लिए एक स्पष्ट, पारदर्शी और अनुकूल नियामक ढाँचा विकसित करना।
- स्वदेशी अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देकर महत्वपूर्ण अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना, विशेषकर पुनः प्रयोज्य रॉकेट और उन्नत प्रणोदन प्रणालियों में।
- नए प्रक्षेपण परिसरों (जैसे कुलसेकरपट्टिनम) के विकास में तेजी लाना और मौजूदा अवसंरचना का आधुनिकीकरण करना ताकि बढ़ती प्रक्षेपण मांगों को पूरा किया जा सके।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और साझेदारी को मजबूत करना, विशेष रूप से गहरे अंतरिक्ष अन्वेषण और पृथ्वी अवलोकन जैसे क्षेत्रों में।
- अंतरिक्ष क्षेत्र में कौशल विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा देना और प्रतिभा पूल का निर्माण करना ताकि भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।
- अंतरिक्ष क्षेत्र में नवाचार और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए वित्तीय सहायता और प्रोत्साहन योजनाओं को जारी रखना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
अंतरिक्ष प्रक्षेपण कार्यक्रम · चंद्रयान-3 · आदित्य-एल1 · SPADEX मिशन · स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SSLV) · नासा-इसरो सिंथेटिक अपर्चर रडार (NISAR) · प्रक्षेपण यान · तीसरा प्रक्षेपण परिसर · कुलसेकरपट्टिनम · गैर-सरकारी संस्थाएँ (NGE) · इन-स्पेस · अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र
अवधारणा प्रवाह
सरकार द्वारा अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधार और निजी भागीदारी को प्रोत्साहन → इन-स्पेस (IN-SPACe) जैसी संस्थाओं द्वारा नीतिगत सुधार और प्रोत्साहन योजनाएँ → निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी और इसरो परिसरों तक पहुँच → नए प्रक्षेपण परिसरों (जैसे कुलसेकरपट्टिनम) का विकास → भारत की प्रक्षेपण क्षमता में वृद्धि और वाणिज्यिक प्रक्षेपणों की बढ़ती मांग की पूर्ति → एक सशक्त और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भारतीय अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र का विकास
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. भारत के अंतरिक्ष प्रक्षेपण कार्यक्रम के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चंद्रयान-3 मिशन के माध्यम से भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट सफल सॉफ्ट-लैंडिंग करने वाला विश्व का पहला देश बना।
2. SPADEX मिशन के माध्यम से भारत अंतरिक्ष में डॉकिंग/अनडॉकिंग का सफल प्रदर्शन करने वाला विश्व का चौथा देश बना।
3. NISAR मिशन को भारत के PSLV प्रक्षेपण यान से सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 और 2 सही हैं। भारत चंद्रयान-3 के माध्यम से चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट-लैंडिंग करने वाला पहला देश है और SPADEX मिशन के साथ डॉकिंग/अनडॉकिंग का प्रदर्शन करने वाला चौथा देश है। कथन 3 गलत है क्योंकि NISAR मिशन को भारत के GSLV प्रक्षेपण यान से प्रक्षेपित किया गया था, न कि PSLV से।
Q2. भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र के विकास और निजी भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में इसरो के अगली पीढ़ी के प्रक्षेपण यानों के लिए तीसरे प्रक्षेपण परिसर की स्थापना को मंजूरी दी गई है।
2. तमिलनाडु के कुलसेकरपट्टिनम में SSLV लॉन्च कॉम्प्लेक्स (SLC) का विकास किया जा रहा है, जो भारत का दूसरा रॉकेट प्रक्षेपण स्थल होगा।
3. इन-स्पेस ने स्टार्टअप्स और MSME के लिए वित्तीय सहायता तथा सरल प्राधिकरण प्रक्रियाओं जैसी कई नीतिगत सुधार और प्रोत्साहन योजनाएँ शुरू की हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1, 2 और 3 तीनों सही हैं। श्रीहरिकोटा में तीसरे प्रक्षेपण परिसर और कुलसेकरपट्टिनम में SSLV लॉन्च कॉम्प्लेक्स का विकास किया जा रहा है। इन-स्पेस ने निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता और सरल प्रक्रियाओं सहित विभिन्न नीतिगत सुधार और प्रोत्साहन योजनाएँ शुरू की हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत के अंतरिक्ष प्रक्षेपण कार्यक्रम ने हाल के वर्षों में महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की हैं, जिसने देश को वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति के रूप में स्थापित किया है। इन उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए, भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी को बढ़ावा देने और इसकी प्रक्षेपण अवसंरचना को सुदृढ़ करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में, हाल की प्रमुख उपलब्धियों जैसे चंद्रयान-3, आदित्य-एल1, SPADEX मिशन और NISAR जैसे महत्वपूर्ण मिशनों का उल्लेख करें। दूसरे भाग में, सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का विश्लेषण करें, जिसमें श्रीहरिकोटा में तीसरे प्रक्षेपण परिसर और कुलसेकरपट्टिनम में SSLV लॉन्च कॉम्प्लेक्स जैसे अवसंरचना विकास शामिल हैं। साथ ही, इन-स्पेस की भूमिका, निजी संस्थाओं को दी गई सुविधाएँ, वित्तीय सहायता, नीतिगत सुधार और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण जैसे उपायों पर भी चर्चा करें। विश्लेषण में इन कदमों के महत्व और भारतीय अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र पर उनके संभावित प्रभाव को शामिल करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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