राजस्थान सरकार का वन्यजीव संरक्षण में 1500 करोड़ का बड़ा फैसला, AI से होगी निगरानी

राजस्थान सरकार का वन्यजीव संरक्षण में 1500 करोड़ का बड़ा फैसला, AI से होगी निगरानी

राजस्थान सरकार का वन्यजीव संरक्षण में 1500 करोड़ का बड़ा फैसला, AI से होगी निगरानी

पृथ्वी परियोजना के प्रमुख चरण1500 करोड़ आवंटननिधि स्वीकृतिAI निगरानी व्यवस्थातकनीक आधारितआवास सुधारप्राकृतिक संसाधनमानव-वन्य संघर्ष कमसुरक्षा बढ़ानाजैव विविधता संरक्षणपारिस्थितिकी संतुलन
पृथ्वी परियोजना के प्रमुख चरण

✎ पृथ्वी परियोजना राजस्थान सरकार की एक पहल है जो 1500 करोड़ रुपये के निवेश से वन्यजीव संरक्षण, मानव-वन्यजीव संघर्ष न्यूनीकरण और AI आधारित निगरानी पर केंद्रित है।

💬 Doubt on this topic? Ask Aanya, your free AI study-buddy, for an instant explanation. Ask Aanya →

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता
  • Prelims: पृथ्वी परियोजना, वन्यजीव संरक्षण, मानव-वन्यजीव संघर्ष, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), आर्द्रभूमि प्रबंधन, वन्यजीव एम्बुलेंस
  • Essay: सतत विकास और वन्यजीव संरक्षण: चुनौतियाँ और समाधान, तकनीक का उपयोग कर पर्यावरण संरक्षण: एक नया दृष्टिकोण

त्वरित पुनरावृत्ति: पृथ्वी परियोजना राजस्थान सरकार की एक पहल है जो 1500 करोड़ रुपये के निवेश से वन्यजीव संरक्षण, मानव-वन्यजीव संघर्ष न्यूनीकरण और AI आधारित निगरानी पर केंद्रित है।

💬 Doubt on this topic? Ask Aanya, your free AI study-buddy, for an instant explanation. Ask Aanya →

यह खबर चर्चा में क्यों?

राजस्थान सरकार ने जंगलों और वन्यजीवों के दीर्घकालिक संरक्षण, प्राकृतिक आवास सुधार तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) को कम करने के लिए 1,500 करोड़ रुपये की ‘पृथ्वी परियोजना’ शुरू करने का निर्णय लिया है। इस परियोजना के तहत वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास, भोजन और पानी की उपलब्धता में सुधार के साथ-साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) आधारित निगरानी व्यवस्था विकसित की जाएगी और आपातकालीन सेवाओं को मजबूत किया जाएगा।

पृष्ठभूमि

  • भारत में वन्यजीव संरक्षण एक महत्वपूर्ण विषय है, जिसे संविधान के अनुच्छेद 48A और 51A(g) के तहत राज्य और नागरिकों दोनों की जिम्मेदारी के रूप में मान्यता दी गई है।
  • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (Wildlife (Protection) Act, 1972) भारत में वन्यजीवों और उनके आवासों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है।
  • मानव-वन्यजीव संघर्ष एक बढ़ती हुई समस्या है, जहां मानव बस्तियों के विस्तार और वन्यजीवों के आवासों के सिकुड़ने के कारण दोनों के बीच टकराव बढ़ रहा है।
  • जलवायु परिवर्तन और पर्यावास विखंडन (Habitat Fragmentation) वन्यजीवों के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरे पैदा कर रहे हैं, जिससे उनके भोजन और पानी की उपलब्धता प्रभावित हो रही है।
  • आधुनिक तकनीक, जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता और ड्रोन, वन्यजीवों की निगरानी और संरक्षण प्रयासों को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक सिद्ध हो सकती हैं।
  • राज्य सरकारें अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण के लिए विभिन्न योजनाएं और परियोजनाएं चलाती हैं, जो केंद्र सरकार की नीतियों के पूरक होती हैं।

पृथ्वी परियोजना क्या है?

  • पृथ्वी परियोजना राजस्थान सरकार द्वारा शुरू की गई एक व्यापक पहल है, जिसका उद्देश्य राज्य में वन्यजीवों और उनके प्राकृतिक आवासों का दीर्घकालिक संरक्षण सुनिश्चित करना है।
  • इस परियोजना के तहत 1,500 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है, जो विभिन्न संरक्षण गतिविधियों पर खर्च किया जाएगा।
  • परियोजना का एक मुख्य घटक वन्यजीवों के लिए प्राकृतिक शिकार (Prey-base Augmentation) की उपलब्धता बढ़ाना है, विशेषकर मांसाहारी जीवों के लिए, ताकि वे भोजन की तलाश में मानव बस्तियों की ओर न आएं।
  • वन्यजीवों के लिए जंगलों के भीतर पर्याप्त भोजन और पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया जाएगा, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष कम हो सके।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित निगरानी तंत्र विकसित किया जाएगा, जो संवेदनशील वन क्षेत्रों और वन्यजीवों की गतिविधियों पर चौबीसों घंटे नज़र रखेगा।
  • घायल या संकटग्रस्त वन्यजीवों के लिए त्वरित बचाव, उपचार और पुनर्वास सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा, जिसमें 291 वन्यजीव एम्बुलेंस और रैपिड मोबिलिटी टीमें शामिल होंगी।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
1,500 करोड़ रुपये का आवंटन वन्यजीव संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित निगरानी वन्यजीवों की गतिविधियों पर चौबीसों घंटे निगरानी और अवैध शिकार पर अंकुश लगाने में सहायक।
प्राकृतिक आवास और भोजन का सुधार वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक पर्यावास में बनाए रखने और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में मदद करेगा।
291 वन्यजीव एम्बुलेंस और रैपिड मोबिलिटी टीमें घायल या संकटग्रस्त वन्यजीवों को त्वरित बचाव, उपचार और पुनर्वास प्रदान करने में सहायक।
संघर्ष निवारण अवसंरचना का विकास मानव बस्तियों और कृषि क्षेत्रों में वन्यजीवों के प्रवेश से होने वाले संघर्षों को कम करेगा।
उदयपुर में वन्यजीव उपचार केंद्र वन्यजीवों के लिए आधुनिक और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा।

महत्व

पर्यावरणीय महत्व

  • यह परियोजना जैव विविधता (Biodiversity) के संरक्षण और पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
  • वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों में सुधार से उनकी आबादी में वृद्धि होगी, जिससे पारिस्थितिकीय स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा।
  • आर्द्रभूमि (Wetland) प्रबंधन से जल संरक्षण और प्रवासी पक्षियों सहित विभिन्न प्रजातियों के लिए महत्वपूर्ण पर्यावासों का संरक्षण होगा।

सामाजिक महत्व

  • मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने से ग्रामीण समुदायों की सुरक्षा और आजीविका पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
  • वन्यजीवों के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ाने में मदद मिलेगी, जिससे सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा।

प्रशासनिक एवं तकनीकी महत्व

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग वन्यजीव प्रबंधन को अधिक कुशल और प्रभावी बनाएगा।
  • त्वरित प्रतिक्रिया और उपचार सुविधाओं से वन्यजीवों की मृत्यु दर कम होगी और उनके पुनर्वास में सहायता मिलेगी।

चुनौतियाँ

1. परियोजना का प्रभावी क्रियान्वयन

  • इतनी बड़ी परियोजना के लिए आवंटित धन का उचित और पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित करना।
  • विभिन्न विभागों और हितधारकों के बीच समन्वय स्थापित करना।

2. मानव-वन्यजीव संघर्ष

  • बढ़ती मानव आबादी और घटते वन क्षेत्रों के कारण संघर्षों को पूरी तरह समाप्त करना एक चुनौती है।
  • संघर्ष निवारण अवसंरचना के रखरखाव और प्रभावशीलता को सुनिश्चित करना।

3. तकनीकी एकीकरण और क्षमता निर्माण

  • AI आधारित निगरानी प्रणालियों को स्थापित करने और उनके संचालन के लिए प्रशिक्षित कर्मियों की आवश्यकता।
  • दूरदराज के क्षेत्रों में तकनीकी बुनियादी ढांचे की उपलब्धता सुनिश्चित करना।

4. वन्यजीवों का अवैध शिकार और व्यापार

  • अवैध शिकारियों से वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करना एक सतत चुनौती है।
  • सीमा पार वन्यजीव अपराधों से निपटना।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
धन का दुरुपयोग बड़ी राशि के आवंटन में भ्रष्टाचार या अक्षमता की संभावना।
स्थानीय समुदायों का प्रतिरोध संरक्षण प्रयासों से स्थानीय लोगों की आजीविका पर पड़ने वाले प्रभाव के कारण विरोध।
जलवायु परिवर्तन का प्रभाव बदलते मौसम पैटर्न और प्राकृतिक आपदाओं से वन्यजीवों के आवासों को खतरा।
प्रजातियों की विशिष्ट आवश्यकताएँ विभिन्न वन्यजीव प्रजातियों की अलग-अलग आवश्यकताओं को पूरा करने में जटिलता।
पर्याप्त जनशक्ति का अभाव वन्यजीव संरक्षण और प्रबंधन के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी।

आगे की राह

  • स्थानीय समुदायों को संरक्षण प्रयासों में सक्रिय रूप से शामिल करना और उन्हें वैकल्पिक आजीविका के अवसर प्रदान करना।
  • वन्यजीवों के लिए सुरक्षित गलियारों (Corridors) का विकास करना ताकि वे बिना किसी बाधा के आवागमन कर सकें।
  • वन्यजीवों के स्वास्थ्य की निगरानी के लिए पशु चिकित्सा सुविधाओं और विशेषज्ञता को और मजबूत करना।
  • अवैध शिकार और वन्यजीव अपराधों से निपटने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ाना।
  • जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का आकलन करना और वन्यजीवों के आवासों को इसके प्रति अधिक लचीला बनाने के लिए उपाय करना।
  • परियोजना के प्रभाव का नियमित मूल्यांकन करना और आवश्यकतानुसार रणनीतियों में संशोधन करना।
  • वन्यजीव संरक्षण के महत्व के बारे में जन जागरूकता अभियान चलाना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

वन्यजीव संरक्षण · मानव-वन्यजीव संघर्ष · कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) · पारिस्थितिक संतुलन · प्राकृतिक आवास सुधार · आर्द्रभूमि प्रबंधन · जैव विविधता · सतत विकास · वन्यजीव गलियारे · पर्यावरण नीति

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A (g)’, ‘note’: ‘प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और संवर्धन’}

अवधारणा प्रवाह

राजस्थान सरकार ने ‘पृथ्वी परियोजना’ शुरू की।  →  1,500 करोड़ रुपये का आवंटन और AI निगरानी।  →  वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास, भोजन और पानी में सुधार।  →  मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमी।  →  घायल वन्यजीवों का त्वरित बचाव और उपचार।  →  जैव विविधता का संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पृथ्वी परियोजना का मुख्य उद्देश्य वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में सुधार करना और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना है।
2. इस परियोजना के तहत केवल वन क्षेत्रों की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, न कि वन्यजीवों के भोजन और पानी की उपलब्धता पर।
3. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित निगरानी व्यवस्था का उपयोग वन्यजीवों की गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए किया जाएगा।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि पृथ्वी परियोजना का लक्ष्य प्राकृतिक आवास में सुधार और संघर्ष को कम करना है। कथन 2 गलत है क्योंकि परियोजना में भोजन और पानी की उपलब्धता पर भी विशेष बल दिया गया है। कथन 3 सही है क्योंकि एआई आधारित निगरानी व्यवस्था का प्रावधान है। अतः, केवल दो कथन सही हैं।

Q2. कथन (A): वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में पर्याप्त भोजन और पानी उपलब्ध कराना मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में सहायक हो सकता है।
कारण (R): भोजन और पानी की तलाश में वन्यजीव अक्सर मानव बस्तियों और कृषि क्षेत्रों में प्रवेश करते हैं।
उपरोक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?

  1. A और R दोनों सही हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है।
  2. A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
  3. A सही है, लेकिन R गलत है।
  4. A गलत है, लेकिन R सही है।

उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है। — कथन (A) सही है क्योंकि प्राकृतिक आवास में पर्याप्त संसाधन मिलने पर वन्यजीव मानव बस्तियों की ओर कम आकर्षित होंगे। कारण (R) भी सही है और यह कथन (A) का सही स्पष्टीकरण है, क्योंकि भोजन और पानी की कमी ही वन्यजीवों को मानव क्षेत्रों में आने के लिए प्रेरित करती है, जिससे संघर्ष बढ़ता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ राजस्थान की ‘पृथ्वी परियोजना’ जैसी पहलें वन्यजीव संरक्षण में प्रौद्योगिकी के उपयोग और सामुदायिक भागीदारी के महत्व को कैसे रेखांकित करती हैं? भारत में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में ऐसी परियोजनाओं की संभावित भूमिका का विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर कंकाल:
1. **परिचय:** पृथ्वी परियोजना का संक्षिप्त परिचय (उद्देश्य, 1500 करोड़ रुपये का आवंटन)।
2. **प्रौद्योगिकी का उपयोग:**
* कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित निगरानी प्रणाली (24 घंटे ट्रैकिंग, संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी)।
* वन्यजीव एम्बुलेंस और रैपिड मोबिलिटी टीमें (तत्काल बचाव, उपचार और पुनर्वास)।
* आधुनिक उपचार केंद्र (उदयपुर में प्रस्तावित)।
3. **सामुदायिक भागीदारी का महत्व:**
* मानव-वन्यजीव संघर्ष निवारण बुनियादी ढांचा (ग्रामीण क्षेत्रों में वन्यजीवों के प्रवेश को रोकना)।
* प्राकृतिक आवास सुधार (शिकार आधार बढ़ाना, भोजन और पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना) – इससे वन्यजीवों का मानव बस्तियों की ओर पलायन रुकेगा, जिससे स्थानीय समुदायों के साथ संघर्ष कम होगा।
* आर्द्रभूमि प्रबंधन (जैसे मेनार आर्द्रभूमि) – पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में स्थानीय समुदायों की भूमिका।
4. **मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में भूमिका:**
* वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में बनाए रखना (भोजन, पानी की उपलब्धता)।
* त्वरित प्रतिक्रिया और उपचार (घायल जीवों का बचाव)।
* संघर्ष निवारण संरचनाएं (बाड़, खाई आदि)।
* जागरूकता और शिक्षा के माध्यम से समुदायों को शामिल करना (प्रत्यक्ष रूप से उल्लेख नहीं है, लेकिन निहित है)।
* दीर्घकालिक पारिस्थितिक संतुलन और जैव विविधता संरक्षण।
5. **निष्कर्ष:** ऐसी परियोजनाओं का महत्व राष्ट्रीय वन्यजीव कार्य योजना (National Wildlife Action Plan) और सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals) के संदर्भ में।

स्रोत: amarujala.com

Rajasthan PCS (RPSC / RAS) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: राजस्थान सरकार द्वारा वन्यजीवों की सुरक्षा हेतु प्रस्तावित 1500 करोड़ रुपये के व्यय में निम्नलिखित में से कौन-सा प्रमुख घटक शामिल है?

  1. A. वन्यजीवों के लिए 291 एम्बुलेंस तैनाती तथा AI आधारित निगरानी प्रणाली
  2. B. केवल वन्यजीवों के आवास निर्माण हेतु व्यय
  3. C. राज्य के सभी वन्य जीव विहारों का विलय कर एकीकृत पार्क बनाना
  4. D. वन्यजीवों के लिए विदेशी तकनीक आयात करना

उत्तर: A. वन्यजीवों के लिए 291 एम्बुलेंस तैनाती तथा AI आधारित निगरानी प्रणाली — राजस्थान सरकार ने वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए 1500 करोड़ रुपये के व्यय में 291 एम्बुलेंस तैनाती तथा AI आधारित निगरानी प्रणाली को प्रमुख घटक के रूप में शामिल किया है।

Mains: राजस्थान में वन्यजीव सुरक्षा के लिए प्रस्तावित 1500 करोड़ रुपये के व्यय एवं AI आधारित निगरानी प्रणाली के महत्व एवं चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए, राज्य की जैव विविधता संरक्षण में इसकी भूमिका का विश्लेषण कीजिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


Related guides on our sites

No Comments

Post A Comment