07 Aug राज्यसभा ने पारित किया ₹54,067 करोड़ का विनियोग विधेयक, जानें प्रमुख बिंदु

✎ विनियोग विधेयक सरकार को भारत की संचित निधि से व्यय के लिए धन निकालने की संवैधानिक अनुमति प्रदान करता है, जिसे लोक लेखा समिति की जांच के बाद संसद द्वारा पारित किया जाता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान, संसद और राज्य विधायिका—संरचना, कार्यपद्धति, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उपजी समस्याएँ। | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय। सरकारी बजट।
- Prelims: विनियोग विधेयक (Appropriation Bill), भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India), लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee – PAC), अनुपूरक अनुदान (Supplementary Grants), अतिरिक्त अनुदान (Excess Grants), राजकोषीय उत्तरदायित्व (Fiscal Responsibility), संसद की वित्तीय शक्तियाँ, जम्मू और कश्मीर का वित्तीय प्रबंधन
- Essay: भारतीय लोकतंत्र में संसद की वित्तीय संप्रभुता और जवाबदेही।, संघवाद के संदर्भ में केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध और उनका प्रभाव।
त्वरित पुनरावृत्ति: विनियोग विधेयक सरकार को भारत की संचित निधि से व्यय के लिए धन निकालने की संवैधानिक अनुमति प्रदान करता है, जिसे लोक लेखा समिति की जांच के बाद संसद द्वारा पारित किया जाता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
राज्यसभा ने हाल ही में विनियोग विधेयक, 2026 को लौटा दिया, जिससे वित्तीय वर्ष 2022-23 के दौरान हुए ₹54,067 करोड़ के अतिरिक्त व्यय को वैधानिकता मिल गई। इस विधेयक पर चर्चा के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जम्मू और कश्मीर के वित्तीय प्रबंधन तथा केंद्र सरकार द्वारा प्रदान की जा रही सहायता पर भी प्रकाश डाला। यह घटनाक्रम संसदीय वित्तीय प्रक्रियाओं और केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों के महत्व को रेखांकित करता है।
पृष्ठभूमि
- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 114 के अनुसार, सरकार भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) से कोई भी धन संसद की अनुमति के बिना नहीं निकाल सकती।
- विनियोग विधेयक (Appropriation Bill) एक ऐसा विधेयक है जो सरकार को संचित निधि से धन निकालने की अनुमति देता है ताकि वह अपने व्यय को पूरा कर सके।
- जब किसी वित्तीय वर्ष में किसी सेवा पर उसके लिए स्वीकृत राशि से अधिक व्यय हो जाता है, तो इस अतिरिक्त व्यय को नियमित करने के लिए संसद में अतिरिक्त अनुदान (Excess Grants) की मांग प्रस्तुत की जाती है।
- अतिरिक्त व्यय की मांग को लोकसभा में मतदान के लिए रखने से पहले लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee – PAC) द्वारा इसकी जांच की जाती है।
- लोक लेखा समिति संसद की एक महत्वपूर्ण वित्तीय समिति है जो सरकार के व्यय की जांच करती है और यह सुनिश्चित करती है कि सार्वजनिक धन का उपयोग कुशलतापूर्वक और उद्देश्यपूर्ण तरीके से किया गया है।
- वर्तमान मामले में, ₹54,067 करोड़ का अतिरिक्त व्यय वित्तीय वर्ष 2022-23 से संबंधित था, जिसमें रेलवे मंत्रालय से संबंधित एक अदालत के आदेश के कारण ₹196.44 करोड़ और ऋण चुकाने के लिए ₹53,871 करोड़ शामिल थे।
- जम्मू और कश्मीर के संदर्भ में, केंद्र सरकार राज्य पुलिस के वेतन और पेंशन का पूरा खर्च वहन करती है और अतिरिक्त वित्तीय सहायता भी प्रदान करती है, जो केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों का एक उदाहरण है।
- अनुच्छेद 370 के निरसन के बाद जम्मू और कश्मीर के वित्तीय पुनर्गठन और केंद्र सरकार की भूमिका पर भी चर्चा हुई।
- यह विधेयक संसद के मानसून सत्र के दौरान पारित किया गया, जिसमें विपक्ष ने विभिन्न मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन किया।
विनियोग विधेयक क्या है?
- विनियोग विधेयक एक धन विधेयक (Money Bill) है जो सरकार को भारत की संचित निधि से धन निकालने की शक्ति प्रदान करता है।
- संविधान के अनुच्छेद 114 के तहत, संसद द्वारा विनियोग विधेयक पारित किए बिना संचित निधि से कोई भी धन नहीं निकाला जा सकता है।
- यह विधेयक सरकार के वार्षिक वित्तीय विवरण (बजट) में उल्लिखित अनुमानित व्यय को कवर करने के लिए आवश्यक होता है।
- विनियोग विधेयक में सरकार द्वारा किए जाने वाले सभी व्यय शामिल होते हैं, जिनमें राजस्व व्यय और पूंजीगत व्यय दोनों शामिल हैं।
- एक बार जब विनियोग विधेयक संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित हो जाता है और राष्ट्रपति की सहमति प्राप्त कर लेता है, तो यह एक अधिनियम बन जाता है, जिसे विनियोग अधिनियम कहा जाता है।
- विनियोग विधेयक को लोकसभा में ही पेश किया जा सकता है और राज्यसभा इसे केवल चर्चा कर सकती है, इसमें संशोधन का सुझाव दे सकती है, लेकिन इसे अस्वीकार या संशोधित नहीं कर सकती।
- यह विधेयक सरकार को वित्तीय वर्ष के लिए अपने कार्यक्रमों और नीतियों को लागू करने के लिए आवश्यक धन उपलब्ध कराता है।
- यह संसदीय नियंत्रण का एक महत्वपूर्ण साधन है, जो सरकार को सार्वजनिक धन के मनमाने उपयोग से रोकता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| विनियोग विधेयक, 2026 | यह विधेयक सरकार को वित्तीय वर्ष 2022-23 के दौरान किए गए ₹54,067 करोड़ के अतिरिक्त व्यय को अधिकृत करने की अनुमति देता है। |
| अतिरिक्त व्यय का कारण | रेल मंत्रालय से संबंधित एक अदालती आदेश (₹196.44 करोड़) और ऋण चुकौती (₹53,871 करोड़) के कारण यह अतिरिक्त व्यय हुआ। |
| लोक लेखा समिति (PAC) की भूमिका | अतिरिक्त व्यय की मांगों की जांच PAC द्वारा की गई थी और इसकी 39वीं रिपोर्ट अप्रैल में लोकसभा में प्रस्तुत की गई थी। |
| जम्मू और कश्मीर को वित्तीय सहायता | केंद्र सरकार जम्मू और कश्मीर पुलिस के वेतन और पेंशन का पूरा खर्च वहन करती है (लगभग ₹13,000 करोड़ सालाना)। |
| जम्मू और कश्मीर के लिए अतिरिक्त आवंटन | 2024-25 और 2025-26 के लिए, जम्मू और कश्मीर के बजट के संशोधित अनुमानों के अतिरिक्त ₹5,000 करोड़ प्रत्येक वर्ष आवंटित किए गए हैं। |
| अनुच्छेद 370 का निरसन | वित्त मंत्री ने अनुच्छेद 370 के निरसन के निर्णय की सराहना की, जिसका उद्देश्य जम्मू और कश्मीर की वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करना है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- विनियोग विधेयक का पारित होना सरकार को पूर्व में किए गए व्यय को कानूनी वैधता प्रदान करने में सक्षम बनाता है, जिससे वित्तीय अनुशासन बना रहता है।
- ऋण चुकौती के लिए बड़ी राशि का आवंटन सरकार की वित्तीय प्रतिबद्धताओं को दर्शाता है और राजकोषीय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
- जम्मू और कश्मीर को विशेष वित्तीय सहायता क्षेत्र के आर्थिक विकास और स्थिरता को सुनिश्चित करने में मदद करती है, विशेषकर अनुच्छेद 370 के निरसन के बाद।
शासन और जवाबदेही
- लोक लेखा समिति (PAC) द्वारा अतिरिक्त व्यय की जांच यह सुनिश्चित करती है कि सार्वजनिक धन का उपयोग विधिवत और जवाबदेही के साथ किया गया है।
- संसद द्वारा विनियोग विधेयक पर चर्चा और अनुमोदन संसदीय नियंत्रण और सरकार के वित्तीय मामलों पर निगरानी को मजबूत करता है।
संघवाद और केंद्र-राज्य संबंध
- केंद्र सरकार द्वारा जम्मू और कश्मीर को प्रदान की गई व्यापक वित्तीय सहायता भारतीय संघवाद के ढांचे के भीतर राज्यों की वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने की केंद्र की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
- लद्दाख के ऋण का भुगतान और जम्मू और कश्मीर के ऋण का पुनर्गठन केंद्र सरकार द्वारा इन केंद्र शासित प्रदेशों की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के प्रयासों को उजागर करता है।
चुनौतियाँ
1. राजकोषीय अनुशासन और अतिरिक्त व्यय
- अतिरिक्त व्यय का बार-बार होना बजटीय अनुमानों की सटीकता पर सवाल उठाता है और राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने में चुनौती पेश करता है।
- अदालती आदेशों या अप्रत्याशित आवश्यकताओं के कारण होने वाले अतिरिक्त व्यय को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करना सरकार के लिए एक सतत चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: राजकोषीय नीति, बजटीय प्रबंधन
2. संसदीय कार्यवाही में व्यवधान
- विपक्षी दलों द्वारा विरोध प्रदर्शन और सदन से बहिर्गमन महत्वपूर्ण विधायी कार्यों में बाधा डालते हैं, जिससे संसदीय कार्यप्रणाली प्रभावित होती है।
- संसदीय बहस और चर्चाओं के लिए एक रचनात्मक माहौल बनाए रखना विधायी प्रक्रिया की प्रभावशीलता के लिए महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: संसद की कार्यप्रणाली, विधायी प्रक्रिया
3. जम्मू और कश्मीर की वित्तीय आत्मनिर्भरता
- केंद्र सरकार पर जम्मू और कश्मीर की अत्यधिक वित्तीय निर्भरता क्षेत्र की दीर्घकालिक वित्तीय आत्मनिर्भरता के लिए एक चुनौती है।
- स्थायी आर्थिक विकास और राजस्व सृजन के लिए नीतियों को लागू करना महत्वपूर्ण है ताकि केंद्र पर निर्भरता कम हो सके।
यूपीएससी लिंक: केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध, क्षेत्रीय विकास
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| अतिरिक्त व्यय की आवृत्ति | यह बजटीय अनुमानों की सटीकता और राजकोषीय योजना की प्रभावशीलता पर सवाल उठाता है। |
| संसदीय गतिरोध | विपक्षी विरोध प्रदर्शनों के कारण महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा और पारित होने में देरी होती है, जिससे शासन प्रभावित होता है। |
| जम्मू और कश्मीर की वित्तीय निर्भरता | केंद्र सरकार पर अत्यधिक निर्भरता क्षेत्र की दीर्घकालिक वित्तीय आत्मनिर्भरता और स्थायी विकास के लिए चुनौती है। |
| लोक लेखा समिति की सिफारिशों का कार्यान्वयन | PAC की रिपोर्टों पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है ताकि वित्तीय अनियमितताओं को रोका जा सके। |
आगे की राह
- बजटीय अनुमानों की सटीकता में सुधार किया जाए ताकि अतिरिक्त व्यय की आवश्यकता को कम किया जा सके।
- अदालती आदेशों या अप्रत्याशित आवश्यकताओं से उत्पन्न होने वाले व्यय के लिए आकस्मिक निधि (Contingency Fund) के उपयोग और प्रबंधन को मजबूत किया जाए।
- संसदीय कार्यवाही में रचनात्मक बहस और चर्चा को बढ़ावा देने के लिए राजनीतिक दलों के बीच आम सहमति और सहयोग को प्रोत्साहित किया जाए।
- लोक लेखा समिति (PAC) की सिफारिशों पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि वित्तीय जवाबदेही बनी रहे।
- जम्मू और कश्मीर में स्थानीय राजस्व सृजन के अवसरों को बढ़ावा देने और निवेश आकर्षित करने के लिए नीतियों को लागू किया जाए ताकि वित्तीय आत्मनिर्भरता बढ़ाई जा सके।
- केंद्र सरकार द्वारा प्रदान की गई वित्तीय सहायता का प्रभावी ढंग से उपयोग सुनिश्चित करने के लिए जम्मू और कश्मीर प्रशासन की क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
विनियोग विधेयक · अतिरिक्त व्यय · भारत की संचित निधि · संसद की वित्तीय शक्तियाँ · लोक लेखा समिति · राजकोषीय उत्तरदायित्व · अनुपूरक अनुदान · जम्मू और कश्मीर का वित्तपोषण · संसदीय प्रक्रिया · बजट प्रक्रिया
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 114’, ‘note’: ‘विनियोग विधेयक का प्रावधान’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 370’, ‘note’: ‘जम्मू और कश्मीर के लिए विशेष प्रावधान (निरसित)’}
अवधारणा प्रवाह
सरकार द्वारा अतिरिक्त व्यय किया जाना → लोक लेखा समिति (PAC) द्वारा व्यय की जांच → विनियोग विधेयक का संसद में प्रस्तुत होना → संसद द्वारा विधेयक पर चर्चा और अनुमोदन → अतिरिक्त व्यय को कानूनी वैधता मिलना → जम्मू और कश्मीर को वित्तीय सहायता का प्रावधान
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विनियोग विधेयक (Appropriation Bill) भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) से धन निकालने की अनुमति देता है।
2. विनियोग विधेयक को केवल लोकसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है।
3. राज्यसभा विनियोग विधेयक में संशोधन कर सकती है लेकिन उसे अस्वीकृत नहीं कर सकती।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। विनियोग विधेयक का मुख्य उद्देश्य भारत की संचित निधि से सरकार के व्यय के लिए धन निकालना होता है। कथन 2 सही है। अनुच्छेद 114(1) के अनुसार, विनियोग विधेयक को केवल लोकसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है। कथन 3 गलत है। राज्यसभा विनियोग विधेयक पर केवल चर्चा कर सकती है और सिफारिशें दे सकती है, लेकिन उसे न तो संशोधित कर सकती है और न ही अस्वीकृत कर सकती है।
Q2. विनियोग विधेयक के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
1. यह भारत की संचित निधि से धन के विनियोग को अधिकृत करता है।
2. इसे संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित किया जाना आवश्यक है।
3. यह एक धन विधेयक (Money Bill) है।
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 3 — कथन 1 सही है, क्योंकि विनियोग विधेयक का प्राथमिक कार्य भारत की संचित निधि से व्यय के लिए धन को अधिकृत करना है। कथन 2 गलत है, क्योंकि विनियोग विधेयक को लोकसभा में प्रस्तुत किया जाता है और राज्यसभा केवल सिफारिशें दे सकती है, उसे पारित करने की शक्ति नहीं रखती। कथन 3 सही है, क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 110 के तहत विनियोग विधेयक को धन विधेयक के रूप में परिभाषित किया गया है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ विनियोग विधेयक क्या है और भारतीय संसदीय प्रणाली में इसकी क्या भूमिका है? भारत की संचित निधि से व्यय को विनियमित करने में संसद की वित्तीय शक्तियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** विनियोग विधेयक की परिभाषा, इसका उद्देश्य (भारत की संचित निधि से धन निकालना) और संवैधानिक आधार (अनुच्छेद 114) का संक्षिप्त परिचय।
2. **विनियोग विधेयक की भूमिका:**
* सरकारी व्यय को कानूनी वैधता प्रदान करना।
* संसद को कार्यपालिका के वित्तीय नियंत्रण में सक्षम बनाना।
* बजट प्रक्रिया का अभिन्न अंग।
* धन विधेयक के रूप में इसकी विशेष स्थिति (लोकसभा की प्रमुखता, राज्यसभा की सीमित शक्तियाँ)।
3. **संसद की वित्तीय शक्तियों का समालोचनात्मक परीक्षण:**
* **सकारात्मक पहलू:**
* **बजट पर नियंत्रण:** वार्षिक वित्तीय विवरण (बजट) की स्वीकृति।
* **अनुदान मांगों पर मतदान:** लोकसभा को विभिन्न मंत्रालयों की अनुदान मांगों पर मतदान का अधिकार।
* **विनियोग विधेयक और वित्त विधेयक:** व्यय और राजस्व दोनों पर संसदीय नियंत्रण।
* **वित्तीय समितियों की भूमिका:** लोक लेखा समिति (PAC), प्राक्कलन समिति (Estimates Committee), सार्वजनिक उपक्रम समिति (Committee on Public Undertakings) द्वारा व्यय की जाँच। वर्तमान संदर्भ में PAC की 39वीं रिपोर्ट का उल्लेख।
* **अतिरिक्त, अनुपूरक और अधिक अनुदान:** विशेष परिस्थितियों में भी संसदीय स्वीकृति की आवश्यकता।
* **सीमाएँ/चुनौतियाँ:**
* **’गिलोटिन’ का प्रयोग:** अधिकांश अनुदान मांगों पर बिना चर्चा के मतदान।
* **कार्यपालिका की प्रमुखता:** सरकार के पास बहुमत होने पर विधेयक आसानी से पारित हो जाते हैं।
* **राज्यसभा की सीमित शक्तियाँ:** विनियोग विधेयक के संबंध में राज्यसभा की भूमिका केवल सिफारिशी।
* **’चार्ज्ड एक्सपेंडिचर’ (Charged Expenditure):** भारत की संचित निधि पर भारित व्यय पर संसद में मतदान नहीं होता, केवल चर्चा हो सकती है।
* **तकनीकी जटिलता:** वित्तीय प्रक्रियाओं की जटिलता के कारण सांसदों के लिए गहन जाँच मुश्किल।
4. **निष्कर्ष:** संसद की वित्तीय शक्तियाँ भारतीय लोकतंत्र में कार्यपालिका पर नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन कुछ संरचनात्मक और प्रक्रियात्मक सीमाएँ इसकी प्रभावशीलता को कम करती हैं। वित्तीय जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए इन सीमाओं को दूर करने के उपायों पर विचार किया जाना चाहिए।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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