राज्यसभा सांसद ने एनईईटी प्रदर्शन पर चेहरे की पहचान तकनीक के इस्तेमाल को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी

राज्यसभा सांसद ने एनईईटी प्रदर्शन पर चेहरे की पहचान तकनीक के इस्तेमाल को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान, शासन और सामाजिक न्याय  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में विकास
  • Prelims: चेहरे की पहचान तकनीक (FRT), निजता का अधिकार, अनुच्छेद 21, पुट्टास्वामी वाद, आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) अधिनियम, 2022, जन निगरानी, मौलिक अधिकार
  • Essay: निजता का अधिकार और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन, डिजिटल युग में मौलिक अधिकारों का संरक्षण: चुनौतियाँ और समाधान

त्वरित पुनरावृत्ति: चेहरे की पहचान तकनीक का उपयोग बिना किसी वैध कानून के शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर करना निजता के मौलिक अधिकार और संवैधानिक स्वतंत्रता का उल्लंघन हो सकता है, जैसा कि उच्चतम न्यायालय में दायर याचिका में तर्क दिया गया है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, एक राज्यसभा सांसद ने NEET-UG परीक्षा लीक के विरोध प्रदर्शनों में दिल्ली पुलिस द्वारा चेहरे की पहचान तकनीक (Facial Recognition Technology – FRT) और संबंधित जन निगरानी उपायों के उपयोग के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की है। याचिका में इस प्रकार की निगरानी को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है, क्योंकि यह बिना किसी वैध कानून के हजारों शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के बायोमेट्रिक पहचानकर्ताओं के स्वचालित निष्कर्षण और राष्ट्रीय आपराधिक डेटाबेस के साथ उनके जुड़ाव से संबंधित है।

पृष्ठभूमि

  • याचिका में कहा गया है कि दिल्ली पुलिस ने विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने वाले छात्रों और व्यक्तियों के खिलाफ FRT और संबद्ध जन निगरानी उपायों का उपयोग किया है।
  • याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि इस प्रकार की निगरानी ‘पूर्ण कानूनी शून्य’ में की जा रही है, क्योंकि न तो दिल्ली पुलिस के अपने स्थायी आदेश और न ही आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) अधिनियम, 2022 (Criminal Procedure (Identification) Act, 2022) एक वैध सभा में भाग लेने वाले व्यक्तियों की बायोमेट्रिक निगरानी को अधिकृत करते हैं।
  • याचिका में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि सीसीटीवी कैमरों, ड्रोन, मोबाइल कमांड और कंट्रोल वाहन, और हैंड-हेल्ड उपकरणों के माध्यम से वीडियो और तस्वीरें प्राप्त करके निगरानी की गई है।
  • इसमें ‘इक्शना’ वाहन और ‘अजनालेंस’ स्मार्ट चश्मे का उपयोग करके स्वचालित FRT के माध्यम से फुटेज के वास्तविक समय प्रसंस्करण और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (National Crime Records Bureau) के ‘अभिज्ञान’ मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली (National Automated Fingerprint Identification System) के खिलाफ उंगलियों के निशान के संग्रह और मिलान का उल्लेख है।
  • यह मामला निजता के अधिकार, भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, और शांतिपूर्ण ढंग से इकट्ठा होने के अधिकार जैसे मौलिक अधिकारों पर FRT के संभावित प्रभाव के संबंध में महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न उठाता है।

चेहरे की पहचान तकनीक (FRT) क्या है?

  • चेहरे की पहचान तकनीक (FRT) एक बायोमेट्रिक तकनीक है जो व्यक्ति की पहचान करने या उसे सत्यापित करने के लिए उसके चेहरे की विशिष्ट विशेषताओं का उपयोग करती है।
  • यह तकनीक चेहरे के पैटर्न, आकार और बनावट का विश्लेषण करती है, जिसे ‘चेहरे के फिंगरप्रिंट’ के रूप में जाना जाता है।
  • FRT में आमतौर पर तीन मुख्य चरण शामिल होते हैं: चेहरा पहचानना (फेस डिटेक्शन), चेहरे का विश्लेषण (फेस एनालिसिस) और चेहरे की पहचान (फेस रिकॉग्निशन)।
  • यह तकनीक अक्सर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) और मशीन लर्निंग (Machine Learning) एल्गोरिदम का उपयोग करती है ताकि बड़ी संख्या में छवियों से चेहरे के डेटा का मिलान किया जा सके।
  • FRT का उपयोग विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जाता है, जैसे सुरक्षा, कानून प्रवर्तन, अभिगम नियंत्रण, और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स में प्रमाणीकरण।
  • भारत में, FRT का उपयोग कई सरकारी और निजी क्षेत्रों में बढ़ रहा है, लेकिन इसके उपयोग को नियंत्रित करने वाले व्यापक कानून का अभाव है।
  • निजता के अधिकार के संदर्भ में, FRT के व्यापक उपयोग पर चिंताएँ व्यक्त की गई हैं, विशेष रूप से जन निगरानी और व्यक्तिगत डेटा के संभावित दुरुपयोग के संबंध में।
  • उच्चतम न्यायालय ने के.एस. पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ वाद (K.S. Puttaswamy v. Union of India case) में निजता के अधिकार को अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) के तहत एक मौलिक अधिकार घोषित किया है, जिससे FRT जैसे निगरानी उपकरणों के उपयोग के लिए एक मजबूत कानूनी आधार की आवश्यकता उत्पन्न होती है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
चेहरे की पहचान तकनीक (Facial Recognition Technology – FRT) विरोध प्रदर्शनों में व्यक्तियों की पहचान और निगरानी के लिए उपयोग।
बायोमेट्रिक डेटा का संग्रह हजारों शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के बायोमेट्रिक पहचानकर्ताओं (biometric identifiers) का स्वचालित निष्कर्षण और मिलान।
राष्ट्रीय आपराधिक डेटाबेस से जुड़ाव एकत्रित डेटा को स्थायी राष्ट्रीय आपराधिक डेटाबेस (national criminal databases) से जोड़ना।
कानूनी शून्यता (Legal Vacuum) बिना किसी वैध कानून के बड़े पैमाने पर निगरानी का आरोप।
सर्वोच्च न्यायालय में याचिका राज्यसभा सांसद द्वारा FRT के उपयोग को असंवैधानिक घोषित करने की मांग।

महत्व

लोकतांत्रिक महत्व

  • विरोध प्रदर्शनों का अधिकार: यह मामला शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने के नागरिकों के मौलिक अधिकार (fundamental right) और राज्य द्वारा निगरानी के बीच संतुलन से संबंधित है।
  • नागरिक स्वतंत्रताएँ: बड़े पैमाने पर निगरानी से नागरिक स्वतंत्रताएँ (civil liberties) और निजता का अधिकार (right to privacy) प्रभावित होता है, जो लोकतंत्र के लिए आवश्यक हैं।

शासन और विधि का शासन

  • कानूनी ढाँचे का अभाव: याचिका इस बात पर जोर देती है कि FRT का उपयोग ‘पूर्ण कानूनी शून्यता’ में किया जा रहा है, जो विधि के शासन (rule of law) के सिद्धांत के खिलाफ है।
  • पुलिस शक्तियों का दुरुपयोग: यह पुलिस द्वारा अपनी शक्तियों के संभावित दुरुपयोग और बिना किसी स्पष्ट कानूनी आधार के नागरिकों की निगरानी पर सवाल उठाता है।

प्रौद्योगिकी और समाज

  • निजता पर तकनीकी प्रभाव: FRT जैसी उन्नत प्रौद्योगिकियों का उपयोग व्यक्तियों की निजता पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है, खासकर जब बायोमेट्रिक डेटा शामिल हो।
  • डेटा सुरक्षा और दुरुपयोग: एकत्रित बायोमेट्रिक डेटा की सुरक्षा और उसके संभावित दुरुपयोग के संबंध में चिंताएँ उठती हैं, खासकर जब इसे आपराधिक डेटाबेस से जोड़ा जाता है।

चुनौतियाँ

1. निजता का अधिकार

  • बायोमेट्रिक डेटा का संग्रह: FRT के माध्यम से हजारों प्रदर्शनकारियों के बायोमेट्रिक पहचानकर्ताओं का स्वचालित निष्कर्षण निजता के अधिकार का उल्लंघन करता है।
  • डेटा का दुरुपयोग: एकत्रित डेटा को राष्ट्रीय आपराधिक डेटाबेस से जोड़ने से व्यक्तियों की निजता और भविष्य में उनके खिलाफ डेटा के संभावित दुरुपयोग का जोखिम बढ़ जाता है।

2. विरोध प्रदर्शन का अधिकार

  • शांतिपूर्ण सभा पर प्रभाव: FRT का उपयोग शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने वाले व्यक्तियों पर एक ‘शीतल प्रभाव’ (chilling effect) डाल सकता है, जिससे वे अपने अधिकारों का प्रयोग करने से हिचकिचा सकते हैं।
  • लोकतांत्रिक भागीदारी में बाधा: बड़े पैमाने पर निगरानी लोकतांत्रिक भागीदारी और असहमति के अधिकार को कमजोर करती है, जो एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण है।

3. कानूनी और नियामक शून्यता

  • वैध कानून का अभाव: FRT के उपयोग को नियंत्रित करने वाले किसी विशिष्ट कानून की अनुपस्थिति इसे मनमाना और असंवैधानिक बनाती है।
  • मौजूदा कानूनों की अपर्याप्तता: आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) अधिनियम, 2022 (Criminal Procedure (Identification) Act, 2022) जैसे मौजूदा कानून शांतिपूर्ण सभाओं में बायोमेट्रिक निगरानी को अधिकृत नहीं करते हैं।

4. डेटा सुरक्षा और एल्गोरिथम पूर्वाग्रह

  • डेटा सुरक्षा जोखिम: बायोमेट्रिक डेटा के बड़े पैमाने पर संग्रह से डेटा उल्लंघनों (data breaches) और अनधिकृत पहुँच का जोखिम बढ़ जाता है।
  • एल्गोरिथम पूर्वाग्रह: FRT प्रणालियों में निहित एल्गोरिथम पूर्वाग्रह (algorithmic bias) गलत पहचान और भेदभाव को जन्म दे सकता है, जैसा कि 80% समानता स्कोर को सकारात्मक मिलान मानने से पता चलता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
बायोमेट्रिक निगरानी निजता के अधिकार का उल्लंघन और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों पर ‘शीतल प्रभाव’।
कानूनी आधार का अभाव FRT के उपयोग को नियंत्रित करने वाले किसी विशिष्ट कानून की अनुपस्थिति, जिससे मनमानी बढ़ती है।
डेटा का आपराधिक डेटाबेस से जुड़ाव एकत्रित डेटा के दुरुपयोग और व्यक्तियों के भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव का जोखिम।
डेटा सुरक्षा बायोमेट्रिक डेटा के बड़े पैमाने पर संग्रह से डेटा उल्लंघनों और अनधिकृत पहुँच का खतरा।
एल्गोरिथम पूर्वाग्रह FRT प्रणालियों में निहित पूर्वाग्रहों के कारण गलत पहचान और भेदभाव की संभावना।

आगे की राह

  • FRT के उपयोग को नियंत्रित करने के लिए एक व्यापक कानून का निर्माण करना, जिसमें निजता सुरक्षा, डेटा सुरक्षा और जवाबदेही के प्रावधान शामिल हों।
  • FRT के उपयोग से पहले निजता प्रभाव आकलन (Privacy Impact Assessment) अनिवार्य करना और उसके परिणामों को सार्वजनिक करना।
  • पुलिस और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए FRT के उपयोग पर स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रियाएँ (Standard Operating Procedures – SOPs) स्थापित करना।
  • बायोमेट्रिक डेटा के संग्रह, भंडारण और उपयोग के लिए मजबूत डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल और एन्क्रिप्शन (encryption) विधियों को लागू करना।
  • FRT प्रणालियों में एल्गोरिथम पूर्वाग्रह को कम करने और उनकी सटीकता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए नियमित ऑडिट और स्वतंत्र मूल्यांकन करना।
  • नागरिक समाज और विशेषज्ञों के साथ परामर्श करके FRT के नैतिक और सामाजिक प्रभावों पर व्यापक सार्वजनिक बहस को बढ़ावा देना।
  • सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस मामले में एक स्पष्ट न्यायिक घोषणा की प्रतीक्षा करना, जो FRT के उपयोग की संवैधानिक वैधता को परिभाषित करे।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

निजता का अधिकार · फेशियल रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी · सामूहिक निगरानी · अनुच्छेद 21 · अनुच्छेद 19 · आधारभूत संरचना सिद्धांत · न्यायिक समीक्षा · आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) अधिनियम, 2022 · पुट्टास्वामी निर्णय · विधि का शासन · डेटा संरक्षण · पुलिस सुधार

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 19(1)(a)’, ‘note’: ‘वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 19(1)(b)’, ‘note’: ‘शांतिपूर्ण और निरायुध सम्मेलन का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 14’, ‘note’: ‘कानून के समक्ष समानता’}

अवधारणा प्रवाह

NEET-UG परीक्षा में अनियमितताओं पर विरोध प्रदर्शन।  →  दिल्ली पुलिस द्वारा FRT और अन्य निगरानी तकनीकों का उपयोग।  →  शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के बायोमेट्रिक डेटा का संग्रह।  →  डेटा को राष्ट्रीय आपराधिक डेटाबेस से जोड़ना।  →  राज्यसभा सांसद द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर।  →  FRT के उपयोग की संवैधानिक वैधता पर न्यायिक समीक्षा की मांग।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. भारत में फेशियल रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी (FRT) के उपयोग के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में FRT के उपयोग को नियंत्रित करने वाला कोई विशिष्ट कानून नहीं है।
2. आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) अधिनियम, 2022 शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की बायोमेट्रिक निगरानी को स्पष्ट रूप से अधिकृत करता है।
3. पुट्टास्वामी निर्णय (2017) ने निजता के अधिकार को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत एक मौलिक अधिकार घोषित किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि भारत में FRT के उपयोग को नियंत्रित करने वाला कोई विशिष्ट कानून नहीं है, जिससे ‘कानूनी शून्यता’ की स्थिति बनी हुई है। कथन 2 गलत है क्योंकि याचिका में कहा गया है कि आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) अधिनियम, 2022 शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की बायोमेट्रिक निगरानी को अधिकृत नहीं करता है। कथन 3 सही है क्योंकि पुट्टास्वामी निर्णय ने निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार के रूप में स्थापित किया।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से संवैधानिक प्रावधान भारत में नागरिकों के विरोध करने के अधिकार से संबंधित है/हैं?
1. अनुच्छेद 19(1)(a) – भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार
2. अनुच्छेद 19(1)(b) – शांतिपूर्वक और बिना हथियारों के इकट्ठा होने का अधिकार
3. अनुच्छेद 21 – प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार

  1. केवल 1
  2. केवल 1 और 2
  3. केवल 2 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — अनुच्छेद 19(1)(a) और 19(1)(b) सीधे तौर पर विरोध करने के अधिकार से संबंधित हैं, क्योंकि विरोध अभिव्यक्ति और सभा का एक रूप है। अनुच्छेद 21 भी अप्रत्यक्ष रूप से संबंधित है क्योंकि इसमें निजता का अधिकार शामिल है, जो विरोध प्रदर्शनों के दौरान निगरानी से प्रभावित हो सकता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ फेशियल रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी (FRT) का उपयोग करते हुए सामूहिक निगरानी, विशेष रूप से शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के संदर्भ में, भारत में निजता के अधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियाँ प्रस्तुत करती है। इस कथन का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए और चर्चा कीजिए कि ऐसे निगरानी उपायों को नियंत्रित करने के लिए एक मजबूत कानूनी ढाँचे की आवश्यकता क्यों है।

रूपरेखा: प्रश्न के परिचय में FRT और सामूहिक निगरानी की अवधारणा को संक्षेप में परिभाषित करें। इसके बाद, निजता के अधिकार (अनुच्छेद 21) और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19) पर इसके प्रभावों का विश्लेषण करें, जिसमें पुट्टास्वामी निर्णय और विरोध करने के अधिकार का उल्लेख करें। ‘कानूनी शून्यता’ और इसके निहितार्थों पर प्रकाश डालें। अंत में, एक मजबूत डेटा संरक्षण कानून और निगरानी के लिए स्पष्ट दिशानिर्देशों सहित एक व्यापक कानूनी ढाँचे की आवश्यकता पर बल देते हुए निष्कर्ष प्रस्तुत करें।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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