विकसित ग्राम पंचायत योजना: ग्रामीण विकास में नया आयाम, जानें पूरी प्रक्रिया

विकसित ग्राम पंचायत योजना: ग्रामीण विकास में नया आयाम, जानें पूरी प्रक्रिया — Developed Gram Panchayat Scheme (VGPP) Process

विकसित ग्राम पंचायत योजना: ग्रामीण विकास में नया आयाम, जानें पूरी प्रक्रिया

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन, संविधान, राजव्यवस्था, सामाजिक न्याय और अंतर्राष्ट्रीय संबंध  |  GS Paper III — आर्थिक विकास, प्रौद्योगिकी, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा और आपदा प्रबंधन
  • Prelims: विकसित ग्राम पंचायत योजना (वीजीपीपी), विकसित भारत – रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025), ग्राम सभा, युक्‍तधारा पोर्टल, पंचायती राज संस्थाएँ, स्थानीय स्वशासन
  • Essay: पंचायती राज संस्थाओं के माध्यम से ग्रामीण भारत का सशक्तिकरण, प्रौद्योगिकी-सक्षम शासन और समावेशी विकास

त्वरित पुनरावृत्ति: विकसित ग्राम पंचायत योजना (वीजीपीपी) विकसित भारत – रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025) के तहत एक भागीदारी-आधारित ग्रामीण विकास योजना है, जो ग्राम सभा की सक्रिय भागीदारी और युक्‍तधारा जैसे प्रौद्योगिकी उपकरणों का उपयोग करके स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों की पहचान और नियोजन पर केंद्रित है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री कमलेश पासवान ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में विकसित ग्राम पंचायत योजना (वीजीपीपी) के संबंध में जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि विकसित भारत – रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025) की धारा 16 के अंतर्गत प्रत्येक ग्राम पंचायत को भागीदारी आधारित योजना प्रक्रिया के माध्यम से वीजीपीपी तैयार करनी होगी। इस योजना का उद्देश्य ग्राम पंचायतों के समग्र विकास को सुनिश्चित करना है, जिसमें ग्राम सभा द्वारा कार्यों की पहचान और प्राथमिकता निर्धारण शामिल है, और इसके लिए युक्‍तधारा जैसे जीआईएस-आधारित योजना सहायक उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में ग्रामीण विकास हमेशा से एक महत्वपूर्ण प्राथमिकता रही है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना है।
  • पंचायती राज संस्थाएँ (Panchayati Raj Institutions – PRIs) भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 के माध्यम से संवैधानिक दर्जा प्राप्त करने के बाद से ग्रामीण स्थानीय स्वशासन की आधारशिला रही हैं।
  • इन संस्थाओं को ग्रामीण विकास योजनाओं के नियोजन और कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का अधिकार दिया गया है।
  • विकसित भारत – रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025) एक व्यापक पहल है जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका के अवसरों को बढ़ाना है।
  • यह अधिनियम ग्रामीण विकास के लिए एक भागीदारी-आधारित दृष्टिकोण पर जोर देता है, जिसमें स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाती है।
  • प्रौद्योगिकी का उपयोग, जैसे कि भू-स्थानिक जानकारी (Geospatial Information) और विश्लेषणात्मक इनपुट, ग्रामीण योजना को अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी बनाने में सहायक सिद्ध हो रहा है।

विकसित ग्राम पंचायत योजना (वीजीपीपी) क्या है?

  • विकसित ग्राम पंचायत योजना (वीजीपीपी) विकसित भारत – रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025) की धारा 16 के अंतर्गत प्रत्येक ग्राम पंचायत द्वारा तैयार की जाने वाली एक भागीदारी-आधारित योजना है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य ग्राम पंचायत के समग्र विकास के लिए आवश्यक कार्यों की पहचान करना, उन्हें प्राथमिकता देना और उनका नियोजन करना है।
  • ग्राम सभा इस योजना प्रक्रिया में केंद्रीय भूमिका निभाती है, जो ग्राम पंचायत के समग्र विकास के लिए अनुमेय कार्यों की पहचान और प्राथमिकता निर्धारित करती है।
  • अनुमोदित वीजीपीपी को बाद में मध्यवर्ती और जिला पंचायत स्तरों पर समेकित किया जाता है, जिससे समग्र ब्लॉक और जिला योजनाएँ तैयार की जा सकें।
  • युक्‍तधारा एक जीआईएस-आधारित योजना सहायक उपकरण है जो भू-स्थानिक जानकारी और विश्लेषणात्मक इनपुट प्रदान करके वैज्ञानिक योजना बनाने में अधिकृत पदाधिकारियों की सहायता करता है।
  • इस योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए राष्ट्रीय, राज्य, जिला, ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तरों पर व्यापक क्षमता निर्माण (Capacity Building) कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
  • क्षमता निर्माण में वीजीपीपी तैयार करना, प्रौद्योगिकी-सक्षम योजना बनाना और युक्‍तधारा पोर्टल जैसे निगरानी उपकरणों का उपयोग करना शामिल है।
  • वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 की धारा 21 के अनुसार, राज्य सरकार पर यह दायित्व है कि वह जिला कार्यक्रम समन्वयक और कार्यक्रम अधिकारी को प्रभावी कार्यान्वयन हेतु आवश्यक कार्मिक एवं तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराए।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
भागीदारी आधारित योजना प्रक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि योजनाएँ स्थानीय आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के अनुरूप हों, जिससे जमीनी स्तर पर स्वामित्व और प्रभावशीलता बढ़ती है।
ग्राम सभा की भूमिका ग्राम पंचायत के समग्र विकास के लिए आवश्यक कार्यों की पहचान और प्राथमिकता निर्धारित करने में प्रत्यक्ष लोकतंत्र को बढ़ावा देती है।
युक्‍तधारा पोर्टल भू-स्थानिक जानकारी और विश्लेषणात्मक इनपुट प्रदान करके वैज्ञानिक योजना निर्माण में सहायता करता है, जिससे संसाधनों का इष्टतम उपयोग होता है।
क्षमता निर्माण राष्ट्रीय से ग्राम पंचायत स्तर तक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए पदाधिकारियों और कर्मचारियों को सशक्त बनाता है।
योजनाओं का एकीकरण ग्राम पंचायत स्तर पर अनुमोदित योजनाओं को ब्लॉक और जिला स्तर पर समेकित किया जाता है, जिससे समग्र क्षेत्रीय विकास योजनाएँ बनती हैं।
मेट को भुगतान योजना में संलग्न मेट को अर्ध-कुशल श्रमिकों की वेतन दर पर भुगतान किया जाता है, जिससे स्थानीय रोजगार और आजीविका को समर्थन मिलता है।

महत्व

शासन और विकेंद्रीकरण

  • यह योजना पंचायती राज संस्थाओं (Panchayati Raj Institutions) को सशक्त बनाती है, जिससे स्थानीय स्वशासन (Local Self-Governance) और अधिक प्रभावी होता है।
  • ग्राम सभाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में केंद्रीय भूमिका देकर प्रत्यक्ष लोकतंत्र (Direct Democracy) को मजबूत करती है।
  • योजना निर्माण में जनभागीदारी (Public Participation) को बढ़ावा देती है, जिससे विकास कार्य स्थानीय आवश्यकताओं के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।

आर्थिक और सामाजिक विकास

  • स्थानीय स्तर पर रोजगार और आजीविका के अवसर सृजित करने में मदद करती है, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में।
  • वैज्ञानिक योजना निर्माण के माध्यम से संसाधनों के कुशल उपयोग को बढ़ावा देती है, जिससे विकास परियोजनाओं की प्रभावशीलता बढ़ती है।
  • ग्राम पंचायतों के समग्र विकास के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण प्रदान करती है, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों को शामिल किया जाता है।

प्रौद्योगिकी का उपयोग

  • युक्‍तधारा जैसे GIS-आधारित उपकरण का उपयोग करके योजना प्रक्रिया में पारदर्शिता (Transparency) और दक्षता (Efficiency) लाती है।
  • भू-स्थानिक डेटा के माध्यम से बेहतर निर्णय लेने में सहायता करती है, जिससे विकास कार्यों की गुणवत्ता में सुधार होता है।
  • डिजिटल साक्षरता (Digital Literacy) और प्रौद्योगिकी अपनाने को बढ़ावा देती है, विशेषकर ग्रामीण प्रशासनिक स्तर पर।

चुनौतियाँ

1. क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण

  • विभिन्न स्तरों पर पदाधिकारियों और कर्मचारियों को प्रभावी ढंग से प्रशिक्षित करना एक बड़ी चुनौती है, विशेषकर दूरदराज के क्षेत्रों में।
  • प्रशिक्षण सामग्री की गुणवत्ता और उसकी पहुँच सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है ताकि सभी हितधारक लाभान्वित हो सकें।

2. डिजिटल डिवाइड और प्रौद्योगिकी पहुँच

  • युक्‍तधारा जैसे डिजिटल उपकरणों के प्रभावी उपयोग के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिजिटल साक्षरता की कमी एक बाधा हो सकती है।
  • सभी ग्राम पंचायतों तक आवश्यक हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की पहुँच सुनिश्चित करना भी एक चुनौती है।

3. राज्यों और केंद्र के बीच समन्वय

  • योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच मजबूत समन्वय आवश्यक है, विशेषकर कार्मिक और तकनीकी सहायता के प्रावधान में।
  • विभिन्न राज्यों में परिचालन ढाँचे और प्रशासनिक व्यवस्थाओं में भिन्नताएँ कार्यान्वयन को जटिल बना सकती हैं।

4. वित्तीय संसाधन और आवंटन

  • योजनाओं के सफल कार्यान्वयन के लिए पर्याप्त और समय पर वित्तीय संसाधनों का आवंटन सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
  • स्थानीय स्तर पर वित्तीय प्रबंधन और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी एक चुनौती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
मानव संसाधन की कमी जिला कार्यक्रम समन्वयक, कार्यक्रम अधिकारी, रोजगार सहायक और कंप्यूटर ऑपरेटर जैसे आवश्यक कार्मिकों की उपलब्धता और नियुक्ति।
प्रौद्योगिकी का सीमित उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता, इंटरनेट कनेक्टिविटी और तकनीकी बुनियादी ढाँचे की कमी के कारण युक्‍तधारा जैसे पोर्टल का पूर्ण उपयोग न हो पाना।
भागीदारी की गुणवत्ता ग्राम सभाओं में सभी वर्गों की सक्रिय और सार्थक भागीदारी सुनिश्चित करना, विशेषकर हाशिए पर पड़े समुदायों की।
योजनाओं का एकीकरण ग्राम पंचायत स्तर पर तैयार की गई योजनाओं को ब्लॉक और जिला स्तर पर प्रभावी ढंग से समेकित करने में आने वाली प्रशासनिक और प्रक्रियात्मक बाधाएँ।
निगरानी और मूल्यांकन योजनाओं के कार्यान्वयन की प्रभावी निगरानी और मूल्यांकन के लिए मजबूत तंत्र का अभाव, जिससे जवाबदेही प्रभावित हो सकती है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • विकसित भारत – रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण): वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025

आगे की राह

  • क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को और अधिक सुदृढ़ करना, जिसमें प्रौद्योगिकी-सक्षम योजना और युक्‍तधारा पोर्टल के उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जाए।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल बुनियादी ढाँचे और कनेक्टिविटी में सुधार करना ताकि युक्‍तधारा जैसे उपकरणों का अधिकतम उपयोग हो सके।
  • ग्राम सभाओं में महिलाओं, कमजोर वर्गों और हाशिए पर पड़े समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयास करना।
  • केंद्र और राज्य सरकारों के बीच प्रभावी समन्वय तंत्र स्थापित करना ताकि कार्मिकों की उपलब्धता और तकनीकी सहायता सुनिश्चित हो सके।
  • योजनाओं के वित्तीय आवंटन और उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए मजबूत निगरानी और मूल्यांकन तंत्र विकसित करना।
  • स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप नवीन और टिकाऊ विकास परियोजनाओं की पहचान और कार्यान्वयन को प्रोत्साहित करना।
  • ग्राम पंचायत स्तर पर मेट जैसे स्थानीय श्रमिकों के कौशल विकास और उन्हें उचित पारिश्रमिक सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

विकसित ग्राम पंचायत योजना (VGPP) · विकसित भारत – रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) (VB-GRAM Ji) · ग्राम सभा · भागीदारी आधारित योजना प्रक्रिया · युक्‍तधारा पोर्टल · क्षमता निर्माण · पंचायती राज संस्थाएँ · स्थानीय स्वशासन

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 40’, ‘note’: ‘ग्राम पंचायतों का संगठन’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 243-जी’, ‘note’: ‘पंचायतों की शक्तियाँ, प्राधिकार और उत्तरदायित्व’}
  • {‘article’: ‘ग्यारहवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘पंचायतों के कार्यक्षेत्र के विषय’}

अवधारणा प्रवाह

VB-GRAM-G अधिनियम, 2025 की धारा 16 के तहत ग्राम पंचायत को VGP तैयार करनी होगी।  →  ग्राम सभा ग्राम पंचायत के समग्र विकास के लिए कार्यों की पहचान और प्राथमिकता निर्धारित करती है।  →  ग्राम पंचायत VGP तैयार करती है, जिसमें युक्‍तधारा (GIS-आधारित उपकरण) वैज्ञानिक योजना में सहायता करता है।  →  अनुमोदित VGP को मध्यवर्ती और जिला पंचायत स्तरों पर समेकित किया जाता है।  →  समग्र ब्लॉक और जिला योजनाएँ तैयार की जाती हैं।  →  राज्य सरकार प्रभावी कार्यान्वयन हेतु कार्मिक और तकनीकी सहायता प्रदान करती है।  →  राष्ट्रीय से ग्राम पंचायत स्तर तक क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. विकसित ग्राम पंचायत योजना (VGPP) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह विकसित भारत – रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 की धारा 16 के अंतर्गत तैयार की जाती है।
2. ग्राम सभा ग्राम पंचायत के समग्र विकास के लिए आवश्यक कार्यों की पहचान और प्राथमिकता निर्धारित करती है।
3. युक्‍तधारा पोर्टल एक जीआईएस-आधारित उपकरण है जो VGPP तैयार करने में वैज्ञानिक योजना बनाने में सहायता करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि VGPP VB-GRAM Ji अधिनियम, 2025 की धारा 16 के अंतर्गत तैयार की जाती है। कथन 2 सही है क्योंकि ग्राम सभा ही कार्यों की पहचान और प्राथमिकता निर्धारित करती है। कथन 3 भी सही है क्योंकि युक्‍तधारा एक जीआईएस-आधारित योजना सहायक उपकरण है।

Q2. विकसित भारत – रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) (VB-GRAM Ji) अधिनियम, 2025 के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अधिनियम की धारा 21 राज्य सरकार पर जिला कार्यक्रम समन्वयक और कार्यक्रम अधिकारी को आवश्यक कार्मिक एवं तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने का दायित्व डालती है।
2. मेट को देय वेतन दरों का निर्धारण केंद्र सरकार द्वारा किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. 1 और 2 दोनों
  4. न तो 1 और न ही 2

उत्तर: केवल 1 — कथन 1 सही है क्योंकि धारा 21 राज्य सरकार पर कार्मिक और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने का दायित्व डालती है। कथन 2 गलत है क्योंकि मेट को देय वेतन दरों का निर्धारण संबंधित राज्य सरकारों/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन द्वारा किया जाता है, न कि केंद्र सरकार द्वारा।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ विकसित ग्राम पंचायत योजना (VGPP) के उद्देश्यों और कार्यान्वयन तंत्र पर चर्चा कीजिए। यह योजना स्थानीय स्वशासन को सशक्त बनाने और ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने में किस प्रकार सहायक सिद्ध हो सकती है? (250 शब्द)

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में VGPP के उद्देश्यों (जैसे भागीदारी आधारित योजना, समग्र विकास) और इसके कार्यान्वयन तंत्र (जैसे VB-GRAM Ji अधिनियम, ग्राम सभा की भूमिका, युक्‍तधारा पोर्टल, क्षमता निर्माण) का विस्तार से वर्णन करें। दूसरे भाग में, यह बताएं कि कैसे यह योजना पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत करके, निर्णय लेने में स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करके और भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी का उपयोग करके ग्रामीण विकास को गति दे सकती है। अंत में, स्थानीय स्वशासन और समावेशी विकास पर इसके संभावित सकारात्मक प्रभावों पर प्रकाश डालें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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