वीबी-जी राम-जी अधिनियम 2025: ग्रामीण रोजगार गारंटी में बड़ा बदलाव, जानिए पूरी डिटेल्स

वीबी-जी राम-जी अधिनियम, 2025 के अंतर्गत रोजगार गारंटी और आजीविका सहायता — concept mind map

वीबी-जी राम-जी अधिनियम 2025: ग्रामीण रोजगार गारंटी में बड़ा बदलाव, जानिए पूरी डिटेल्स

✎ वीबी-जी राम-जी अधिनियम, 2025 ग्रामीण परिवारों के लिए गारंटीकृत रोजगार को 100 से बढ़ाकर 125 दिन करता है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण आजीविका सुरक्षा, सतत परिसंपत्ति निर्माण और अवसंरचना विकास को बढ़ावा देना है।

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वीबी-जी राम-जी अधिनियम प्रवाह

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — सरकार की नीतियां और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप तथा उनके डिजाइन और कार्यान्वयन से उत्पन्न मुद्दे  |  GS Paper III — समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय; सरकारी बजट के मुख्य घटक
  • Prelims: वीबी-जी राम-जी अधिनियम, 2025, रोजगार गारंटी योजनाएँ, ग्रामीण विकास मंत्रालय, निधि साझाकरण पद्धति, डीबीटी-स्पर्श, सामाजिक लेखा परीक्षा
  • Essay: ग्रामीण भारत में समावेशी विकास और आजीविका सुरक्षा, भारत में गरीबी उन्मूलन और रोजगार सृजन में सरकारी योजनाओं की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: वीबी-जी राम-जी अधिनियम, 2025 ग्रामीण परिवारों के लिए गारंटीकृत रोजगार को 100 से बढ़ाकर 125 दिन करता है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण आजीविका सुरक्षा, सतत परिसंपत्ति निर्माण और अवसंरचना विकास को बढ़ावा देना है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री कमलेश पासवान ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि विकसित भारत–रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम जी) अधिनियम, 2025, 1 जुलाई, 2026 से लागू हो गया है। यह अधिनियम ग्रामीण परिवारों की आजीविका सुरक्षा को बढ़ाने के उद्देश्य से 125 दिनों के गारंटीकृत मजदूरी रोजगार, सतत ग्रामीण परिसंपत्तियों के सृजन और ग्रामीण अवसंरचना को सुदृढ़ करने पर केंद्रित है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका सुरक्षा हमेशा से एक महत्वपूर्ण नीतिगत चिंता का विषय रही है।
  • महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) जैसे पूर्ववर्ती कार्यक्रमों ने ग्रामीण रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
  • ग्रामीण परिवारों को मौसमी बेरोजगारी और आय की अनिश्चितता से बचाने के लिए एक सुदृढ़ वैधानिक ढांचे की आवश्यकता महसूस की गई है।
  • सरकार का लक्ष्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और ग्रामीण-शहरी प्रवास को कम करना है, जिसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी रोजगार के अवसर पैदा करना आवश्यक है।
  • प्रौद्योगिकी के उपयोग और शासन में पारदर्शिता को बढ़ावा देना वर्तमान सरकारी नीतियों का एक अभिन्न अंग है, जिसे इस अधिनियम में भी शामिल किया गया है।
  • विभिन्न केंद्रीय और राज्य सरकारों के कार्यक्रमों के बीच अभिसरण (Convergence) को बढ़ावा देना संसाधनों के कुशल उपयोग और बेहतर परिणामों के लिए महत्वपूर्ण है।

वीबी-जी राम-जी अधिनियम, 2025 क्या है?

  • यह अधिनियम ग्रामीण परिवारों की आजीविका सुरक्षा बढ़ाने के उद्देश्य से विकसित भारत–रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम जी) के तहत लागू किया गया है।
  • यह प्रत्येक ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्यों को, जो अकुशल शारीरिक कार्य करने के इच्छुक हैं, एक वित्त वर्ष में 125 दिनों के गारंटीकृत रोजगार का प्रावधान करता है (जो पहले 100 दिन था)।
  • अधिनियम सतत एवं उत्पादक ग्रामीण परिसंपत्तियों के सृजन, सतत आजीविका को बढ़ावा देने तथा ग्रामीण अवसंरचना को सुदृढ़ करने पर बल देता है।
  • यह जल-संबंधी कार्यों, मूल ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका-संबंधी अवसंरचना तथा प्रतिकूल मौसम घटनाओं के शमन हेतु कार्यों पर विशेष ध्यान केंद्रित करता है।
  • यह अधिनियम प्रौद्योगिकी-सक्षम योजना, कार्यान्वयन, निगरानी तथा पारदर्शिता को बढ़ावा देता है, जिसमें मजदूरी भुगतान के लिए डीबीटी-स्पर्श (DBT-SPARSH) का उपयोग शामिल है।
  • निधि साझाकरण पद्धति उत्तर पूर्वी राज्यों, हिमालयी राज्यों तथा संघ राज्य क्षेत्रों (उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर) के लिए 90:10 तथा विधानमंडल वाले अन्य सभी राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों के लिए 60:40 है।
  • इसमें निर्धारित समय के भीतर रोजगार न दिए जाने पर बेरोजगारी भत्ते तथा मजदूरी भुगतान में विलंब के लिए मुआवजे का स्पष्ट प्रावधान है।
  • अधिनियम में प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए निगरानी, मूल्यांकन, सामाजिक लेखा परीक्षा (Social Audit) और शिकायत निवारण के लिए एक व्यापक संस्थागत ढांचा भी शामिल है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
125 दिनों का गारंटीकृत रोजगार प्रत्येक ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्यों को अकुशल शारीरिक कार्य के लिए एक वित्त वर्ष में 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिनों का रोजगार सुनिश्चित करता है, जिससे ग्रामीण आय और आजीविका सुरक्षा में वृद्धि होती है।
निधि साझाकरण पद्धति उत्तर पूर्वी, हिमालयी राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों (उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर) के लिए 90:10 तथा अन्य राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के लिए 60:40 का अनुपात, क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुसार वित्तीय सहायता सुनिश्चित करता है।
समग्र सरकारी दृष्टिकोण अन्य केंद्रीय और राज्य कार्यक्रमों के साथ अभिसरण को बढ़ावा देता है, जिससे जल-संबंधी कार्यों, मूल ग्रामीण अवसंरचना और आजीविका-संबंधी अवसंरचना पर केंद्रित एक एकीकृत विकास मॉडल बनता है।
प्रौद्योगिकी-सक्षम कार्यान्वयन योजना, कार्यान्वयन, निगरानी और पारदर्शिता के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग, जैसे DBT-स्पर्श के माध्यम से मजदूरी भुगतान, दक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करता है।
श्रमिकों के सांविधिक अधिकार निर्धारित समय में रोजगार न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता और मजदूरी भुगतान में देरी के लिए मुआवजे का प्रावधान करके श्रमिकों के अधिकारों को मजबूत करता है।
व्यापक शिकायत निवारण तंत्र ब्लॉक और जिला स्तर पर बहु-स्तरीय शिकायत निवारण तंत्र, निगरानी और मूल्यांकन के लिए संस्थागत ढांचा, प्रभावी कार्यान्वयन और पारदर्शिता सुनिश्चित करता है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • वीबी-जी राम-जी अधिनियम, 2025 (VB-G Ram-Ji Act, 2025) के तहत ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों का गारंटीकृत मजदूरी रोजगार प्रदान करने से ग्रामीण आय में वृद्धि होगी, जिससे गरीबी कम होगी और क्रय शक्ति बढ़ेगी।
  • यह अधिनियम ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन को बढ़ावा देगा, जिससे मौसमी बेरोजगारी और ग्रामीण-शहरी प्रवासन को कम करने में मदद मिलेगी।
  • सतत एवं उत्पादक ग्रामीण परिसंपत्तियों (Rural Assets) के सृजन पर बल देने से ग्रामीण अवसंरचना (Rural Infrastructure) जैसे जल-संबंधी कार्य, सड़क और आजीविका-संबंधी अवसंरचना का विकास होगा, जो दीर्घकालिक आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को गति देगा।

सामाजिक महत्व

  • ग्रामीण परिवारों, विशेषकर कमजोर वर्गों की आजीविका सुरक्षा को बढ़ाकर, यह अधिनियम सामाजिक समानता और समावेश को बढ़ावा देगा।
  • महिलाओं और अन्य हाशिए पर पड़े समूहों को रोजगार के अवसर प्रदान करके, यह सामाजिक सशक्तिकरण (Social Empowerment) में योगदान देगा।
  • बेरोजगारी भत्ते और मजदूरी भुगतान में विलंब के लिए मुआवजे का प्रावधान श्रमिकों के अधिकारों को सुदृढ़ करेगा और उनकी गरिमा सुनिश्चित करेगा।

प्रशासनिक महत्व

  • यह अधिनियम एक ‘समग्र सरकार दृष्टिकोण’ (Whole of Government Approach) की परिकल्पना करता है, जो केंद्र और राज्य सरकारों के कार्यक्रमों के बीच अभिसरण (Convergence) को बढ़ावा देगा, जिससे संसाधनों का कुशल उपयोग होगा।
  • प्रौद्योगिकी-सक्षम योजना, कार्यान्वयन, निगरानी और पारदर्शिता (Transparency) पर बल देने से कार्यक्रम की दक्षता और जवाबदेही (Accountability) बढ़ेगी, जिससे भ्रष्टाचार कम होगा।
  • ग्राम पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका और ब्लॉक तथा जिला स्तर पर शिकायत निवारण तंत्र (Grievance Redressal Mechanism) स्थानीय शासन को मजबूत करेगा और लाभार्थियों तक लाभों की समयबद्ध पहुँच सुनिश्चित करेगा।

पर्यावरणीय महत्व

  • जल-संबंधी कार्यों और प्रतिकूल मौसम घटनाओं के शमन (Mitigation) हेतु कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने से ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरणीय स्थिरता (Environmental Sustainability) को बढ़ावा मिलेगा।
  • सतत ग्रामीण परिसंपत्तियों के सृजन से प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर प्रबंधन होगा और जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के प्रभावों को कम करने में मदद मिलेगी।

चुनौतियाँ

1. निधि का कुशल उपयोग

  • आवंटित 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक के कुल परिव्यय का प्रभावी ढंग से उपयोग सुनिश्चित करना, ताकि धन का अपव्यय न हो।
  • केंद्र और राज्यों के बीच निधि साझाकरण पद्धति (90:10 और 60:40) में राज्यों द्वारा अपने हिस्से का समय पर और पर्याप्त योगदान सुनिश्चित करना एक चुनौती हो सकती है।

2. कार्यान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही

  • प्रौद्योगिकी-सक्षम प्रबंधन सूचना प्रणाली (MIS) और सामाजिक लेखा परीक्षा (Social Audit) के बावजूद, जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को रोकना एक सतत चुनौती बनी रहेगी।
  • मजदूरी भुगतान में देरी और बेरोजगारी भत्ते के भुगतान में होने वाली समस्याओं को प्रभावी ढंग से संबोधित करना।

3. गुणवत्तापूर्ण परिसंपत्ति सृजन

  • केवल रोजगार सृजन पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, टिकाऊ और उत्पादक ग्रामीण परिसंपत्तियों का निर्माण सुनिश्चित करना, जिनकी ग्रामीण समुदायों के लिए वास्तविक उपयोगिता हो।
  • सृजित परिसंपत्तियों के रखरखाव और दीर्घकालिक उपयोगिता सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त तंत्र का अभाव।

4. श्रमिकों का पंजीकरण और मांग

  • ग्रामीण क्षेत्रों में सभी पात्र परिवारों, विशेषकर दूरदराज के क्षेत्रों में, को पंजीकरण प्रक्रिया और रोजगार की मांग के सरलीकृत तंत्र के बारे में जागरूक करना।
  • अनपढ़ और तकनीकी रूप से कम साक्षर श्रमिकों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण और मांग प्रक्रिया को सुलभ बनाना।

5. अंतर-विभागीय समन्वय

  • ‘समग्र सरकार दृष्टिकोण’ के तहत विभिन्न केंद्रीय और राज्य सरकारों के कार्यक्रमों के साथ प्रभावी अभिसरण सुनिश्चित करना, ताकि योजनाओं का दोहराव न हो और संसाधनों का अधिकतम उपयोग हो।
  • विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी से परियोजना कार्यान्वयन में देरी हो सकती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
निधि का कुशल उपयोग आवंटित धन का अपव्यय रोकना, राज्यों द्वारा समय पर योगदान सुनिश्चित करना।
पारदर्शिता और जवाबदेही जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और मजदूरी भुगतान में देरी को रोकना।
गुणवत्तापूर्ण परिसंपत्ति सृजन टिकाऊ और उत्पादक ग्रामीण परिसंपत्तियों का निर्माण, रखरखाव और दीर्घकालिक उपयोगिता सुनिश्चित करना।
श्रमिकों का पंजीकरण सभी पात्र परिवारों तक पहुँच, पंजीकरण प्रक्रिया की सरलता और जागरूकता बढ़ाना।
अंतर-विभागीय समन्वय विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों के बीच प्रभावी अभिसरण और सहयोग सुनिश्चित करना।
शिकायत निवारण शिकायत निवारण तंत्र की दक्षता और समयबद्धता सुनिश्चित करना।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA)

आगे की राह

  • निधि के कुशल उपयोग और समय पर आवंटन को सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच एक सुदृढ़ वित्तीय समन्वय तंत्र स्थापित करना।
  • प्रौद्योगिकी-सक्षम निगरानी प्रणाली (MIS) को और मजबूत करना तथा सामाजिक लेखा परीक्षा (Social Audit) को अनिवार्य और प्रभावी बनाना, जिससे जमीनी स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो।
  • सृजित की जाने वाली परिसंपत्तियों की गुणवत्ता और उपयोगिता सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली विकसित करना तथा उनके दीर्घकालिक रखरखाव के लिए ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाना।
  • ग्रामीण श्रमिकों, विशेषकर महिलाओं और कमजोर वर्गों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को और सरल बनाना, जागरूकता अभियान चलाना और डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देना।
  • विभिन्न केंद्रीय और राज्य स्तरीय ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के साथ वीबी-जी राम-जी अधिनियम का प्रभावी अभिसरण सुनिश्चित करने के लिए एक नोडल एजेंसी या समन्वय समिति का गठन करना।
  • शिकायत निवारण तंत्र को अधिक सुलभ, समयबद्ध और प्रभावी बनाने के लिए ब्लॉक और जिला स्तर पर समर्पित कर्मियों की नियुक्ति करना तथा नियमित रूप से उनकी कार्यप्रणाली की समीक्षा करना।
  • अधिनियम के तहत श्रमिकों के अधिकारों, विशेषकर बेरोजगारी भत्ते और मजदूरी भुगतान में देरी के मुआवजे के प्रावधानों के बारे में व्यापक जागरूकता अभियान चलाना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

वीबी-जी राम-जी अधिनियम, 2025 · रोजगार गारंटी · ग्रामीण आजीविका · मनरेगा · ग्रामीण अवसंरचना · राजकोषीय संघवाद · सामाजिक लेखा परीक्षा · प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT)

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 38: राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि के लिए सामाजिक व्यवस्था बनाएगा।
  • अनुच्छेद 39: राज्य अपनी नीति का विशेषतया इस प्रकार संचालन करेगा कि सुनिश्चित रूप से सभी नागरिकों को आजीविका के पर्याप्त साधन प्राप्त हों।
  • अनुच्छेद 41: कुछ दशाओं में काम, शिक्षा और लोक सहायता पाने का अधिकार।
  • अनुच्छेद 43: कर्मकारों के लिए निर्वाह मजदूरी आदि।

अवधारणा प्रवाह

वीबी-जी राम-जी अधिनियम, 2025 का अधिनियमन  →  ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों का गारंटीकृत रोजगार  →  ग्रामीण आय में वृद्धि और आजीविका सुरक्षा  →  सतत ग्रामीण परिसंपत्तियों का सृजन और अवसंरचना विकास  →  ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सुदृढ़ीकरण और गरीबी में कमी  →  सामाजिक सशक्तिकरण और समावेशी विकास

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. वीबी-जी राम-जी अधिनियम, 2025 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह अधिनियम प्रत्येक ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्यों को एक वित्त वर्ष में 125 दिनों के गारंटीकृत रोजगार का प्रावधान करता है।
2. केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच निधि साझाकरण पद्धति उत्तर पूर्वी राज्यों के लिए 90:10 होगी।
3. यह अधिनियम निर्धारित समय के भीतर रोजगार न दिए जाने पर बेरोजगारी भत्ते का प्रावधान नहीं करता है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि अधिनियम 125 दिनों के गारंटीकृत रोजगार का प्रावधान करता है। कथन 2 सही है क्योंकि उत्तर पूर्वी राज्यों, हिमालयी राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों (उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर) के लिए निधि साझाकरण 90:10 है। कथन 3 गलत है क्योंकि अधिनियम बेरोजगारी भत्ते और मजदूरी भुगतान में देरी के लिए मुआवजे का स्पष्ट रूप से प्रावधान करता है।

Q2. अभिकथन (A): वीबी-जी राम-जी अधिनियम, 2025 ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका सुरक्षा को बढ़ाने के लिए एक मजबूत वैधानिक ढांचा प्रदान करता है।
कारण (R): यह अधिनियम सतत ग्रामीण परिसंपत्तियों के सृजन, सतत आजीविका को बढ़ावा देने और ग्रामीण अवसंरचना को मजबूत करने पर केंद्रित है।

  1. A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि अधिनियम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण परिवारों की आजीविका सुरक्षा को बढ़ाना है। कारण (R) भी सही है और यह A की सही व्याख्या करता है, क्योंकि ये सभी कारक आजीविका सुरक्षा बढ़ाने में योगदान करते हैं।

Q3. वीबी-जी राम-जी अधिनियम, 2025 के अंतर्गत निधि साझाकरण पद्धति के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन सा युग्म सही सुमेलित है?

  1. A. उत्तर पूर्वी राज्य – 60:40
  2. B. हिमालयी राज्य – 90:10
  3. C. विधानमंडल वाले अन्य राज्य – 90:10
  4. D. संघ राज्य क्षेत्र (उत्तराखंड को छोड़कर) – 60:40

उत्तर: B. हिमालयी राज्य – 90:10 — अधिनियम की धारा 22 की उपधारा (2) के अनुसार, केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच निधि साझाकरण पद्धति उत्तर पूर्वी राज्यों, हिमालयी राज्यों तथा संघ राज्य क्षेत्रों (उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर) के लिए 90:10 तथा विधानमंडल वाले अन्य सभी राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों के लिए 60:40 होगी। इसलिए, विकल्प B सही है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ विकसित भारत–रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम जी) अधिनियम, 2025, ग्रामीण रोजगार गारंटी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतिनिधित्व करता है। इस अधिनियम की प्रमुख विशेषताओं का विश्लेषण करें और यह मनरेगा (MGNREGA) से किस प्रकार भिन्न है? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: वीबी-जी राम-जी अधिनियम, 2025 का संक्षिप्त परिचय और इसके उद्देश्य।
2. प्रमुख विशेषताएँ: अधिनियम की मुख्य विशेषताओं का विस्तृत विश्लेषण:
* रोजगार गारंटी में वृद्धि (100 से 125 दिन)।
* सतत परिसंपत्तियों का सृजन और आजीविका संवर्धन पर बल।
* ‘संपूर्ण सरकार’ दृष्टिकोण और अन्य कार्यक्रमों के साथ अभिसरण।
* प्रौद्योगिकी-सक्षम योजना, कार्यान्वयन और निगरानी।
* निधि साझाकरण पद्धति (90:10 और 60:40)।
* श्रमिकों के सांविधिक अधिकारों का सुदृढीकरण (बेरोजगारी भत्ता, मुआवजा)।
* शिकायत निवारण तंत्र और सामाजिक लेखा परीक्षा।
3. मनरेगा से भिन्नता:
* गारंटीकृत रोजगार के दिनों की संख्या में वृद्धि।
* ‘संपूर्ण सरकार’ दृष्टिकोण और व्यापक अभिसरण पर अधिक जोर।
* प्रौद्योगिकी के उपयोग और पारदर्शिता में वृद्धि।
* ग्रामीण अवसंरचना और आजीविका संवर्धन पर अधिक केंद्रित दृष्टिकोण।
* निधि साझाकरण के विशिष्ट प्रावधान।
* मजदूरी भुगतान के लिए डीबीटी-स्पर्श का अनिवार्य उपयोग।
4. निष्कर्ष: ग्रामीण विकास और आजीविका सुरक्षा पर अधिनियम के संभावित प्रभाव का संक्षिप्त मूल्यांकन।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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