वीबी-जी राम-जी योजना से ग्रामीण रोजगार सृजन में वृद्धि: जानें कैसे मिलेगा 125 दिनों का रोजगार

वीबी-जी राम-जी योजना से ग्रामीण रोजगार सृजन में वृद्धि: जानें कैसे मिलेगा 125 दिनों का रोजगार — वीबी-जी राम-जी योजना के तहत विभिन्न राज्यों में उत्पन्न मानव-दिव

वीबी-जी राम-जी योजना से ग्रामीण रोजगार सृजन में वृद्धि: जानें कैसे मिलेगा 125 दिनों का रोजगार

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — सरकार की नीतियाँ और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप तथा उनके डिज़ाइन और कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाना, संवृद्धि, विकास और रोज़गार से संबंधित विषय
  • Prelims: VB-GRAM-JI अधिनियम, महात्मा गांधी नरेगा, ग्रामीण विकास मंत्रालय, रोज़गार गारंटी योजनाएँ, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT), राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक फंड प्रबंधन प्रणाली (NeFMS), प्रबंधन सूचना प्रणाली (MIS), ग्रामीण अवसंरचना, कौशल विकास केंद्र, आजीविका मिशन
  • Essay: ग्रामीण भारत में रोज़गार सृजन और आजीविका सुरक्षा: चुनौतियाँ और सरकारी पहलें, भारत के आर्थिक विकास में ग्रामीण अवसंरचना और मानव पूंजी का महत्व

त्वरित पुनरावृत्ति: VB-GRAM-JI अधिनियम ग्रामीण रोज़गार गारंटी को 100 से 125 दिन तक बढ़ाता है, रिकॉर्ड बजट के साथ आजीविका और ग्रामीण अवसंरचना विकास पर केंद्रित है, और NeFMS व DBT के माध्यम से समय पर मज़दूरी भुगतान सुनिश्चित करता है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

केंद्र सरकार राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर विकसित भारत-रोज़गार गारंटी और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-GRAM-JI) कार्यक्रम के कार्यान्वयन की लगातार समीक्षा कर रही है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में ग्रामीण रोज़गार सृजन और आजीविका सुरक्षा हमेशा से एक महत्वपूर्ण नीतिगत प्राथमिकता रही है, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी उन्मूलन और समावेशी विकास के लिए।
  • महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) ग्रामीण परिवारों को वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों के रोज़गार की कानूनी गारंटी प्रदान करके इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।
  • समय के साथ, MGNREGA के कार्यान्वयन में कई चुनौतियाँ सामने आईं, जिनमें समय पर मज़दूरी भुगतान, पारदर्शिता और कार्यक्रम की प्रभावशीलता शामिल थीं।
  • इन चुनौतियों का समाधान करने और ग्रामीण रोज़गार गारंटी संरचना को और मज़बूत करने के उद्देश्य से, सरकार ने ‘विकसित भारत-रोज़गार गारंटी और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम 2025’ को लागू किया।
  • यह नया अधिनियम 1 जुलाई, 2026 से पूरे देश के सभी ग्रामीण इलाकों में प्रभावी हो गया है, जिसका लक्ष्य ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देना और अवसंरचना विकास को एकीकृत करना है।

विकसित भारत-रोज़गार गारंटी और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-GRAM-JI) अधिनियम क्या है?

  • यह अधिनियम 1 जुलाई, 2026 से पूरे देश के सभी ग्रामीण इलाकों में प्रभावी हुआ है।
  • यह ग्रामीण परिवारों के लिए एक वित्तीय वर्ष में रोज़गार की कानूनी गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन करता है।
  • अधिनियम का उद्देश्य ग्रामीण रोज़गार गारंटी संरचना को मज़बूत करना और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देना है।
  • वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए, इस योजना के तहत केंद्र का हिस्सा 95,692.31 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है, जो ग्रामीण रोज़गार के लिए अब तक का सबसे बड़ा बजट अनुमान है।
  • मज़दूरी का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए, राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक फंड प्रबंधन प्रणाली (NeFMS) और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) लागू किया गया है।
  • कार्यक्रम के कार्यान्वयन की रियल-टाइम निगरानी और समीक्षा के लिए एक व्यापक ऑनलाइन प्रबंधन सूचना प्रणाली (MIS) स्थापित की गई है।
  • यह अधिनियम आजीविका से जुड़ी अवसंरचना को उच्च प्राथमिकता देता है और खेती, उससे जुड़े क्षेत्रों तथा अन्य सरकारी कार्यक्रमों के साथ तालमेल स्थापित कर ‘पूरा-सरकार’ वाला दृष्टिकोण अपनाता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
रोज़गार गारंटी में वृद्धि ग्रामीण परिवारों के लिए प्रति वित्तीय वर्ष 100 से बढ़ाकर 125 दिन के रोज़गार की कानूनी गारंटी।
व्यापक ऑनलाइन प्रबंधन सूचना प्रणाली (MIS) कार्यक्रम के कार्यान्वयन की रियल-टाइम निगरानी और समस्याओं का त्वरित समाधान।
राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक फंड प्रबंधन प्रणाली (NeFMS) और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) मजदूरी का समय पर और सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भुगतान सुनिश्चित करना।
आजीविका अवसंरचना पर ध्यान कौशल विकास केंद्र, ग्रामीण लाइब्रेरी, डिजिटल लर्निंग केंद्र जैसे सामुदायिक संसाधनों का निर्माण।
बजट आवंटन वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए केंद्र का हिस्सा 95,692.31 करोड़ रुपये, कुल खर्च 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक।
पूरा-सरकार दृष्टिकोण खेती, संबद्ध क्षेत्रों और अन्य सरकारी कार्यक्रमों के साथ तालमेल स्थापित करना।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • ग्रामीण क्षेत्रों में आय और क्रय शक्ति में वृद्धि करके ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना।
  • प्रवासी श्रमिकों के लिए स्थानीय स्तर पर रोज़गार के अवसर प्रदान करके शहरी प्रवास को कम करना।
  • ग्रामीण अवसंरचना के निर्माण से दीर्घकालिक आर्थिक विकास को गति देना।

सामाजिक महत्व

  • ग्रामीण परिवारों, विशेषकर महिलाओं और हाशिए पर पड़े समुदायों के लिए सामाजिक सुरक्षा जाल प्रदान करना।
  • गरीबी और असमानता को कम करने में सहायक, जिससे सामाजिक समावेशिता बढ़ती है।
  • कौशल विकास और शिक्षा के अवसरों से ग्रामीण आबादी का सशक्तिकरण।

प्रशासनिक महत्व

  • MIS, NeFMS और DBT जैसी तकनीकी प्रणालियों के माध्यम से कार्यक्रम के कार्यान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना।
  • राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ समन्वय और नियमित समीक्षा से प्रभावी शासन सुनिश्चित करना।
  • भ्रष्टाचार और लीकेज को कम करके सार्वजनिक धन का कुशल उपयोग सुनिश्चित करना।

चुनौतियाँ

1. कार्यान्वयन में चुनौतियाँ

  • ग्रामीण क्षेत्रों में काम की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखना।
  • गुणवत्तापूर्ण और टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण सुनिश्चित करना।
  • स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भूमिका को नियंत्रित करना।

2. वित्तीय प्रबंधन

  • राज्यों द्वारा समय पर अपने हिस्से का योगदान सुनिश्चित करना।
  • बजट आवंटन का कुशल और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना।
  • मजदूरी भुगतान में देरी को पूरी तरह समाप्त करना।

3. जागरूकता और क्षमता निर्माण

  • ग्रामीण आबादी के बीच योजना के लाभों और अधिकारों के बारे में जागरूकता बढ़ाना।
  • स्थानीय प्रशासन और ग्राम पंचायतों की क्षमता का निर्माण करना।
  • तकनीकी प्रणालियों के उपयोग में ग्रामीण लाभार्थियों की सहायता करना।

4. जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन

  • जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के कारण कृषि आधारित रोज़गार पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों का प्रबंधन।
  • प्राकृतिक आपदाओं के दौरान रोज़गार सृजन की निरंतरता सुनिश्चित करना।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
मजदूरी भुगतान में देरी लाभार्थियों को समय पर भुगतान न मिलने से आजीविका पर नकारात्मक प्रभाव।
काम की गुणवत्ता सृजित परिसंपत्तियों की गुणवत्ता और स्थायित्व सुनिश्चित करना।
तकनीकी पहुंच ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिजिटल साक्षरता की कमी।
राज्यों का समन्वय केंद्र और राज्यों के बीच प्रभावी समन्वय की आवश्यकता।
निगरानी और मूल्यांकन कार्यक्रम के प्रभाव का सटीक और नियमित मूल्यांकन।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • विकसित भारत-रोज़गार गारंटी और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम-जी)
  • महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (मनरेगा)

आगे की राह

  • तकनीकी प्रणालियों (MIS, NeFMS, DBT) का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता बढ़ाना।
  • स्थानीय स्तर पर ग्राम पंचायतों और स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाना ताकि वे योजना के कार्यान्वयन में सक्रिय भूमिका निभा सकें।
  • कृषि, बागवानी और अन्य संबद्ध क्षेत्रों के साथ तालमेल स्थापित कर बहुआयामी आजीविका के अवसर सृजित करना।
  • सृजित परिसंपत्तियों की गुणवत्ता और स्थायित्व सुनिश्चित करने के लिए नियमित ऑडिट और गुणवत्ता नियंत्रण तंत्र स्थापित करना।
  • ग्रामीण युवाओं के लिए कौशल विकास और उद्यमिता प्रशिक्षण कार्यक्रमों को एकीकृत करना ताकि उन्हें स्थायी आजीविका मिल सके।
  • जलवायु परिवर्तन के अनुकूल रोज़गार सृजन गतिविधियों को बढ़ावा देना, जैसे जल संरक्षण और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएँ।
  • कार्यक्रम के प्रभाव का नियमित और स्वतंत्र मूल्यांकन करना ताकि नीतिगत सुधार किए जा सकें।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

विकसित भारत-रोज़गार गारंटी और आजीविका मिशन (ग्रामीण) · ग्रामीण रोज़गार गारंटी · मानव-दिवस सृजन · प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) · राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक फंड प्रबंधन प्रणाली (NeFMS) · प्रबंधन सूचना प्रणाली (MIS) · आजीविका अवसंरचना · कौशल विकास केंद्र · पूरा-सरकार दृष्टिकोण · वित्तीय समावेशन

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 41’, ‘note’: ‘काम का अधिकार सुनिश्चित करना’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 43’, ‘note’: ‘निर्वाह मजदूरी और काम की दशाएँ’}

अवधारणा प्रवाह

वीबी-जी राम-जी अधिनियम 2025 लागू  →  ग्रामीण परिवारों के लिए 125 दिन के रोज़गार की गारंटी  →  NeFMS और DBT से मजदूरी का सीधा भुगतान  →  ग्रामीण अवसंरचना और आजीविका केंद्रों का निर्माण  →  ग्रामीण आय में वृद्धि और आर्थिक सशक्तिकरण

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. विकसित भारत-रोज़गार गारंटी और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम-जी) अधिनियम, 2025 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह अधिनियम 1 जुलाई, 2026 से पूरे देश के सभी ग्रामीण इलाकों में प्रभावी हुआ है।
2. यह एक वित्तीय वर्ष में प्रति ग्रामीण परिवार रोज़गार की कानूनी गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन करता है।
3. यह आजीविका से जुड़ी अवसंरचना के निर्माण को प्राथमिकता देता है, जिसमें कौशल विकास केंद्र और ग्रामीण लाइब्रेरी शामिल हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि अधिनियम 1 जुलाई, 2026 से प्रभावी हुआ है। कथन 2 सही है क्योंकि यह रोज़गार गारंटी को 100 से 125 दिन तक बढ़ाता है। कथन 3 भी सही है क्योंकि यह आजीविका अवसंरचना के निर्माण को प्राथमिकता देता है।

Q2. वीबी-जी राम-जी कार्यक्रम के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों में निम्नलिखित में से कौन-कौन से शामिल हैं?
1. राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक फंड प्रबंधन प्रणाली (NeFMS) का कार्यान्वयन।
2. प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से सीधे बैंक खातों में मजदूरी का भुगतान।
3. कार्यान्वयन की रियल-टाइम निगरानी के लिए व्यापक ऑनलाइन प्रबंधन सूचना प्रणाली (MIS) का उपयोग।
4. राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को समय पर धनराशि जारी करना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1, 2 और 3
  2. केवल 2, 3 और 4
  3. केवल 1 और 4
  4. 1, 2, 3 और 4

उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — सभी कथन सही हैं। NeFMS, DBT, MIS और राज्यों को समय पर धनराशि जारी करना – ये सभी वीबी-जी राम-जी कार्यक्रम के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदम हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ विकसित भारत-रोज़गार गारंटी और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम-जी) अधिनियम, 2025 ग्रामीण भारत में रोज़गार सृजन और आजीविका सुरक्षा को कैसे सुदृढ़ करता है? इस अधिनियम की प्रमुख विशेषताओं और इसके कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों पर चर्चा कीजिए।

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में वीबी-जी राम-जी अधिनियम के माध्यम से ग्रामीण रोज़गार सृजन और आजीविका सुरक्षा को सुदृढ़ करने के तरीकों पर चर्चा करें, जिसमें 125 दिनों की रोज़गार गारंटी, आजीविका अवसंरचना का निर्माण और ‘पूरा-सरकार’ दृष्टिकोण शामिल हैं। दूसरे भाग में अधिनियम की प्रमुख विशेषताओं जैसे NeFMS, DBT, MIS और बजट प्रावधानों का उल्लेख करें। अंत में, कार्यान्वयन से जुड़ी संभावित चुनौतियों जैसे समय पर मजदूरी भुगतान, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना, तथा विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों के साथ तालमेल स्थापित करने पर संक्षेप में चर्चा करें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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