23 Sep संयुक्त राष्ट्र की विफलता पर तुर्की राष्ट्रपति ने उठाया बड़ा सवाल, जानिए पूरा मामला
✎ संयुक्त राष्ट्र, विशेषकर सुरक्षा परिषद में सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया जा रहा है ताकि यह बदलती वैश्विक व्यवस्था में अपनी भूमिका को अधिक प्रभावी ढंग से निभा सके और अंतर्राष्ट्रीय शांति व सुरक्षा बनाए रख सके।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध | GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएँ
- Prelims: संयुक्त राष्ट्र (UN), संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA), संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC), स्थायी सदस्य, वीटो शक्ति, अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा
- Essay: बदलती वैश्विक व्यवस्था में संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकता, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और बहुपक्षवाद का भविष्य
त्वरित पुनरावृत्ति: संयुक्त राष्ट्र, विशेषकर सुरक्षा परिषद में सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया जा रहा है ताकि यह बदलती वैश्विक व्यवस्था में अपनी भूमिका को अधिक प्रभावी ढंग से निभा सके और अंतर्राष्ट्रीय शांति व सुरक्षा बनाए रख सके।
यह खबर चर्चा में क्यों?
तुर्की के राष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र में विश्व नेताओं को संबोधित करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के अपने मिशन को पूरा करने में असमर्थ रहा है। उन्होंने गाजा, यूक्रेन, सूडान और अन्य संघर्ष क्षेत्रों में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों और निराशा पर प्रकाश डाला, और संगठन में विश्वास बहाल करने के लिए सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया।
पृष्ठभूमि
- संयुक्त राष्ट्र की स्थापना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1945 में अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने, राष्ट्रों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध विकसित करने और सामाजिक प्रगति, बेहतर जीवन स्तर तथा मानवाधिकारों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी।
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) संयुक्त राष्ट्र का सबसे शक्तिशाली अंग है, जिसके पास अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
- सुरक्षा परिषद में पाँच स्थायी सदस्य (चीन, फ्रांस, रूस, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका) और दस गैर-स्थायी सदस्य होते हैं, जिन्हें महासभा द्वारा दो साल के कार्यकाल के लिए चुना जाता है।
- स्थायी सदस्यों के पास वीटो शक्ति होती है, जिसका अर्थ है कि वे किसी भी महत्वपूर्ण प्रस्ताव को रोक सकते हैं, भले ही उसे अन्य सदस्यों का समर्थन प्राप्त हो।
- पिछले कुछ दशकों में, विभिन्न देशों द्वारा संयुक्त राष्ट्र, विशेषकर सुरक्षा परिषद की संरचना और कार्यप्रणाली में सुधार की मांग की गई है, ताकि यह समकालीन वैश्विक वास्तविकताओं को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित कर सके।
- गाजा, यूक्रेन, सूडान जैसे क्षेत्रों में चल रहे संघर्षों ने संयुक्त राष्ट्र की प्रभावी ढंग से हस्तक्षेप करने और समाधान प्रदान करने की क्षमता पर सवाल उठाए हैं।
- तुर्की के राष्ट्रपति ने ‘दुनिया पाँच से बड़ी है’ (The world is bigger than five) के नारे के साथ सुरक्षा परिषद में सुधारों का आह्वान किया है, जो स्थायी सदस्यों की वीटो शक्ति पर सवाल उठाता है।
- अंतर्राष्ट्रीय कानून के समान अनुप्रयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि शक्तिशाली और कमजोर दोनों देशों पर कानून समान रूप से लागू हों।
- संयुक्त राष्ट्र के चार्टर में संशोधन के माध्यम से ही सुरक्षा परिषद की संरचना में बदलाव किए जा सकते हैं, जिसके लिए स्थायी सदस्यों सहित अधिकांश सदस्य देशों की सहमति आवश्यक है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) क्या है?
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) संयुक्त राष्ट्र के छह प्रमुख अंगों में से एक है, जिस पर अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
- इसके पास बाध्यकारी प्रस्ताव पारित करने की शक्ति है, जिसका सदस्य देशों को पालन करना होता है।
- सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं: पाँच स्थायी सदस्य और दस गैर-स्थायी सदस्य।
- स्थायी सदस्य चीन, फ्रांस, रूस, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका हैं। इन देशों को ‘P5’ के नाम से भी जाना जाता है।
- स्थायी सदस्यों के पास ‘वीटो शक्ति’ होती है, जिसका अर्थ है कि वे किसी भी सारगर्भित प्रस्ताव को पारित होने से रोक सकते हैं।
- दस गैर-स्थायी सदस्यों को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा दो साल के कार्यकाल के लिए चुना जाता है, जिसमें हर साल पाँच नए सदस्य चुने जाते हैं।
- गैर-स्थायी सदस्यों का चुनाव क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के आधार पर किया जाता है।
- सुरक्षा परिषद के निर्णय कम से कम नौ सदस्यों के सकारात्मक मत से लिए जाते हैं, जिसमें स्थायी सदस्यों का कोई वीटो न हो।
- सुरक्षा परिषद के कार्यों में शांति अभियानों की स्थापना, अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों को लागू करना और सैन्य कार्रवाई को अधिकृत करना शामिल है।
- सुरक्षा परिषद के सुधारों में स्थायी और गैर-स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाना, वीटो शक्ति के उपयोग को सीमित करना या समाप्त करना, और परिषद की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाना शामिल है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर चिंता | यह वैश्विक शांति और सुरक्षा बनाए रखने में संयुक्त राष्ट्र की कथित अक्षमता पर प्रकाश डालता है, विशेषकर गाजा, सूडान और यूक्रेन जैसे संघर्ष क्षेत्रों में। |
| सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग | तुर्की के राष्ट्रपति ने सुरक्षा परिषद की संरचना पर सवाल उठाया, जिसमें पांच स्थायी सदस्यों के वीटो पावर को चुनौती दी गई, इसे अन्यायपूर्ण बताया। |
| अंतर्राष्ट्रीय कानून के समान अनुप्रयोग पर जोर | यह इस बात पर बल देता है कि अंतर्राष्ट्रीय कानून को सभी देशों पर समान रूप से लागू किया जाना चाहिए, चाहे वे शक्तिशाली हों या कमजोर, ताकि अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था में विश्वास बहाल हो सके। |
| बहुपक्षवाद का कमजोर होना | यह टिप्पणी बहुपक्षीय संस्थानों की प्रभावशीलता में घटते विश्वास और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के समक्ष बढ़ती चुनौतियों को दर्शाती है। |
| मानवीय संकटों पर ध्यान | यह फिलिस्तीन, लेबनान और सूडान जैसे क्षेत्रों में मानवीय पीड़ा और संयुक्त राष्ट्र की प्रतिक्रिया की कमी पर चिंता व्यक्त करता है। |
महत्व
अंतर्राष्ट्रीय संबंध (International Relations)
- यह संयुक्त राष्ट्र की प्रभावशीलता और प्रासंगिकता पर वैश्विक बहस को बढ़ावा देता है, विशेषकर संघर्ष समाधान और शांति स्थापना में।
- सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों की वीटो शक्ति के दुरुपयोग पर सवाल उठाता है, जो वैश्विक शक्ति संतुलन और प्रतिनिधित्व के मुद्दों को सामने लाता है।
- यह भारत जैसे देशों के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता के दावे को मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है, जो अधिक समावेशी और प्रतिनिधि वैश्विक शासन की वकालत करते हैं।
शासन (Governance)
- यह अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों में सुधार की आवश्यकता को रेखांकित करता है ताकि वे वर्तमान वैश्विक चुनौतियों का अधिक प्रभावी ढंग से सामना कर सकें।
- यह अंतर्राष्ट्रीय कानून के शासन और उसके सार्वभौमिक अनुप्रयोग के महत्व पर जोर देता है, जो वैश्विक सुशासन के लिए महत्वपूर्ण है।
नैतिक और मानवीय मुद्दे (Ethical and Humanitarian Issues)
- यह गाजा, सूडान और अन्य संघर्ष क्षेत्रों में हो रहे मानवीय संकटों पर वैश्विक ध्यान आकर्षित करता है, जो अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की नैतिक जिम्मेदारी को उजागर करता है।
- यह अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से कमजोर और पीड़ित आबादी के अधिकारों की रक्षा के लिए अधिक सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान करता है।
चुनौतियाँ
1. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार
- सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों (P5) के पास वीटो शक्ति है, जो अक्सर महत्वपूर्ण प्रस्तावों को पारित होने से रोकती है और परिषद को पंगु बना देती है।
- वर्तमान संरचना 1945 की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को दर्शाती है और आज की दुनिया का प्रतिनिधित्व नहीं करती, जिससे कई देशों में असंतोष है।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध: महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, उनकी संरचना और अधिदेश
2. अंतर्राष्ट्रीय कानून का असमान अनुप्रयोग
- कुछ शक्तिशाली देश अक्सर अंतर्राष्ट्रीय कानून के उल्लंघन के लिए जवाबदेह नहीं ठहराए जाते, जबकि कमजोर देशों पर सख्ती से कानून लागू होता है।
- यह अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था में विश्वास को कमजोर करता है और न्याय व समानता के सिद्धांतों को चुनौती देता है।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध: अंतर्राष्ट्रीय कानून और संधियाँ
3. वैश्विक संघर्षों का समाधान
- संयुक्त राष्ट्र गाजा, सूडान, यूक्रेन जैसे कई संघर्षों को प्रभावी ढंग से रोकने या उनका समाधान करने में असमर्थ रहा है, जिससे बड़े पैमाने पर मानवीय संकट पैदा हुए हैं।
- सदस्य देशों के बीच राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी और निहित स्वार्थ अक्सर प्रभावी कार्रवाई में बाधा डालते हैं।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध: वैश्विक सुरक्षा चुनौतियाँ
4. बहुपक्षीय संस्थानों में विश्वास की कमी
- संयुक्त राष्ट्र जैसे बहुपक्षीय संस्थानों की प्रभावशीलता पर बढ़ती निराशा वैश्विक सहयोग और सामूहिक कार्रवाई की क्षमता को कमजोर करती है।
- यह राष्ट्रों को एकतरफा कार्रवाई करने या क्षेत्रीय गठबंधनों पर अधिक निर्भर रहने के लिए प्रेरित कर सकता है।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध: बहुपक्षवाद और वैश्विक शासन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| सुरक्षा परिषद का वीटो पावर | यह कुछ स्थायी सदस्यों को वैश्विक मुद्दों पर एकतरफा निर्णय लेने की शक्ति देता है, जिससे अन्य 190 से अधिक सदस्य देशों की इच्छा को नजरअंदाज किया जा सकता है। |
| अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन | शक्तिशाली देशों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय कानून के उल्लंघन पर अक्सर कोई कार्रवाई नहीं होती, जिससे अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था में ‘दण्डमुक्ति’ (impunity) की भावना बढ़ती है। |
| संयुक्त राष्ट्र की अक्षमता | संघर्षों और मानवीय संकटों को रोकने या उनका समाधान करने में संयुक्त राष्ट्र की कथित विफलता, जिससे लाखों लोगों को निराशा हुई है। |
| प्रतिनिधित्व का अभाव | सुरक्षा परिषद की वर्तमान संरचना वैश्विक आबादी और शक्ति संतुलन का सही प्रतिनिधित्व नहीं करती, जिससे इसकी वैधता पर सवाल उठते हैं। |
| बहुपक्षीय सहयोग का क्षरण | अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों में विश्वास की कमी वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए आवश्यक बहुपक्षीय सहयोग को कमजोर करती है। |
आगे की राह
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार किए जाएं, जिसमें स्थायी और गैर-स्थायी सदस्यों की संख्या में वृद्धि और वीटो शक्ति के उपयोग पर प्रतिबंध या उसका उन्मूलन शामिल हो।
- अंतर्राष्ट्रीय कानून के सार्वभौमिक और समान अनुप्रयोग को सुनिश्चित किया जाए, जिससे कोई भी देश अपनी शक्ति के कारण जवाबदेही से बच न सके।
- संयुक्त राष्ट्र के शांति स्थापना और संघर्ष समाधान तंत्रों को मजबूत किया जाए, जिसमें प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली और त्वरित प्रतिक्रिया बल शामिल हों।
- सदस्य देशों के बीच राजनीतिक इच्छाशक्ति और सहयोग को बढ़ावा दिया जाए ताकि वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए सामूहिक कार्रवाई की जा सके।
- संयुक्त राष्ट्र के वित्तपोषण और प्रशासनिक दक्षता में सुधार किया जाए ताकि यह अपने जनादेश को अधिक प्रभावी ढंग से पूरा कर सके।
- संयुक्त राष्ट्र को अधिक समावेशी और प्रतिनिधि बनाया जाए, जिसमें विकासशील देशों की आवाज को अधिक महत्व दिया जाए।
- मानवीय सहायता और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए संयुक्त राष्ट्र की क्षमता को बढ़ाया जाए, विशेषकर संघर्ष और संकटग्रस्त क्षेत्रों में।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
संयुक्त राष्ट्र संघ · अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा · सुरक्षा परिषद · वीटो शक्ति · बहुपक्षवाद · अंतर्राष्ट्रीय कानून · संयुक्त राष्ट्र सुधार · गाजा संघर्ष · संघर्ष समाधान · मानवीय संकट
अवधारणा प्रवाह
तुर्की के राष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र की अक्षमता पर चिंता व्यक्त की। → यह चिंता वैश्विक संघर्षों (गाजा, सूडान) और मानवीय संकटों से जुड़ी है। → सुरक्षा परिषद की संरचना और वीटो शक्ति पर सवाल उठाए गए। → अंतर्राष्ट्रीय कानून के असमान अनुप्रयोग को एक बड़ी समस्या बताया गया। → इससे अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था में विश्वास की कमी और बहुपक्षवाद का कमजोर होना। → परिणामस्वरूप, संयुक्त राष्ट्र अपने मिशन को पूरा करने में असमर्थ महसूस करता है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में पाँच स्थायी सदस्य और दस अस्थायी सदस्य होते हैं।
2. अस्थायी सदस्यों का चुनाव संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा दो साल के कार्यकाल के लिए किया जाता है।
3. स्थायी सदस्यों के पास किसी भी महत्वपूर्ण प्रस्ताव को वीटो करने की शक्ति होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 और 2 सही हैं। सुरक्षा परिषद में पाँच स्थायी सदस्य (चीन, फ्रांस, रूस, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका) और दस अस्थायी सदस्य होते हैं, जिन्हें महासभा द्वारा दो साल के कार्यकाल के लिए चुना जाता है। कथन 3 भी सही है, स्थायी सदस्यों के पास वीटो शक्ति होती है, जिसका अर्थ है कि वे किसी भी मसौदा प्रस्ताव को पारित होने से रोक सकते हैं, भले ही उसे अन्य सदस्यों का समर्थन प्राप्त हो।
Q2. अभिकथन (A): संयुक्त राष्ट्र संघ (United Nations Organization) की स्थापना अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए की गई थी।
कारण (R): संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पाँच स्थायी सदस्यों की वीटो शक्ति संगठन के प्रभावी कामकाज में बाधा डालती है।
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है। — अभिकथन (A) सही है, क्योंकि संयुक्त राष्ट्र का मुख्य उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना है, जैसा कि इसके चार्टर में उल्लिखित है। कारण (R) भी सही है, क्योंकि स्थायी सदस्यों की वीटो शक्ति अक्सर महत्वपूर्ण मुद्दों पर निर्णय लेने में बाधा डालती है, जिससे संगठन की प्रभावशीलता कम होती है। हालांकि, R, A की सही व्याख्या नहीं है, क्योंकि A संयुक्त राष्ट्र के उद्देश्य को बताता है, जबकि R उसके कामकाज में एक चुनौती को दर्शाता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ संयुक्त राष्ट्र संघ (United Nations Organization) की प्रभावशीलता पर हालिया वैश्विक संघर्षों के प्रभाव का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधारों की आवश्यकता पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: संयुक्त राष्ट्र संघ के गठन के उद्देश्य (अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा, मानवाधिकारों का संरक्षण) का संक्षिप्त उल्लेख।
2. प्रभावशीलता पर वैश्विक संघर्षों का प्रभाव: गाजा, यूक्रेन, सूडान जैसे हालिया संघर्षों का उल्लेख करते हुए, संयुक्त राष्ट्र की इन संघर्षों को रोकने या हल करने में कथित अक्षमता पर प्रकाश डालें। मानवीय संकटों और अंतर्राष्ट्रीय कानून के उल्लंघन पर संगठन की प्रतिक्रिया की सीमाओं पर चर्चा करें।
3. सुरक्षा परिषद में सुधारों की आवश्यकता: ‘दुनिया पाँच से बड़ी है’ जैसे तर्कों का उल्लेख करते हुए स्थायी सदस्यों की वीटो शक्ति की आलोचना करें। सुरक्षा परिषद की संरचना (स्थायी और अस्थायी सदस्यों की संख्या) में बदलाव की आवश्यकता पर जोर दें ताकि यह वर्तमान भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित कर सके। भारत जैसे विकासशील देशों की स्थायी सदस्यता की मांग का उल्लेख करें।
4. चुनौतियों और आगे का रास्ता: सुधारों के मार्ग में आने वाली बाधाओं (जैसे स्थायी सदस्यों का प्रतिरोध) पर चर्चा करें। बहुपक्षवाद को मजबूत करने और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने के महत्व पर प्रकाश डालें।
5. निष्कर्ष: संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकता और एक सुधारित तथा अधिक प्रतिनिधि संगठन की आवश्यकता पर बल देते हुए निष्कर्ष प्रस्तुत करें।
स्रोत: news.un.org
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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