अरुणांक परियोजना: बीआरओ की 19वीं वर्षगांठ पर जानिए इसकी भूमिका और उपलब्धियां

अरुणांक परियोजना: बीआरओ की 19वीं वर्षगांठ पर जानिए इसकी भूमिका और उपलब्धियां

अरुणांक परियोजना: बीआरओ की 19वीं वर्षगांठ पर जानिए इसकी भूमिका और उपलब्धियां

अरुणांक परियोजना का विकासस्थापनावर्ष 2008निर्माणपहाड़ी क्षेत्रउपलब्धियाँसड़क संपर्कप्रभावसुरक्षा तैयारी
अरुणांक परियोजना का विकास

✎ सीमा सड़क संगठन (BRO) रक्षा मंत्रालय के अधीन है और अरुणांक परियोजना (2008 से) अरुणाचल प्रदेश में सीमावर्ती सड़क अवसंरचना के माध्यम से सुरक्षा और विकास दोनों को जोड़ती है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन और संघवाद (सीमावर्ती राज्यों और दुर्गम क्षेत्रों के विकास हेतु केंद्र-राज्य समन्वय; पूर्वोत्तर क्षेत्र का विकास)  |  GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा (सीमा अवसंरचना की भूमिका; सीमा प्रबंधन) और अवसंरचना (सड़क परिवहन, पर्वतीय क्षेत्रों में सतत निर्माण)  |  GS Paper III — पर्यावरण (पर्वतीय पारिस्थितिकी संरक्षण, वृक्षारोपण एवं सतत विकास)
  • Prelims: सीमा सड़क संगठन (BRO) — रक्षा मंत्रालय के अधीन इंजीनियरिंग संगठन, अरुणांक परियोजना — अरुणाचल प्रदेश में BRO की परियोजना, वर्ष 2008 में आरंभ, नाहरलगुन — अरुणाचल प्रदेश की राजधानी क्षेत्र में स्थित स्थान, जियोसेल तकनीक — मिट्टी को स्थिर करने हेतु पॉलिमर-आधारित कोशिकीय संरचना, ढलान सुरक्षा उपाय — पर्वतीय सड़कों पर भूस्खलन रोकने हेतु इंजीनियरिंग उपाय, दिहाड़ी मजदूर (सीपीएल) — BRO परियोजनाओं में कार्यरत श्रमिक वर्ग, वाइब्रेंट विलेज्स प्रोग्राम — सीमावर्ती गांवों के समग्र विकास हेतु केंद्रीय योजना (2023), सेला सुरंग — अरुणाचल प्रदेश में तवांग मार्ग पर BRO द्वारा निर्मित सुरंग
  • Essay: सीमावर्ती क्षेत्रों में अवसंरचना: राष्ट्रीय सुरक्षा और स्थानीय विकास का समन्वय, दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में सतत और पर्यावरण-अनुकूल अवसंरचना का निर्माण

त्वरित पुनरावृत्ति: सीमा सड़क संगठन (BRO) रक्षा मंत्रालय के अधीन है और अरुणांक परियोजना (2008 से) अरुणाचल प्रदेश में सीमावर्ती सड़क अवसंरचना के माध्यम से सुरक्षा और विकास दोनों को जोड़ती है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

सीमा सड़क संगठन (BRO) की अरुणांक परियोजना ने 24 अक्टूबर, 2026 को अरुणाचल प्रदेश के नाहरलगुन में अपना 19वां स्थापना दिवस मनाया। यह परियोजना वर्ष 2008 में आरंभ हुई थी और इसने दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में सीमा अवसंरचना के निर्माण एवं रखरखाव में भूमिका निभाई है। समारोह के माध्यम से परियोजना की उपलब्धियों को रेखांकित किया गया, जिनमें सशस्त्र बलों की परिचालन तैयारी, दूरदराज के क्षेत्रों में सड़क संपर्क, जियोसेल जैसी इंजीनियरिंग तकनीकों का प्रयोग, दिहाड़ी मजदूरों के कल्याण हेतु सुविधाएं तथा पर्यावरण एवं सामुदायिक कार्यक्रम शामिल हैं। इस समाचार का परीक्षा-उन्मुख महत्व इसमें है कि यह सीमावर्ती अवसंरचना, पर्वतीय इंजीनियरिंग और श्रमिक कल्याण को एक साथ दर्शाता है।

पृष्ठभूमि

  • सीमा सड़क संगठन की स्थापना वर्ष 1960 में हुई थी। यह रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्य करता है और मुख्यतः सीमावर्ती तथा दुर्गम क्षेत्रों में सड़कों, पुलों और सुरंगों का निर्माण एवं रखरखाव करता है।
  • पूर्वोत्तर भारत, विशेषकर अरुणाचल प्रदेश, में सड़क संपर्क की कमी लंबे समय से विकास और सुरक्षा दोनों के लिए चुनौती रही है। इसी संदर्भ में सीमावर्ती सड़क नेटवर्क को सुदृढ़ करने के प्रयास किए गए हैं।
  • अरुणांक परियोजना की शुरुआत वर्ष 2008 में हुई। इसके बाद से यह परियोजना ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी क्षेत्रों, घने जंगलों और प्रतिकूल मौसम में निर्माण कार्य कर रही है।
  • केंद्र सरकार ने वर्ष 2023 में वाइब्रेंट विलेज्स प्रोग्राम आरंभ किया, जिसका उद्देश्य सीमावर्ती गांवों में बुनियादी सुविधाओं और आजीविका के अवसरों को बढ़ाना है। सीमावर्ती सड़कें इस कार्यक्रम के लिए संपर्क का आधार हैं।
  • पर्वतीय सड़क निर्माण में भूस्खलन और मिट्टी के कटाव की समस्या रहती है, जिसके समाधान हेतु ढलान सुरक्षा, जियोसेल जैसी मिट्टी-स्थिरीकरण तकनीकें और वैकल्पिक निर्माण सामग्री अपनाई जाती हैं।

सीमा सड़क संगठन और अरुणांक परियोजना क्या है?

  • सीमा सड़क संगठन (Border Roads Organisation – BRO) रक्षा मंत्रालय के अधीन एक इंजीनियरिंग संगठन है, जो भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में सामरिक महत्व की सड़कों और अवसंरचना का निर्माण करता है।
  • अरुणांक परियोजना BRO की एक क्षेत्रीय परियोजना है, जो अरुणाचल प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों में सीमा अवसंरचना के निर्माण और रखरखाव का कार्य करती है। इसकी शुरुआत वर्ष 2008 में हुई।
  • सीमावर्ती सड़कों का दोहरा उपयोग होता है: एक ओर ये सशस्त्र बलों की आवाजाही और आपूर्ति को सुगम बनाती हैं, दूसरी ओर स्थानीय नागरिकों के लिए आवागमन, स्वास्थ्य सेवा और बाजार तक पहुंच सुनिश्चित करती हैं।
  • जियोसेल तकनीक में पॉलिमर से बनी कोशिकीय संरचना का प्रयोग होता है, जो मिट्टी और बजरी को बांधकर सड़क की आधार-परत को मजबूत करती है। यह कम संसाधनों में टिकाऊ सड़क निर्माण में सहायक है।
  • ढलान सुरक्षा उपाय, जैसे रिटेनिंग वॉल और ढलान स्थिरीकरण, पर्वतीय सड़कों को भूस्खलन और मौसमी क्षति से बचाते हैं और उनकी दीर्घकालिक कार्यक्षमता बढ़ाते हैं।
  • दिहाड़ी मजदूर (सीपीएल) ऐसे श्रमिक हैं जो परियोजना में अस्थायी आधार पर कार्य करते हैं। इनके लिए आश्रय, सुरक्षा वस्त्र, स्वच्छता सुविधाएं और नियमित चिकित्सा शिविर जैसे कल्याण उपाय महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
  • इस परियोजना ने पर्यावरण संरक्षण के लिए ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत 25,815 पौधे लगाए हैं, और साइकिलिंग, योग, स्वच्छता तथा साइबर जागरूकता जैसे सामुदायिक कार्यक्रम भी आयोजित किए हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
परियोजना का स्वरूप सीमा सड़क संगठन (Border Roads Organisation – BRO) की अरुणांक परियोजना, जो वर्ष 2008 में आरंभ हुई और अरुणाचल प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों में सीमा अवसंरचना के निर्माण एवं रखरखाव का कार्य करती है
स्थापना दिवस 24 अक्टूबर 2026 को नाहरलगुन (अरुणाचल प्रदेश) में 19वां स्थापना दिवस मनाया गया, जो लगभग दो दशकों की सेवा का प्रतीक है
तकनीकी नवाचार जियोसेल (Geocell) तकनीक, वैकल्पिक निर्माण सामग्री और ढलान सुरक्षा के उपाय, जिनसे दुर्गम क्षेत्रों में सड़कों की मजबूती और टिकाऊपन बढ़ा है
दिहाड़ी मजदूर कल्याण दिहाड़ी मजदूर (CPL) को बेहतर आश्रय, सुरक्षा के लिए आवश्यक वस्त्र, स्वच्छता सुविधाएं और नियमित चिकित्सा शिविर उपलब्ध कराए गए हैं
पर्यावरण एवं सामुदायिक पहल ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत 25,815 पौधे लगाए गए; साथ ही साइकिलिंग, योग, स्वच्छता और साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए

महत्व

सामरिक एवं सुरक्षा महत्व

  • सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क संपर्क से सशस्त्र बलों की परिचालन तैयारियों और आवाजाही की क्षमता में सुधार होता है
  • दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की उपलब्धता रक्षा बलों की रणनीतिक आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक है

संपर्क और विकास

  • दूरदराज के क्षेत्रों में आवागमन और संपर्क सुविधाओं में सुधार से स्थानीय लोगों को विकास के नए अवसर मिलते हैं
  • सड़क संपर्क से बाजार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान होती है, जिससे क्षेत्रीय संतुलित विकास को बल मिलता है

अभियांत्रिकी और सतत अवसंरचना

  • जियोसेल तकनीक और ढलान सुरक्षा उपायों से भू-स्खलन जैसी आपदाओं के प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है
  • वैकल्पिक सामग्री के प्रयोग से टिकाऊ अवसंरचना का मॉडल विकसित होता है, जो दीर्घकालिक कार्यक्षमता सुनिश्चित करता है

सामाजिक कल्याण और पर्यावरण

  • दिहाड़ी मजदूरों के आश्रय, स्वच्छता और स्वास्थ्य की व्यवस्था श्रमिक कल्याण के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण को दर्शाती है
  • वृक्षारोपण और स्वच्छता अभियान सीमावर्ती क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता को प्रोत्साहित करते हैं

चुनौतियाँ

1. भौगोलिक और मौसमी बाधाएं

  • ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी भूभाग, घने जंगल और प्रतिकूल मौसम निर्माण कार्य की गति और लागत दोनों को प्रभावित करते हैं
  • भू-स्खलन और भारी वर्षा से सड़कों को बार-बार क्षति पहुंचती है, जिससे लगातार रखरखाव आवश्यक हो जाता है

2. पर्यावरणीय संवेदनशीलता

  • सड़क निर्माण से वनों की कटाई, भूमि अस्थिरता और जैव-विविधता पर दबाव पड़ सकता है
  • निर्माण और संरक्षण के बीच संतुलन बनाना, हिमालयी पारिस्थितिकी की दृष्टि से, एक निरंतर चुनौती है

3. श्रमिक सुरक्षा और कल्याण की निरंतरता

  • दिहाड़ी मजदूर अस्थायी रोजगार में होते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का स्थायी ढांचा बनाना कठिन रहता है
  • दुर्गम स्थलों पर चिकित्सा और स्वच्छता सेवाओं की पहुंच सीमित होने से जोखिम बढ़ता है

4. सीमावर्ती क्षेत्र में स्थायी संपर्क

  • दूरस्थ क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ निरंतर रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है
  • सीमा अवसंरचना और स्थानीय विकास की आवश्यकताओं में समन्वय बनाना प्रशासनिक चुनौती है

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

समस्या चिंता का विषय
भू-स्खलन और मौसमी क्षति बार-बार होने वाली क्षति से सड़कों की परिचालन उपलब्धता घटती है और रखरखाव की लागत बढ़ती है
पर्यावरणीय दबाव वनों की कटाई और भूमि अस्थिरता से हिमालयी पारिस्थितिकी को दीर्घकालिक नुकसान का खतरा है
दिहाड़ी मजदूरों की सुरक्षा अस्थायी रोजगार और दुर्गम स्थलों पर सीमित सुविधाएं श्रमिकों के जोखिम को बढ़ाती हैं
सीमित प्रशासनिक पहुंच दूरस्थ क्षेत्रों में सेवाओं और निगरानी की निरंतरता बनाए रखना कठिन होता है

आगे की राह

  • जियोसेल जैसी तकनीकों के प्रयोग का विस्तार कर भू-स्खलन-प्रवण क्षेत्रों में सड़कों की दीर्घकालिक मजबूती सुनिश्चित की जाए
  • निर्माण से पहले पर्यावरणीय प्रभाव आकलन को कठोरता से लागू कर वनों और जैव-विविधता पर दबाव कम किया जाए
  • मौसम-आधारित रखरखाव योजना और आपदा-पूर्व तैयारी को संस्थागत रूप दिया जाए
  • दिहाड़ी मजदूरों के आश्रय, स्वास्थ्य और सुरक्षा मानकों को नियमित निरीक्षण के माध्यम से सुनिश्चित किया जाए
  • स्थानीय समुदायों को रखरखाव और वृक्षारोपण जैसे कार्यों में शामिल कर सामुदायिक स्वामित्व की भावना विकसित की जाए
  • सीमा अवसंरचना और स्थानीय विकास योजनाओं के बीच केंद्र, राज्य और सैन्य प्रशासन के बीच समन्वय तंत्र मजबूत किया जाए
  • वैकल्पिक और स्थानीय रूप से उपलब्ध निर्माण सामग्री के उपयोग पर शोध और मानकीकरण को बढ़ावा दिया जाए

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

सीमा सड़क संगठन · अरुणांक परियोजना · अरुणाचल प्रदेश · रणनीतिक बुनियादी ढाँचा · सड़क संपर्क · सीमा अवसंरचना · आधुनिक निर्माण तकनीकें · पर्यावरण संरक्षण · सामुदायिक कल्याण · रक्षा बलों की परिचालन आवश्यकताएँ · दुर्गम क्षेत्र · टिकाऊ बुनियादी ढाँचा

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 51A(छ): पर्यावरण संरक्षण का मौलिक कर्तव्य, वृक्षारोपण अभियान से संबंध
  • अनुच्छेद 48A: पर्यावरण और वनों की रक्षा का राज्य का नीति-निर्देशक सिद्धांत

अवधारणा प्रवाह

सीमावर्ती दुर्गम क्षेत्र में संपर्क और सुरक्षा की आवश्यकता उत्पन्न होती है  →  वर्ष 2008 में अरुणांक परियोजना आरंभ कर सीमा सड़कों के निर्माण और रखरखाव का कार्य शुरू किया गया  →  जियोसेल तकनीक और ढलान सुरक्षा जैसे इंजीनियरिंग उपायों से सड़कों की मजबूती और टिकाऊपन बढ़ता है  →  सड़क संपर्क से सशस्त्र बलों की परिचालन तैयारी और स्थानीय आवागमन में सुधार होता है  →  बेहतर संपर्क से दूरदराज के क्षेत्रों में विकास के अवसर और सामाजिक-आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं  →  दिहाड़ी मजदूरों के कल्याण और पर्यावरण संरक्षण की पहल से परियोजना की दीर्घकालिक सततता सुनिश्चित होती है

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. सीमा सड़क संगठन (BRO) की अरुणांक परियोजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अरुणांक परियोजना का शुभारंभ वर्ष 2008 में हुआ था।
2. यह परियोजना केवल सैन्य उद्देश्यों के लिए सड़क निर्माण पर केंद्रित है, नागरिक संपर्क पर नहीं।
3. परियोजना ने निर्माण में जियोसेल तकनीक और वैकल्पिक सामग्रियों का उपयोग किया है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है, अरुणांक परियोजना वर्ष 2008 में शुरू की गई थी। कथन 2 गलत है, यह परियोजना सशस्त्र बलों की परिचालन तैयारियों के साथ-साथ दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए आवागमन, संपर्क सुविधाओं और विकास के अवसरों में भी सुधार करती है। कथन 3 सही है, परियोजना आधुनिक तकनीकों जैसे जियोसेल तकनीक और वैकल्पिक सामग्रियों का उपयोग करती है।

Q2. अभिकथन (A): सीमा सड़क संगठन (BRO) भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में रणनीतिक बुनियादी ढाँचे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कारण (R): BRO रक्षा मंत्रालय के तहत कार्य करता है और इसका मुख्य उद्देश्य सशस्त्र बलों की परिचालन तैयारियों को बढ़ाना है।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?

  1. A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सही है, लेकिन R गलत है।
  4. A गलत है, लेकिन R सही है।

उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि BRO सीमावर्ती क्षेत्रों में रणनीतिक बुनियादी ढाँचे के विकास में महत्वपूर्ण है। कारण (R) भी सही है क्योंकि BRO रक्षा मंत्रालय के तहत कार्य करता है और इसका प्राथमिक उद्देश्य सशस्त्र बलों की परिचालन तैयारियों को बढ़ाना है। कारण, अभिकथन की सही व्याख्या करता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा अरुणाचल प्रदेश में अरुणांक परियोजना जैसे रणनीतिक बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के महत्व का परीक्षण कीजिए। साथ ही, इन परियोजनाओं के माध्यम से दुर्गम क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में BRO की भूमिका पर भी प्रकाश डालिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** सीमा सड़क संगठन (BRO) और अरुणांक परियोजना का संक्षिप्त परिचय, इसके स्थापना वर्ष (2008) और अरुणाचल प्रदेश में इसके कार्यक्षेत्र का उल्लेख।
2. **रणनीतिक महत्व:**
* सुरक्षा और रक्षा: सीमावर्ती क्षेत्रों में सशस्त्र बलों की त्वरित आवाजाही और परिचालन तैयारियों में वृद्धि।
* सीमा प्रबंधन: सीमा पर निगरानी और नियंत्रण को सुदृढ़ करना।
* राष्ट्रीय सुरक्षा: बाहरी खतरों से देश की संप्रभुता और अखंडता की रक्षा।
3. **सामाजिक-आर्थिक विकास में भूमिका:**
* बेहतर संपर्क: दूरदराज के क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ना, जिससे आवागमन आसान होता है।
* आर्थिक अवसर: कृषि उत्पादों, हस्तशिल्प आदि के लिए बाजारों तक पहुँच, पर्यटन को बढ़ावा।
* बुनियादी सेवाएँ: शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुँच में सुधार।
* रोजगार सृजन: स्थानीय लोगों, विशेषकर दिहाड़ी मजदूरों (CPL) के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर।
* सामुदायिक कल्याण: मजदूरों के लिए बेहतर आश्रय, सुरक्षा, स्वच्छता और चिकित्सा सुविधाएँ।
4. **अभिनव निर्माण तकनीकें और पर्यावरण संरक्षण:**
* आधुनिक तकनीकें: जियोसेल तकनीक, वैकल्पिक सामग्रियों का उपयोग, ढलानों की सुरक्षा के उपाय।
* टिकाऊ बुनियादी ढाँचा: प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों में भी सड़कों की मजबूती और दीर्घकालिक कार्यक्षमता।
* पर्यावरण संरक्षण: ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसे अभियान, स्वच्छता कार्यक्रम।
5. **चुनौतियाँ और आगे की राह:** दुर्गम भूभाग, प्रतिकूल मौसम, वित्तपोषण की चुनौतियाँ और उनके समाधान के लिए निरंतर प्रयास।
6. **निष्कर्ष:** BRO की अरुणांक परियोजना जैसी पहलें न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि दूरदराज के क्षेत्रों में समावेशी विकास और स्थानीय समुदायों के सशक्तिकरण में भी सहायक हैं।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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