09 Sep आंध्र प्रदेश ने एल नीनो चुनौतियों के बीच 24X7 बिजली आपूर्ति का रोडमैप जारी किया
✎ आंध्र प्रदेश का ऊर्जा रोडमैप एल नीनो की चुनौतियों के बीच चौबीसों घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तापीय ऊर्जा खरीद, बैटरी भंडारण और पम्प्ड हाइड्रो स्टोरेज जैसी बहुआयामी रणनीतियों पर केंद्रित है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अर्थव्यवस्था (Economy) | GS Paper III — आधारभूत संरचना (Infrastructure) | GS Paper I — भूगोल (Geography) – एल नीनो के प्रभाव
- Prelims: एल नीनो, बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (Battery Energy Storage Systems), पम्प्ड हाइड्रो स्टोरेज परियोजना (Pumped Hydro Storage Project), टैरिफ-आधारित प्रतिस्पर्धी बोली (Tariff-based Competitive Bidding), विद्युत वितरण कंपनियाँ (DISCOMs), व्यवहार्यता अंतराल वित्तपोषण (Viability Gap Funding)
- Essay: भारत की ऊर्जा सुरक्षा: चुनौतियाँ और समाधान, जलवायु परिवर्तन और इसका भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
त्वरित पुनरावृत्ति: आंध्र प्रदेश का ऊर्जा रोडमैप एल नीनो की चुनौतियों के बीच चौबीसों घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तापीय ऊर्जा खरीद, बैटरी भंडारण और पम्प्ड हाइड्रो स्टोरेज जैसी बहुआयामी रणनीतियों पर केंद्रित है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
आंध्र प्रदेश सरकार ने एल नीनो (El Niño) से संबंधित चुनौतियों के बीच राज्य में चौबीसों घंटे गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने और ग्रिड को मजबूत करने के उद्देश्य से एक व्यापक ऊर्जा रोडमैप (Energy Roadmap) का अनावरण किया है। इस पहल में नई तापीय ऊर्जा (Thermal Power) की खरीद, बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (Battery Energy Storage Systems) की तैनाती और पम्प्ड हाइड्रो स्टोरेज परियोजनाओं (Pumped Hydro Storage Projects) का मूल्यांकन शामिल है, ताकि बढ़ती बिजली की मांग को पूरा किया जा सके और कृषि तथा उद्योगों को निर्बाध आपूर्ति प्रदान की जा सके।
पृष्ठभूमि
- एल नीनो एक जलवायु घटना है जो प्रशांत महासागर में सतही जल के असामान्य रूप से गर्म होने से जुड़ी है, जिसका वैश्विक मौसम पैटर्न पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है, जिसमें भारत में मानसून की वर्षा में कमी भी शामिल है।
- कम वर्षा के कारण जलविद्युत उत्पादन (Hydroelectric Power Generation) प्रभावित हो सकता है, जिससे तापीय ऊर्जा या अन्य स्रोतों पर निर्भरता बढ़ जाती है।
- आंध्र प्रदेश में अगस्त माह में औसत दैनिक बिजली खपत में पिछले वर्ष की तुलना में 20 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जो 269 मिलियन यूनिट तक पहुँच गई, जबकि चरम खपत 286 मिलियन यूनिट रही।
- राज्य में घरों, उद्योगों और कृषि को विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना एक प्रमुख विकासात्मक प्राथमिकता है।
- बिजली क्षेत्र में वितरण कंपनियाँ (DISCOMs) अक्सर वित्तीय और परिचालन चुनौतियों का सामना करती हैं, जिससे आपूर्ति की गुणवत्ता और निरंतरता प्रभावित होती है।
- नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) स्रोतों, विशेषकर सौर ऊर्जा (Solar Power) की बढ़ती हिस्सेदारी के साथ, ग्रिड स्थिरता और शाम की चरम मांग को पूरा करने के लिए ऊर्जा भंडारण समाधानों की आवश्यकता बढ़ गई है।
आंध्र प्रदेश का ऊर्जा रोडमैप क्या है?
- यह रोडमैप एल नीनो से संबंधित चुनौतियों के बीच चौबीसों घंटे गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने और राज्य के ग्रिड को मजबूत करने के लिए एक व्यापक रणनीति है।
- राज्य टैरिफ-आधारित प्रतिस्पर्धी बोली (Tariff-based Competitive Bidding) के माध्यम से 1,600 मेगावाट (MW) नई तापीय ऊर्जा की खरीद करेगा।
- तापीय ऊर्जा डेवलपर्स (Thermal Power Developers) को ईंधन व्यवधानों के जोखिम को कम करने के लिए अनिवार्य रूप से 15 दिनों का कोयला स्टॉक बनाए रखना होगा।
- APGENCO को एक पारदर्शी प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से आयातित कोयला (Imported Coal) खरीदने की अनुमति दी गई है।
- विद्युत वितरण कंपनियों (DISCOMs) को 12 महीने की अग्रिम बिजली आपूर्ति योजना (Advance Power Supply Plan) तैयार करने का निर्देश दिया गया है।
- शाम की चरम मांग को पूरा करने और सौर ऊर्जा के अतिप्रवाह (Solar Power Spillage) को कम करने के लिए, राज्य रणनीतिक स्थानों पर 1,500 MW/6,000 MWh की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियाँ (Battery Energy Storage Systems) तैनात कर रहा है।
- केंद्र की व्यवहार्यता अंतराल वित्तपोषण (Viability Gap Funding) योजना के तहत NHPC के साथ साझेदारी में एक और 500 MW/1,000 MWh भंडारण परियोजना शुरू की जा रही है।
- राज्य 1,344 MW की पम्प्ड हाइड्रो स्टोरेज परियोजना (Pumped Hydro Storage Project) का भी मूल्यांकन कर रहा है और 500 MW की अल्पकालिक पम्प्ड स्टोरेज सेवाओं के लिए APERC अनुमोदन प्राप्त करने की योजना बना रहा है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| 1,600 MW तापीय विद्युत की खरीद | एल् नीनो (El Niño) से उत्पन्न चुनौतियों के बीच चौबीसों घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत। |
| डेवलपर्स द्वारा 15-दिवसीय कोयला स्टॉक | ईंधन आपूर्ति में व्यवधान के जोखिम को कम करना और विद्युत उत्पादन की निरंतरता बनाए रखना। |
| DISCOMs द्वारा 12-माह की अग्रिम आपूर्ति योजना | दीर्घकालिक ऊर्जा मांग का पूर्वानुमान लगाना और उसके अनुसार आपूर्ति प्रबंधन करना। |
| 1,500 MW/6,000 MWh बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) | शाम की चरम मांग को पूरा करना और सौर ऊर्जा के अपव्यय को कम करना। |
| पंपड हाइड्रो स्टोरेज परियोजनाएँ | ग्रिड स्थिरता बढ़ाना, नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण को सुगम बनाना और ऊर्जा भंडारण क्षमता में वृद्धि। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- उद्योगों और कृषि क्षेत्र को विश्वसनीय बिजली आपूर्ति से उत्पादन और आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा मिलेगा।
- ऊर्जा सुरक्षा से निवेश आकर्षित होगा और औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।
सामाजिक महत्व
- घरेलू उपभोक्ताओं को चौबीसों घंटे गुणवत्तापूर्ण बिजली मिलने से जीवन स्तर में सुधार होगा।
- कृषि क्षेत्र को मुफ्त बिजली की निर्बाध आपूर्ति से किसानों की आय और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
पर्यावरणीय महत्व
- बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली और पंपड हाइड्रो स्टोरेज जैसी प्रौद्योगिकियों से नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) का बेहतर एकीकरण होगा, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।
- ऊर्जा दक्षता उपायों से जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी।
शासनिक महत्व
- राज्य सरकार की यह पहल ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक योजना और प्रभावी नीति निर्माण को दर्शाती है।
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership) और केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ उठाना सुशासन का प्रतीक है।
चुनौतियाँ
1. एल् नीनो का प्रभाव
- एल् नीनो के कारण वर्षा में कमी और उच्च तापमान से बिजली की मांग में वृद्धि होती है।
- जलविद्युत उत्पादन (Hydroelectric Power Generation) पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, जिससे अन्य स्रोतों पर दबाव बढ़ेगा।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण और पारिस्थितिकी
2. बढ़ती बिजली की मांग
- अगस्त में दैनिक बिजली खपत में 20 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जो भविष्य में और बढ़ने की उम्मीद है।
- यह बढ़ती मांग मौजूदा बुनियादी ढांचे पर दबाव डालती है और आपूर्ति-मांग के अंतर को बढ़ा सकती है।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढाँचा: ऊर्जा
3. ईंधन आपूर्ति में व्यवधान
- तापीय विद्युत संयंत्रों के लिए कोयले की उपलब्धता और परिवहन एक चुनौती हो सकती है।
- अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कोयले की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी लागत को प्रभावित कर सकता है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: ऊर्जा सुरक्षा
4. ग्रिड स्थिरता और एकीकरण
- नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की परिवर्तनशीलता को ग्रिड में एकीकृत करना एक तकनीकी चुनौती है।
- बड़ी मात्रा में भंडारण प्रणालियों की स्थापना और प्रबंधन के लिए उन्नत ग्रिड अवसंरचना की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान और प्रौद्योगिकी: ऊर्जा
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| एल् नीनो प्रेरित मांग वृद्धि | कृषि और घरेलू क्षेत्रों में अप्रत्याशित बिजली कटौती का जोखिम। |
| तापीय विद्युत पर निर्भरता | कोयले की उपलब्धता और पर्यावरणीय प्रभाव से संबंधित दीर्घकालिक चिंताएँ। |
| वितरण कंपनियों (DISCOMs) की वित्तीय स्थिति | उच्च खरीद लागत और राजस्व वसूली में चुनौतियाँ, जो आपूर्ति की स्थिरता को प्रभावित कर सकती हैं। |
| प्रौद्योगिकी एकीकरण की लागत | बैटरी ऊर्जा भंडारण और पंपड हाइड्रो जैसी उन्नत प्रणालियों की स्थापना और रखरखाव की उच्च प्रारंभिक लागत। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- व्यवहार्यता अंतराल वित्तपोषण योजना (Viability Gap Funding Scheme)
आगे की राह
- नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों (सौर, पवन) के विकास में तेजी लाना और उन्हें ग्रिड के साथ प्रभावी ढंग से एकीकृत करना।
- ऊर्जा भंडारण प्रौद्योगिकियों, जैसे बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली और पंपड हाइड्रो स्टोरेज में निवेश बढ़ाना।
- स्मार्ट ग्रिड (Smart Grid) प्रौद्योगिकियों को अपनाना ताकि बिजली वितरण को अधिक कुशल और लचीला बनाया जा सके।
- ऊर्जा दक्षता (Energy Efficiency) उपायों को बढ़ावा देना और उपभोक्ताओं को बिजली बचाने के लिए प्रोत्साहित करना।
- दीर्घकालिक ऊर्जा योजना और मांग पूर्वानुमान को मजबूत करना ताकि भविष्य की जरूरतों को पूरा किया जा सके।
- अंतर-राज्यीय और अंतर-क्षेत्रीय बिजली हस्तांतरण क्षमताओं को बढ़ाना ताकि अतिरिक्त बिजली को प्रभावी ढंग से वितरित किया जा सके।
- अनुसंधान और विकास (Research and Development) में निवेश करना ताकि ऊर्जा क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा मिल सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
विद्युत आपूर्ति · नवीकरणीय ऊर्जा · बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली · पम्प्ड हाइड्रो स्टोरेज · एल् नीनो प्रभाव · ऊर्जा सुरक्षा · ग्रिड सुदृढ़ीकरण · टैरिफ-आधारित प्रतिस्पर्धी बोली · वितरण कंपनियाँ (DISCOMs) · व्यवहार्यता अंतराल वित्तपोषण
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण’}
- {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘विद्युत समवर्ती सूची का विषय’}
अवधारणा प्रवाह
एल् नीनो के कारण वर्षा में कमी और तापमान में वृद्धि। → कृषि और घरेलू क्षेत्रों में बिजली की मांग में अप्रत्याशित वृद्धि। → मौजूदा बिजली उत्पादन और वितरण प्रणाली पर दबाव। → राज्य सरकार द्वारा तापीय विद्युत खरीद और भंडारण प्रणालियों में निवेश। → चौबीसों घंटे गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियाँ (Battery Energy Storage Systems) बिजली ग्रिड को स्थिर करने और नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण में सहायता करती हैं।
2. पम्प्ड हाइड्रो स्टोरेज परियोजनाएँ (Pumped Hydro Storage Projects) केवल दिन के समय की ऊर्जा मांग को पूरा करने के लिए उपयुक्त हैं।
3. व्यवहार्यता अंतराल वित्तपोषण (Viability Gap Funding) योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से व्यवहार्य लेकिन वित्तीय रूप से अलाभकारी बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं को समर्थन देना है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियाँ बिजली ग्रिड में उतार-चढ़ाव को प्रबंधित करने और सौर तथा पवन ऊर्जा जैसे आंतरायिक नवीकरणीय स्रोतों को एकीकृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
कथन 2 गलत है। पम्प्ड हाइड्रो स्टोरेज परियोजनाएँ ऊर्जा को स्टोर करने का एक प्रभावी तरीका हैं, जिसे मांग के अनुसार किसी भी समय जारी किया जा सकता है, न कि केवल दिन के समय। वे पीक डिमांड को पूरा करने और ग्रिड स्थिरता बनाए रखने के लिए उपयोगी हैं।
कथन 3 सही है। व्यवहार्यता अंतराल वित्तपोषण (VGF) योजना भारत सरकार द्वारा उन बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए शुरू की गई थी जो सामाजिक और आर्थिक रूप से वांछनीय हैं लेकिन वित्तीय रूप से व्यवहार्य नहीं हैं।
Q2. एल् नीनो (El Niño) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
- यह प्रशांत महासागर में सतही जल के असामान्य शीतलन से जुड़ा है।
- यह भारतीय मानसून को मजबूत करता है, जिससे अधिक वर्षा होती है।
- यह वैश्विक मौसम पैटर्न को प्रभावित करता है, जिससे कुछ क्षेत्रों में सूखा और अन्य में भारी वर्षा हो सकती है।
- इसका प्रभाव केवल समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र तक ही सीमित है।
उत्तर: यह वैश्विक मौसम पैटर्न को प्रभावित करता है, जिससे कुछ क्षेत्रों में सूखा और अन्य में भारी वर्षा हो सकती है। — एल् नीनो प्रशांत महासागर में सतही जल के असामान्य तापन से जुड़ा है, न कि शीतलन से। यह भारतीय मानसून को कमजोर कर सकता है, जिससे कम वर्षा हो सकती है। यह वैश्विक मौसम पैटर्न को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करता है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में सूखे, बाढ़ और अन्य चरम मौसमी घटनाएँ हो सकती हैं। इसका प्रभाव केवल समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्थलीय मौसम और कृषि को भी प्रभावित करता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ एल् नीनो जैसी मौसमी चुनौतियों के बीच चौबीसों घंटे गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (Battery Energy Storage Systems) और पम्प्ड हाइड्रो स्टोरेज परियोजनाओं (Pumped Hydro Storage Projects) की भूमिका का परीक्षण कीजिए। भारत में ऊर्जा सुरक्षा और ग्रिड स्थिरता के लिए इन प्रौद्योगिकियों के महत्व पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत एल् नीनो के संदर्भ में बिजली आपूर्ति की चुनौतियों का संक्षिप्त परिचय देकर करें।
पहले भाग में, बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (BESS) की भूमिका का विस्तार से परीक्षण करें:
– नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण में महत्व (सौर और पवन ऊर्जा की आंतरायिकता का प्रबंधन)।
– ग्रिड स्थिरता और आवृत्ति विनियमन में भूमिका।
– पीक डिमांड प्रबंधन और ब्लैकआउट की रोकथाम।
– उदाहरण के तौर पर आंध्र प्रदेश द्वारा 1,500 MW/6,000 MWh BESS की तैनाती का उल्लेख करें।
दूसरे भाग में, पम्प्ड हाइड्रो स्टोरेज परियोजनाओं की भूमिका का परीक्षण करें:
– बड़े पैमाने पर ऊर्जा भंडारण की क्षमता।
– लंबी अवधि के भंडारण और ग्रिड संतुलन में महत्व।
– त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता और ग्रिड लचीलापन।
– आंध्र प्रदेश के 1,344 MW पम्प्ड हाइड्रो स्टोरेज परियोजना के मूल्यांकन और केंद्र की व्यवहार्यता अंतराल वित्तपोषण योजना के तहत NHPC के साथ 500 MW/1,000 MWh परियोजना का उदाहरण दें।
तीसरे भाग में, भारत में ऊर्जा सुरक्षा और ग्रिड स्थिरता के लिए इन प्रौद्योगिकियों के महत्व पर चर्चा करें:
– नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों की प्राप्ति में योगदान।
– जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना।
– जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना करने में लचीलापन।
– आर्थिक विकास और औद्योगिक आपूर्ति के लिए विश्वसनीय बिजली की उपलब्धता।
– कृषि क्षेत्र को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना।
निष्कर्ष में, भारत के ऊर्जा भविष्य के लिए इन भंडारण समाधानों के रणनीतिक महत्व को दोहराएँ।
स्रोत: The Hindu
Andhra Pradesh PCS (APPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में प्रस्तुत ’24X7 गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति’ रोडमैप में निम्नलिखित में से कौन-सा प्रमुख घटक शामिल नहीं है?
- विद्युत उत्पादन क्षमता में वृद्धि के लिए नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं का विस्तार
- विद्युत वितरण नेटवर्क में स्मार्ट मीटरिंग प्रणाली का कार्यान्वयन
- राज्य में परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना
- विद्युत आपूर्ति में व्यवधानों को कम करने के लिए बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) का विकास
उत्तर: राज्य में परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना — राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत रोडमैप में नवीकरणीय ऊर्जा, स्मार्ट मीटरिंग और बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) को शामिल किया गया है, जबकि परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना का उल्लेख नहीं किया गया है।
Mains: आंध्र प्रदेश में ’24X7 गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति’ सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा प्रस्तुत रोडमैप की प्रमुख चुनौतियों और उनके समाधानों का विश्लेषण कीजिए। विशेष रूप से, एल नीनो के प्रभाव और राज्य की विद्युत क्षेत्र की वर्तमान स्थिति को ध्यान में रखते हुए अपने उत्तर को स्पष्ट कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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