आरबीआई गवर्नर ने कहा रुपया है कम मूल्यांकित, जानिए क्या है मतलब और क्यों है महत्वपूर्ण

आरबीआई गवर्नर ने कहा रुपया है कम मूल्यांकित, जानिए क्या है मतलब और क्यों है महत्वपूर्ण

प्रासंगिकता — UPSC & State PCS: Economy

**आरबीआई गवर्नर ने कहा रुपया कम मूल्यांकित है: क्या मतलब है और क्यों महत्वपूर्ण?**

हाल ही में आरबीआई गवर्नर ने स्पष्ट किया है कि भारतीय रुपया अपनी वास्तविक आर्थिक स्थिति की तुलना में कम मूल्यांकित है। इसका अर्थ है कि रुपया अपनी क्रय शक्ति और व्यापार संतुलन के हिसाब से जितना मजबूत होना चाहिए, उतना नहीं है। आरबीआई गवर्नर के इस बयान से यह संकेत मिलता है कि रुपये में और अधिक स्थिरता और वृद्धि की संभावना है, खासकर जब वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव और मुद्रा की अस्थिरता बढ़ रही है। इससे निर्यातकों को लाभ मिल सकता है, क्योंकि कमजोर रुपया निर्यात को प्रतिस्पर्धी बनाता है। साथ ही, आयात महंगा होने से घरेलू उद्योगों को बढ़ावा मिल सकता है।

इस कथन का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि रुपये की गिरावट का सीधा असर मुद्रास्फीति और विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ता है। आरबीआई का यह रुख इसलिए भी प्रासंगिक है, क्योंकि इससे निवेशकों का विश्वास बढ़ सकता है। यदि रुपया वास्तव में कम मूल्यांकित है, तो सरकार और आरबीआई मिलकर ऐसी नीतियां बना सकते हैं, जो रुपये को और मजबूत करें। इससे विदेशी निवेशकों को भारत में निवेश करने में आसानी होगी, जिससे देश की आर्थिक वृद्धि को बल मिलेगा।

यूपीएससी और राज्य पीसीएस के परीक्षार्थियों के लिए यह विषय महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें मुद्रा नीति, व्यापार संतुलन, और वैश्विक आर्थिक प्रभाव जैसे विषय शामिल हैं। परीक्षा में इससे संबंधित प्रश्न प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पूछे जा सकते हैं, जैसे कि रुपये के मूल्यांकन के कारण, इसके प्रभाव, और आरबीआई की भूमिका। साथ ही, राज्य पीसीएस में आर्थिक सर्वेक्षण और बजट से जुड़े प्रश्नों में भी इस विषय का उल्लेख किया जा सकता है। इसलिए, इस विषय को गहराई से समझना आवश्यक है।

स्रोत: Business Standard

अभ्यास प्रश्न

Q1. आरबीआई गवर्नर द्वारा रुपये को ‘अवमूल्यित’ बताया गया है। निम्नलिखित में से कौन सा इसका सबसे प्रत्यक्ष परिणाम होगा?

  1. भारत में आयात कीमतों में वृद्धि
  2. भारत से निर्यात कीमतों में कमी
  3. विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजारों में निवेश कम आकर्षक होना
  4. भारतीय निर्यातकों को अधिक लाभ मिलना
उत्तर

भारत में आयात कीमतों में वृद्धि — जब रुपया अवमूल्यित होता है, तो विदेशी मुद्रा में आयात की लागत बढ़ जाती है क्योंकि रुपये का मूल्य घट जाता है। इससे आयात महंगा हो जाता है, जबकि निर्यातकों को विदेशी बाजारों में अपनी वस्तुओं को सस्ता बेचने का लाभ मिलता है।

Q2. अवमूल्यन के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?

  1. अवमूल्यन से विदेशी ऋणों का बोझ बढ़ जाता है
  2. अवमूल्यन से विदेशी ऋणों का बोझ कम हो जाता है
  3. अवमूल्यन का विदेशी ऋणों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता
  4. अवमूल्यन से विदेशी निवेशकों को लाभ होता है
उत्तर

अवमूल्यन से विदेशी ऋणों का बोझ बढ़ जाता है — अवमूल्यन के कारण रुपये का मूल्य घट जाता है, जिससे विदेशी मुद्रा में लिए गए ऋणों का मूल्य रुपये में बढ़ जाता है। इससे सरकार और कंपनियों पर विदेशी ऋणों का बोझ बढ़ जाता है।


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