आरबीआई ने सितंबर 2026 में घरों के मुद्रास्फीति अपेक्षा सर्वेक्षण का शुभारंभ किया

RBI launches the September 2026 round of the Inflation Expectations Survey of Households — diagram

आरबीआई ने सितंबर 2026 में घरों के मुद्रास्फीति अपेक्षा सर्वेक्षण का शुभारंभ किया

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✎ भारतीय रिज़र्व बैंक का परिवारों का मुद्रास्फीति प्रत्याशा सर्वेक्षण (IESH) परिवारों की भविष्य की मूल्य वृद्धि की धारणाओं को मापता है, जो मौद्रिक नीति निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण इनपुट प्रदान करता है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — अर्थव्यवस्था
  • Prelims: मुद्रास्फीति प्रत्याशा सर्वेक्षण (IESH), भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI), मौद्रिक नीति, मुद्रास्फीति, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI), मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण
  • Essay: भारत में आर्थिक स्थिरता और मौद्रिक नीति की भूमिका, डेटा-संचालित शासन और नीति निर्माण का महत्व

त्वरित पुनरावृत्ति: भारतीय रिज़र्व बैंक का परिवारों का मुद्रास्फीति प्रत्याशा सर्वेक्षण (IESH) परिवारों की भविष्य की मूल्य वृद्धि की धारणाओं को मापता है, जो मौद्रिक नीति निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण इनपुट प्रदान करता है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने सितंबर 2026 के लिए ‘परिवारों का मुद्रास्फीति प्रत्याशा सर्वेक्षण’ (Inflation Expectations Survey of Households – IESH) का नवीनतम दौर शुरू किया है। यह सर्वेक्षण नियमित रूप से आयोजित किया जाता है और इसका उद्देश्य परिवारों की मूल्य गतिविधियों तथा मुद्रास्फीति पर व्यक्तिपरक धारणाओं को जानना है, जो मौद्रिक नीति के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है।

पृष्ठभूमि

  • मुद्रास्फीति (Inflation) किसी अर्थव्यवस्था में वस्तुओं और सेवाओं के सामान्य मूल्य स्तर में वृद्धि को संदर्भित करती है, जिससे मुद्रा की क्रय शक्ति कम हो जाती है।
  • भारत में, मुद्रास्फीति को मुख्य रूप से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer Price Index – CPI) द्वारा मापा जाता है, जो खुदरा मुद्रास्फीति को दर्शाता है।
  • भारतीय रिज़र्व बैंक को सरकार द्वारा मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण (Inflation Targeting) का जनादेश दिया गया है, जिसका लक्ष्य CPI मुद्रास्फीति को 4% (+/- 2%) के दायरे में रखना है।
  • मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee – MPC) RBI की मौद्रिक नीति तय करती है, जिसमें मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना एक प्रमुख उद्देश्य है।
  • मुद्रास्फीति प्रत्याशाएँ (Inflation Expectations) भविष्य में कीमतों के बढ़ने की आशंकाओं को दर्शाती हैं, और ये वास्तविक मुद्रास्फीति को प्रभावित कर सकती हैं क्योंकि लोग अपनी अपेक्षाओं के आधार पर खर्च और निवेश के निर्णय लेते हैं।
  • RBI विभिन्न सर्वेक्षणों और डेटा स्रोतों का उपयोग करके अर्थव्यवस्था की स्थिति का आकलन करता है, जिनमें से IESH एक महत्वपूर्ण उपकरण है।

परिवारों का मुद्रास्फीति प्रत्याशा सर्वेक्षण (IESH) क्या है?

  • IESH भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा नियमित रूप से आयोजित किया जाने वाला एक सर्वेक्षण है जिसका उद्देश्य भारतीय परिवारों की मुद्रास्फीति संबंधी धारणाओं और अपेक्षाओं को मापना है।
  • सर्वेक्षण में परिवार अपनी व्यक्तिगत उपभोग टोकरियों के आधार पर मूल्य आंदोलनों और मुद्रास्फीति पर अपने व्यक्तिपरक आकलन प्रस्तुत करते हैं।
  • यह गुणात्मक (qualitative) और मात्रात्मक (quantitative) दोनों तरह की प्रतिक्रियाएँ एकत्र करता है। गुणात्मक प्रतिक्रियाएँ सामान्य कीमतों के साथ-साथ विशिष्ट उत्पाद समूहों की कीमतों में बदलाव पर होती हैं।
  • मात्रात्मक प्रतिक्रियाएँ वर्तमान, तीन महीने आगे और एक साल आगे की मुद्रास्फीति दरों पर होती हैं।
  • सर्वेक्षण के परिणाम मौद्रिक नीति के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण इनपुट प्रदान करते हैं, क्योंकि परिवारों की अपेक्षाएँ भविष्य की वास्तविक मुद्रास्फीति को प्रभावित कर सकती हैं।
  • RBI इस सर्वेक्षण को एक बाहरी एजेंसी, जैसे कि M/s हंसा रिसर्च ग्रुप प्राइवेट लिमिटेड, मुंबई के माध्यम से संचालित करता है।
  • यह सर्वेक्षण RBI को अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति के दबावों की बेहतर समझ प्रदान करता है और नीति निर्माताओं को समय पर और प्रभावी निर्णय लेने में मदद करता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
सर्वेक्षण का उद्देश्य मूल्य गतिविधियों और मुद्रास्फीति पर परिवारों के व्यक्तिपरक आकलन को जानना।
कवरेज अहमदाबाद, बेंगलुरु, भोपाल, भुवनेश्वर, चंडीगढ़, चेन्नई, दिल्ली, गुवाहाटी, हैदराबाद, जयपुर, जम्मू, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई, नागपुर, पटना, रायपुर, रांची और तिरुवनंतपुरम सहित 19 शहर।
प्रतिक्रिया के प्रकार सामान्य कीमतों और विशिष्ट उत्पाद समूहों की कीमतों में बदलाव पर गुणात्मक प्रतिक्रियाएं; वर्तमान, तीन महीने आगे और एक साल आगे की मुद्रास्फीति दरों पर मात्रात्मक प्रतिक्रियाएं।
समय-सीमा तीन महीने आगे और एक साल आगे की अवधि के लिए अपेक्षित मुद्रास्फीति।
संचालन एजेंसी M/s हंसा रिसर्च ग्रुप प्राइवेट लिमिटेड, मुंबई।

महत्व

मौद्रिक नीति के लिए इनपुट

  • यह सर्वेक्षण भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को परिवारों की मुद्रास्फीति संबंधी अपेक्षाओं को समझने में मदद करता है, जो मौद्रिक नीति (Monetary Policy) के निर्धारण के लिए एक महत्वपूर्ण इनपुट है।
  • मुद्रास्फीति संबंधी अपेक्षाएँ वास्तविक मुद्रास्फीति को प्रभावित कर सकती हैं, क्योंकि वे उपभोक्ता खर्च और निवेश निर्णयों को प्रभावित करती हैं।

आर्थिक स्थिरता

  • मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना आर्थिक स्थिरता (Economic Stability) बनाए रखने और क्रय शक्ति (Purchasing Power) की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
  • आरबीआई के लिए यह समझना आवश्यक है कि परिवार कीमतों में वृद्धि की कितनी उम्मीद करते हैं, ताकि वह तदनुसार अपनी नीतियों को समायोजित कर सके।

पारदर्शिता और संचार

  • इस तरह के सर्वेक्षणों के माध्यम से प्राप्त जानकारी का उपयोग आरबीआई अपनी मौद्रिक नीति के औचित्य को जनता तक पहुँचाने और अपनी पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कर सकता है।
  • यह परिवारों को भविष्य की आर्थिक स्थितियों के बारे में सूचित निर्णय लेने में भी मदद करता है।

चुनौतियाँ

1. प्रतिनिधित्व और पूर्वाग्रह

  • सर्वेक्षण के नमूने का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना कठिन हो सकता है, जिससे परिणामों में पूर्वाग्रह (Bias) आ सकता है।
  • अलग-अलग आय वर्ग और सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि वाले परिवारों की मुद्रास्फीति संबंधी अपेक्षाएँ भिन्न हो सकती हैं।

2. व्यक्तिपरक आकलन की सटीकता

  • परिवारों द्वारा दिए गए व्यक्तिपरक आकलन हमेशा सटीक नहीं हो सकते हैं, क्योंकि वे व्यक्तिगत अनुभवों और धारणाओं पर आधारित होते हैं।
  • आर्थिक साक्षरता (Economic Literacy) का निम्न स्तर भी प्रतिक्रियाओं की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।

3. डेटा का विश्लेषण और व्याख्या

  • सर्वेक्षण से प्राप्त गुणात्मक और मात्रात्मक डेटा का सही ढंग से विश्लेषण और व्याख्या करना एक जटिल कार्य है।
  • विभिन्न कारकों के प्रभाव को अलग करना और मुद्रास्फीति संबंधी अपेक्षाओं के अंतर्निहित कारणों को समझना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
नमूनाकरण पूर्वाग्रह यह सुनिश्चित करना कि सर्वेक्षण का नमूना भारतीय आबादी की विविधता का सही प्रतिनिधित्व करता है।
प्रतिक्रियाओं की व्यक्तिपरकता परिवारों की व्यक्तिगत धारणाओं और सीमित आर्थिक ज्ञान के कारण प्रतिक्रियाओं में भिन्नता।
डेटा की व्याख्या गुणात्मक और मात्रात्मक डेटा से सटीक निष्कर्ष निकालना और नीतिगत निहितार्थों को समझना।
अस्थिर अपेक्षाएँ आर्थिक घटनाओं या समाचारों के कारण परिवारों की मुद्रास्फीति संबंधी अपेक्षाओं में तेजी से बदलाव।

आगे की राह

  • सर्वेक्षण के दायरे और आवृत्ति को बढ़ाना ताकि अधिक व्यापक और अद्यतन डेटा प्राप्त हो सके।
  • विभिन्न सामाजिक-आर्थिक समूहों के प्रतिनिधित्व को बेहतर बनाने के लिए नमूनाकरण विधियों को परिष्कृत करना।
  • परिवारों के बीच आर्थिक और वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा देना ताकि उनकी प्रतिक्रियाओं की गुणवत्ता में सुधार हो सके।
  • मुद्रास्फीति संबंधी अपेक्षाओं को प्रभावित करने वाले कारकों पर गहन शोध करना।
  • सर्वेक्षण के परिणामों को अधिक पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक करना ताकि नीतिगत निर्णयों की समझ बढ़ाई जा सके।
  • अन्य आर्थिक संकेतकों के साथ सर्वेक्षण परिणामों का एकीकृत विश्लेषण करना ताकि एक समग्र दृष्टिकोण प्राप्त हो सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

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अवधारणा प्रवाह

RBI द्वारा मुद्रास्फीति संबंधी अपेक्षा सर्वेक्षण का संचालन  →  परिवारों से मूल्य गतिविधियों पर व्यक्तिपरक आकलन प्राप्त करना  →  डेटा का विश्लेषण और मुद्रास्फीति संबंधी अपेक्षाओं का निर्धारण  →  मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee) द्वारा नीतिगत निर्णयों में इनपुट के रूप में उपयोग  →  मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने का प्रयास

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा आयोजित ‘मुद्रास्फीति प्रत्याशा सर्वेक्षण’ (Inflation Expectations Survey of Households – IESH) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह सर्वेक्षण केवल शहरी क्षेत्रों में आयोजित किया जाता है।
2. यह सर्वेक्षण परिवारों से आगामी तीन महीने और एक वर्ष की अवधि के लिए मूल्य परिवर्तनों पर गुणात्मक और मात्रात्मक दोनों प्रतिक्रियाएँ प्राप्त करता है।
3. इस सर्वेक्षण के परिणाम मौद्रिक नीति निर्माण के लिए महत्वपूर्ण इनपुट प्रदान करते हैं।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि सर्वेक्षण 19 शहरों में आयोजित किया जाता है, जो शहरी क्षेत्रों को कवर करता है, लेकिन ‘केवल’ शहरी क्षेत्रों का उल्लेख इसे गलत बनाता है यदि इसमें अर्ध-शहरी या ग्रामीण क्षेत्रों को शामिल करने की संभावना हो, हालांकि दिए गए संदर्भ में यह शहरों तक सीमित है। लेकिन ‘केवल’ शब्द इसे संकीर्ण करता है। कथन 2 सही है क्योंकि सर्वेक्षण गुणात्मक (सामान्य कीमतों और विशिष्ट उत्पाद समूहों पर) और मात्रात्मक (वर्तमान, तीन महीने आगे और एक साल आगे मुद्रास्फीति दर) दोनों प्रतिक्रियाएँ चाहता है। कथन 3 सही है क्योंकि प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सर्वेक्षण के परिणाम मौद्रिक नीति के लिए उपयोगी इनपुट प्रदान करते हैं।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के मौद्रिक नीति उपकरण का प्राथमिक उद्देश्य है?

  1. राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करना
  2. विनिमय दर को स्थिर करना
  3. मूल्य स्थिरता बनाए रखना और आर्थिक संवृद्धि का समर्थन करना
  4. सरकारी प्रतिभूतियों का प्रबंधन करना

उत्तर: मूल्य स्थिरता बनाए रखना और आर्थिक संवृद्धि का समर्थन करना — भारतीय रिज़र्व बैंक का प्राथमिक उद्देश्य मूल्य स्थिरता (Price Stability) बनाए रखना है, जबकि आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) के उद्देश्य को ध्यान में रखना भी है। यह मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण (Inflation Targeting) ढांचे के तहत कार्य करता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा आयोजित ‘मुद्रास्फीति प्रत्याशा सर्वेक्षण’ (Inflation Expectations Survey of Households – IESH) के महत्व पर चर्चा करें। मौद्रिक नीति निर्माण में ऐसे सर्वेक्षणों से प्राप्त इनपुट किस प्रकार सहायक होते हैं? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** मुद्रास्फीति प्रत्याशा सर्वेक्षण (IESH) क्या है और इसका उद्देश्य क्या है, इसका संक्षिप्त परिचय दें। यह बताएं कि RBI इसे नियमित रूप से क्यों आयोजित करता है।
2. **IESH का महत्व:**
* **उपभोक्ता धारणा:** यह परिवारों की मूल्य आंदोलनों और मुद्रास्फीति पर व्यक्तिपरक धारणाओं को दर्शाता है।
* **उपभोग व्यवहार:** मुद्रास्फीति की अपेक्षाएँ परिवारों के उपभोग और बचत निर्णयों को प्रभावित करती हैं।
* **मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण:** RBI के मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण ढांचे के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह वास्तविक मुद्रास्फीति पर प्रत्याशाओं के प्रभाव को समझने में मदद करता है।
* **नीतिगत प्रतिक्रिया:** यह RBI को संभावित मुद्रास्फीति दबावों का अनुमान लगाने और समय पर नीतिगत प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाता है।
* **बाजार मनोविज्ञान:** बाजार मनोविज्ञान और भविष्य की मूल्य प्रवृत्तियों पर जनता के विश्वास का एक संकेतक।
3. **मौद्रिक नीति निर्माण में सहायता:**
* **भविष्य की मुद्रास्फीति का अनुमान:** सर्वेक्षण के गुणात्मक और मात्रात्मक डेटा RBI को भविष्य की मुद्रास्फीति प्रवृत्तियों का अधिक सटीक अनुमान लगाने में मदद करते हैं।
* **नीतिगत निर्णय:** मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee – MPC) ब्याज दरों (रेपो दर, रिवर्स रेपो दर) जैसे उपकरणों का उपयोग करके नीतिगत निर्णय लेने के लिए इन इनपुट का उपयोग करती है।
* **संवाद और पारदर्शिता:** सर्वेक्षण के परिणाम सार्वजनिक किए जाते हैं, जिससे RBI की नीतिगत सोच में पारदर्शिता आती है और जनता के साथ संवाद बेहतर होता है।
* **विश्वसनीयता:** जब केंद्रीय बैंक जनता की अपेक्षाओं को समझता है और उन्हें संबोधित करता है, तो उसकी मौद्रिक नीति की विश्वसनीयता बढ़ती है।
* **वास्तविक बनाम प्रत्याशित मुद्रास्फीति:** यह समझने में मदद करता है कि वास्तविक मुद्रास्फीति और प्रत्याशित मुद्रास्फीति के बीच कितना अंतर है, जो नीतिगत समायोजन के लिए महत्वपूर्ण है।
4. **निष्कर्ष:** सर्वेक्षण के महत्व को दोहराते हुए एक संतुलित निष्कर्ष दें, जिसमें यह बताया जाए कि कैसे यह RBI को मूल्य स्थिरता और आर्थिक संवृद्धि के दोहरे जनादेश को पूरा करने में मदद करता है।

स्रोत: RBI


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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