04 Sep इसरो ने जीएसएलवी-एफ17 द्वारा पृथ्वी अवलोकन उपग्रह ईओएस-05 का सफल प्रक्षेपण किया
✎ EOS-05 उपग्रह का GSLV-F17 द्वारा सफल प्रक्षेपण भारत की भू-पर्यवेक्षण क्षमताओं को बढ़ाता है, जो आपदा प्रबंधन, कृषि और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करेगा।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS पेपर III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी — अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी | GS पेपर III — आपदा प्रबंधन
- Prelims: EOS-05, GSLV-F17, भू-पर्यवेक्षण उपग्रह, भू-तुल्यकालिक कक्षा, क्रायोजेनिक ऊपरी चरण, सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र
- Essay: अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का भारत के विकास और सुरक्षा में योगदान, आपदा प्रबंधन में तकनीकी नवाचार की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: EOS-05 उपग्रह का GSLV-F17 द्वारा सफल प्रक्षेपण भारत की भू-पर्यवेक्षण क्षमताओं को बढ़ाता है, जो आपदा प्रबंधन, कृषि और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करेगा।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने हाल ही में GSLV-F17 रॉकेट का उपयोग करके उन्नत भू-पर्यवेक्षण उपग्रह (Earth observation satellite) EOS-05 को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया है। यह प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया गया, जिससे देश की अंतरिक्ष-आधारित निगरानी प्रणाली में एक महत्वपूर्ण नई क्षमता जुड़ गई है। यह मिशन भारत के भू-पर्यवेक्षण कार्यक्रम और स्वदेशी GSLV कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
पृष्ठभूमि
- भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम: भारत ने 1960 के दशक में अपना अंतरिक्ष कार्यक्रम शुरू किया, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय विकास के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का उपयोग करना था।
- ISRO की भूमिका: ISRO भारत की प्रमुख अंतरिक्ष एजेंसी है, जो उपग्रहों के डिजाइन, विकास, निर्माण और प्रक्षेपण तथा संबंधित अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के लिए जिम्मेदार है।
- भू-पर्यवेक्षण उपग्रह: ये उपग्रह पृथ्वी की सतह, वायुमंडल और महासागरों का डेटा एकत्र करते हैं, जिसका उपयोग विभिन्न नागरिक और रणनीतिक अनुप्रयोगों के लिए किया जाता है।
- GSLV कार्यक्रम: भू-तुल्यकालिक उपग्रह प्रक्षेपण यान (Geosynchronous Satellite Launch Vehicle – GSLV) ISRO द्वारा विकसित एक प्रक्षेपण यान है, जो भू-तुल्यकालिक स्थानांतरण कक्षा (Sub-Geosynchronous Transfer Orbit) में उपग्रहों को स्थापित करने में सक्षम है। इसमें भारत का स्वदेशी क्रायोजेनिक ऊपरी चरण (Cryogenic Upper Stage) शामिल है।
- पूर्व मिशन: अगस्त 2021 में GSLV-F10 द्वारा EOS-03 उपग्रह का प्रक्षेपण क्रायोजेनिक ऊपरी चरण के अपेक्षित प्रदर्शन न कर पाने के कारण असफल रहा था।
- EOS-05 का महत्व: यह मिशन ISRO के विस्तारित भू-पर्यवेक्षण कार्यक्रम में एक और परिष्कृत मंच जोड़ता है और देश के मौजूदा उपग्रह नेटवर्क का पूरक होगा।
- प्रक्षेपण स्थल: सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (Satish Dhawan Space Centre), श्रीहरिकोटा, आंध्र प्रदेश, भारत का प्रमुख उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र है।
EOS-05 उपग्रह और GSLV-F17 मिशन क्या है?
- EOS-05 एक उन्नत भू-पर्यवेक्षण उपग्रह है जिसका वजन लगभग 2,367 किलोग्राम है।
- इसे भू-तुल्यकालिक कक्षा (Geosynchronous Orbit) से पृथ्वी की उन्नत इमेजिंग क्षमताएं प्रदान करने के लिए विकसित किया गया है।
- यह पारंपरिक निम्न-पृथ्वी-कक्षा (Low-Earth-Orbit) के पर्यवेक्षण उपग्रहों की तुलना में काफी अधिक ऊंचाई पर संचालित होगा।
- यह उपग्रह बड़े भौगोलिक क्षेत्रों का बार-बार अवलोकन करने में सक्षम होगा, जिससे भारतीय उपमहाद्वीप और आसपास के क्षेत्रों की निगरानी क्षमता बढ़ेगी।
- इसके अवलोकन आपदा प्रबंधन, कृषि, पर्यावरण मूल्यांकन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और मौसम संबंधी घटनाओं की निगरानी में सहायता करेंगे।
- GSLV-F17 GSLV श्रृंखला की 19वीं उड़ान है और इसमें भारत का स्वदेशी रूप से विकसित क्रायोजेनिक ऊपरी चरण का उपयोग किया गया है।
- यह मिशन आपदा प्रतिक्रिया, विकास योजना और राष्ट्रीय आवश्यकताओं के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी संसाधन प्रदान करते हुए, अंतरिक्ष से बड़े क्षेत्रों के निरंतर अवलोकन के लिए भारत की क्षमता को मजबूत करता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| EOS-05 उपग्रह | उन्नत भू-अवलोकन क्षमताएँ प्रदान करता है, विशेषकर भू-तुल्यकालिक कक्षा से। |
| GSLV-F17 रॉकेट | स्वदेशी क्रायोजेनिक ऊपरी चरण का उपयोग करने वाला GSLV कार्यक्रम का 19वाँ सफल प्रक्षेपण। |
| भू-तुल्यकालिक कक्षा (Geosynchronous Orbit) | पारंपरिक निम्न-पृथ्वी-कक्षा उपग्रहों की तुलना में बड़े भौगोलिक क्षेत्रों का बार-बार अवलोकन करने में सक्षम। |
| 2,367 किलोग्राम वजन | ISRO की भारी उपग्रहों को भू-तुल्यकालिक कक्षा में स्थापित करने की क्षमता को दर्शाता है। |
| सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा | भारत के अंतरिक्ष अभियानों के लिए प्रमुख प्रक्षेपण स्थल। |
महत्व
सामरिक महत्व
- भारत की उपमहाद्वीप और पड़ोसी क्षेत्रों की निगरानी क्षमता में वृद्धि करता है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा आवश्यकताओं के लिए महत्वपूर्ण है।
- आपदा प्रबंधन और आपातकालीन प्रतिक्रिया के दौरान त्वरित जानकारी की उपलब्धता में सुधार करता है, जिससे जान-माल के नुकसान को कम करने में मदद मिलती है।
वैज्ञानिक एवं तकनीकी महत्व
- भू-तुल्यकालिक कक्षा से पृथ्वी इमेजिंग क्षमता स्थापित करने में ISRO की प्रगति को दर्शाता है, जो पिछली असफलताओं के बाद एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
- स्वदेशी क्रायोजेनिक ऊपरी चरण का सफल उपयोग भारत की आत्मनिर्भरता और उन्नत रॉकेट प्रौद्योगिकी में महारत को प्रदर्शित करता है।
आर्थिक एवं विकासात्मक महत्व
- कृषि, पर्यावरण मूल्यांकन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और मौसम संबंधी घटनाओं की निगरानी के लिए महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करता है, जिससे विकास योजना में सहायता मिलती है।
- अंतरिक्ष-आधारित निगरानी प्रणाली को मजबूत करता है, जो विभिन्न नागरिक अनुप्रयोगों के लिए आवश्यक है और देश की समग्र तकनीकी क्षमता को बढ़ाता है।
चुनौतियाँ
1. अंतरिक्ष मलबे का प्रबंधन
- बढ़ते उपग्रह प्रक्षेपणों के साथ, अंतरिक्ष मलबे की समस्या गंभीर होती जा रही है, जिससे भविष्य के मिशनों के लिए खतरा पैदा हो रहा है।
- मलबे को ट्रैक करने, उससे बचने और उसके निपटान के लिए प्रभावी अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और प्रौद्योगिकियों की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी
2. प्रौद्योगिकी का दोहरा उपयोग
- भू-अवलोकन उपग्रहों द्वारा एकत्र किए गए डेटा का नागरिक और सामरिक दोनों उद्देश्यों के लिए उपयोग किया जा सकता है, जिससे डेटा गोपनीयता और सुरक्षा संबंधी चिंताएँ उत्पन्न होती हैं।
- डेटा के उपयोग और साझाकरण के लिए स्पष्ट नीतियां और नियामक ढाँचे स्थापित करना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, आंतरिक सुरक्षा
3. लागत प्रभावी प्रक्षेपण
- अंतरिक्ष मिशनों की उच्च लागत एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, खासकर विकासशील देशों के लिए।
- पुनः प्रयोज्य रॉकेट (reusable rockets) और कम लागत वाली प्रौद्योगिकियों का विकास इस चुनौती को कम करने में मदद कर सकता है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, अर्थव्यवस्था
4. अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा
- वैश्विक अंतरिक्ष उद्योग में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण भारत को अपनी तकनीकी बढ़त बनाए रखने और नए बाजारों में प्रवेश करने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
- अनुसंधान और विकास में निरंतर निवेश तथा अंतर्राष्ट्रीय सहयोग महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, अंतर्राष्ट्रीय संबंध
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| क्रायोजेनिक चरण की विफलता | GSLV-F10 मिशन की विफलता ने क्रायोजेनिक इंजन की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे, जिसे इस सफल प्रक्षेपण से दूर किया गया है। |
| डेटा की सुरक्षा और गोपनीयता | संवेदनशील भू-अवलोकन डेटा के दुरुपयोग या अनधिकृत पहुँच को रोकना एक महत्वपूर्ण चुनौती है। |
| अंतरिक्ष में भीड़भाड़ | बढ़ते उपग्रहों और मलबे के कारण अंतरिक्ष में टकराव का जोखिम बढ़ रहा है, जिससे परिचालन सुरक्षा प्रभावित होती है। |
| दीर्घकालिक स्थिरता | उपग्रहों के दीर्घकालिक संचालन और उनके जीवनकाल के अंत में सुरक्षित निपटान सुनिश्चित करना। |
आगे की राह
- अंतरिक्ष अनुसंधान और विकास में निवेश बढ़ाना, विशेषकर अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों जैसे पुनः प्रयोज्य प्रक्षेपण यान (reusable launch vehicles) और उन्नत प्रणोदन प्रणालियों में।
- अंतरिक्ष मलबे के प्रबंधन और शमन के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना तथा स्वदेशी समाधान विकसित करना।
- भू-अवलोकन डेटा के उपयोग के लिए एक मजबूत नियामक ढाँचा स्थापित करना, जिसमें डेटा गोपनीयता, सुरक्षा और साझाकरण के प्रावधान शामिल हों।
- निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करना और अंतरिक्ष उद्योग में नवाचार को बढ़ावा देना, जिससे लागत प्रभावी समाधान और नई क्षमताएं विकसित हो सकें।
- अंतरिक्ष-आधारित अनुप्रयोगों के लिए मानव संसाधन विकास पर ध्यान केंद्रित करना, जिसमें वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और तकनीशियनों का प्रशिक्षण शामिल है।
- अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसियों और देशों के साथ सहयोग बढ़ाना, जिससे ज्ञान साझाकरण और संयुक्त मिशनों को बढ़ावा मिल सके।
- आपदा प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन निगरानी जैसे क्षेत्रों में भू-अवलोकन डेटा के उपयोग को अधिकतम करने के लिए विभिन्न सरकारी विभागों के साथ समन्वय स्थापित करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
पृथ्वी अवलोकन उपग्रह · भू-तुल्यकालिक उपग्रह प्रक्षेपण यान (GSLV) · EOS-05 · क्रायोजेनिक ऊपरी चरण · अंतरिक्ष-आधारित निगरानी प्रणाली · आपदा प्रबंधन · कृषि अनुप्रयोग · पर्यावरण मूल्यांकन · प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन · मौसम संबंधी घटनाएँ · भू-तुल्यकालिक कक्षा · इसरो (ISRO)
अवधारणा प्रवाह
GSLV-F17 का सफल प्रक्षेपण → EOS-05 उपग्रह को भू-तुल्यकालिक स्थानांतरण कक्षा में स्थापित करना → उपग्रह का परिचालन कक्षा में स्थापित होना → उन्नत भू-अवलोकन क्षमताएँ प्राप्त करना → आपदा प्रबंधन, कृषि और राष्ट्रीय सुरक्षा में सुधार
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. EOS-05 एक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह है जिसे ISRO द्वारा विकसित किया गया है।
2. GSLV-F17 रॉकेट ने EOS-05 को निम्न-पृथ्वी कक्षा (Low-Earth Orbit) में स्थापित किया।
3. GSLV रॉकेट भारत के स्वदेशी क्रायोजेनिक ऊपरी चरण का उपयोग करता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि EOS-05 एक उन्नत पृथ्वी अवलोकन उपग्रह है। कथन 2 गलत है क्योंकि GSLV-F17 ने EOS-05 को उप-भू-तुल्यकालिक स्थानांतरण कक्षा (Sub-Geosynchronous Transfer Orbit) में स्थापित किया, न कि निम्न-पृथ्वी कक्षा में। कथन 3 सही है क्योंकि GSLV रॉकेट भारत के स्वदेशी क्रायोजेनिक ऊपरी चरण का उपयोग करता है। अतः, केवल दो कथन सही हैं।
Q2. अभिकथन (A): ISRO का EOS-05 उपग्रह आपदा प्रबंधन और कृषि जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करेगा।
कारण (R): EOS-05 को भू-तुल्यकालिक कक्षा से बड़े भौगोलिक क्षेत्रों का बार-बार अवलोकन करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो पारंपरिक निम्न-पृथ्वी कक्षा उपग्रहों की तुलना में अधिक ऊंचाई पर संचालित होता है।
- A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि EOS-05 के अवलोकन आपदा प्रबंधन, कृषि, पर्यावरण मूल्यांकन और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन जैसे विभिन्न नागरिक और रणनीतिक अनुप्रयोगों का समर्थन कर सकते हैं। कारण (R) भी सही है और A की सही व्याख्या करता है, क्योंकि भू-तुल्यकालिक कक्षा में इसकी उच्च ऊंचाई और बार-बार अवलोकन की क्षमता ही इसे इन अनुप्रयोगों के लिए महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करने में सक्षम बनाती है।
Q3. निम्नलिखित में से कौन-सा ISRO के GSLV रॉकेट कार्यक्रम की एक प्रमुख विशेषता है?
- यह केवल ध्रुवीय कक्षाओं में उपग्रहों को लॉन्च करने के लिए उपयोग किया जाता है।
- यह भारत के स्वदेशी क्रायोजेनिक ऊपरी चरण का उपयोग करता है।
- यह मुख्य रूप से संचार उपग्रहों के प्रक्षेपण तक ही सीमित है।
- यह केवल विदेशी ग्राहकों के लिए उपग्रहों का प्रक्षेपण करता है।
उत्तर: यह भारत के स्वदेशी क्रायोजेनिक ऊपरी चरण का उपयोग करता है। — GSLV रॉकेट कार्यक्रम की एक प्रमुख विशेषता यह है कि यह भारत के स्वदेशी रूप से विकसित क्रायोजेनिक ऊपरी चरण का उपयोग करता है, जैसा कि GSLV-F17 मिशन में भी देखा गया। अन्य विकल्प गलत हैं; GSLV भू-तुल्यकालिक कक्षाओं में उपग्रहों को लॉन्च करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, और इसका उपयोग विभिन्न प्रकार के उपग्रहों के लिए किया जाता है, न कि केवल संचार उपग्रहों के लिए।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत की अंतरिक्ष-आधारित निगरानी प्रणाली में भू-तुल्यकालिक पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों के महत्व का परीक्षण कीजिए। आपदा प्रबंधन और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन में EOS-05 जैसे उपग्रह किस प्रकार सहायक हो सकते हैं? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** भारत की अंतरिक्ष क्षमता और ISRO के पृथ्वी अवलोकन कार्यक्रम का संक्षिप्त उल्लेख।
2. **भू-तुल्यकालिक पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों का महत्व:**
* **व्यापक कवरेज:** पारंपरिक निम्न-पृथ्वी कक्षा उपग्रहों की तुलना में बड़े भौगोलिक क्षेत्रों का बार-बार अवलोकन करने की क्षमता।
* **निरंतर निगरानी:** एक ही स्थिति से लगातार निगरानी, विशेषकर तेजी से विकसित होने वाली घटनाओं के लिए।
* **रणनीतिक अनुप्रयोग:** भारतीय उपमहाद्वीप और पड़ोसी क्षेत्रों की निगरानी में वृद्धि।
* **तकनीकी आत्मनिर्भरता:** स्वदेशी क्रायोजेनिक ऊपरी चरण जैसी उन्नत प्रौद्योगिकियों का विकास।
3. **आपदा प्रबंधन में EOS-05 की भूमिका:**
* **तत्काल जानकारी:** बाढ़, चक्रवात, भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान वास्तविक समय की जानकारी प्रदान करना।
* **क्षति का आकलन:** आपदा प्रभावित क्षेत्रों की मैपिंग और क्षति का आकलन।
* **राहत और बचाव कार्य:** राहत और बचाव अभियानों के समन्वय में सहायता।
* **पूर्व चेतावनी प्रणाली:** मौसम संबंधी घटनाओं की निगरानी करके पूर्व चेतावनी प्रदान करना।
4. **प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन में EOS-05 की भूमिका:**
* **कृषि:** फसल की निगरानी, मिट्टी के स्वास्थ्य का आकलन, सिंचाई प्रबंधन।
* **पर्यावरण मूल्यांकन:** वन आवरण, जल निकायों और प्रदूषण स्तरों की निगरानी।
* **शहरी नियोजन:** शहरी विस्तार और भूमि उपयोग परिवर्तनों का विश्लेषण।
* **भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण:** खनिज संसाधनों की खोज और भूवैज्ञानिक मानचित्रण।
5. **निष्कर्ष:** भारत की विकास योजनाओं और राष्ट्रीय आवश्यकताओं के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के बढ़ते महत्व पर बल, भविष्य की संभावनाओं का उल्लेख।
स्रोत: orissapost.com
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