16 Sep इस्पात मंत्रालय का विशेष अभियान 6.0: ई-कचरे के निपटारे पर केंद्रित पहल
✎ विशेष अभियान 6.0 इस्पात मंत्रालय द्वारा ई-कचरा प्रबंधन और प्रशासनिक दक्षता में सुधार के लिए शुरू किया गया एक राष्ट्रव्यापी अभियान है, जो ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 के अनुपालन पर विशेष जोर देता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पक्ष, ई-गवर्नेंस | GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी, प्रदूषण और अवक्रमण, पर्यावरण प्रभाव आकलन
- Prelims: विशेष अभियान 6.0, ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022, ई-कचरा प्रबंधन, स्वच्छता अभियान, प्रशासनिक दक्षता, इस्पात मंत्रालय
- Essay: सतत विकास और प्रभावी शासन में प्रौद्योगिकी की भूमिका, भारत में ई-कचरा प्रबंधन की चुनौतियाँ और समाधान
त्वरित पुनरावृत्ति: विशेष अभियान 6.0 इस्पात मंत्रालय द्वारा ई-कचरा प्रबंधन और प्रशासनिक दक्षता में सुधार के लिए शुरू किया गया एक राष्ट्रव्यापी अभियान है, जो ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 के अनुपालन पर विशेष जोर देता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
इस्पात मंत्रालय (Ministry of Steel) ने 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर, 2026 तक चलने वाले ‘विशेष अभियान 6.0’ की शुरुआत की है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ई-कचरे (E-waste) के प्रभावी संग्रह, पृथक्करण और निपटारे पर ध्यान केंद्रित करते हुए स्वच्छता, स्थिरता और बेहतर प्रशासन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत करना है। यह अभियान मंत्रालय के कार्यालयों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) में लागू किया जाएगा।
पृष्ठभूमि
- भारत में ई-कचरा एक गंभीर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी चिंता का विषय बनता जा रहा है, क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।
- ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 (E-Waste (Management) Rules, 2022) भारत में ई-कचरे के प्रबंधन और निपटान के लिए एक नियामक ढाँचा प्रदान करते हैं, जिसमें उत्पादकों की विस्तारित जिम्मेदारी (Extended Producer Responsibility – EPR) पर जोर दिया गया है।
- सरकार विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में प्रशासनिक दक्षता और स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए समय-समय पर विशेष अभियान चलाती रही है।
- विशेष अभियान 5.0 (अक्टूबर 2025) के दौरान, इस्पात मंत्रालय ने लंबित मामलों के निपटारे, अनुपयोगी फाइलों के निपटान और स्थान के बेहतर उपयोग में महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की थी।
- ये अभियान ‘स्वच्छ भारत अभियान’ (Swachh Bharat Abhiyan) के व्यापक लक्ष्यों के अनुरूप हैं, जिसका उद्देश्य देश भर में स्वच्छता को बढ़ावा देना है।
- प्रभावी ई-कचरा प्रबंधन न केवल पर्यावरण की रक्षा करता है, बल्कि मूल्यवान धातुओं और खनिजों की पुनःप्राप्ति के माध्यम से चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) को भी बढ़ावा देता है।
विशेष अभियान 6.0 क्या है?
- विशेष अभियान 6.0 इस्पात मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया एक व्यापक अभियान है, जो 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर, 2026 तक चलेगा।
- इसका मुख्य उद्देश्य स्वच्छता, स्थिरता और बेहतर प्रशासन के प्रति मंत्रालय की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करना है।
- यह अभियान चार प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर केंद्रित है: ई-कचरा प्रबंधन, मशीनीकृत सफाई पद्धतियाँ, लंबित मामलों का समय पर निपटारा, और जागरूकता एवं सहभागिता।
- ई-कचरा प्रबंधन के तहत, ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 के अनुसार ई-कचरे के प्रभावी संग्रह और पृथक्करण को सुनिश्चित किया जाएगा।
- मशीनीकृत सफाई पद्धतियों के माध्यम से कार्यस्थलों में स्वच्छता और कार्यकुशलता बनाए रखने के लिए आधुनिक सफाई विधियों का उपयोग बढ़ाया जाएगा।
- लंबित मामलों के निपटारे में प्रधानमंत्री कार्यालय, राज्य सरकारों, संसद और VIP मामलों से संबंधित लंबित संदर्भों का निपटारा, साथ ही पुरानी फाइलों और दस्तावेजों का व्यवस्थित निपटान शामिल है।
- जागरूकता और सहभागिता बढ़ाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और जनसंपर्क गतिविधियों का उपयोग किया जाएगा ताकि स्वच्छता अभियानों में जनता की भागीदारी को बढ़ावा मिल सके।
- यह अभियान दो चरणों में चलाया जाएगा: तैयारी चरण (15-30 सितंबर, 2026) और कार्यान्वयन चरण (2-31 अक्टूबर, 2026)।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| ई-कचरा प्रबंधन पर विशेष ध्यान | ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 के अनुपालन में प्रभावी संग्रह और पृथक्करण सुनिश्चित करना, पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देना। |
| मशीनीकृत सफाई पद्धतियाँ | कार्यस्थलों में स्वच्छता और कार्यकुशलता बनाए रखने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग, बेहतर कार्य वातावरण का निर्माण। |
| लंबित मामलों का समय पर निपटारा | प्रधानमंत्री कार्यालय, राज्य सरकारों, संसद और VIP मामलों से संबंधित संदर्भों का त्वरित समाधान, प्रशासनिक दक्षता में वृद्धि। |
| जागरूकता और सहभागिता | स्वच्छता अभियानों में जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और जनसंपर्क गतिविधियों का उपयोग, नागरिक-केंद्रित शासन को मजबूत करना। |
| दो-चरणीय कार्यान्वयन | तैयारी चरण (लक्ष्य निर्धारण) और कार्यान्वयन चरण (उपायों का क्रियान्वयन) के माध्यम से व्यवस्थित और प्रभावी अभियान संचालन। |
महत्व
पर्यावरणीय महत्व
- ई-कचरे के प्रभावी प्रबंधन से पर्यावरण प्रदूषण (Environmental Pollution) में कमी आएगी, क्योंकि ई-कचरा अक्सर खतरनाक रसायनों से युक्त होता है।
- यह अभियान प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में योगदान देगा, क्योंकि ई-कचरे से मूल्यवान धातुओं की पुनर्प्राप्ति संभव है।
प्रशासनिक महत्व
- लंबित मामलों के निपटारे से सरकारी कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही (Accountability) बढ़ेगी, जिससे सुशासन (Good Governance) को बढ़ावा मिलेगा।
- कार्यस्थलों में स्वच्छता और दक्षता से कर्मचारियों की उत्पादकता (Productivity) में वृद्धि होगी और सेवा वितरण में सुधार होगा।
सामाजिक महत्व
- जागरूकता और जनभागीदारी से स्वच्छता के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण में सकारात्मक बदलाव आएगा, जिससे स्वच्छ भारत अभियान जैसे बड़े लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
- ई-कचरा प्रबंधन से संबंधित गतिविधियों से अनौपचारिक क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए बेहतर और सुरक्षित काम करने की स्थिति बन सकती है।
आर्थिक महत्व
- ई-कचरे के पुनर्चक्रण (Recycling) से नए उद्योगों को बढ़ावा मिल सकता है और रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
- यह अभियान संसाधनों के कुशल उपयोग को बढ़ावा देगा, जिससे दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता (Economic Stability) में मदद मिलेगी।
चुनौतियाँ
1. ई-कचरा संग्रह और पृथक्करण
- देश भर में ई-कचरे के संग्रह के लिए एक सुव्यवस्थित और व्यापक बुनियादी ढाँचे (Infrastructure) का अभाव है।
- उपभोक्ताओं और छोटे व्यवसायों में ई-कचरे के उचित पृथक्करण और निपटान के बारे में जागरूकता की कमी।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण और पारिस्थितिकी, प्रदूषण
2. अनौपचारिक क्षेत्र की भूमिका
- भारत में ई-कचरा प्रबंधन का एक बड़ा हिस्सा अनौपचारिक क्षेत्र द्वारा नियंत्रित होता है, जहाँ सुरक्षा मानकों का अक्सर उल्लंघन होता है।
- अनौपचारिक क्षेत्र को औपचारिक प्रणाली में एकीकृत करने और उनके काम को विनियमित करने में चुनौतियाँ।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, पर्यावरण
3. प्रौद्योगिकी और क्षमता
- ई-कचरे के पुनर्चक्रण और प्रसंस्करण के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों और कुशल जनशक्ति की उपलब्धता में कमी।
- ई-कचरे में मौजूद विभिन्न प्रकार के खतरनाक और मूल्यवान घटकों को प्रभावी ढंग से संभालने की क्षमता का अभाव।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण
4. नियमों का प्रवर्तन
- ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 जैसे कानूनों के प्रभावी प्रवर्तन (Enforcement) में चुनौतियाँ, विशेषकर छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में।
- उत्पादक उत्तरदायित्व विस्तार (Extended Producer Responsibility – EPR) के तहत उत्पादकों की जवाबदेही सुनिश्चित करने में कठिनाइयाँ।
यूपीएससी लिंक: शासन, पर्यावरण कानून
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| ई-कचरे की बढ़ती मात्रा | तेजी से बदलते प्रौद्योगिकी के कारण ई-कचरे की मात्रा में लगातार वृद्धि, मौजूदा प्रबंधन प्रणालियों पर दबाव। |
| खतरनाक पदार्थों की उपस्थिति | ई-कचरे में सीसा, पारा, कैडमियम जैसे जहरीले पदार्थ, जो मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं। |
| जागरूकता का अभाव | आम जनता और छोटे व्यवसायों में ई-कचरे के सही निपटान और उसके खतरों के बारे में जानकारी की कमी। |
| पुनर्चक्रण की कम दर | भारत में ई-कचरे के पुनर्चक्रण की दर अभी भी कम है, जिससे मूल्यवान संसाधनों का नुकसान होता है। |
| सीमा पार ई-कचरा | अवैध रूप से अन्य देशों से आने वाले ई-कचरे की समस्या, जो घरेलू प्रबंधन प्रयासों को बाधित करती है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022
आगे की राह
- ई-कचरा संग्रह के लिए एक मजबूत और सुलभ राष्ट्रीय बुनियादी ढाँचा विकसित करना, जिसमें शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्र शामिल हों।
- ई-कचरा प्रबंधन के महत्व और सही निपटान विधियों के बारे में व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाना।
- अनौपचारिक क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों को प्रशिक्षण प्रदान करना और उन्हें औपचारिक पुनर्चक्रण प्रक्रियाओं में एकीकृत करना।
- ई-कचरे से मूल्यवान धातुओं और खनिजों की पुनर्प्राप्ति के लिए अनुसंधान और विकास (R&D) में निवेश को बढ़ावा देना।
- उत्पादक उत्तरदायित्व विस्तार (EPR) तंत्र को और मजबूत करना और उत्पादकों की जवाबदेही सुनिश्चित करना।
- ई-कचरा प्रबंधन के लिए आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहन प्रदान करना।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से ई-कचरा प्रबंधन में सर्वोत्तम प्रथाओं और प्रौद्योगिकियों का आदान-प्रदान करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
ई-कचरा प्रबंधन · विशेष अभियान 6.0 · स्वच्छ भारत अभियान · ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 · चक्रीय अर्थव्यवस्था · सतत विकास · प्रदूषण नियंत्रण · डिजिटल इंडिया · अपशिष्ट प्रबंधन · सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 48क’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 51क (छ)’, ‘note’: ‘पर्यावरण की रक्षा और सुधार का कर्तव्य’}
अवधारणा प्रवाह
ई-कचरे का उत्पादन (इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग) → ई-कचरे का अनुचित निपटान (पर्यावरण और स्वास्थ्य जोखिम) → ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 (कानूनी ढाँचा) → विशेष अभियान 6.0 (नियमों का कार्यान्वयन) → ई-कचरा संग्रह, पृथक्करण और निपटान (प्रभावी प्रबंधन) → पर्यावरणीय स्थिरता और सुशासन (वांछित परिणाम)
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 केवल बड़े पैमाने के उत्पादकों पर लागू होते हैं, न कि व्यक्तिगत उपभोक्ताओं पर।
2. विशेष अभियान 6.0 का मुख्य उद्देश्य ई-कचरे के प्रभावी संग्रह, पृथक्करण और निपटारे पर केंद्रित है।
3. यह अभियान इस्पात मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया है और इसमें केवल मंत्रालय के कार्यालय शामिल हैं, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम नहीं।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल एक — कथन 1 गलत है क्योंकि ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 उत्पादकों, उपभोक्ताओं और अन्य हितधारकों सहित सभी पर लागू होते हैं। कथन 2 सही है क्योंकि विशेष अभियान 6.0 का एक प्रमुख फोकस ई-कचरा प्रबंधन है। कथन 3 गलत है क्योंकि यह अभियान इस्पात मंत्रालय और उसके सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों दोनों द्वारा चलाया जा रहा है।
Q2. भारत में ई-कचरा प्रबंधन के संबंध में, ‘विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व’ (Extended Producer Responsibility – EPR) की अवधारणा का क्या महत्व है?
- यह उपभोक्ताओं को अपने ई-कचरे को सीधे पुनर्चक्रण केंद्रों तक पहुंचाने के लिए बाध्य करता है।
- यह उत्पादकों को उनके उत्पादों के पूरे जीवनचक्र, विशेषकर उनके निपटान के लिए जिम्मेदार बनाता है।
- यह सरकार को ई-कचरा प्रबंधन के लिए विशेष कर लगाने की अनुमति देता है।
- यह केवल आयातित इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों पर लागू होता है।
उत्तर: यह उत्पादकों को उनके उत्पादों के पूरे जीवनचक्र, विशेषकर उनके निपटान के लिए जिम्मेदार बनाता है। — विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) एक नीतिगत दृष्टिकोण है जिसमें उत्पादकों को उनके उत्पादों के जीवनचक्र के अंत में उनके पर्यावरणीय प्रभाव के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जाती है, जिसमें संग्रह और पुनर्चक्रण शामिल है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में ई-कचरा प्रबंधन से जुड़ी प्रमुख चुनौतियों पर चर्चा कीजिए। इन चुनौतियों का समाधान करने में ‘विशेष अभियान 6.0’ जैसे सरकारी अभियानों और ‘ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022’ की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: ई-कचरा प्रबंधन से जुड़ी प्रमुख चुनौतियों को सूचीबद्ध करें, जैसे अनौपचारिक क्षेत्र की भूमिका, जागरूकता की कमी, अपर्याप्त संग्रह अवसंरचना, डेटा की कमी, और नियमों का कमजोर प्रवर्तन। इसके बाद, विशेष अभियान 6.0 के उद्देश्यों और ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 के प्रमुख प्रावधानों (जैसे EPR, संग्रह लक्ष्य, आदि) को समझाएं। अंत में, इन पहलों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करें कि वे चुनौतियों का कितना समाधान कर पा रही हैं, उनकी सीमाएं क्या हैं और आगे क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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