09 Sep एनएचएआई ने वृक्षारोपण मानदंडों को सख्त किया: जानें नए नियम और अनुपालन प्रक्रिया
✎ NHAI ने राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लिए अनंतिम पूर्णता प्रमाण पत्र जारी करने हेतु वृक्षारोपण के कड़े मानदंड लागू किए हैं, जिसमें 80% वृक्षारोपण कवरेज और 90% पौधों की जीवित रहने की दर अनिवार्य है, जो पर्यावरणीय स्थिरता को…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी, अवसंरचना | GS Paper I — भूगोल (पर्यावरण भूगोल)
- Prelims: भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), हरित राजमार्ग नीति, 2015, अनंतिम पूर्णता प्रमाण पत्र (PCC), पर्यावरणीय स्थिरता, सड़क अवसंरचना, वृक्षारोपण मानदंड
- Essay: पर्यावरणीय स्थिरता और आर्थिक विकास का संतुलन, भारत में हरित अवसंरचना का महत्व
त्वरित पुनरावृत्ति: NHAI ने राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लिए अनंतिम पूर्णता प्रमाण पत्र जारी करने हेतु वृक्षारोपण के कड़े मानदंड लागू किए हैं, जिसमें 80% वृक्षारोपण कवरेज और 90% पौधों की जीवित रहने की दर अनिवार्य है, जो पर्यावरणीय स्थिरता को सड़क विकास का अभिन्न अंग बनाता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लिए अनंतिम पूर्णता प्रमाण पत्र (PCC) जारी करने से पहले वृक्षारोपण के अनुपालन मानदंडों को सख्त किया है। नए दिशानिर्देशों के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे न्यूनतम 80 प्रतिशत वृक्षारोपण और रोपित पौधों की 90 प्रतिशत जीवित रहने की दर अनिवार्य की गई है। यह कदम पर्यावरणीय स्थिरता को सड़क विकास परियोजनाओं का अभिन्न अंग बनाने के NHAI के संकल्प को दर्शाता है।
पृष्ठभूमि
- NHAI ने राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास और रखरखाव में पर्यावरणीय पहलुओं को एकीकृत करने के लिए व्यापक दिशानिर्देश जारी किए हैं।
- इन दिशानिर्देशों का उद्देश्य अनुबंध आधारित वृक्षारोपण दायित्वों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करना है, जो पहले अक्सर उपेक्षित रह जाते थे।
- वृक्षारोपण और भूनिर्माण को अब राष्ट्रीय राजमार्ग विकास और समग्र परियोजना पूर्णता का एक अनिवार्य हिस्सा माना जाएगा।
- यह पहल हरित राजमार्ग नीति, 2015 (Green Highways Policy, 2015) और भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के दिशानिर्देशों जैसे IRC:SP:21-2009 के अनुरूप है।
- नए मानदंडों में इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (EPC), हाइब्रिड एन्युटी मोड (HAM) और बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT) एन्युटी परियोजनाओं के साथ-साथ BOT-टोल परियोजनाओं में भी संचालन और रखरखाव (O&M) अवधि के दौरान वृक्षारोपण संबंधी आवश्यकताओं को मजबूत किया गया है।
- दिशानिर्देशों में वृक्षारोपण घनत्व बनाए रखने के लिए समय पर पौधों की क्षति होने पर उन्हें बदलने का भी प्रावधान है, जिससे गलियारे में एकरूपता और निरंतरता बनी रहे।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और इसके नए दिशानिर्देश
- भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) भारत सरकार की एक स्वायत्त एजेंसी है, जिसकी स्थापना 1988 में संसद के एक अधिनियम द्वारा की गई थी। इसका मुख्य कार्य राष्ट्रीय राजमार्गों का विकास, रखरखाव और प्रबंधन करना है।
- नए दिशानिर्देशों के तहत, अनंतिम पूर्णता प्रमाण पत्र (PCC) या अनंतिम व्यावसायिक संचालन तिथि (PCOD) जारी करने के लिए वृक्षारोपण कार्य को तभी अनुपालन योग्य माना जाएगा जब निर्धारित उपलब्ध मार्ग (ROW) के कम से कम 80 प्रतिशत भाग पर वृक्षारोपण किया गया हो।
- निरीक्षण के समय रोपित पौधों की जीवित रहने की दर कम से कम 90 प्रतिशत होनी चाहिए। यह सुनिश्चित करेगा कि केवल वृक्षारोपण ही नहीं, बल्कि उनकी सफल वृद्धि भी परियोजना का हिस्सा हो।
- यदि निर्धारित 80 प्रतिशत सीमा से अधिक वृक्षारोपण में कोई कमी पाई जाती है, तो उसे एक विशिष्ट समय-सीमा के भीतर पूरा करना होगा, अन्यथा संबंधित अनुबंध/रियायत समझौते के तहत वित्तीय कटौती लागू की जाएगी।
- संचालन एवं रखरखाव (O&M) अवधि के दौरान भी न्यूनतम 90 प्रतिशत पौधों की जीवित रहने की दर बनाए रखना अनिवार्य होगा, जिसके आधार पर O&M/एन्युटी भुगतान जारी किए जाएंगे।
- NHAI द्वारा नियुक्त पर्यावरण और वृक्षारोपण विशेषज्ञ क्षेत्र स्तर पर अनुपालन का सत्यापन करेंगे और निर्धारित पौध उत्तरजीविता मानकों का पालन सुनिश्चित करने में तकनीकी सहायता प्रदान करेंगे।
- इन संशोधित दिशानिर्देशों का उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के कार्यान्वयन और रखरखाव ढांचे में पर्यावरणीय स्थिरता और वृक्षारोपण प्रबंधन को एकीकृत करना है, जिससे हरित अवसंरचना का विकास हो सके।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| न्यूनतम 80% वृक्षारोपण | अनंतिम पूर्णता प्रमाण पत्र (PCC)/अनंतिम व्यावसायिक संचालन तिथि (PCOD) जारी करने के लिए अनिवार्य। |
| 90% पौधों की जीवित रहने की दर | वृक्षारोपण कार्य के अनुपालन को सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक। |
| वित्तीय कटौती का प्रावधान | वृक्षारोपण में कमी होने पर ठेकेदारों पर लागू, लक्ष्य प्राप्ति तक। |
| परिचालन एवं रखरखाव (O&M) अवधि में मानदंड | O&M भुगतान जारी करने और रखरखाव अनुपालन के आकलन के लिए 90% उत्तरजीविता दर अनिवार्य। |
| क्षतिग्रस्त पौधों का प्रतिस्थापन | वृक्षारोपण घनत्व और एकरूपता बनाए रखने के लिए समान आयु व वृद्धि वाले पौधों से बदलने का आदेश। |
| पर्यावरण और वृक्षारोपण विशेषज्ञ की सहायता | क्षेत्र स्तर पर अनुपालन सत्यापन और मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए। |
महत्व
पर्यावरणीय महत्व
- राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे हरियाली बढ़ाने से वायु प्रदूषण कम होगा और कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण बढ़ेगा, जिससे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में मदद मिलेगी।
- सड़क किनारे वृक्षारोपण से जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को मजबूती मिलेगी।
सामाजिक महत्व
- सड़क किनारे हरियाली यात्रियों को सुखद अनुभव प्रदान करेगी और सड़क सुरक्षा में भी अप्रत्यक्ष रूप से सुधार कर सकती है।
- वृक्षारोपण से स्थानीय समुदायों को रोजगार के अवसर मिल सकते हैं, विशेषकर रखरखाव गतिविधियों में।
शासन और नीतिगत महत्व
- यह कदम भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की ‘ग्रीन हाइवेज पॉलिसी, 2015’ के लक्ष्यों को प्राप्त करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- कठोर अनुपालन मानदंड ठेकेदारों और रियायतग्राहियों की जवाबदेही बढ़ाएंगे, जिससे परियोजनाओं के पर्यावरणीय पहलुओं को गंभीरता से लिया जाएगा।
आर्थिक महत्व
- वृक्षारोपण के लिए वित्तीय कटौती का प्रावधान ठेकेदारों को समय पर और गुणवत्तापूर्ण कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करेगा, जिससे अनावश्यक देरी और लागत से बचा जा सकेगा।
- दीर्घकालिक रखरखाव आवश्यकताओं को पूरा करने से राजमार्गों का जीवनकाल बढ़ेगा और भविष्य में बड़े मरम्मत कार्यों की आवश्यकता कम होगी।
चुनौतियाँ
1. भूमि अधिग्रहण और उपलब्धता
- राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे वृक्षारोपण के लिए पर्याप्त और उपयुक्त भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक चुनौती हो सकती है, विशेषकर घनी आबादी वाले क्षेत्रों में।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढाँचा; भूमि सुधार
2. पौधों की उत्तरजीविता दर
- विभिन्न जलवायु परिस्थितियों, मिट्टी की गुणवत्ता और रखरखाव की कमी के कारण 90% जीवित रहने की दर बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण; पर्यावरण प्रभाव आकलन
3. निगरानी और प्रवर्तन
- बड़ी संख्या में परियोजनाओं और व्यापक भौगोलिक क्षेत्र में वृक्षारोपण मानदंडों की प्रभावी निगरानी और प्रवर्तन सुनिश्चित करना एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: शासन; पारदर्शिता और जवाबदेही
4. वित्तीय दंड का प्रभावी क्रियान्वयन
- वृक्षारोपण में कमी के लिए वित्तीय कटौती को निष्पक्ष और प्रभावी ढंग से लागू करना, साथ ही ठेकेदारों के प्रतिरोध का सामना करना पड़ सकता है।
यूपीएससी लिंक: सरकारी बजट; सार्वजनिक-निजी भागीदारी
5. विशेषज्ञता और क्षमता निर्माण
- पर्यावरण और वृक्षारोपण विशेषज्ञों की पर्याप्त संख्या और उनकी क्षमता का निर्माण, विशेषकर दूरदराज के क्षेत्रों में, एक चुनौती हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन; क्षमता निर्माण
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| भूमि की उपलब्धता | शहरी और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में वृक्षारोपण के लिए पर्याप्त जगह मिलना कठिन। |
| पौधों का रखरखाव | पानी की कमी, कीटों और बीमारियों से पौधों को बचाना और उनकी वृद्धि सुनिश्चित करना। |
| मौसम की प्रतिकूलता | अत्यधिक गर्मी, सूखा या बाढ़ जैसी स्थितियाँ पौधों की उत्तरजीविता को प्रभावित कर सकती हैं। |
| स्थानीय समुदायों का सहयोग | वृक्षारोपण स्थलों की सुरक्षा और रखरखाव में स्थानीय भागीदारी सुनिश्चित करना। |
| प्रौद्योगिकी का उपयोग | वृक्षारोपण की निगरानी और डेटा संग्रह के लिए आधुनिक तकनीकों को अपनाना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- ग्रीन हाइवेज पॉलिसी, 2015
आगे की राह
- वृक्षारोपण के लिए उपयुक्त प्रजातियों का चयन करें, जो स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुकूल हों तथा कम पानी की आवश्यकता वाली हों।
- वृक्षारोपण के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करें और स्थानीय समुदायों को इसमें शामिल करें।
- ड्रोन और उपग्रह इमेजरी जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके वृक्षारोपण की निगरानी और जीवित रहने की दर का आकलन करें।
- ठेकेदारों और NHAI कर्मियों के लिए वृक्षारोपण तकनीकों, रखरखाव और पर्यावरणीय मानकों पर नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करें।
- वृक्षारोपण के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल को बढ़ावा दें, जिसमें निजी क्षेत्र को रखरखाव और दीर्घकालिक उत्तरजीविता के लिए प्रोत्साहन दिया जाए।
- पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) को परियोजना नियोजन के शुरुआती चरणों में एकीकृत करें ताकि वृक्षारोपण आवश्यकताओं को प्रभावी ढंग से शामिल किया जा सके।
- वृक्षारोपण के लिए एक समर्पित कोष स्थापित करें, जो रखरखाव और प्रतिस्थापन गतिविधियों के लिए पर्याप्त संसाधन सुनिश्चित करे।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) · वृक्षारोपण मानदंड · अनंतिम पूर्णता प्रमाण पत्र (PCC) · पर्यावरणीय स्थिरता · हरित राजमार्ग नीति (Green Highways Policy) · परियोजना कार्यान्वयन · रखरखाव दायित्व · अवसंरचना विकास · पर्यावरण संरक्षण · हरित आवरण
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘अनुच्छेद 48A’: ‘पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन’}
- {‘अनुच्छेद 51A (g)’: ‘प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार’}
अवधारणा प्रवाह
NHAI द्वारा नए दिशानिर्देश जारी → वृक्षारोपण के लिए सख्त अनुपालन मानदंड → अनंतिम पूर्णता प्रमाण पत्र के लिए अनिवार्यता → परिचालन एवं रखरखाव अवधि में उत्तरजीविता दर → पर्यावरणीय स्थिरता और हरियाली को बढ़ावा → जलवायु परिवर्तन शमन में योगदान
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा हाल ही में जारी किए गए दिशानिर्देशों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अनंतिम पूर्णता प्रमाण पत्र (PCC) जारी करने के लिए वृक्षारोपण के लिए निर्धारित उपलब्ध मार्ग (ROW) के कम से कम 80 प्रतिशत भाग पर वृक्षारोपण अनिवार्य है।
2. निरीक्षण के समय रोपित पौधों की जीवित रहने की दर कम से कम 90 प्रतिशत होनी चाहिए।
3. ये दिशानिर्देश केवल इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (EPC) परियोजनाओं पर लागू होते हैं, हाइब्रिड एन्युटी मोड (HAM) और बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT) परियोजनाओं पर नहीं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 और 2 सही हैं। नए दिशानिर्देशों के अनुसार, PCC के लिए 80% वृक्षारोपण और 90% जीवित रहने की दर अनिवार्य है। कथन 3 गलत है क्योंकि दिशानिर्देश EPC, HAM और BOT सहित सभी प्रमुख परियोजना मोड पर लागू होते हैं।
Q2. अभिकथन (A): भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए वृक्षारोपण मानदंडों को सख्त किया है।
कारण (R): NHAI ने पहले पाया था कि डिवाइडर और एवेन्यू के किनारे वृक्षारोपण का विकास, जो एक अनुबंध आधारित दायित्व है, को अक्सर उचित महत्व नहीं दिया जाता था।
- A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या करता है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं करता है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या करता है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि NHAI ने पर्यावरणीय स्थिरता के लिए मानदंडों को सख्त किया है। कारण (R) भी सही है और यह A की सही व्याख्या करता है, क्योंकि NHAI ने पाया था कि वृक्षारोपण दायित्वों को पहले अनदेखा किया जाता था, जिसके कारण नए दिशानिर्देश जारी किए गए।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा हाल ही में जारी किए गए सख्त वृक्षारोपण मानदंडों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। ये दिशानिर्देश भारत में अवसंरचना विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने में कैसे सहायक हो सकते हैं? (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: NHAI के नए दिशानिर्देशों का संक्षिप्त परिचय दें, जिसमें वृक्षारोपण और पौधों की जीवित रहने की दर के लिए निर्धारित न्यूनतम सीमाएं शामिल हों।
मुख्य भाग:
1. दिशानिर्देशों का समालोचनात्मक परीक्षण: दिशानिर्देशों के प्रमुख प्रावधानों (80% वृक्षारोपण, 90% जीवित रहने की दर, वित्तीय कटौती, O&M अवधि में रखरखाव) का उल्लेख करें। उनके सकारात्मक प्रभावों पर चर्चा करें, जैसे पर्यावरणीय लाभ, हरित आवरण में वृद्धि, वायु गुणवत्ता में सुधार और सड़क सुरक्षा। संभावित चुनौतियों या कार्यान्वयन संबंधी मुद्दों पर भी प्रकाश डालें, जैसे भूमि अधिग्रहण की समस्या, पौधों के चयन में चुनौतियाँ, निगरानी तंत्र की प्रभावशीलता और वित्तीय बोझ।
2. अवसंरचना विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन: बताएं कि ये दिशानिर्देश कैसे अवसंरचना विकास (राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण) को पर्यावरणीय लक्ष्यों (वृक्षारोपण और हरित आवरण) के साथ एकीकृत करते हैं। ‘ग्रीन हाइवेज पॉलिसी, 2015’ और ‘IRC:SP:21-2009’ जैसे प्रासंगिक नीतियों और मानकों का उल्लेख करें। यह बताएं कि ये मानदंड दीर्घकालिक स्थिरता को बढ़ावा देकर, पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखकर और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करके कैसे संतुलन स्थापित कर सकते हैं।
निष्कर्ष: इन दिशानिर्देशों के महत्व को दोहराएं और एक स्थायी अवसंरचना विकास मॉडल की दिशा में उनके योगदान पर जोर दें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
Related guides on our sites
- Anthropology VS PSIR
- Best PSIR optional coaching
- Best PSIR optional coaching online
- Best PSIR optional teacher
- गोबरधन योजना: सीबीजी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की पहल - October 2, 2026
- NITI Aayog Hosts SDG Budgeting Workshop in Kolkata for State Support - October 2, 2026
- लद्दाख के 28 स्थानों को भारतीय सर्वेक्षण विभाग के मानचित्र पर किया गया चिन्हित - October 2, 2026

No Comments