10 Sep एनएसटीआर में 20 नए शिकार-रोधी शिविर, बाघ सुरक्षा में बड़ा कदम
✎ नागार्जुनसागर-श्रीशैलम बाघ अभयारण्य में वन्यजीव संरक्षण को मजबूत करने के लिए एंटी-पोचिंग कैंप और प्रशिक्षित कर्मियों की तैनाती की गई है, जो भारत में बाघ संरक्षण के व्यापक प्रयासों का एक हिस्सा है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण, जैव-विविधता, आपदा प्रबंधन
- Prelims: नागार्जुनसागर-श्रीशैलम बाघ अभयारण्य (NSTR), बाघ संरक्षण, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA), वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972, प्रोजेक्ट टाइगर, एंटी-पोचिंग कैंप (APC)
- Essay: भारत में वन्यजीव संरक्षण: चुनौतियाँ और समाधान, सतत विकास और जैव-विविधता का संरक्षण
त्वरित पुनरावृत्ति: नागार्जुनसागर-श्रीशैलम बाघ अभयारण्य में वन्यजीव संरक्षण को मजबूत करने के लिए एंटी-पोचिंग कैंप और प्रशिक्षित कर्मियों की तैनाती की गई है, जो भारत में बाघ संरक्षण के व्यापक प्रयासों का एक हिस्सा है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, नागार्जुनसागर-श्रीशैलम बाघ अभयारण्य (Nagarjunasagar Srisailam Tiger Reserve – NSTR) के गिद्दालूर प्रोजेक्ट टाइगर डिवीजन में बाघों की मृत्यु की कुछ घटनाओं के बाद, अभयारण्य अधिकारियों ने वन्यजीव संरक्षण उपायों को तेज कर दिया है। इसके तहत 20 एंटी-पोचिंग कैंप (Anti-Poaching Camps – APCs) स्थापित किए गए हैं और 100 से अधिक प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया है। वन सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक चार सदस्यीय उच्च-स्तरीय समिति का भी गठन किया गया है।
पृष्ठभूमि
- नागार्जुनसागर-श्रीशैलम बाघ अभयारण्य भारत का सबसे बड़ा बाघ अभयारण्य है, जो आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों में फैला हुआ है।
- यह अभयारण्य कृष्णा नदी के बेसिन में स्थित है और अपनी समृद्ध जैव-विविधता के लिए जाना जाता है, जिसमें बाघों की एक महत्वपूर्ण आबादी शामिल है।
- बाघों की मृत्यु की घटनाओं ने क्षेत्र में अवैध शिकार (poaching) और मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावनाओं पर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (Wildlife Protection Act, 1972) भारत में वन्यजीवों और उनके आवासों के संरक्षण के लिए कानूनी ढाँचा प्रदान करता है।
- प्रोजेक्ट टाइगर (Project Tiger), 1973 में शुरू किया गया, भारत में बाघों और उनके आवासों के संरक्षण के लिए एक प्रमुख पहल है।
- राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (National Tiger Conservation Authority – NTCA) भारत में बाघ संरक्षण प्रयासों की निगरानी और समन्वय के लिए वैधानिक निकाय है।
भारत में बाघ संरक्षण के प्रयास
- भारत में बाघों के संरक्षण के लिए ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ एक प्रमुख कार्यक्रम है, जिसे 1973 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य बाघों के आवासों को सुरक्षित करना और उनकी आबादी को बढ़ाना है।
- राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत एक वैधानिक निकाय है, जो वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत स्थापित किया गया है। यह प्रोजेक्ट टाइगर के कार्यान्वयन की देखरेख करता है।
- बाघ अभयारण्यों (Tiger Reserves) की स्थापना बाघों के लिए सुरक्षित और संरक्षित आवास प्रदान करने के लिए की जाती है। भारत में वर्तमान में 50 से अधिक बाघ अभयारण्य हैं।
- एंटी-पोचिंग कैंप (APCs) और प्रशिक्षित वन कर्मियों की तैनाती अवैध शिकार को रोकने और वन्यजीवों की निगरानी के लिए महत्वपूर्ण है।
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 लुप्तप्राय प्रजातियों और उनके आवासों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है, जिसमें बाघ भी शामिल हैं।
- बाघों की जनगणना हर चार साल में की जाती है, जिसमें ‘कैमरा ट्रैपिंग’ और ‘पगमार्क’ जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाता है ताकि उनकी आबादी का सटीक अनुमान लगाया जा सके।
- स्थानीय समुदायों को संरक्षण प्रयासों में शामिल करना और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना भी बाघ संरक्षण रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| 20 नए एंटी-पोचिंग कैंप (APC) की स्थापना | यह नागार्जुनसागर श्रीशैलम टाइगर रिजर्व (NSTR) में अवैध शिकार पर अंकुश लगाने और वन्यजीवों, विशेषकर बाघों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। |
| 100 से अधिक प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मियों की तैनाती | वन्यजीव संरक्षण प्रयासों को मजबूत करने और वनों में निरंतर गश्त सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक मानव संसाधन प्रदान करता है। |
| उच्च-स्तरीय समिति का गठन | यह समिति नए बेस कैंप के बुनियादी ढांचे और जनशक्ति को मजबूत करने के लिए आवश्यक सहायता सुनिश्चित करेगी, जिससे वन संरक्षण में समग्र सुधार होगा। |
| बाघों की मृत्यु के बाद त्वरित कार्रवाई | यह दर्शाता है कि अधिकारी वन्यजीवों की सुरक्षा के प्रति गंभीर हैं और अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए तुरंत कदम उठा रहे हैं। |
| NTCA मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का पालन | बाघों की मृत्यु के मामलों में वैज्ञानिक और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करता है, जिससे मृत्यु के कारणों का सटीक निर्धारण हो सके। |
महत्व
पर्यावरण और पारिस्थितिकी
- बाघों की आबादी का संरक्षण: बाघ खाद्य श्रृंखला के शीर्ष पर होते हैं और इनके संरक्षण से पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बना रहता है।
- जैव विविधता का संरक्षण: बाघ अभयारण्य कई अन्य प्रजातियों के लिए भी आवास प्रदान करते हैं, जिससे समग्र जैव विविधता बनी रहती है।
शासन और प्रशासन
- वन्यजीव अपराधों पर नियंत्रण: एंटी-पोचिंग कैंप और प्रशिक्षित कर्मियों की तैनाती से अवैध शिकार और वन्यजीव तस्करी पर प्रभावी ढंग से अंकुश लगेगा।
- जवाबदेही और निगरानी: अधिकारियों की लापरवाही पर निलंबन जैसी कार्रवाई से वन संरक्षण में जवाबदेही बढ़ती है।
सामाजिक
- स्थानीय समुदायों की भागीदारी: वन्यजीव संरक्षण में स्थानीय समुदायों को शामिल करने से संरक्षण प्रयासों को और मजबूती मिलती है।
- जागरूकता में वृद्धि: ऐसी खबरें वन्यजीव संरक्षण के महत्व के बारे में जन जागरूकता बढ़ाने में मदद करती हैं।
चुनौतियाँ
1. अवैध शिकार और वन्यजीव तस्करी
- अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर वन्यजीव उत्पादों की उच्च मांग अवैध शिकार को बढ़ावा देती है।
- वन्यजीव तस्करों के पास अक्सर आधुनिक उपकरण और संगठित नेटवर्क होते हैं, जिससे उन्हें पकड़ना मुश्किल हो जाता है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण संरक्षण; आंतरिक सुरक्षा
2. पर्याप्त जनशक्ति और बुनियादी ढांचे का अभाव
- बड़े वन क्षेत्रों की निगरानी के लिए पर्याप्त वनकर्मी और आधुनिक उपकरणों की कमी एक बड़ी चुनौती है।
- दूरदराज के क्षेत्रों में बेस कैंप और संचार सुविधाओं का अभाव प्रभावी गश्त में बाधा डालता है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण शासन; आपदा प्रबंधन
3. मानव-वन्यजीव संघर्ष
- वन क्षेत्रों के पास बढ़ती मानव आबादी और कृषि गतिविधियों के कारण वन्यजीवों और मनुष्यों के बीच संघर्ष बढ़ रहा है।
- यह संघर्ष कभी-कभी प्रतिशोधात्मक हत्याओं और अवैध शिकार को जन्म दे सकता है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण और पारिस्थितिकी; सामाजिक मुद्दे
4. वन्यजीवों के आवास का विखंडन और नुकसान
- विकास परियोजनाओं, जैसे सड़क निर्माण और खनन, से वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास खंडित हो रहे हैं और उनका नुकसान हो रहा है।
- यह वन्यजीवों की आवाजाही को बाधित करता है और उनकी आबादी को कमजोर करता है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण प्रभाव आकलन; सतत विकास
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| अवैध शिकार | बाघों की आबादी के लिए सबसे बड़ा खतरा, जिससे उनकी संख्या में कमी आ सकती है। |
| वन्यजीव तस्करी | यह एक संगठित अपराध है जो वैश्विक स्तर पर फैला हुआ है और इसे नियंत्रित करना मुश्किल है। |
| वन कर्मियों की कमी | बड़े वन क्षेत्रों की प्रभावी ढंग से निगरानी और सुरक्षा सुनिश्चित करने में बाधा। |
| बुनियादी ढांचे का अभाव | दूरदराज के क्षेत्रों में एंटी-पोचिंग कैंप और संचार सुविधाओं की कमी। |
| मानव-वन्यजीव संघर्ष | वन्यजीवों और स्थानीय समुदायों दोनों के लिए खतरा, जिससे प्रतिशोधात्मक हत्याएं हो सकती हैं। |
| आवास का विखंडन | विकास परियोजनाओं के कारण वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों का नुकसान और उनकी आवाजाही में बाधा। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- प्रोजेक्ट टाइगर (Project Tiger)
- राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (National Tiger Conservation Authority – NTCA)
आगे की राह
- वन्यजीव संरक्षण के लिए एंटी-पोचिंग कैंपों की संख्या और प्रशिक्षित कर्मियों की तैनाती में वृद्धि करना।
- वन्यजीव अपराधों से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक, जैसे ड्रोन और निगरानी कैमरे, का उपयोग बढ़ाना।
- वन्यजीव संरक्षण में स्थानीय समुदायों को शामिल करना और उन्हें वैकल्पिक आजीविका के अवसर प्रदान करना।
- वन्यजीव अपराधों के लिए कठोर दंड सुनिश्चित करना और न्यायिक प्रक्रिया को तेज करना।
- वन्यजीव अभयारण्यों के आसपास के क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए प्रभावी रणनीतियाँ विकसित करना।
- वन्यजीवों के आवासों की सुरक्षा और उनके विखंडन को रोकने के लिए सतत विकास मॉडल अपनाना।
- वन्यजीव संरक्षण के लिए अंतर-राज्यीय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
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संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 48A: पर्यावरण का संरक्षण तथा संवर्धन और वन तथा वन्यजीवों की रक्षा
- अनुच्छेद 51A(g): प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और उसका संवर्धन
अवधारणा प्रवाह
बाघों की मृत्यु की रिपोर्ट → NSTR द्वारा वन्यजीव संरक्षण उपायों को तेज करना → 20 नए एंटी-पोचिंग कैंप और 100+ सुरक्षा कर्मियों की तैनाती → अवैध शिकार पर अंकुश और वन्यजीव अपराधों पर नियंत्रण → बाघों और अन्य वन्यजीवों की आबादी का संरक्षण
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नागार्जुनसागर-श्रीशैलम बाघ अभयारण्य (NSTR) भारत का सबसे बड़ा बाघ अभयारण्य है।
2. राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत एक वैधानिक निकाय है।
3. प्रोजेक्ट टाइगर का उद्देश्य भारत में बाघों और उनके आवासों का संरक्षण करना है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 गलत है क्योंकि नागार्जुनसागर-श्रीशैलम बाघ अभयारण्य भारत के सबसे बड़े बाघ अभयारण्यों में से एक है, लेकिन यह सबसे बड़ा नहीं है। कथन 2 सही है, NTCA वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत गठित एक वैधानिक निकाय है। कथन 3 भी सही है, प्रोजेक्ट टाइगर 1973 में शुरू किया गया था जिसका मुख्य उद्देश्य बाघों और उनके पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण करना है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा अधिनियम भारत में वन्यजीव संरक्षण के लिए कानूनी ढाँचा प्रदान करता है?
- पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986
- वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972
- जैव विविधता अधिनियम, 2002
- वन संरक्षण अधिनियम, 1980
उत्तर: वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 — वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 भारत में वन्यजीवों और उनके आवासों को प्रभावी ढंग से संरक्षित करने के लिए एक व्यापक कानूनी ढाँचा प्रदान करता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में बाघ संरक्षण के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं? नागार्जुनसागर-श्रीशैलम बाघ अभयारण्य (NSTR) में हाल ही में उठाए गए कदमों के आलोक में इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय में बाघ संरक्षण के महत्व को संक्षेप में बताएं। मुख्य भाग में, बाघ संरक्षण के समक्ष प्रमुख चुनौतियों को सूचीबद्ध करें, जैसे अवैध शिकार, मानव-वन्यजीव संघर्ष, आवास का नुकसान और विखंडन, जलवायु परिवर्तन, और अपर्याप्त प्रवर्तन। इसके बाद, नागार्जुनसागर-श्रीशैलम बाघ अभयारण्य (NSTR) में अवैध शिकार-रोधी शिविरों (एंटी-पोचिंग कैंप) की स्थापना, प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मियों की तैनाती, उच्च-स्तरीय समिति का गठन और त्वरित कार्रवाई जैसे हालिया उपायों का उल्लेख करें। इन उपायों को राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के दिशानिर्देशों और प्रोजेक्ट टाइगर जैसी व्यापक सरकारी पहलों के संदर्भ में विश्लेषण करें। निष्कर्ष में, बाघ संरक्षण के लिए एक समग्र और बहु-आयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दें।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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