16 Sep जयशंकर ने भूटान के विदेश मंत्री से द्विपक्षीय संबंधों पर वार्ता की

✎ भारत और भूटान के संबंध 'पड़ोसी पहले' नीति के तहत एक अद्वितीय और बहुआयामी साझेदारी का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो विकास, ऊर्जा और सामरिक हितों पर केंद्रित है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध | GS Paper II — भारत एवं उसके पड़ोसी-संबंध
- Prelims: भारत-भूटान संबंध, पड़ोसी पहले नीति, विकास साझेदारी, ऊर्जा सहयोग, व्यापार और कनेक्टिविटी
- Essay: भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति का महत्व, छोटे पड़ोसी देशों के साथ भारत के संबंध: चुनौतियाँ और अवसर
त्वरित पुनरावृत्ति: भारत और भूटान के संबंध ‘पड़ोसी पहले’ नीति के तहत एक अद्वितीय और बहुआयामी साझेदारी का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो विकास, ऊर्जा और सामरिक हितों पर केंद्रित है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भूटान के विदेश मंत्री लियोनपो डी.एन. ढुंग्येल के साथ व्यापक द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा करने के लिए भूटान का दौरा किया। इस यात्रा के दौरान, दोनों देशों ने विकास साझेदारी, ऊर्जा, व्यापार, कनेक्टिविटी, संस्कृति और लोगों से लोगों के संबंधों सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपनी बहुआयामी सहभागिता को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया। यह यात्रा दोनों देशों के बीच नियमित उच्च-स्तरीय आदान-प्रदान की परंपरा का हिस्सा है और इसका उद्देश्य मौजूदा घनिष्ठ मित्रता और सहयोग को और मजबूत करना है।
पृष्ठभूमि
- भारत और भूटान के बीच अद्वितीय संबंध विश्वास, सद्भावना और गर्मजोशी पर आधारित हैं, जो ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भू-रणनीतिक कारकों से पोषित हैं।
- भारत भूटान का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है और उसके विकास में एक महत्वपूर्ण भागीदार रहा है, विशेष रूप से पनबिजली परियोजनाओं के विकास में।
- दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय आदान-प्रदान की एक लंबी परंपरा रही है, जिसमें राष्ट्राध्यक्षों और मंत्रियों की नियमित यात्राएँ शामिल हैं।
- भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति (Neighbourhood First Policy) भूटान के साथ संबंधों को अत्यधिक महत्व देती है, जो क्षेत्रीय स्थिरता और सहयोग के लिए महत्वपूर्ण है।
- हाल की यात्राओं में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूटान यात्रा भी शामिल है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के चुनाव आयोगों के बीच संस्थागत सहयोग को मजबूत करना है।
- भूटान के साथ भारत की सुरक्षा और सामरिक हित भी जुड़े हुए हैं, विशेष रूप से चीन के साथ साझा सीमा के संदर्भ में।
भारत-भूटान द्विपक्षीय संबंध
- भारत और भूटान के संबंध 1949 की शांति और मित्रता संधि (Treaty of Peace and Friendship) द्वारा निर्देशित हैं, जिसे 2007 में संशोधित किया गया था।
- भारत भूटान का सबसे बड़ा विकास भागीदार रहा है, जिसने पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से भूटान के सामाजिक-आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
- ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग एक प्रमुख स्तंभ है, जिसमें भारत ने भूटान में कई पनबिजली परियोजनाओं के निर्माण में सहायता की है, जैसे चूखा, ताला और मांगदेछू परियोजनाएँ।
- दोनों देशों के बीच व्यापार, कनेक्टिविटी और निवेश को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न पहलें की गई हैं, जिससे आर्थिक संबंधों को मजबूती मिली है।
- संस्कृति और लोगों से लोगों के संबंध भी मजबूत हैं, जिसमें शिक्षा, पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान शामिल हैं।
- भारत भूटान को विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी समर्थन देता रहा है, जिससे दोनों देशों के बीच विश्वास और समझ बढ़ी है।
- सुरक्षा सहयोग भी दोनों देशों के संबंधों का एक महत्वपूर्ण पहलू है, जिसमें सीमा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता शामिल है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| उच्च-स्तरीय आदान-प्रदान | दोनों देशों के बीच विश्वास और सद्भावना को सुदृढ़ करता है। |
| विकास साझेदारी | भूटान के सामाजिक-आर्थिक विकास में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका। |
| ऊर्जा सहयोग | जलविद्युत परियोजनाओं के माध्यम से भूटान की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा और भारत की ऊर्जा सुरक्षा में योगदान। |
| व्यापार और कनेक्टिविटी | क्षेत्रीय एकीकरण और आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देता है। |
| सांस्कृतिक और जन-केंद्रित संबंध | दोनों देशों के लोगों के बीच गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाता है। |
महत्व
सामरिक महत्व
- भारत और भूटान के संबंध हिमालयी क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- यह चीन के साथ सीमा साझा करने वाले भूटान के साथ भारत के विशेष संबंधों को रेखांकित करता है, जो क्षेत्रीय भू-राजनीति में महत्वपूर्ण है।
आर्थिक महत्व
- भारत भूटान का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है, और यह साझेदारी भूटान की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।
- जलविद्युत परियोजनाओं में सहयोग दोनों देशों के लिए ऊर्जा सुरक्षा और राजस्व सृजन का एक प्रमुख स्रोत है।
सांस्कृतिक और जन-केंद्रित संबंध
- दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंध गहरे हैं, जो आपसी समझ और सद्भाव को बढ़ावा देते हैं।
- शिक्षा, पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के माध्यम से लोगों से लोगों के बीच संबंध मजबूत होते हैं।
संस्थागत सहयोग
- चुनाव आयोग जैसे संस्थानों के बीच सहयोग दोनों देशों में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को मजबूत करने में मदद करता है।
- यह सुशासन और संस्थागत क्षमता निर्माण के लिए एक मॉडल प्रस्तुत करता है।
चुनौतियाँ
1. भू-राजनीतिक दबाव
- भूटान पर अन्य क्षेत्रीय शक्तियों से बढ़ते भू-राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है, जिससे भारत के लिए अपनी स्थिति बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
- सीमा विवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताएं दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित कर सकती हैं।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध, भारत के पड़ोसी
2. आर्थिक विविधीकरण
- भूटान की अर्थव्यवस्था अभी भी कुछ हद तक भारत पर निर्भर है, जिससे आर्थिक विविधीकरण की आवश्यकता है।
- जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संबंधी चुनौतियाँ भूटान की अर्थव्यवस्था और विकास साझेदारी को प्रभावित कर सकती हैं।
यूपीएससी लिंक: आर्थिक विकास, पर्यावरण
3. बुनियादी ढाँचा और कनेक्टिविटी
- पहाड़ी भूभाग के कारण भूटान में बुनियादी ढाँचे का विकास और कनेक्टिविटी एक चुनौती बनी हुई है।
- परिवहन और व्यापार मार्गों को और अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढाँचा, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| सीमा सुरक्षा | क्षेत्रीय अस्थिरता और घुसपैठ का खतरा। |
| आर्थिक निर्भरता | भूटान की अर्थव्यवस्था का भारत पर अत्यधिक निर्भर होना। |
| जलवायु परिवर्तन | जलविद्युत परियोजनाओं और कृषि पर प्रतिकूल प्रभाव। |
| बुनियादी ढाँचा विकास | पहाड़ी क्षेत्र में कनेक्टिविटी और परिवहन की चुनौतियाँ। |
आगे की राह
- विकास साझेदारी को और अधिक विविध बनाना, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास जैसे नए क्षेत्रों को शामिल किया जाए।
- सीमा पार कनेक्टिविटी और व्यापार के लिए बुनियादी ढाँचे का उन्नयन करना, जिसमें सड़क, रेल और डिजिटल संपर्क शामिल हैं।
- जलविद्युत परियोजनाओं से परे ऊर्जा सहयोग के नए अवसरों की तलाश करना, जैसे सौर ऊर्जा।
- लोगों से लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए सांस्कृतिक आदान-प्रदान और पर्यटन को बढ़ावा देना।
- क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर सहयोग को बढ़ाना, विशेष रूप से जलवायु परिवर्तन और सतत विकास जैसे मुद्दों पर।
- दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को निरंतर बनाए रखना और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
भारत-भूटान संबंध · पड़ोसी पहले नीति · विकास साझेदारी · ऊर्जा सहयोग · व्यापार और कनेक्टिविटी · सांस्कृतिक संबंध · पीपल-टू-पीपल संबंध · रणनीतिक स्वायत्तता · उच्च-स्तरीय आदान-प्रदान · क्षेत्रीय स्थिरता
अवधारणा प्रवाह
विदेश मंत्री की भूटान यात्रा → द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा → विकास, ऊर्जा, व्यापार और कनेक्टिविटी पर चर्चा → आपसी विश्वास और सद्भावना का सुदृढीकरण → भारत-भूटान संबंधों का और गहरा होना
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत और भूटान के बीच कोई औपचारिक प्रत्यर्पण संधि नहीं है।
2. भूटान भारत के ‘पड़ोसी पहले’ नीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।
3. भारत भूटान में जलविद्युत परियोजनाओं का सबसे बड़ा विकास भागीदार है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 गलत है। भारत और भूटान के बीच एक प्रत्यर्पण संधि है, जिस पर 2016 में हस्ताक्षर किए गए थे। कथन 2 और 3 सही हैं। भूटान भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, और भारत भूटान में जलविद्युत परियोजनाओं के विकास में सबसे बड़ा भागीदार रहा है।
Q2. भारत और भूटान के बीच द्विपक्षीय संबंधों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से क्षेत्र सहयोग के प्रमुख स्तंभ हैं?
1. विकास साझेदारी
2. ऊर्जा सहयोग
3. व्यापार और कनेक्टिविटी
4. सांस्कृतिक और पीपल-टू-पीपल संबंध
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- केवल 1 और 2
- केवल 2, 3 और 4
- केवल 1, 3 और 4
- 1, 2, 3 और 4
उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — भारत और भूटान के बीच सहयोग के प्रमुख स्तंभों में विकास साझेदारी, ऊर्जा सहयोग (विशेषकर जलविद्युत), व्यापार और कनेक्टिविटी, तथा सांस्कृतिक और पीपल-टू-पीपल संबंध शामिल हैं। ये सभी क्षेत्र दोनों देशों के बीच व्यापक संबंधों को दर्शाते हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत-भूटान द्विपक्षीय संबंधों के प्रमुख आयामों पर चर्चा कीजिए। साथ ही, भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति के संदर्भ में भूटान के महत्व का मूल्यांकन कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: भारत और भूटान के बीच अद्वितीय और ऐतिहासिक संबंधों का संक्षिप्त परिचय।
2. द्विपक्षीय संबंधों के प्रमुख आयाम:
क. विकास साझेदारी: भारत द्वारा भूटान को प्रदान की गई सहायता, पंचवर्षीय योजनाओं में योगदान, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में सहयोग।
ख. ऊर्जा सहयोग: जलविद्युत परियोजनाओं में सहयोग (जैसे चूखा, ताला, मांगदेछू), ऊर्जा सुरक्षा और राजस्व सृजन में भूमिका।
ग. व्यापार और कनेक्टिविटी: मुक्त व्यापार समझौता, सड़क और हवाई संपर्क, सीमा पार व्यापार।
घ. सांस्कृतिक और पीपल-टू-पीपल संबंध: बौद्ध धर्म का प्रभाव, शैक्षिक और पर्यटन आदान-प्रदान, सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन।
ङ. रणनीतिक और सुरक्षा सहयोग: सीमा सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता में भूमिका, भारत के सुरक्षा हितों के लिए भूटान का महत्व।
3. ‘पड़ोसी पहले’ नीति के संदर्भ में भूटान का महत्व:
क. क्षेत्रीय स्थिरता: हिमालयी क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने में भूटान की भूमिका।
ख. भू-रणनीतिक स्थिति: चीन के साथ सीमा साझा करने और भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के लिए महत्वपूर्ण बफर राज्य के रूप में महत्व।
ग. विश्वास और सद्भावना: भारत के सबसे विश्वसनीय पड़ोसियों में से एक, जो नीति के सफल कार्यान्वयन का उदाहरण है।
घ. बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग: सार्क, बिम्सटेक जैसे क्षेत्रीय मंचों पर समन्वय।
4. निष्कर्ष: दोनों देशों के बीच संबंधों की निरंतर प्रासंगिकता और भविष्य की संभावनाओं पर बल।
स्रोत: orissapost.com
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