एससी-एसटी उद्यमियों के लिए राष्ट्रीय हब योजना: रोजगार और आपूर्ति श्रृंखला में क्रांतिकारी बदलाव

एससी-एसटी उद्यमियों के लिए राष्ट्रीय हब योजना: रोजगार और आपूर्ति श्रृंखला में क्रांतिकारी बदलाव

Map of Punjab, Tamil Nadu, Rajasthan, Uttar Pradesh, Maharashtra, G highlighted on the map of India — National SC-ST Hub…Mind map of National SC-ST Hub Scheme concept mind map — National SC-ST Hub Scheme UPSC

मानचित्र व माइंड-मैप: National SC-ST Hub Scheme: Impact & Stakeholders

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप, कमजोर वर्गों का सशक्तिकरण  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था, समावेशी विकास, औद्योगिक नीतियां
  • Prelims: राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना (NSSH), सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME), सार्वजनिक खरीद नीति, एससीएलसीएसएस (SCLCSS), व्यावसायिक त्वरण कार्यक्रम (BAP), अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति उद्यमी
  • Essay: समावेशी विकास और सामाजिक न्याय, भारत में उद्यमिता का विकास: चुनौतियाँ और अवसर

त्वरित पुनरावृत्ति: राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना (NSSH) सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय की एक पहल है जिसका उद्देश्य एससी/एसटी उद्यमियों को प्रौद्योगिकी, क्षमता निर्माण और बाजार पहुंच के माध्यम से सशक्त बनाना है ताकि वे सार्वजनिक खरीद में अपनी भागीदारी बढ़ा सकें और समावेशी औद्योगिक विकास में योगदान कर सकें।

यह खबर चर्चा में क्यों?

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) के अंतर्गत राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना (NSSH) अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के उद्यमियों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यह योजना आधुनिक प्रौद्योगिकी के उपयोग को सक्षम करके, व्यावसायिक क्षमताओं को बढ़ाकर और सार्वजनिक खरीद में उनकी भागीदारी को सुगम बनाकर विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण और रोजगार सृजन में वृद्धि कर रही है। हाल ही में, वरुण एंटरप्राइजेज और राजू थंगावेलु जैसे उद्यमियों की सफलता की कहानियों ने इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को उजागर किया है।

पृष्ठभूमि

  • भारत सरकार ने अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था में लाने और उनकी उद्यमशीलता क्षमता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न पहलें की हैं।
  • सार्वजनिक खरीद नीति, 2012 के तहत केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) के लिए यह अनिवार्य है कि वे अपने कुल वार्षिक खरीद का 25% सूक्ष्म और लघु उद्यमों (MSEs) से करें। इसमें से 4% खरीद अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के स्वामित्व वाले MSEs से होनी चाहिए।
  • इस नीतिगत अधिदेश को पूरा करने और एससी/एसटी उद्यमियों को आवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2016 में राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना (NSSH) का शुभारंभ किया।
  • योजना का उद्देश्य एससी/एसटी उद्यमियों को प्रौद्योगिकी अपनाने, क्षमता निर्माण, बाजार पहुंच और वित्तीय सहायता प्रदान करके उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना है।
  • यह योजना विशेष क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी योजना (SCLCSS) और बिजनेस एक्सेलेरेशन प्रोग्राम (BAP) जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से उद्यमों को सहायता प्रदान करती है।
  • NSSH का क्रियान्वयन सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) द्वारा किया जाता है।

राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना (NSSH) क्या है?

  • राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना (NSSH) का शुभारंभ 2016 में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से किया गया था।
  • यह योजना सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) के अंतर्गत संचालित होती है।
  • NSSH का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक खरीद नीति, 2012 के तहत निर्धारित 4% खरीद लक्ष्य को प्राप्त करने में एससी/एसटी उद्यमियों की सहायता करना है।
  • यह योजना एससी/एसटी उद्यमियों को आधुनिक प्रौद्योगिकी अपनाने, व्यावसायिक क्षमताओं को बढ़ाने और बड़े संस्थागत बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद करती है।
  • योजना के तहत, उद्यमियों को वित्तीय सहायता, तकनीकी उन्नयन, परामर्श, प्रशिक्षण और बाजार लिंकेज जैसी सेवाएं प्रदान की जाती हैं।
  • विशेष क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी योजना (SCLCSS) NSSH का एक महत्वपूर्ण घटक है, जो पूंजीगत व्यय के लिए सब्सिडी प्रदान करती है, जिससे उद्यमी उन्नत मशीनरी और उपकरण खरीद सकें।
  • बिजनेस एक्सेलेरेशन प्रोग्राम (BAP) के माध्यम से उद्यमों को परिचालन संबंधी बाधाओं को दूर करने, अनुपालन बढ़ाने और प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार करने में सहायता मिलती है।
  • यह योजना समावेशी विकास को बढ़ावा देती है और एससी/एसटी समुदायों के बीच उद्यमिता की संस्कृति को प्रोत्साहित करती है, जिससे रोजगार सृजन और आर्थिक सशक्तिकरण होता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
उद्यमियों को सशक्त बनाना आधुनिक प्रौद्योगिकी का उपयोग, व्यावसायिक क्षमताओं में वृद्धि और सार्वजनिक खरीद में अधिक भागीदारी
प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि एससी-एसटी उद्यमियों को बड़े संस्थागत बाजारों तक पहुंचने में सहायता
रोजगार सृजन विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखलाओं के माध्यम से नए रोजगार के अवसर
समावेशी विकास भारत के औद्योगिक परिवेश में एससी-एसटी उद्यमियों की भागीदारी सुनिश्चित करना
क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी उद्यमों को परिचालन बाधाओं को दूर करने और आधुनिक तकनीकों को अपनाने में मदद
व्यावसायिक त्वरण कार्यक्रम उद्यमों को अनुपालन बढ़ाने और बाजार पहुंच में सुधार करने में सहायता

महत्व

आर्थिक महत्व

  • यह योजना एससी-एसटी उद्यमियों को आधुनिक प्रौद्योगिकी अपनाने और अपनी व्यावसायिक क्षमताओं को बढ़ाने में मदद करके उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाती है।
  • सार्वजनिक खरीद में एससी-एसटी उद्यमियों की भागीदारी से सरकारी अनुबंधों में उनका हिस्सा बढ़ता है, जिससे उनके उद्यमों का आर्थिक विकास होता है।
  • विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण और औद्योगिक परिवेश में एससी-एसटी उद्यमियों के एकीकरण से रोजगार सृजन में वृद्धि होती है।
  • यह योजना एससी-एसटी समुदायों के बीच उद्यमशीलता को बढ़ावा देकर समावेशी आर्थिक विकास को सुनिश्चित करती है।

सामाजिक महत्व

  • एससी-एसटी उद्यमियों को सशक्त बनाकर, यह योजना सामाजिक समानता और न्याय को बढ़ावा देती है।
  • यह योजना हाशिए पर पड़े समुदायों को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था में एकीकृत करने में मदद करती है, जिससे सामाजिक-आर्थिक असमानताएं कम होती हैं।
  • एससी-एसटी उद्यमियों की सफलता अन्य समुदाय के सदस्यों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनती है, जिससे उद्यमशीलता की भावना को बढ़ावा मिलता है।

शासन और नीतिगत महत्व

  • यह योजना सरकार की ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
  • यह सार्वजनिक खरीद नीति में विविधता और समावेशन को बढ़ावा देती है, जिससे सरकारी खर्च का अधिक न्यायसंगत वितरण होता है।
  • यह सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र के समग्र विकास में योगदान करती है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।

चुनौतियाँ

1. पूंजी तक पहुंच

  • एससी-एसटी उद्यमियों को अक्सर पारंपरिक वित्तीय संस्थानों से ऋण प्राप्त करने में कठिनाई होती है।
  • उच्च ब्याज दरें और कठोर संपार्श्विक आवश्यकताएं उनके लिए एक बाधा बन जाती हैं।

2. तकनीकी उन्नयन

  • कई एससी-एसटी उद्यमों के पास आधुनिक प्रौद्योगिकी और उपकरणों को अपनाने के लिए आवश्यक संसाधनों की कमी होती है।
  • तकनीकी जानकारी और कौशल की कमी भी एक बड़ी चुनौती है।

3. बाजार पहुंच

  • छोटे पैमाने के एससी-एसटी उद्यमों के लिए बड़े संस्थागत और सरकारी बाजारों तक पहुंच बनाना मुश्किल होता है।
  • प्रतिस्पर्धात्मकता और गुणवत्ता मानकों को पूरा करने में चुनौतियां आती हैं।

4. क्षमता निर्माण

  • प्रबंधन कौशल, विपणन रणनीतियों और अनुपालन आवश्यकताओं के बारे में ज्ञान की कमी।
  • उद्यमों को अपनी परिचालन दक्षता और उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण और सहायता की आवश्यकता होती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
वित्तपोषण की कमी उद्यमों के विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए पर्याप्त पूंजी का अभाव
तकनीकी अंतराल आधुनिक उत्पादन तकनीकों और उपकरणों तक सीमित पहुंच
बाजार एकीकरण बड़े खरीदारों और आपूर्ति श्रृंखलाओं में प्रवेश करने में कठिनाई
प्रशासनिक बाधाएं सरकारी खरीद प्रक्रियाओं की जटिलता और अनुपालन की चुनौतियां
कौशल विकास उद्यमियों और कर्मचारियों के लिए आवश्यक व्यावसायिक कौशल की कमी
जागरूकता का अभाव योजनाओं और उनके लाभों के बारे में एससी-एसटी उद्यमियों के बीच कम जानकारी

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • विशेष क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी योजना (Special Credit Linked Capital Subsidy Scheme – SCLCSS)
  • बिजनेस एक्सेलेरेशन प्रोग्राम (Business Acceleration Program – BAP)

आगे की राह

  • योजना के तहत वित्तीय सहायता तक पहुंच को और सुगम बनाया जाए, विशेषकर दूरदराज के क्षेत्रों में।
  • एससी-एसटी उद्यमियों के लिए विशेष कौशल विकास और तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
  • सरकारी खरीद में एससी-एसटी उद्यमियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए खरीद प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाए।
  • उद्यमियों को बाजार से जोड़ने के लिए व्यापार मेलों, प्रदर्शनियों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म का उपयोग बढ़ाया जाए।
  • योजना के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए व्यापक प्रचार अभियान चलाए जाएं।
  • उद्यमियों को परामर्श और मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए एक मजबूत मेंटरशिप (Mentorship) कार्यक्रम विकसित किया जाए।
  • योजना के प्रभाव का नियमित मूल्यांकन किया जाए और आवश्यकतानुसार नीतिगत सुधार किए जाएं।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना (NSSHS) · सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME Ministry) · अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति उद्यमी · सार्वजनिक क्रय नीति · विशेष क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी योजना (SCLCSS) · व्यावसायिक त्वरण कार्यक्रम (BAP) · समावेशी विकास · रोजगार सृजन · आपूर्ति श्रृंखला · क्षमता निर्माण · तकनीकी उन्नयन · बाजार पहुंच

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘अनुच्छेद 15(4)’: ‘सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए विशेष प्रावधान’}
  • {‘अनुच्छेद 16(4)’: ‘राज्य के अधीन सेवाओं में एससी/एसटी के लिए आरक्षण’}
  • {‘अनुच्छेद 46’: ‘एससी/एसटी के शैक्षिक और आर्थिक हितों को बढ़ावा’}
  • {‘अनुच्छेद 330’: ‘लोकसभा में एससी/एसटी के लिए सीटों का आरक्षण’}
  • {‘अनुच्छेद 332’: ‘राज्य विधानसभाओं में एससी/एसटी के लिए सीटों का आरक्षण’}

अवधारणा प्रवाह

राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना का कार्यान्वयन  →  एससी-एसटी उद्यमियों को वित्तीय और तकनीकी सहायता  →  आधुनिक प्रौद्योगिकी का अंगीकरण और क्षमता निर्माण  →  उत्पादकता, गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि  →  सार्वजनिक खरीद और बड़े बाजारों तक पहुंच  →  रोजगार सृजन और समावेशी औद्योगिक विकास

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना (NSSHS) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME Ministry) के अंतर्गत संचालित है।
2. इसका मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों को सार्वजनिक क्रय में अधिक भागीदारी हेतु सशक्त बनाना है।
3. विशेष क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी योजना (SCLCSS) इसका एक घटक नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 2
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 सही है क्योंकि NSSHS सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के अंतर्गत संचालित है। कथन 2 भी सही है क्योंकि इसका लक्ष्य SC/ST उद्यमियों को सार्वजनिक क्रय में शामिल करना है। कथन 3 गलत है क्योंकि SCLCSS NSSHS का एक महत्वपूर्ण घटक है जो उद्यमियों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है।

Q2. भारत में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?

  1. MSMEs भारतीय अर्थव्यवस्था में रोजगार सृजन का एक प्रमुख स्रोत हैं।
  2. सरकार MSMEs को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं जैसे ‘मेक इन इंडिया’ और ‘स्टार्टअप इंडिया’ का समर्थन करती है।
  3. MSMEs को केवल विनिर्माण क्षेत्र तक ही सीमित रखा गया है, सेवा क्षेत्र इसमें शामिल नहीं है।
  4. MSMEs भारतीय निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

उत्तर: MSMEs को केवल विनिर्माण क्षेत्र तक ही सीमित रखा गया है, सेवा क्षेत्र इसमें शामिल नहीं है। — MSMEs भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और ये विनिर्माण तथा सेवा दोनों क्षेत्रों को कवर करते हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि MSMEs में सेवा क्षेत्र भी शामिल है। अन्य सभी कथन सही हैं और MSMEs के महत्व को दर्शाते हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना (NSSHS) अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों को सशक्त बनाने और समावेशी विकास को बढ़ावा देने में कैसे योगदान दे रही है? इस योजना की प्रमुख विशेषताओं और इसके द्वारा प्राप्त की गई सफलताओं का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में NSSHS के उद्देश्यों और SC/ST उद्यमियों को सशक्त बनाने में इसकी भूमिका पर प्रकाश डालना चाहिए। दूसरे भाग में योजना की प्रमुख विशेषताओं जैसे SCLCSS और BAP का उल्लेख करें। अंत में, योजना की सफलताओं को उदाहरणों के साथ प्रस्तुत करें और इसके प्रभाव का विश्लेषण करें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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