कर्नाटक का लोकसभा सीटों पर स्थिरता का प्रस्ताव: ‘हमारी सफलता हमारी आवाज़ को कम नहीं करेगी’

Karnataka seeks Lok Sabha seat freeze: ‘Our success mustn’t shrink our voice’ — labelled illustration

कर्नाटक का लोकसभा सीटों पर स्थिरता का प्रस्ताव: ‘हमारी सफलता हमारी आवाज़ को कम नहीं करेगी’

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Exploded view: Karnataka seeks Lok Sabha seat freeze

✎ लोकसभा सीटों का परिसीमन जनसंख्या नियंत्रण में सफल राज्यों के प्रतिनिधित्व को प्रभावित कर सकता है, जिससे संघवाद और केंद्र-राज्य संबंधों में चुनौतियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान, संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध  |  GS Paper III — आर्थिक संवृद्धि एवं विकास
  • Prelims: लोकसभा सीटों का परिसीमन, दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद, जनसंख्या नियंत्रण, महिलाओं के लिए आरक्षण, खान और खनिज (विकास और विनियमन) विधेयक, मेकेदातू परियोजना, अनुच्छेद 82, अनुच्छेद 170
  • Essay: भारत में संघवाद की चुनौतियाँ और भविष्य, जनसंख्या नियंत्रण और विकास: एक संतुलन

त्वरित पुनरावृत्ति: लोकसभा सीटों का परिसीमन जनसंख्या नियंत्रण में सफल राज्यों के प्रतिनिधित्व को प्रभावित कर सकता है, जिससे संघवाद और केंद्र-राज्य संबंधों में चुनौतियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद (Southern Zonal Council) की बैठक में कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने लोकसभा सीटों की संख्या को वर्तमान स्तर पर स्थिर रखने और महिलाओं के लिए आरक्षण को मौजूदा सीटों के भीतर ही लागू करने का प्रस्ताव रखा है। दक्षिणी राज्यों का तर्क है कि जनसंख्या नियंत्रण में उनकी सफलता के कारण लोकसभा में उनका प्रतिनिधित्व कम नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे उनकी ‘आवाज’ और ‘आर्थिक भार’ का संतुलन बिगड़ सकता है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों का निर्धारण प्रत्येक जनगणना के बाद अनुच्छेद 82 और अनुच्छेद 170 के तहत परिसीमन (Delimitation) आयोग द्वारा किया जाता है।
  • वर्ष 1976 में 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों को वर्ष 2001 तक के लिए वर्ष 1971 की जनगणना के आधार पर स्थिर कर दिया गया था। इसका उद्देश्य उन राज्यों को दंडित होने से बचाना था जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण के उपायों को सफलतापूर्वक लागू किया था।
  • वर्ष 2001 में 84वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा इस स्थगन को वर्ष 2026 तक बढ़ा दिया गया, जिसका अर्थ है कि वर्ष 2026 के बाद अगला परिसीमन होने की संभावना है।
  • दक्षिणी राज्यों का मानना है कि यदि अगला परिसीमन वर्ष 2026 के बाद नवीनतम जनसंख्या डेटा (जैसे 2021 की जनगणना) के आधार पर होता है, तो उनकी लोकसभा सीटें कम हो सकती हैं क्योंकि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है।
  • यह मुद्दा संघवाद (Federalism) के मूल सिद्धांतों को छूता है, जहाँ राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व और संसाधनों का उचित वितरण सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।

परिसीमन क्या है?

  • परिसीमन का अर्थ है किसी देश या एक विधायी निकाय वाले प्रांत में क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का निर्धारण करना।
  • भारत में, परिसीमन आयोग अधिनियम के तहत एक परिसीमन आयोग का गठन किया जाता है। यह आयोग एक उच्च-शक्ति वाला निकाय है जिसके आदेशों को कानून का बल प्राप्त होता है और उन्हें किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती है।
  • परिसीमन का मुख्य उद्देश्य जनसंख्या के समान खंडों को समान प्रतिनिधित्व प्रदान करना और भौगोलिक क्षेत्रों का उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है।
  • संविधान के अनुच्छेद 82 के तहत संसद प्रत्येक जनगणना के बाद एक परिसीमन अधिनियम बनाती है, जबकि अनुच्छेद 170 राज्यों को प्रत्येक जनगणना के बाद परिसीमन के लिए प्रदान करता है।
  • परिसीमन आयोग में सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश, मुख्य चुनाव आयुक्त और संबंधित राज्य चुनाव आयुक्त शामिल होते हैं।
  • भारत में अब तक चार बार परिसीमन आयोगों का गठन किया गया है: 1952, 1963, 1973 और 2002 में।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
लोकसभा सीटों का स्थगन जनसंख्या नियंत्रण में सफल रहे दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व को बनाए रखने की मांग।
महिला आरक्षण मौजूदा सीटों की संख्या के भीतर महिला आरक्षण प्रदान करने का प्रस्ताव।
खनिज और खान (विकास और विनियमन) विधेयक, 2026 राज्यों के प्रमुख खनिजों पर कर लगाने के अधिकार को प्रभावित करने वाला विधेयक।
मेकेदातू परियोजना कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच जल-साझाकरण से संबंधित अंतर-राज्यीय मुद्दा।
क्षेत्रीय परिषदें केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच आपसी हित के मामलों पर चर्चा और समाधान के लिए सलाहकार मंच।

महत्व

संघवाद और राज्य प्रतिनिधित्व

  • यह मुद्दा भारत के संघीय ढांचे में राज्यों के प्रतिनिधित्व और उनकी ‘आवाज’ के महत्व को उजागर करता है।
  • जनसंख्या नियंत्रण में सफल राज्यों को उनके प्रयासों के लिए ‘दंडित’ न करने की आवश्यकता पर बल देता है, बल्कि उन्हें उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की मांग करता है।

आर्थिक और राजनीतिक संतुलन

  • दक्षिणी राज्यों की आर्थिक शक्ति और उनके राजनीतिक प्रतिनिधित्व के बीच संतुलन बनाए रखने की मांग करता है।
  • यह दर्शाता है कि आर्थिक योगदान को राजनीतिक प्रभाव के साथ जोड़ा जाना चाहिए।

संसाधन प्रबंधन और अंतर-राज्यीय संबंध

  • खनिज संसाधनों पर कराधान के अधिकार को लेकर केंद्र और राज्यों के बीच शक्ति संतुलन का प्रश्न उठाता है।
  • मेकेदातू परियोजना जैसे अंतर-राज्यीय जल विवादों के समाधान में क्षेत्रीय परिषदों की भूमिका को दर्शाता है।

चुनौतियाँ

1. जनसंख्या आधारित परिसीमन

  • जनसंख्या वृद्धि के आधार पर लोकसभा सीटों का पुनर्वितरण उन राज्यों के लिए चिंता का विषय है जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में सफलता प्राप्त की है।
  • यह संघीय संतुलन को प्रभावित कर सकता है और दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक प्रभाव को कम कर सकता है।

2. महिला आरक्षण का कार्यान्वयन

  • मौजूदा सीटों के भीतर महिला आरक्षण लागू करने से सीटों की कुल संख्या में वृद्धि के बिना महिलाओं को प्रतिनिधित्व मिलेगा।
  • हालांकि, यह सीटों की संख्या को स्थिर रखने की मांग के साथ जुड़ा हुआ है, जो भविष्य के परिसीमन को प्रभावित कर सकता है।

3. खनिज संसाधनों पर राज्यों के अधिकार

  • खनिज और खान (विकास और विनियमन) विधेयक, 2026, राज्यों के प्रमुख खनिजों पर कर लगाने के अधिकार को सीमित करता है।
  • यह राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता और उनके राजस्व स्रोतों को प्रभावित करता है, जिससे केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों में तनाव आ सकता है।

4. अंतर-राज्यीय जल विवाद

  • मेकेदातू परियोजना जैसे जल-साझाकरण विवाद राज्यों के बीच सहयोग और समन्वय की कमी को दर्शाते हैं।
  • इन विवादों का समाधान संघीय ढांचे के भीतर शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
लोकसभा सीटों का स्थगन जनसंख्या नियंत्रण में सफल राज्यों का प्रतिनिधित्व कम होने का डर।
महिला आरक्षण मौजूदा सीटों के भीतर आरक्षण लागू करने की व्यवहार्यता और प्रभाव।
खनिज और खान विधेयक राज्यों के खनिज संसाधनों पर कर लगाने के अधिकार का हनन और वित्तीय स्वायत्तता पर प्रभाव।
मेकेदातू परियोजना अंतर-राज्यीय जल विवादों का समाधान और संबंधित राज्यों के हित।

आगे की राह

  • जनसंख्या नियंत्रण में सफल राज्यों के हितों की रक्षा के लिए लोकसभा सीटों के परिसीमन के वैकल्पिक तरीकों पर विचार किया जाना चाहिए।
  • महिला आरक्षण विधेयक को लागू करते समय, सीटों की कुल संख्या को स्थिर रखने की मांग पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए ताकि संघीय संतुलन बना रहे।
  • खनिज संसाधनों पर कराधान के संबंध में केंद्र और राज्यों के बीच व्यापक परामर्श और सहमति स्थापित की जानी चाहिए ताकि राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता बनी रहे।
  • अंतर-राज्यीय जल विवादों के समाधान के लिए क्षेत्रीय परिषदों और अन्य मंचों का प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाना चाहिए, जिसमें सभी हितधारकों के हितों का ध्यान रखा जाए।
  • संघीय ढांचे के भीतर राज्यों के बीच विश्वास और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए नियमित संवाद और परामर्श तंत्र को मजबूत किया जाना चाहिए।
  • राज्यों के आर्थिक योगदान और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के बीच संतुलन सुनिश्चित करने के लिए एक राष्ट्रीय सहमति विकसित की जानी चाहिए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

लोकसभा सीट फ्रीज · जनसंख्या नियंत्रण · संसदीय प्रतिनिधित्व · दक्षिणी राज्य · परिसीमन · संघवाद · महिला आरक्षण · क्षेत्रीय परिषदें · खान और खनिज (विकास और विनियमन) विधेयक · राज्यों के अधिकार

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘अनुच्छेद 81’: ‘लोकसभा की संरचना और सीटों का आवंटन।’}
  • {‘अनुच्छेद 82’: ‘प्रत्येक जनगणना के बाद सीटों का पुनर्समायोजन (परिसीमन)।’}
  • {‘अनुच्छेद 246’: ‘संसद और राज्यों के विधानमंडलों द्वारा बनाई गई विधियों की विषय-वस्तु (सातवीं अनुसूची)।’}
  • {‘अनुच्छेद 262’: ‘अंतर-राज्यीय नदियों या नदी घाटियों से संबंधित विवादों का न्यायनिर्णयन।’}

अवधारणा प्रवाह

दक्षिणी राज्यों द्वारा जनसंख्या नियंत्रण में सफलता प्राप्त करना।  →  जनसंख्या आधारित परिसीमन से लोकसभा में प्रतिनिधित्व घटने की आशंका।  →  राज्यों द्वारा लोकसभा सीटों को स्थिर करने की मांग।  →  मौजूदा सीटों के भीतर महिला आरक्षण लागू करने का प्रस्ताव।  →  संघीय संतुलन और राज्यों के प्रतिनिधित्व पर बहस।  →  खनिज संसाधनों और जल विवादों पर केंद्र-राज्य संबंधों में तनाव।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत के संविधान के अनुच्छेद 82 के तहत, संसद प्रत्येक जनगणना के बाद परिसीमन अधिनियम बनाती है.
2. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में सीटों के आवंटन को वर्ष 2001 की जनगणना तक के लिए फ्रीज कर दिया था.
3. वर्तमान में, लोकसभा सीटों का आवंटन 2001 की जनगणना के आधार पर किया जाता है.
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल एक — कथन 1 सही है। अनुच्छेद 82 संसद को प्रत्येक जनगणना के बाद परिसीमन अधिनियम बनाने का अधिकार देता है। कथन 2 गलत है। 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 ने सीटों के आवंटन को वर्ष 2001 की जनगणना तक के लिए फ्रीज कर दिया था, लेकिन बाद में 84वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2001 ने इसे वर्ष 2026 तक के लिए फ्रीज कर दिया। कथन 3 गलत है। वर्तमान में, लोकसभा सीटों का आवंटन 1971 की जनगणना के आधार पर किया जाता है, जिसे 2026 तक फ्रीज किया गया है।

Q2. क्षेत्रीय परिषदों (Zonal Councils) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. क्षेत्रीय परिषदें संवैधानिक निकाय हैं, जिनका उल्लेख भारतीय संविधान में किया गया है।
2. ये परिषदें केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग और समन्वय को बढ़ावा देने के लिए स्थापित की गई हैं।
3. केंद्रीय गृह मंत्री इन परिषदों के अध्यक्ष होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है। क्षेत्रीय परिषदें सांविधिक निकाय (Statutory bodies) हैं, जिनका गठन राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के तहत किया गया है, न कि संवैधानिक निकाय। कथन 2 सही है। इनका मुख्य उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच तथा राज्यों के आपस में सहयोग और समन्वय को बढ़ावा देना है। कथन 3 सही है। केंद्रीय गृह मंत्री इन परिषदों के अध्यक्ष होते हैं, और संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्री उपाध्यक्ष के रूप में कार्य करते हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ लोकसभा सीटों के परिसीमन को फ्रीज करने की मांग के पीछे के तर्कों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। क्या जनसंख्या नियंत्रण में सफल रहे राज्यों को संसदीय प्रतिनिधित्व में नुकसान उठाना चाहिए? चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: लोकसभा सीटों के परिसीमन और वर्तमान में 2026 तक फ्रीज की स्थिति का संक्षिप्त उल्लेख। दक्षिणी राज्यों द्वारा लोकसभा सीटों को फ्रीज करने की मांग का संदर्भ।
2. मांग के पीछे के तर्क: जनसंख्या नियंत्रण में दक्षिणी राज्यों की सफलता, इस सफलता को दंडित न करने की आवश्यकता, आर्थिक योगदान के अनुरूप राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग, संघवाद के सिद्धांतों पर संभावित प्रभाव।
3. परिसीमन के संवैधानिक प्रावधान: अनुच्छेद 82, 84वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2001।
4. जनसंख्या नियंत्रण और प्रतिनिधित्व का द्वंद्व: जनसंख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व का सिद्धांत बनाम जनसंख्या नियंत्रण के प्रयासों को प्रोत्साहन। ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ के सिद्धांत पर प्रभाव।
5. संभावित समाधान/आगे की राह: सीटों की संख्या फ्रीज रखते हुए महिला आरक्षण लागू करना, प्रतिनिधित्व के अन्य मापदंडों पर विचार (जैसे आर्थिक योगदान), राज्यों के बीच विश्वास बहाली के उपाय, केंद्र-राज्य संबंधों पर द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग की सिफारिशें।
6. निष्कर्ष: संघवाद के संतुलन और राष्ट्रीय हित में एक न्यायसंगत और स्वीकार्य समाधान की आवश्यकता पर बल।

स्रोत: The Indian Express


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