15 Sep कर्नाटक में पश्चिमी घाट पर ईएसए अधिसूचना: शिवकुमार करेंगे जनसंवाद

✎ कस्तूरीरंगन समिति रिपोर्ट पश्चिमी घाट के पारिस्थितिकीय संवेदनशील क्षेत्रों (ESA) के निर्धारण और संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जो पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय आजीविका के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास करती है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भूगोल (भारत एवं विश्व का भौतिक, सामाजिक, आर्थिक भूगोल) | GS Paper III — पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी (संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन)
- Prelims: पश्चिमी घाट, पारिस्थितिकीय संवेदनशील क्षेत्र (ESA), कस्तूरीरंगन समिति रिपोर्ट, माधव गाडगिल समिति, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986, जैव विविधता हॉटस्पॉट
- Essay: पर्यावरण संरक्षण बनाम विकास: एक सतत बहस, भारत में सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में चुनौतियाँ और समाधान
त्वरित पुनरावृत्ति: कस्तूरीरंगन समिति रिपोर्ट पश्चिमी घाट के पारिस्थितिकीय संवेदनशील क्षेत्रों (ESA) के निर्धारण और संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जो पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय आजीविका के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास करती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने पश्चिमी घाट के पारिस्थितिकीय संवेदनशील क्षेत्रों (Ecologically Sensitive Areas – ESA) पर कस्तूरीरंगन समिति की रिपोर्ट के सातवें मसौदा अधिसूचना पर जनता की राय जानने के लिए उडुपी, शिवमोग्गा और चिक्कमगलूरु जिलों में बैठकें कीं। केंद्र सरकार द्वारा जारी इस मसौदा अधिसूचना का मलनाड और तटीय क्षेत्रों के निवासियों द्वारा विरोध किया जा रहा है, क्योंकि उन्हें आशंका है कि इसके लागू होने से उनकी आजीविका बुरी तरह प्रभावित होगी। राज्य सरकार ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए एक विशेष विधानसभा सत्र भी बुलाया है।
पृष्ठभूमि
- पश्चिमी घाट भारत के पश्चिमी तट के समानांतर चलने वाली एक पर्वत श्रृंखला है, जो गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु राज्यों से होकर गुजरती है। इसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल और दुनिया के आठ ‘हॉटस्पॉट’ में से एक माना जाता है, जो जैविक विविधता के लिए महत्वपूर्ण है।
- पर्यावरण और वन मंत्रालय ने पश्चिमी घाट के संरक्षण के लिए विभिन्न समितियों का गठन किया है, जिनमें प्रमुख रूप से माधव गाडगिल समिति (2011) और कस्तूरीरंगन समिति (2013) शामिल हैं।
- माधव गाडगिल समिति ने पश्चिमी घाट के पूरे क्षेत्र को पारिस्थितिकीय संवेदनशील क्षेत्र घोषित करने की सिफारिश की थी, जिसे स्थानीय विरोध के कारण स्वीकार नहीं किया गया।
- कस्तूरीरंगन समिति का गठन गाडगिल रिपोर्ट की समीक्षा और एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करने के लिए किया गया था। इस समिति ने पश्चिमी घाट के लगभग 37% क्षेत्र को पारिस्थितिकीय संवेदनशील क्षेत्र (ESA) के रूप में नामित करने का सुझाव दिया।
- ESA के रूप में अधिसूचित क्षेत्रों में खनन, उत्खनन, थर्मल पावर प्लांट और अत्यधिक प्रदूषणकारी उद्योगों जैसी गतिविधियों पर प्रतिबंध या सख्त नियम लागू होते हैं।
- हाल ही में, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने कस्तूरीरंगन समिति की रिपोर्ट के आधार पर पश्चिमी घाट के कुछ हिस्सों को ESA घोषित करने के लिए सातवीं मसौदा अधिसूचना जारी की है, जिससे स्थानीय समुदायों में चिंताएँ बढ़ गई हैं।
कस्तूरीरंगन समिति रिपोर्ट क्या है?
- कस्तूरीरंगन समिति, जिसे ‘उच्च स्तरीय कार्य समूह’ (High-Level Working Group – HLWG) के नाम से भी जाना जाता है, का गठन डॉ. के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में किया गया था।
- इसका मुख्य उद्देश्य पश्चिमी घाट पारिस्थितिकी विशेषज्ञ पैनल (Western Ghats Ecology Expert Panel – WGEEP) की रिपोर्ट (गाडगिल रिपोर्ट) की समीक्षा करना और पश्चिमी घाट के संरक्षण के लिए एक व्यावहारिक और स्वीकार्य ढाँचा तैयार करना था।
- समिति ने पश्चिमी घाट के कुल भौगोलिक क्षेत्र के लगभग 37% (लगभग 60,000 वर्ग किलोमीटर) को पारिस्थितिकीय संवेदनशील क्षेत्र (ESA) के रूप में नामित करने की सिफारिश की।
- इसने ESA के भीतर खनन, उत्खनन, रेत खनन, थर्मल पावर प्लांट और ‘लाल’ श्रेणी के उद्योगों (उच्च प्रदूषणकारी) जैसी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने का सुझाव दिया।
- समिति ने मौजूदा कृषि पद्धतियों और बागवानी को जारी रखने की अनुमति दी, लेकिन नए बड़े पैमाने के विकास परियोजनाओं पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की।
- रिपोर्ट में स्थानीय समुदायों की भागीदारी के साथ संरक्षण प्रयासों पर जोर दिया गया और ग्राम सभाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका देने का सुझाव दिया गया।
- इस रिपोर्ट का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और क्षेत्र के निवासियों की आजीविका एवं विकास की आवश्यकताओं के बीच संतुलन स्थापित करना था।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| कस्तूरीरंगन समिति रिपोर्ट | पश्चिमी घाट के पारिस्थितिकीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों (ESA) के निर्धारण से संबंधित। |
| पश्चिमी घाट | जैव विविधता हॉटस्पॉट, भारत के पश्चिमी तट के समानांतर स्थित पर्वत श्रृंखला। |
| पारिस्थितिकीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ESA) | पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा अधिसूचित क्षेत्र, जहाँ विकासात्मक गतिविधियों पर प्रतिबंध होता है। |
| सातवीं मसौदा अधिसूचना | ESA के रूप में 20,668 वर्ग किमी क्षेत्र को अधिसूचित करने का प्रस्ताव, जिसमें 10 जिले और 1,576 गाँव शामिल हैं। |
| जनता की राय | राज्य सरकार द्वारा स्थानीय निवासियों की चिंताओं और सुझावों को जानने का प्रयास। |
महत्व
पर्यावरण और पारिस्थितिकी
- पश्चिमी घाट की अद्वितीय जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में सहायक।
- मानव गतिविधियों के कारण होने वाले पर्यावरणीय क्षरण को रोकने के लिए महत्वपूर्ण।
सामाजिक-आर्थिक
- स्थानीय समुदायों की आजीविका और उनके पारंपरिक जीवनशैली पर संभावित प्रभाव।
- विकास और संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने की चुनौती।
शासन और नीति निर्माण
- केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय और सहयोग की आवश्यकता।
- जनभागीदारी और स्थानीय हितधारकों के परामर्श का महत्व।
राज्यों पर प्रभाव
- कर्नाटक जैसे पश्चिमी घाट से सटे राज्यों के लिए भूमि उपयोग, कृषि और विकास परियोजनाओं पर प्रत्यक्ष प्रभाव।
- राज्य सरकारों द्वारा स्थानीय जनता की चिंताओं को केंद्र सरकार तक पहुँचाने की भूमिका।
चुनौतियाँ
1. विकास बनाम संरक्षण
- पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों की विकासात्मक आकांक्षाओं के बीच संतुलन स्थापित करना।
- ESA अधिसूचना से कृषि गतिविधियों, आवास और बुनियादी ढांचे के विकास पर संभावित प्रतिबंध।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास
2. स्थानीय आजीविका पर प्रभाव
- ग्रामीण और मलनाड क्षेत्रों के निवासियों की आजीविका पर नकारात्मक प्रभाव का डर।
- पारंपरिक कृषि पद्धतियों और वन-आधारित आजीविका पर प्रतिबंधों की चिंता।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, ग्रामीण विकास
3. केंद्र-राज्य संबंध
- पर्यावरण नीति निर्माण में केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय की आवश्यकता।
- राज्य सरकारों द्वारा स्थानीय जनता की चिंताओं को केंद्र सरकार तक प्रभावी ढंग से पहुँचाना।
यूपीएससी लिंक: संघवाद, केंद्र-राज्य विधायी संबंध
4. जनभागीदारी और परामर्श
- स्थानीय समुदायों की आपत्तियों और सुझावों को नीति निर्माण प्रक्रिया में शामिल करना।
- अधिसूचना के प्रभावों के बारे में जागरूकता और गलत सूचना को दूर करना।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| ESA अधिसूचना | 20,668 वर्ग किमी क्षेत्र में विकासात्मक गतिविधियों पर प्रतिबंध। |
| स्थानीय निवासियों की आजीविका | कृषि, आवास और अन्य आर्थिक गतिविधियों पर प्रतिबंधों से जीवनयापन प्रभावित होने का डर। |
| मानव बस्ती और खेती योग्य भूमि | प्रस्तावित ESA में मानव बस्तियों और खेती योग्य भूमि का शामिल होना। |
| राज्य सरकार की भूमिका | स्थानीय जनता की चिंताओं को केंद्र सरकार तक पहुँचाने और उनके हितों की रक्षा करने की जिम्मेदारी। |
| विरोध प्रदर्शन | स्थानीय समुदायों द्वारा ESA अधिसूचना के विरोध में लगातार प्रदर्शन। |
आगे की राह
- केंद्र और राज्य सरकारों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित किया जाए ताकि स्थानीय चिंताओं का समाधान हो सके।
- स्थानीय समुदायों, ग्राम पंचायतों और अन्य हितधारकों के साथ व्यापक और समावेशी परामर्श प्रक्रिया अपनाई जाए।
- ESA अधिसूचना के संभावित सामाजिक-आर्थिक प्रभावों का विस्तृत आकलन किया जाए और शमन रणनीतियाँ विकसित की जाएँ।
- पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय आजीविका को सुरक्षित रखने वाले वैकल्पिक मॉडल और सतत विकास के तरीकों पर विचार किया जाए।
- अधिसूचना के प्रावधानों के बारे में स्थानीय जनता के बीच जागरूकता बढ़ाई जाए और गलत सूचनाओं को दूर किया जाए।
- पश्चिमी घाट के पारिस्थितिकीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों के सीमांकन में वैज्ञानिक डेटा और स्थानीय ज्ञान दोनों का उपयोग किया जाए।
- राज्यों को ESA के कार्यान्वयन में लचीलापन प्रदान किया जाए, ताकि वे अपनी विशिष्ट परिस्थितियों के अनुसार अनुकूलन कर सकें।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
कस्तूरीरंगन समिति रिपोर्ट · पश्चिमी घाट · पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ESA) · पर्यावरण संरक्षण · स्थानीय आजीविका · संघवाद · राज्य-केंद्र संबंध · पर्यावरण प्रभाव आकलन · सतत विकास · जैव विविधता हॉटस्पॉट
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 252’, ‘note’: ‘राज्यों की सहमति से संसद द्वारा कानून बनाने की शक्ति’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 263’, ‘note’: ‘अंतर-राज्यीय परिषदों से संबंधित प्रावधान’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 48क’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 51क (छ)’, ‘note’: ‘पर्यावरण की रक्षा और उसमें सुधार करना’}
अवधारणा प्रवाह
कस्तूरीरंगन समिति रिपोर्ट पश्चिमी घाट के लिए ESA की सिफारिश करती है। → पर्यावरण मंत्रालय ESA की सातवीं मसौदा अधिसूचना जारी करता है। → अधिसूचना से स्थानीय निवासियों की आजीविका प्रभावित होने की आशंका। → कर्नाटक के मुख्यमंत्री जनमत जानने के लिए बैठकें आयोजित करते हैं। → राज्य सरकार स्थानीय चिंताओं को केंद्र तक पहुँचाने का प्रयास करती है। → विकास और संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने की चुनौती उत्पन्न होती है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. कस्तूरीरंगन समिति रिपोर्ट के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह रिपोर्ट पश्चिमी घाट के संरक्षण से संबंधित है।
2. रिपोर्ट में पश्चिमी घाट के कुछ क्षेत्रों को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ESA) घोषित करने का प्रस्ताव है।
3. यह रिपोर्ट केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा गठित की गई थी।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि कस्तूरीरंगन समिति रिपोर्ट विशेष रूप से पश्चिमी घाट के संरक्षण और प्रबंधन पर केंद्रित है। कथन 2 भी सही है क्योंकि रिपोर्ट का मुख्य प्रस्ताव पश्चिमी घाट के लगभग एक-तिहाई क्षेत्र को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ESA) के रूप में नामित करना है। कथन 3 गलत है क्योंकि यह रिपोर्ट माधव गाडगिल समिति की रिपोर्ट की समीक्षा के लिए योजना आयोग (अब नीति आयोग) द्वारा गठित एक उच्च-स्तरीय कार्य समूह (High-Level Working Group) थी, जिसे बाद में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने अपनाया।
Q2. निम्नलिखित में से कौन सा क्षेत्र कस्तूरीरंगन समिति रिपोर्ट के तहत पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ESA) के रूप में प्रस्तावित पश्चिमी घाट का हिस्सा नहीं है?
- उडुपी
- शिवमोग्गा
- चिकमंगलूरु
- चेन्नई
उत्तर: चेन्नई — कस्तूरीरंगन समिति रिपोर्ट पश्चिमी घाट के राज्यों जैसे कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, गोवा, गुजरात और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों से संबंधित है। उडुपी, शिवमोग्गा और चिकमंगलूरु कर्नाटक के पश्चिमी घाट क्षेत्र में स्थित हैं और रिपोर्ट के दायरे में आते हैं। चेन्नई तमिलनाडु की राजधानी है और पूर्वी तट पर स्थित है, इसलिए यह पश्चिमी घाट का हिस्सा नहीं है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ कस्तूरीरंगन समिति की रिपोर्ट पश्चिमी घाट के संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है, लेकिन इसे स्थानीय समुदायों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। इस रिपोर्ट के प्रमुख प्रस्तावों का विश्लेषण करें और पर्यावरण संरक्षण तथा स्थानीय आजीविका के बीच संतुलन स्थापित करने में आने वाली चुनौतियों पर चर्चा करें। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** कस्तूरीरंगन समिति रिपोर्ट का संक्षिप्त परिचय दें, जिसमें इसके गठन का उद्देश्य (माधव गाडगिल रिपोर्ट की समीक्षा) और पश्चिमी घाट के महत्व का उल्लेख हो।
2. **प्रमुख प्रस्ताव:** रिपोर्ट के मुख्य प्रस्तावों का विस्तार से विश्लेषण करें, जैसे:
* पश्चिमी घाट के लगभग 37% क्षेत्र को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ESA) घोषित करना।
* ESA में खनन, ताप विद्युत संयंत्रों और अत्यधिक प्रदूषणकारी उद्योगों पर प्रतिबंध।
* मौजूदा खनन गतिविधियों को चरणबद्ध तरीके से बंद करना।
* नए ‘रेड’ श्रेणी के उद्योगों की स्थापना पर रोक।
* जलविद्युत परियोजनाओं पर प्रतिबंधों का सुझाव।
* स्थानीय समुदायों की भागीदारी और ग्राम सभाओं की भूमिका पर जोर।
3. **चुनौतियाँ (पर्यावरण संरक्षण बनाम स्थानीय आजीविका):** इन प्रस्तावों के कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों पर चर्चा करें:
* **स्थानीय समुदायों का विरोध:** आजीविका पर पड़ने वाले संभावित नकारात्मक प्रभावों (कृषि, बागवानी, वानिकी उत्पादों पर निर्भरता) के कारण विरोध।
* **विकास बनाम संरक्षण:** आर्थिक विकास की आवश्यकता और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के बीच का द्वंद्व।
* **राज्य-केंद्र संबंध:** राज्यों द्वारा रिपोर्ट के कुछ प्रावधानों पर आपत्ति और संघवाद के मुद्दे।
* **कार्यान्वयन की व्यवहार्यता:** प्रतिबंधों को लागू करने और निगरानी करने में व्यावहारिक कठिनाइयाँ।
* **पर्यावरण न्याय:** विकास के लाभों से वंचित होने और संरक्षण का बोझ उठाने वाले स्थानीय लोगों के मुद्दे।
4. **संतुलन स्थापित करने के उपाय:** चुनौतियों का समाधान करने और संतुलन बनाने के लिए संभावित उपायों का सुझाव दें:
* **भागीदारीपूर्ण दृष्टिकोण:** स्थानीय समुदायों, ग्राम सभाओं और हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श।
* **वैकल्पिक आजीविका के अवसर:** प्रभावित लोगों के लिए सतत और पर्यावरण-अनुकूल आजीविका के विकल्प प्रदान करना।
* **क्षतिपूर्ति और पुनर्वास:** उचित मुआवजा और पुनर्वास पैकेज।
* **वैज्ञानिक अध्ययन और डेटा:** क्षेत्र-विशिष्ट अध्ययनों के आधार पर लचीले और अनुकूलित समाधान।
* **जागरूकता और क्षमता निर्माण:** संरक्षण के महत्व और सतत प्रथाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाना।
5. **निष्कर्ष:** एक संतुलित निष्कर्ष प्रस्तुत करें जो पश्चिमी घाट के पारिस्थितिक महत्व को रेखांकित करे और सतत विकास के लिए समावेशी तथा भागीदारीपूर्ण दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दे।
स्रोत: The Hindu
Karnataka PCS (KPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार द्वारा ‘कस्तूरीरंगन रिपोर्ट’ पर चर्चा हेतु आयोजित बैठकों का आयोजन किन तीन जिलों में किया जा रहा है?
- उडुपी, शिवमोग्गा, चिक्कमगलूरु
- बेंगलुरु, मैसूरु, हुब्बली
- मंड्या, तुमकुरु, कोडगु
- बेलगावी, गुलबर्ग, रायचूर
उत्तर: उडुपी, शिवमोग्गा, चिक्कमगलूरु — कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ‘कस्तूरीरंगन रिपोर्ट’ पर चर्चा हेतु बैठकों का आयोजन उडुपी, शिवमोग्गा और चिक्कमगलूरु जिलों में कर रहे हैं।
Mains: कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के संदर्भ में, कर्नाटक सरकार द्वारा अपनाई जाने वाली संभावित रणनीतियों एवं उनके प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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