कर्नाटक: सीएम शिवकुमार की पश्चिमी घाट रिपोर्ट पर बैठक के चलते तीन शिक्षण संस्थानों में छुट्टी

Holiday for three education institutes in Tirthahalli on account of CM’s visit to discuss K. Kasturirangan report on Wes — concept mind map

कर्नाटक: सीएम शिवकुमार की पश्चिमी घाट रिपोर्ट पर बैठक के चलते तीन शिक्षण संस्थानों में छुट्टी

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✎ कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पश्चिमी घाट के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान और संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जो पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय आजीविका के बीच संतुलन साधने का प्रयास करती है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भूगोल (भारत का भूगोल)  |  GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी (पर्यावरण संरक्षण, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन)  |  GS Paper II — शासन (संघवाद, नीति निर्माण)
  • Prelims: पश्चिमी घाट, कस्तूरीरंगन रिपोर्ट, माधव गाडगिल रिपोर्ट, पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ESA), जैव विविधता हॉटस्पॉट, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986, स्थानीय स्वशासन
  • Essay: पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के बीच संतुलन: चुनौतियाँ और समाधान, संघवाद और पर्यावरण शासन में राज्यों की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पश्चिमी घाट के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान और संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जो पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय आजीविका के बीच संतुलन साधने का प्रयास करती है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने पश्चिमी घाट पर के. कस्तूरीरंगन रिपोर्ट से संबंधित सार्वजनिक चर्चा के लिए तीर्थहल्ली का दौरा किया। इस दौरे के कारण स्थानीय शैक्षणिक संस्थानों में अवकाश घोषित किया गया, क्योंकि मुख्यमंत्री ने रिपोर्ट के संबंध में लोगों, निर्वाचित प्रतिनिधियों और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों के विचारों और शिकायतों को सुना। यह घटना पश्चिमी घाट के संरक्षण और स्थानीय समुदायों की आजीविका के बीच संतुलन स्थापित करने की जटिलता को उजागर करती है।

पृष्ठभूमि

  • पश्चिमी घाट भारत के पश्चिमी तट के समानांतर चलने वाली एक पर्वत श्रृंखला है, जो गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु राज्यों से होकर गुजरती है।
  • इसे यूनेस्को (UNESCO) विश्व धरोहर स्थल और दुनिया के आठ ‘सबसे गर्म’ जैव विविधता हॉटस्पॉट (Biodiversity Hotspots) में से एक के रूप में मान्यता प्राप्त है।
  • पश्चिमी घाट में कई स्थानिक प्रजातियाँ पाई जाती हैं और यह भारत की मानसूनी वर्षा के पैटर्न को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • इस क्षेत्र में खनन, वनों की कटाई और शहरीकरण जैसी मानवीय गतिविधियों के कारण गंभीर पर्यावरणीय क्षरण का सामना करना पड़ रहा है।
  • इन चिंताओं के समाधान के लिए, पर्यावरण और वन मंत्रालय (Ministry of Environment and Forests) ने पश्चिमी घाट पारिस्थितिकी विशेषज्ञ पैनल (Western Ghats Ecology Expert Panel – WGEEP) का गठन किया, जिसकी अध्यक्षता प्रोफेसर माधव गाडगिल ने की, जिसने 2011 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।
  • गाडगिल रिपोर्ट को कुछ राज्यों द्वारा अत्यधिक प्रतिबंधात्मक माना गया, जिसके बाद मंत्रालय ने डॉ. के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय कार्य समूह (High-Level Working Group – HLWG) का गठन किया।

कस्तूरीरंगन रिपोर्ट क्या है?

  • के. कस्तूरीरंगन रिपोर्ट 2013 में प्रस्तुत की गई थी, जिसका उद्देश्य पश्चिमी घाट के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों (Ecologically Sensitive Areas – ESA) की पहचान करना और उनके संरक्षण के लिए सिफारिशें करना था।
  • इस रिपोर्ट ने गाडगिल समिति की सिफारिशों को संशोधित किया, जिसमें पश्चिमी घाट के लगभग 37% क्षेत्र को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ESA) के रूप में नामित करने का प्रस्ताव किया गया था।
  • रिपोर्ट में ESA के भीतर खनन, उत्खनन, थर्मल पावर प्लांट और अत्यधिक प्रदूषणकारी उद्योगों जैसी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने का सुझाव दिया गया था।
  • इसने क्षेत्र के सतत विकास के लिए स्थानीय समुदायों की भागीदारी और ग्राम सभाओं को सशक्त बनाने पर जोर दिया।
  • रिपोर्ट का मुख्य उद्देश्य पश्चिमी घाट के अद्वितीय जैव विविधता और पारिस्थितिकी को संरक्षित करना था, जबकि स्थानीय लोगों की आजीविका और विकास संबंधी आकांक्षाओं को भी ध्यान में रखा गया था।
  • हालांकि, इस रिपोर्ट को भी पश्चिमी घाट राज्यों के कुछ वर्गों से विरोध का सामना करना पड़ा, विशेष रूप से किसानों और बागान मालिकों द्वारा, जो मानते थे कि यह उनकी आजीविका को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करेगा।
  • केंद्र सरकार ने कस्तूरीरंगन रिपोर्ट की सिफारिशों के आधार पर कई मसौदा अधिसूचनाएँ (Draft Notifications) जारी की हैं, लेकिन राज्यों के विरोध के कारण अंतिम अधिसूचना अभी जारी नहीं की गई है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
पश्चिमी घाट की संवेदनशीलता यह क्षेत्र जैव विविधता हॉटस्पॉट है और पर्यावरण संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है।
कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पश्चिमी घाट के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों (ESA) के संरक्षण के लिए सिफारिशें प्रस्तुत की गई हैं।
स्थानीय समुदायों की भागीदारी रिपोर्ट के कार्यान्वयन में स्थानीय निवासियों और हितधारकों के विचारों को सुनना आवश्यक है।
पर्यावरण बनाम विकास संरक्षण और स्थानीय आजीविका के बीच संतुलन स्थापित करना एक बड़ी चुनौती है।
राज्य सरकार की भूमिका रिपोर्ट पर निर्णय लेने और केंद्र सरकार के साथ समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण है।

महत्व

पर्यावरण और पारिस्थितिकी

  • पश्चिमी घाट भारत के सबसे महत्वपूर्ण जैव विविधता हॉटस्पॉट में से एक है, जहाँ कई स्थानिक प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
  • रिपोर्ट का उद्देश्य इस क्षेत्र की नाजुक पारिस्थितिकी को खनन, प्रदूषण और अनियंत्रित शहरीकरण जैसी गतिविधियों से बचाना है।

शासन और नीति निर्माण

  • यह घटना दर्शाती है कि पर्यावरण नीतियों को लागू करते समय स्थानीय समुदायों और राज्य सरकारों की चिंताओं को संबोधित करना कितना महत्वपूर्ण है।
  • केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय और परामर्श प्रक्रिया की आवश्यकता को उजागर करती है।

सामाजिक-आर्थिक प्रभाव

  • रिपोर्ट की सिफारिशें पश्चिमी घाट में रहने वाले लाखों लोगों की आजीविका (कृषि, वानिकी) को प्रभावित कर सकती हैं।
  • स्थानीय लोगों की शिकायतें और विरोध प्रदर्शन इस बात का संकेत हैं कि संरक्षण उपायों को लागू करते समय सामाजिक न्याय और आर्थिक स्थिरता पर भी विचार किया जाना चाहिए।

चुनौतियाँ

1. संरक्षण और विकास में संतुलन

  • पश्चिमी घाट के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों (Ecologically Sensitive Areas – ESA) को अधिसूचित करने से स्थानीय निवासियों की कृषि और अन्य आर्थिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लग सकता है।
  • पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता और क्षेत्र के निवासियों की आजीविका के बीच संतुलन बनाना एक जटिल कार्य है।

2. स्थानीय विरोध और भागीदारी

  • कस्तूरीरंगन रिपोर्ट की सिफारिशों को लेकर स्थानीय समुदायों, किसानों और जनप्रतिनिधियों में व्यापक विरोध है।
  • नीति निर्माण में स्थानीय हितधारकों की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करना और उनकी चिंताओं को दूर करना आवश्यक है।

3. केंद्र-राज्य संबंध

  • पर्यावरण संरक्षण एक समवर्ती विषय है, जिसमें केंद्र और राज्य दोनों की भूमिका होती है।
  • रिपोर्ट के कार्यान्वयन के लिए केंद्र और संबंधित राज्य सरकारों (कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, गोवा, गुजरात, तमिलनाडु) के बीच प्रभावी समन्वय और आम सहमति की आवश्यकता है।

4. वैज्ञानिक बनाम स्थानीय ज्ञान

  • रिपोर्ट वैज्ञानिक अध्ययनों पर आधारित है, लेकिन स्थानीय समुदायों का पारंपरिक ज्ञान और उनके अनुभव भी महत्वपूर्ण हैं।
  • वैज्ञानिक दृष्टिकोण और स्थानीय ज्ञान के बीच सामंजस्य स्थापित करना एक चुनौती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ESA) का सीमांकन स्थानीय लोगों को डर है कि उनके कृषि भूमि और गाँवों को ESA में शामिल किया जा सकता है, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित होगी।
विकास गतिविधियों पर प्रतिबंध ESA में खनन, प्रदूषणकारी उद्योगों और बड़े निर्माण परियोजनाओं पर प्रतिबंध से क्षेत्र के आर्थिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
क्षतिपूर्ति और पुनर्वास यदि किसी क्षेत्र को ESA घोषित किया जाता है, तो प्रभावित लोगों के लिए उचित क्षतिपूर्ति और पुनर्वास की व्यवस्था का अभाव एक चिंता का विषय है।
पारदर्शिता और परामर्श स्थानीय समुदायों का मानना है कि रिपोर्ट तैयार करने और उसके कार्यान्वयन की प्रक्रिया में उनसे पर्याप्त परामर्श नहीं किया गया है।
राज्य सरकारों की स्वायत्तता कुछ राज्य सरकारों को लगता है कि केंद्र द्वारा ESA अधिसूचना उनकी विकासात्मक योजनाओं में हस्तक्षेप कर सकती है।

आगे की राह

  • स्थानीय समुदायों, किसानों और जनप्रतिनिधियों के साथ व्यापक और पारदर्शी परामर्श प्रक्रिया आयोजित की जाए।
  • कस्तूरीरंगन रिपोर्ट की सिफारिशों को लागू करते समय स्थानीय आजीविका और पारंपरिक प्रथाओं पर पड़ने वाले प्रभावों का गहन मूल्यांकन किया जाए।
  • पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के बीच संतुलन बनाने के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण अपनाया जाए, जिसमें सामाजिक-आर्थिक पहलुओं को भी ध्यान में रखा जाए।
  • केंद्र और राज्य सरकारों के बीच प्रभावी समन्वय और सहयोग सुनिश्चित किया जाए ताकि एक आम सहमति पर पहुंचा जा सके।
  • प्रभावित होने वाले समुदायों के लिए उचित क्षतिपूर्ति, पुनर्वास और वैकल्पिक आजीविका के अवसरों का प्रावधान किया जाए।
  • रिपोर्ट की सिफारिशों को लागू करने के लिए चरणबद्ध दृष्टिकोण अपनाया जाए, जिसमें पायलट परियोजनाओं और निगरानी तंत्र को शामिल किया जाए।
  • पर्यावरण शिक्षा और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से स्थानीय लोगों को पश्चिमी घाट के पारिस्थितिक महत्व के बारे में शिक्षित किया जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

पश्चिमी घाट · कस्तूरीरंगन रिपोर्ट · पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र · पारिस्थितिकी · जैव विविधता हॉटस्पॉट · सतत विकास · पर्यावरण संरक्षण अधिनियम · स्थानीय समुदाय · संघवाद · राज्यों की भूमिका · पर्यावरण शासन · नीति निर्माण

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘राज्य पर्यावरण की रक्षा और सुधार का प्रयास करेगा।’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A (g)’, ‘note’: ‘प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह पर्यावरण की रक्षा करे।’}
  • {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘वन और वन्यजीव समवर्ती सूची में हैं।’}

अवधारणा प्रवाह

पश्चिमी घाट का पारिस्थितिक महत्व  →  गाडगिल और कस्तूरीरंगन रिपोर्ट का प्रस्ताव  →  ESA के सीमांकन की सिफारिशें  →  स्थानीय समुदायों का विरोध और चिंताएँ  →  राज्य सरकार द्वारा जनसुनवाई और परामर्श  →  केंद्र-राज्य समन्वय और अंतिम निर्णय

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पश्चिमी घाट यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त एक विश्व धरोहर स्थल है।
2. माधव गाडगिल समिति की रिपोर्ट ने पश्चिमी घाट के पारिस्थितिकी संवेदनशील क्षेत्रों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया था।
3. कस्तूरीरंगन रिपोर्ट ने पश्चिमी घाट के लगभग 37 प्रतिशत क्षेत्र को पारिस्थितिकी संवेदनशील क्षेत्र (ESA) घोषित करने की सिफारिश की थी।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। पश्चिमी घाट यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त एक विश्व धरोहर स्थल है और जैव विविधता के लिए एक महत्वपूर्ण हॉटस्पॉट है। कथन 2 सही है। माधव गाडगिल समिति ने पश्चिमी घाट को पारिस्थितिकी संवेदनशील क्षेत्रों (ESAs) के रूप में वर्गीकृत करने के लिए तीन स्तरों (ESA 1, ESA 2, ESA 3) का प्रस्ताव किया था। कथन 3 भी सही है। कस्तूरीरंगन रिपोर्ट ने पश्चिमी घाट के लगभग 37 प्रतिशत क्षेत्र को पारिस्थितिकी संवेदनशील क्षेत्र (ESA) के रूप में नामित करने की सिफारिश की थी।

Q2. कस्तूरीरंगन रिपोर्ट, जो हाल ही में खबरों में थी, निम्नलिखित में से किस क्षेत्र के संरक्षण से संबंधित है?

  1. पूर्वी हिमालय
  2. पश्चिमी घाट
  3. थार रेगिस्तान
  4. सुंदरबन डेल्टा

उत्तर: पश्चिमी घाट — कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पश्चिमी घाट के संरक्षण और प्रबंधन से संबंधित है। यह रिपोर्ट माधव गाडगिल समिति की रिपोर्ट की समीक्षा के लिए गठित की गई थी, जिसमें पश्चिमी घाट के पारिस्थितिकी संवेदनशील क्षेत्रों को परिभाषित किया गया था।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ पश्चिमी घाट के संरक्षण से संबंधित कस्तूरीरंगन रिपोर्ट की प्रमुख सिफारिशों पर चर्चा कीजिए। साथ ही, इस रिपोर्ट के कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों और स्थानीय समुदायों पर इसके संभावित प्रभावों का विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: पश्चिमी घाट के पारिस्थितिक महत्व और कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के संदर्भ का संक्षिप्त परिचय।
2. कस्तूरीरंगन रिपोर्ट की प्रमुख सिफारिशें: रिपोर्ट द्वारा प्रस्तावित पारिस्थितिकी संवेदनशील क्षेत्र (ESA) का प्रतिशत, खनन, उत्खनन, थर्मल पावर प्लांट जैसे उद्योगों पर प्रतिबंध, हरित प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना, स्थानीय समुदायों की भागीदारी पर जोर।
3. कार्यान्वयन में चुनौतियाँ: केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय की कमी, राज्यों द्वारा विरोध (विशेषकर कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र), स्थानीय समुदायों की आजीविका पर प्रभाव की चिंताएँ, विकास बनाम पर्यावरण संरक्षण का द्वंद्व।
4. स्थानीय समुदायों पर संभावित प्रभाव: कृषि, बागवानी और अन्य पारंपरिक गतिविधियों पर प्रतिबंधों का असर, विस्थापन की आशंका, वन अधिकारों का मुद्दा, आजीविका के वैकल्पिक साधनों की आवश्यकता।
5. निष्कर्ष: सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए, स्थानीय समुदायों की चिंताओं को दूर करने के लिए समावेशी नीति निर्माण का सुझाव।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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