09 Sep केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी 3 बहु-ट्रैक परियोजनाएं, रेलवे नेटवर्क 656 किमी बढ़ेगा
✎ रेलवे मल्टीट्रैकिंग परियोजनाएँ भारतीय रेल की क्षमता, दक्षता और कनेक्टिविटी में वृद्धि करके आर्थिक विकास को गति देती हैं तथा प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के उद्देश्यों को पूरा करती हैं।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अवसंरचना (रेलवे), आर्थिक विकास | GS Paper III — निवेश मॉडल, परिवहन और विपणन
- Prelims: मल्टीट्रैकिंग परियोजनाएँ, प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान, आर्थिक मामलों पर केंद्रीय मंत्रिमंडल समिति, रेलवे अवसंरचना, लॉजिस्टिक्स दक्षता, कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी
- Essay: भारत के आर्थिक विकास में अवसंरचना की भूमिका, सतत परिवहन और जलवायु परिवर्तन
त्वरित पुनरावृत्ति: रेलवे मल्टीट्रैकिंग परियोजनाएँ भारतीय रेल की क्षमता, दक्षता और कनेक्टिविटी में वृद्धि करके आर्थिक विकास को गति देती हैं तथा प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के उद्देश्यों को पूरा करती हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, आर्थिक मामलों पर केंद्रीय मंत्रिमंडल समिति ने रेल मंत्रालय की लगभग 10,021 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली पाँच मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। ये परियोजनाएँ तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना राज्यों के 17 जिलों में फैली हैं और भारतीय रेल के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 540 किलोमीटर की वृद्धि करेंगी। इन परियोजनाओं को 2029-30 तक पूरा करने की योजना है, जिससे देश में रेलवे अवसंरचना को मजबूती मिलेगी।
पृष्ठभूमि
- भारत में रेलवे परिवहन का एक महत्वपूर्ण साधन है, जो यात्रियों और माल दोनों के लिए व्यापक कनेक्टिविटी प्रदान करता है।
- बढ़ती जनसंख्या और आर्थिक गतिविधियों के कारण मौजूदा रेलवे नेटवर्क पर दबाव बढ़ रहा है, जिससे क्षमता विस्तार की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
- मल्टीट्रैकिंग परियोजनाएँ, जैसे कि तीसरी और चौथी लाइनें या दोहरीकरण, रेलवे नेटवर्क की वहन क्षमता (carrying capacity) को बढ़ाती हैं, जिससे अधिक ट्रेनों का संचालन संभव होता है और भीड़भाड़ कम होती है।
- सरकार ने देश में लॉजिस्टिक्स दक्षता (logistics efficiency) में सुधार और आर्थिक विकास को गति देने के लिए अवसंरचना परियोजनाओं पर विशेष ध्यान दिया है।
- ये परियोजनाएँ प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (PM Gati Shakti National Master Plan) के अनुरूप हैं, जिसका उद्देश्य एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श के माध्यम से बहु-मार्गीय संपर्क और लॉजिस्टिक्स दक्षता को बढ़ाना है।
- रेलवे को पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा कुशल परिवहन माध्यम के रूप में देखा जाता है, जो जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और देश की लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने में सहायक है।
मल्टीट्रैकिंग परियोजनाएँ क्या हैं और इनके लाभ क्या हैं?
- मल्टीट्रैकिंग परियोजनाएँ रेलवे लाइनों की संख्या बढ़ाने से संबंधित हैं, जैसे कि मौजूदा एकल या दोहरी लाइनों के समानांतर अतिरिक्त तीसरी या चौथी लाइन का निर्माण करना।
- इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य रेलवे नेटवर्क की क्षमता में वृद्धि करना है, जिससे अधिक ट्रेनों का संचालन हो सके और यात्रा के समय में कमी आए।
- ये परियोजनाएँ परिचालन दक्षता (operational efficiency) में सुधार करती हैं और भीड़भाड़ को कम करती हैं, जिससे मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों दोनों की आवाजाही सुचारु होती है।
- मल्टीट्रैकिंग से माल ढुलाई क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है, जो कोयला, सीमेंट, लोहा और इस्पात, कंटेनर, ऑटोमोबाइल, अनाज, पेट्रोलियम उत्पाद, उर्वरक आदि जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए महत्वपूर्ण है।
- ये परियोजनाएँ क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देती हैं, रोजगार/स्वरोजगार के अवसर बढ़ाती हैं और लोगों, वस्तुओं तथा सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करती हैं।
- पर्यावरण की दृष्टि से, रेलवे परिवहन सड़क परिवहन की तुलना में अधिक ऊर्जा कुशल और कम प्रदूषणकारी है, जिससे तेल आयात में कमी और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में गिरावट आती है।
- ये परियोजनाएँ देश भर के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाती हैं, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलता है。
- आर्थिक मामलों पर केंद्रीय मंत्रिमंडल समिति (Cabinet Committee on Economic Affairs) ऐसी बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं को मंजूरी देने वाली शीर्ष संस्था है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| परियोजनाओं की संख्या | पांच मल्टीट्रैकिंग परियोजनाएँ |
| राज्यों का कवरेज | तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना के 17 जिले |
| नेटवर्क में वृद्धि | भारतीय रेल के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 540 किलोमीटर की वृद्धि |
| अनुमानित लागत | 10,021 करोड़ रुपये |
| पूर्ण होने का लक्ष्य | 2029-30 |
| अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता | प्रति वर्ष 47 मिलियन टन (MTPA) |
महत्व
आर्थिक महत्व
- रेलवे नेटवर्क के विस्तार से माल ढुलाई क्षमता में वृद्धि होगी, जिससे कोयला, सीमेंट, लोहा और इस्पात, कंटेनर, ऑटोमोबाइल, अनाज, पेट्रोलियम उत्पाद, उर्वरक आदि जैसी वस्तुओं के परिवहन में सुगमता आएगी।
- लॉजिस्टिक्स लागत (Logistics Cost) में कमी आएगी, जिससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
- परियोजनाओं से लगभग 2,121 गांवों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार/स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
सामाजिक महत्व
- बेहतर रेल कनेक्टिविटी से लगभग 52 लाख आबादी वाले क्षेत्रों को लाभ होगा, जिससे लोगों की आवाजाही आसान होगी।
- कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल पहुंच में सुधार होगा, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय समुदायों के लिए आय के स्रोत उत्पन्न होंगे।
- रोजगार के अवसर बढ़ने से क्षेत्र के व्यापक विकास में मदद मिलेगी और लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।
पर्यावरणीय महत्व
- रेलवे एक पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा कुशल परिवहन माध्यम है, जो जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक होगा।
- तेल आयात में कमी (लगभग 8 करोड़ लीटर) और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी (लगभग 42 करोड़ किलोग्राम) आएगी, जो लगभग 2 करोड़ वृक्षारोपण के बराबर है।
रणनीतिक एवं ढाँचागत महत्व
- मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं से परिचालन को सुव्यवस्थित और भीड़भाड़ को कम करके भारतीय रेल की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में वृद्धि होगी।
- यह प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (PM Gati Shakti National Master Plan) के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श के माध्यम से बहु-मार्गीय संपर्क और लॉजिस्टिक दक्षता को बढ़ाना है।
चुनौतियाँ
1. भूमि अधिग्रहण
- रेलवे परियोजनाओं के लिए आवश्यक भूमि का अधिग्रहण अक्सर एक जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया होती है, जिसमें मुआवजे और पुनर्वास संबंधी मुद्दे शामिल होते हैं।
- विभिन्न राज्यों में भूमि अधिग्रहण कानूनों और प्रक्रियाओं में भिन्नता भी एक चुनौती प्रस्तुत करती है।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढांचा विकास, भूमि सुधार
2. परियोजना कार्यान्वयन और समन्वय
- विभिन्न राज्यों और कई जिलों में फैली परियोजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन और विभिन्न सरकारी विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है।
- समय पर और लागत प्रभावी तरीके से परियोजनाओं को पूरा करने के लिए कुशल परियोजना प्रबंधन की आवश्यकता होती है।
यूपीएससी लिंक: शासन, बुनियादी ढांचा परियोजना प्रबंधन
3. पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव
- बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के निर्माण से स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र और समुदायों पर पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव पड़ सकता है, जिसके लिए उचित मूल्यांकन और शमन उपायों की आवश्यकता होती है।
- वन क्षेत्रों से गुजरने वाली लाइनों के लिए पर्यावरणीय मंजूरी प्राप्त करना एक लंबी प्रक्रिया हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण प्रभाव आकलन, सतत विकास
4. वित्तपोषण और लागत प्रबंधन
- 10,021 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इन परियोजनाओं के लिए पर्याप्त और सतत वित्तपोषण सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
- निर्माण के दौरान लागत में वृद्धि और बजट से अधिक खर्च को नियंत्रित करना एक चुनौती हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: सार्वजनिक वित्त, बुनियादी ढांचा वित्तपोषण
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| भूमि अधिग्रहण | जटिल प्रक्रिया, मुआवजे और पुनर्वास के मुद्दे, कानूनी चुनौतियाँ |
| परियोजना कार्यान्वयन | समय पर पूरा करने में देरी, लागत में वृद्धि, अंतर-विभागीय समन्वय की कमी |
| पर्यावरणीय प्रभाव | पारिस्थितिकी तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव, वन मंजूरी में देरी, जैव विविधता का नुकसान |
| सामाजिक प्रभाव | स्थानीय समुदायों का विस्थापन, आजीविका का नुकसान, सामाजिक अशांति |
| तकनीकी चुनौतियाँ | पहाड़ी/कठिन इलाकों में निर्माण, मौजूदा नेटवर्क के साथ एकीकरण |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान
आगे की राह
- भूमि अधिग्रहण प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और प्रभावित व्यक्तियों के लिए त्वरित और उचित मुआवजे तथा पुनर्वास सुनिश्चित करने के लिए एक पारदर्शी नीति अपनाना।
- परियोजनाओं के समय पर कार्यान्वयन के लिए एक मजबूत निगरानी तंत्र स्थापित करना और अंतर-विभागीय समन्वय को मजबूत करना।
- पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (Environmental Impact Assessment – EIA) को प्रभावी ढंग से लागू करना और परियोजना स्थलों पर जैव विविधता संरक्षण उपायों को प्राथमिकता देना।
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership – PPP) जैसे नवीन वित्तपोषण मॉडलों की खोज करना ताकि परियोजनाओं के लिए पर्याप्त पूंजी सुनिश्चित की जा सके।
- स्थानीय समुदायों को परियोजना विकास प्रक्रिया में शामिल करना और उनके हितों की रक्षा के लिए सामाजिक प्रभाव आकलन (Social Impact Assessment – SIA) करना।
- आधुनिक निर्माण तकनीकों और सामग्री का उपयोग करके परियोजनाओं की दक्षता और स्थायित्व में सुधार करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
रेलवे अवसंरचना · मल्टीट्रैकिंग परियोजनाएं · प्रधानमंत्री गति शक्ति · लॉजिस्टिक्स दक्षता · आर्थिक संवृद्धि · क्षेत्रीय विकास · माल ढुलाई क्षमता · पर्यावरण अनुकूल परिवहन · रोजगार सृजन · बुनियादी ढांचा विकास
अवधारणा प्रवाह
रेलवे मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी → रेलवे नेटवर्क का विस्तार और क्षमता वृद्धि → परिचालन दक्षता में सुधार, भीड़भाड़ में कमी → माल ढुलाई और यात्री आवाजाही में वृद्धि → आर्थिक विकास, रोजगार सृजन, लॉजिस्टिक्स लागत में कमी
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हाल ही में स्वीकृत मल्टीट्रैकिंग रेलवे परियोजनाएँ केवल दक्षिण भारतीय राज्यों तक ही सीमित हैं।
2. ये परियोजनाएँ प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत आती हैं।
3. इन परियोजनाओं का उद्देश्य माल ढुलाई क्षमता में वृद्धि करना और लॉजिस्टिक्स लागत को कम करना है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि समाचार में पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों का भी उल्लेख है। कथन 2 और 3 सही हैं, क्योंकि ये परियोजनाएँ प्रधानमंत्री गति शक्ति के तहत एकीकृत योजना का हिस्सा हैं और इनका लक्ष्य माल ढुलाई क्षमता बढ़ाना तथा लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार करना है।
Q2. प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
- केवल ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क में सुधार करना।
- रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना।
- एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श के माध्यम से बहु-मार्गीय संपर्क और लॉजिस्टिक दक्षता को बढ़ाना।
- केवल शहरी क्षेत्रों में स्मार्ट सिटीज़ का विकास करना।
उत्तर: एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श के माध्यम से बहु-मार्गीय संपर्क और लॉजिस्टिक दक्षता को बढ़ाना। — प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान का मुख्य उद्देश्य एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श के माध्यम से बहु-मार्गीय संपर्क और लॉजिस्टिक दक्षता को बढ़ाना है, ताकि देश में बुनियादी ढाँचे के विकास को गति मिल सके।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारतीय रेलवे के मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं के महत्व पर चर्चा कीजिए और समझाइए कि ये परियोजनाएँ प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के उद्देश्यों को प्राप्त करने में किस प्रकार सहायक हैं। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: भारतीय रेलवे के महत्व और हाल ही में स्वीकृत मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं का संक्षिप्त विवरण।
2. मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं का महत्व:
क. बढ़ी हुई लाइन क्षमता और परिचालन दक्षता।
ख. भीड़भाड़ में कमी और आवागमन में सुधार।
ग. माल ढुलाई क्षमता में वृद्धि (47 मिलियन टन प्रति वर्ष का आंकड़ा)।
घ. आर्थिक संवृद्धि और क्षेत्रीय विकास में योगदान।
ङ. रोजगार सृजन के अवसर।
च. पर्यटन स्थलों तक बेहतर कनेक्टिविटी।
3. प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के साथ संबंध:
क. एकीकृत योजना और बहु-मार्गीय संपर्क का उद्देश्य।
ख. लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार।
ग. निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना (लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की)।
घ. बुनियादी ढाँचे के विकास में समन्वय।
4. पर्यावरणीय और आर्थिक लाभ:
क. पर्यावरण अनुकूल परिवहन माध्यम के रूप में रेलवे।
ख. जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायक।
ग. लॉजिस्टिक्स लागत में कमी।
घ. तेल आयात और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी के आँकड़े।
5. निष्कर्ष: भारत के समग्र विकास और आत्मनिर्भरता के लक्ष्य में इन परियोजनाओं की भूमिका।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Chhattisgarh PCS (CGPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: केन्द्रीय मंत्रिमण्डल द्वारा हाल ही में स्वीकृत तीन मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं में शामिल छत्तीसगढ़ राज्य के जिलों की संख्या कितनी है?
- 2
- 3
- 4
- 5
उत्तर: 4 — छत्तीसगढ़ राज्य से कुल 3 जिले (सरगुजा, बलरामपुर तथा जशपुर) इन मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं में शामिल हैं।
Mains: छत्तीसगढ़ राज्य में मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं के क्रियान्वयन से संबंधित चुनौतियों एवं लाभों पर प्रकाश डालते हुए, राज्य के पर्यटन विकास में इन परियोजनाओं की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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