09 Aug केरल सीएम पर INL का आरोप: पीएम श्री योजना लागू नहीं, सिर्फ एमओयू पर हस्ताक्षर

✎ पीएम श्री योजना एक केंद्र प्रायोजित योजना है जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप देश भर में 14,500 से अधिक स्कूलों को 'आदर्श' स्कूलों के रूप में विकसित करना है, जिससे छात्रों को 21वीं सदी के कौशल के लिए तैयार किया…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान: केंद्र एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघीय ढाँचे से संबंधित विषय एवं चुनौतियाँ, स्थानीय स्तर तक शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण एवं उसकी चुनौतियाँ। | GS Paper II — सामाजिक न्याय: शिक्षा के क्षेत्र में मानव संसाधन का विकास, केंद्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ।
- Prelims: पीएम श्री योजना, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), समग्र शिक्षा अभियान, केंद्र प्रायोजित योजनाएँ, संघवाद, शिक्षा समवर्ती सूची
- Essay: भारत में संघवाद की चुनौतियाँ और सहकारी संघवाद का महत्व, राष्ट्रीय शिक्षा नीति का क्रियान्वयन: केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय की आवश्यकता
त्वरित पुनरावृत्ति: पीएम श्री योजना एक केंद्र प्रायोजित योजना है जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप देश भर में 14,500 से अधिक स्कूलों को ‘आदर्श’ स्कूलों के रूप में विकसित करना है, जिससे छात्रों को 21वीं सदी के कौशल के लिए तैयार किया जा सके।
यह खबर चर्चा में क्यों?
इंडियन नेशनल लीग (INL) ने केरल के मुख्यमंत्री से पीएम श्री योजना (PM SHRI scheme) के संबंध में स्पष्टीकरण माँगा है। यह तब हुआ जब केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री ने संसद में बताया कि केरल में पीएम श्री योजना लागू नहीं की गई है, बल्कि राज्य ने केवल एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। INL का दावा है कि यह केंद्र का स्पष्टीकरण मुख्यमंत्री के इस लगातार दावे के विपरीत है कि राज्य इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए बाध्य था क्योंकि पिछली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) सरकार ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे।
पृष्ठभूमि
- पीएम श्री योजना एक केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme) है, जिसका उद्देश्य देश भर में 14,500 से अधिक स्कूलों को मॉडल स्कूलों के रूप में विकसित करना है।
- इस योजना के तहत, स्कूलों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Education Policy – NEP) 2020 के प्रमुख पहलुओं को प्रदर्शित करने वाले ‘आदर्श’ स्कूलों के रूप में अपग्रेड किया जाएगा।
- केरल के मुख्यमंत्री ने पहले दावा किया था कि राज्य सरकार पिछली LDF सरकार द्वारा हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन के कारण पीएम श्री योजना को लागू करने के लिए बाध्य है।
- INL ने आरोप लगाया है कि केरल में पीएम श्री योजना के तहत एक भी सरकारी स्कूल शामिल नहीं किया गया है, और केवल समग्र शिक्षा केरल (Samagra Shiksha Kerala – SSK) कार्यक्रम लागू किया गया है, जिसके तहत राज्य को ₹99.27 करोड़ प्राप्त हुए हैं।
- INL का दावा है कि LDF शासन के दौरान, केरल ने तमिलनाडु की तरह पीएम श्री योजना पर एक स्पष्ट धर्मनिरपेक्ष रुख अपनाया था और SSK निधियों की रिहाई सुनिश्चित करने के लिए केवल समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे।
- INL ने आरोप लगाया है कि वर्तमान UDF सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने का प्रयास कर रही है, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की वैचारिक दृष्टि को दर्शाती है।
पीएम श्री योजना क्या है?
- पीएम श्री (PM SHRI) का पूर्ण रूप ‘प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया’ (PM Schools for Rising India) है।
- यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है जिसे सितंबर 2022 में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित किया गया था।
- इसका उद्देश्य देश भर में 14,500 से अधिक मौजूदा स्कूलों (जिनका प्रबंधन केंद्र, राज्य, केंद्र शासित प्रदेश या स्थानीय निकाय करते हैं) को मजबूत करना है।
- इन स्कूलों को ‘आदर्श’ स्कूलों के रूप में विकसित किया जाएगा जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के प्रमुख पहलुओं को पूरी तरह से लागू करेंगे।
- योजना का लक्ष्य छात्रों को एक न्यायसंगत, समावेशी और आनंदमय सीखने का अनुभव प्रदान करना है जो उन्हें 21वीं सदी के लिए आवश्यक कौशल से लैस करेगा।
- इन स्कूलों में आधुनिक बुनियादी ढाँचा, जैसे स्मार्ट कक्षाएँ, खेल और कला कक्ष, और हरित स्कूल पहलें शामिल होंगी।
- योजना का कुल परिव्यय ₹27,360 करोड़ है, जिसमें केंद्र का हिस्सा ₹18,128 करोड़ है, जो 2022-23 से 2026-27 तक पाँच वर्षों की अवधि के लिए है।
- पीएम श्री स्कूल अपने आसपास के अन्य स्कूलों के लिए संरक्षक स्कूल (Mentor School) के रूप में कार्य करेंगे और उन्हें नेतृत्व प्रदान करेंगे।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| PM SHRI योजना का उद्देश्य | यह योजना नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप देश भर में 14,500 से अधिक स्कूलों को मॉडल स्कूलों के रूप में विकसित करने के लिए है। |
| योजना का वित्तपोषण | यह केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme) है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों के बीच लागत साझा की जाती है। केंद्र सरकार का योगदान 60% और राज्यों का 40% होता है (विशेष श्रेणी के राज्यों के लिए अनुपात भिन्न हो सकता है)। |
| स्कूलों का उन्नयन | योजना के तहत चयनित स्कूलों को अत्याधुनिक बुनियादी ढाँचा, स्मार्ट कक्षाएँ, खेल और कला के लिए सुविधाएँ, और समग्र शिक्षा के लिए डिजिटल उपकरण प्रदान किए जाते हैं। |
| हरित विद्यालय पहल | PM SHRI स्कूल ‘हरित विद्यालय’ (Green Schools) के रूप में भी विकसित किए जाएंगे, जिसमें पर्यावरण-अनुकूल प्रथाओं को बढ़ावा दिया जाएगा, जैसे सौर पैनल, LED लाइटें, पोषण वाटिकाएँ, जल संरक्षण और अपशिष्ट प्रबंधन। |
| राष्ट्रीय शिक्षा नीति से संबंध | यह योजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जिसमें अनुभवात्मक शिक्षा, समग्र विकास और 21वीं सदी के कौशल पर जोर दिया गया है। |
महत्व
शिक्षा क्षेत्र पर प्रभाव
- PM SHRI योजना का उद्देश्य देश भर में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना है, जिससे छात्रों को आधुनिक और समग्र शिक्षा मिल सके।
- यह योजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के कार्यान्वयन में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भारत की शिक्षा प्रणाली में परिवर्तनकारी सुधार लाने का लक्ष्य रखती है।
संघवाद और केंद्र-राज्य संबंध
- यह घटना केंद्र-राज्य संबंधों में तनाव को उजागर करती है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ शिक्षा जैसे विषय समवर्ती सूची (Concurrent List) में हैं।
- राज्यों द्वारा केंद्र प्रायोजित योजनाओं को लागू करने या न करने का निर्णय संघवाद के सिद्धांतों और राज्यों की स्वायत्तता पर बहस को जन्म देता है।
राजनीतिक निहितार्थ
- विपक्षी दलों द्वारा योजना के कार्यान्वयन पर सवाल उठाना राजनीतिक ध्रुवीकरण और विभिन्न विचारधाराओं के बीच टकराव को दर्शाता है।
- यह घटना राज्य सरकारों द्वारा केंद्र की नीतियों को स्वीकार करने या अस्वीकार करने के राजनीतिक परिणामों को भी दर्शाती है।
चुनौतियाँ
1. केंद्र-राज्य समन्वय का अभाव
- केंद्र प्रायोजित योजनाओं के कार्यान्वयन में अक्सर केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय की कमी देखी जाती है, जिससे योजनाओं की प्रभावशीलता प्रभावित होती है।
- राज्यों की विशिष्ट आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं को ध्यान में रखे बिना एकरूप मॉडल लागू करने से प्रतिरोध उत्पन्न हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: शासन, संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध
2. वित्तीय बोझ और संसाधनों का आवंटन
- केंद्र प्रायोजित योजनाओं में राज्यों पर वित्तीय बोझ पड़ता है, खासकर जब उन्हें अपने हिस्से का वित्तपोषण करना होता है।
- संसाधनों के आवंटन और उपयोग को लेकर केंद्र और राज्यों के बीच मतभेद उत्पन्न हो सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: राजकोषीय संघवाद, सार्वजनिक वित्त
3. नीतिगत मतभेद और विचारधारात्मक टकराव
- विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा शासित राज्यों में केंद्र की नीतियों को लेकर विचारधारात्मक मतभेद हो सकते हैं, जिससे कार्यान्वयन में बाधा आती है।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति जैसे संवेदनशील मुद्दों पर राज्यों की अपनी अलग राय हो सकती है, जिससे केंद्र के साथ टकराव होता है।
यूपीएससी लिंक: राजनीतिक दर्शन, सामाजिक न्याय
4. जवाबदेही और पारदर्शिता
- योजनाओं के कार्यान्वयन में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करना एक चुनौती है, खासकर जब केंद्र और राज्य दोनों शामिल हों।
- फंड के उपयोग और योजना के परिणामों पर स्पष्ट रिपोर्टिंग तंत्र की कमी से भ्रष्टाचार और अक्षमता बढ़ सकती है।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता, जवाबदेही
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| PM SHRI योजना का कार्यान्वयन | केरल में योजना के कार्यान्वयन को लेकर केंद्र और राज्य के बयानों में विरोधाभास, जिससे भ्रम की स्थिति बनी। |
| समझौता ज्ञापन (MoU) की बाध्यता | मुख्यमंत्री का दावा कि पिछले MoU के कारण राज्य योजना को लागू करने के लिए बाध्य है, जबकि केंद्र का कहना है कि यह केवल एक समझौता है, कार्यान्वयन नहीं। |
| समग्र शिक्षा केरल (SSK) निधि | INL का आरोप है कि राज्य ने केवल SSK फंड जारी कराने के लिए MoU पर हस्ताक्षर किए थे, न कि PM SHRI योजना को लागू करने के लिए। |
| राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) का कार्यान्वयन | INL का आरोप है कि वर्तमान राज्य सरकार NEP को लागू करने का प्रयास कर रही है, जिसे वे एक विशेष विचारधारा से प्रेरित मानते हैं। |
| संघवाद और राज्य की स्वायत्तता | केंद्र प्रायोजित योजनाओं को लेकर राज्यों की स्वायत्तता और केंद्र के हस्तक्षेप के बीच संतुलन का मुद्दा। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- PM SHRI योजना (प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया)
आगे की राह
- केंद्र और राज्यों के बीच प्रभावी संवाद और समन्वय तंत्र स्थापित किया जाना चाहिए ताकि योजनाओं के कार्यान्वयन में आने वाली बाधाओं को दूर किया जा सके।
- केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए एक स्पष्ट और पारदर्शी दिशानिर्देश तैयार किया जाना चाहिए, जिसमें राज्यों की भूमिका और जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाए।
- राज्यों को अपनी विशिष्ट आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के अनुरूप योजनाओं को अनुकूलित करने की अधिक स्वायत्तता दी जानी चाहिए, जिससे स्थानीय स्तर पर बेहतर परिणाम प्राप्त हो सकें।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति जैसे महत्वपूर्ण नीतिगत मुद्दों पर व्यापक परामर्श और आम सहमति बनाने का प्रयास किया जाना चाहिए, जिसमें सभी हितधारकों को शामिल किया जाए।
- योजनाओं के कार्यान्वयन की नियमित निगरानी और मूल्यांकन किया जाना चाहिए, जिसमें प्रदर्शन संकेतकों और परिणामों पर ध्यान केंद्रित किया जाए।
- वित्तीय आवंटन और उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मजबूत लेखापरीक्षा (Audit) और रिपोर्टिंग तंत्र स्थापित किए जाने चाहिए।
- संघवाद के सिद्धांतों का सम्मान करते हुए, केंद्र और राज्यों को मिलकर काम करना चाहिए ताकि देश के विकास और नागरिकों के कल्याण को सुनिश्चित किया जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
पीएम श्री योजना · राष्ट्रीय शिक्षा नीति · संघवाद · केंद्र-राज्य संबंध · शिक्षा का अधिकार · समग्र शिक्षा अभियान · समझौता ज्ञापन (MoU) · राज्य की स्वायत्तता · शिक्षा में केंद्र की भूमिका · राज्यों का वित्तीय अधिकार
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संघ, राज्य और समवर्ती सूचियाँ’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 282’, ‘note’: ‘केंद्र और राज्यों द्वारा अनुदान’}
- {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘शिक्षा समवर्ती सूची का विषय’}
अवधारणा प्रवाह
केंद्र सरकार द्वारा PM SHRI योजना की शुरुआत। → योजना के कार्यान्वयन के लिए राज्यों के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर। → केरल सरकार द्वारा MoU पर हस्ताक्षर, SSK फंड जारी होने की उम्मीद। → केंद्र द्वारा संसद में स्पष्टीकरण कि केरल में योजना लागू नहीं हुई है। → INL द्वारा केरल के मुख्यमंत्री पर सवाल उठाना, विरोधाभासी बयानों पर। → केंद्र-राज्य संबंधों और संघवाद पर बहस का पुनः उभरना।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. पीएम श्री योजना का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों के अनुरूप देश भर में 14,500 से अधिक स्कूलों को मॉडल स्कूलों के रूप में विकसित करना है।
2. यह योजना केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसमें केंद्र और राज्य के बीच लागत साझाकरण का एक निश्चित अनुपात होता है।
3. समग्र शिक्षा अभियान एक व्यापक कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य स्कूली शिक्षा को पूर्व-विद्यालय से लेकर बारहवीं कक्षा तक समावेशी और समान बनाना है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। पीएम श्री योजना का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सिद्धांतों के अनुरूप देश भर में 14,500 से अधिक स्कूलों को मॉडल स्कूलों के रूप में विकसित करना है। कथन 2 सही है। पीएम श्री योजना एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका अर्थ है कि केंद्र सरकार और राज्य सरकारें इसके कार्यान्वयन की लागत साझा करती हैं। कथन 3 सही है। समग्र शिक्षा अभियान (Samagra Shiksha Abhiyan) एक एकीकृत योजना है जो पूर्व-विद्यालय से बारहवीं कक्षा तक स्कूली शिक्षा के सभी स्तरों को कवर करती है, जिसका लक्ष्य समावेशी और समान गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करना है।
Q2. अभिकथन (A): केंद्र सरकार की योजनाओं को लागू करने के लिए राज्यों द्वारा समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करना अक्सर राज्य के लिए वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए आवश्यक होता है।
कारण (R): भारत में शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है, जिससे केंद्र और राज्य दोनों को इस पर कानून बनाने की शक्ति मिलती है।
उपरोक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है। — अभिकथन (A) सही है। कई केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत, राज्यों को योजना के दिशानिर्देशों का पालन करने और वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए केंद्र के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने की आवश्यकता होती है। कारण (R) भी सही है। भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत शिक्षा समवर्ती सूची (Concurrent List) का विषय है, जिसका अर्थ है कि संसद और राज्य विधानमंडल दोनों इस विषय पर कानून बना सकते हैं। कारण (R) अभिकथन (A) की सही व्याख्या है क्योंकि समवर्ती सूची में होने के कारण केंद्र और राज्य दोनों की शिक्षा में भूमिका होती है, और केंद्र द्वारा शुरू की गई योजनाओं के लिए राज्यों को अक्सर वित्तीय सहायता के बदले में MoUs पर हस्ताक्षर करने पड़ते हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ पीएम श्री योजना जैसी केंद्र प्रायोजित योजनाओं के कार्यान्वयन में राज्यों द्वारा समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने की अनिवार्यता, भारत में संघवाद (Federalism) की भावना को किस हद तक प्रभावित करती है? इस संदर्भ में, शिक्षा के क्षेत्र में केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग और स्वायत्तता के संतुलन का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** पीएम श्री योजना (PM SHRI Scheme) का संक्षिप्त परिचय और केंद्र प्रायोजित योजनाओं में MoU की भूमिका का उल्लेख।
2. **MoU की अनिवार्यता और संघवाद पर प्रभाव:**
* **सकारात्मक प्रभाव:** राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति (जैसे NEP 2020), एकरूपता, वित्तीय सहायता का प्रवाह, राज्यों में क्षमता निर्माण।
* **नकारात्मक प्रभाव:** राज्यों की स्वायत्तता का हनन, नीति निर्माण में राज्यों की सीमित भूमिका, केंद्र के दिशानिर्देशों का पालन करने का दबाव, राज्यों की विशिष्ट आवश्यकताओं की अनदेखी, वित्तीय बोझ का असमान वितरण।
3. **शिक्षा के क्षेत्र में केंद्र-राज्य संबंध:**
* **संवैधानिक प्रावधान:** शिक्षा का समवर्ती सूची में होना (अनुच्छेद 254, 256)।
* **केंद्र की भूमिका:** राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), सर्व शिक्षा अभियान (SSA), समग्र शिक्षा अभियान (Samagra Shiksha Abhiyan) जैसी योजनाओं के माध्यम से मानक निर्धारण और वित्तीय सहायता।
* **राज्यों की भूमिका:** स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार पाठ्यक्रम, प्रशासन और कार्यान्वयन।
* **संघर्ष के बिंदु:** वित्तीय आवंटन, पाठ्यक्रम का मानकीकरण, विचारधारात्मक मतभेद (जैसा कि केरल के मामले में देखा गया)।
4. **सहयोग और स्वायत्तता का संतुलन:**
* **संतुलन की आवश्यकता:** राष्ट्रीय लक्ष्यों और स्थानीय आवश्यकताओं के बीच सामंजस्य।
* **सुझाव:** सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) को बढ़ावा देना, राज्यों के साथ अधिक परामर्श, वित्तीय हस्तांतरण में लचीलापन, राज्यों को अपनी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार योजनाओं को अनुकूलित करने की अनुमति।
* **न्यायिक दृष्टिकोण:** सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का उल्लेख जो केंद्र-राज्य संबंधों और संघवाद की भावना को स्पष्ट करते हैं।
5. **निष्कर्ष:** एक मजबूत और प्रभावी शिक्षा प्रणाली के लिए केंद्र और राज्यों के बीच रचनात्मक संवाद और परस्पर सम्मान पर आधारित एक संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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