गुवाहाटी हाईकोर्ट ने मानस टाइगर रिजर्व में अतिक्रमण पर रोक लगाने का दिया आदेश

Gauhati High Court seeks status quo on encroachment in Manas Tiger Reserve — concept mind map

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने मानस टाइगर रिजर्व में अतिक्रमण पर रोक लगाने का दिया आदेश

✎ गौहाटी उच्च न्यायालय ने मानस टाइगर रिजर्व में अतिक्रमण पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है, जो एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है और भारत में बाघ संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है।

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3D cutaway: Gauhati High Court seeks status quo on encroachment in Manas Tiger Reserve

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता  |  GS Paper II — शासन और न्यायपालिका
  • Prelims: मानस टाइगर रिजर्व, यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल, बोधोलैंड प्रादेशिक परिषद (BTC), राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA), जनहित याचिका (PIL), वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972
  • Essay: पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन, न्यायपालिका की भूमिका: पर्यावरण संरक्षण में एक प्रहरी

त्वरित पुनरावृत्ति: गौहाटी उच्च न्यायालय ने मानस टाइगर रिजर्व में अतिक्रमण पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है, जो एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है और भारत में बाघ संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

गौहाटी उच्च न्यायालय ने असम सरकार और बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद (BTC) को मानस राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व में किसी भी और अतिक्रमण को रोकने का निर्देश दिया है। यह निर्देश एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए दिया गया, जिसमें पार्क के मुख्य क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण का आरोप लगाया गया था, जिसमें कोकिलाबाड़ी बीज फार्म भी शामिल है, जो BTC के कृषि विभाग के नियंत्रण में है। न्यायालय ने अगली सुनवाई तक यथास्थिति (status quo) बनाए रखने का आदेश दिया है।

पृष्ठभूमि

  • मानस टाइगर रिजर्व, जो भूटान की सीमा से लगा हुआ है, 2,837 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है और यह एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल (UNESCO World Heritage Site) है।
  • पर्यावरण कार्यकर्ता रोहित चौधरी द्वारा दायर जनहित याचिका में असम सरकार और BTC से मानस से अनाधिकृत अतिक्रमण हटाने के लिए परमादेश (writ of mandamus) जारी करने की मांग की गई थी।
  • याचिका में विशेष रूप से पनबारी और बेतबारी क्षेत्रों में मानस राष्ट्रीय उद्यान के मुख्य क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण का उल्लेख किया गया है।
  • कोकिलाबाड़ी बीज फार्म, जो BTC के कृषि विभाग के नियंत्रण में है, को एक प्रमुख अतिक्रमणकर्ता के रूप में इंगित किया गया है, जिसने कथित तौर पर 3,558.32 बीघा भूमि पर कब्जा कर रखा है।
  • बाघ रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर ने पहले ही बक्सा और चिरांग जिला आयुक्तों को 18,000 बीघा से अधिक भूमि पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण को उजागर करते हुए पत्र लिखा था।

मानस टाइगर रिजर्व और संबंधित अवधारणाएँ

  • मानस राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व: यह असम में स्थित एक महत्वपूर्ण वन्यजीव अभयारण्य है, जो अपनी समृद्ध जैव विविधता और बाघों की आबादी के लिए जाना जाता है। यह एक बायोस्फीयर रिजर्व और हाथी रिजर्व भी है।
  • यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल: मानस को 1985 में यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था, जो इसके अद्वितीय सार्वभौमिक मूल्य को दर्शाता है।
  • बोधोलैंड प्रादेशिक परिषद (BTC): यह असम के बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र जिलों के प्रशासन के लिए एक स्वायत्त निकाय है, जिसे बोडो समझौते के तहत स्थापित किया गया था।
  • राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA): यह पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत एक वैधानिक निकाय है, जिसे वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (Wildlife (Protection) Act, 1972) के तहत स्थापित किया गया है। इसका मुख्य कार्य देश में बाघ संरक्षण को मजबूत करना है।
  • जनहित याचिका (PIL): यह भारतीय न्यायपालिका में एक तंत्र है जो सार्वजनिक हित के मामलों में अदालतों को हस्तक्षेप करने की अनुमति देता है, भले ही याचिकाकर्ता सीधे प्रभावित न हो।
  • यथास्थिति (Status Quo): यह एक कानूनी शब्द है जिसका अर्थ है ‘वर्तमान स्थिति’ या ‘चीजें जैसी हैं वैसी ही बनी रहें’। न्यायालय अक्सर विवादित संपत्ति या स्थिति के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश देते हैं ताकि आगे कोई बदलाव न हो।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
मानस राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व असम में स्थित एक महत्वपूर्ण संरक्षित क्षेत्र, जो भूटान के साथ सीमा साझा करता है।
यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल इसकी अद्वितीय जैव विविधता और पारिस्थितिक महत्व को दर्शाता है, अंतर्राष्ट्रीय संरक्षण प्रयासों को आकर्षित करता है।
अतिक्रमण का मुद्दा संरक्षित क्षेत्र की अखंडता और वन्यजीवों के आवास के लिए गंभीर खतरा, विशेषकर कोर क्षेत्रों में।
गौहाटी उच्च न्यायालय का हस्तक्षेप न्यायपालिका द्वारा पर्यावरण संरक्षण और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम।
जनहित याचिका (PIL) नागरिक समाज और पर्यावरण कार्यकर्ताओं द्वारा सार्वजनिक हित के मुद्दों पर न्यायिक राहत मांगने का एक प्रभावी माध्यम।

महत्व

पर्यावरण और पारिस्थितिकी

  • मानस टाइगर रिजर्व में अतिक्रमण से बाघों और अन्य लुप्तप्राय प्रजातियों के आवास को खतरा है, जिससे जैव विविधता का नुकसान हो सकता है।
  • यह क्षेत्र एक महत्वपूर्ण वन्यजीव गलियारा है, और अतिक्रमण से वन्यजीवों की आवाजाही बाधित होती है, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ सकता है।
  • वन क्षेत्रों का विनाश जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को बढ़ाता है और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं को प्रभावित करता है।

शासन और कानून का शासन

  • उच्च न्यायालय का आदेश यह सुनिश्चित करता है कि कानून का शासन कायम रहे और संरक्षित क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगे।
  • यह मामला सरकारी विभागों और स्वायत्त परिषदों (जैसे BTC) के बीच समन्वय की कमी को उजागर करता है, जो संरक्षण प्रयासों को कमजोर करता है।
  • जनहित याचिकाएं (PIL) नागरिकों को पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार की जवाबदेही तय करने का अवसर प्रदान करती हैं।

सामाजिक और आर्थिक

  • अतिक्रमण अक्सर स्थानीय समुदायों की आजीविका और भूमि अधिकारों से जुड़ा होता है, जिससे सामाजिक-आर्थिक तनाव पैदा हो सकता है।
  • संरक्षित क्षेत्रों में पर्यटन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ होता है, लेकिन अतिक्रमण से पर्यटन क्षमता प्रभावित हो सकती है।
  • अवैध खेती और अन्य गतिविधियों से वन संसाधनों का अत्यधिक दोहन होता है, जिससे भविष्य की पीढ़ियों के लिए उनकी उपलब्धता कम हो जाती है।

चुनौतियाँ

1. अतिक्रमण का प्रबंधन

  • संरक्षित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर और लंबे समय से चले आ रहे अतिक्रमण को हटाना एक जटिल प्रक्रिया है, जिसमें सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियाँ शामिल हैं।
  • अतिक्रमणकारियों के पुनर्वास और वैकल्पिक आजीविका के अवसर प्रदान करने की आवश्यकता है, ताकि उन्हें विस्थापित होने से रोका जा सके।

2. अंतर-विभागीय समन्वय

  • कृषि विभाग जैसे विभिन्न सरकारी विभागों और बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद (BTC) जैसी स्वायत्त संस्थाओं के बीच समन्वय की कमी संरक्षण प्रयासों को बाधित करती है।
  • वन विभाग और स्थानीय प्रशासन के बीच प्रभावी सहयोग सुनिश्चित करना आवश्यक है ताकि अतिक्रमण को रोका जा सके और मौजूदा अतिक्रमण को हटाया जा सके।

3. कर्मचारियों की कमी और क्षमता निर्माण

  • टाइगर रिजर्व में कर्मचारियों की कमी प्रभावी निगरानी और प्रवर्तन में बाधा डालती है, जिससे अतिक्रमण को रोकना मुश्किल हो जाता है।
  • वन अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए क्षमता निर्माण और आधुनिक उपकरणों का प्रावधान आवश्यक है ताकि वे अपने कर्तव्यों का प्रभावी ढंग से पालन कर सकें।

4. कानूनी और नीतिगत ढाँचा

  • अतिक्रमण से संबंधित कानूनों और नीतियों का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करना एक चुनौती है, खासकर जब इसमें सरकारी संस्थाएं शामिल हों।
  • संरक्षित क्षेत्रों के लिए भूमि उपयोग योजनाओं और प्रबंधन रणनीतियों को मजबूत करना आवश्यक है ताकि भविष्य में अतिक्रमण को रोका जा सके।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
मानस टाइगर रिजर्व में अतिक्रमण जैव विविधता का नुकसान, वन्यजीव आवास का विनाश, मानव-वन्यजीव संघर्ष में वृद्धि।
कोकिलाबाड़ी बीज फार्म द्वारा भूमि का उपयोग सरकारी संस्था द्वारा ही संरक्षित क्षेत्र में अवैध कब्जा, कानून के शासन का उल्लंघन।
कर्मचारियों की कमी प्रभावी निगरानी और प्रवर्तन में बाधा, अतिक्रमण को रोकने और हटाने में अक्षमता।
विभिन्न विभागों के बीच समन्वय का अभाव संरक्षण प्रयासों को कमजोर करना, नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन में बाधा।
जनहित याचिका (PIL) न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता को दर्शाता है जब कार्यकारी निकाय अपने कर्तव्यों का पालन करने में विफल रहते हैं।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA)

आगे की राह

  • अतिक्रमण वाले क्षेत्रों की पहचान के लिए नवीनतम भू-स्थानिक तकनीक (Geospatial technology) का उपयोग करते हुए एक व्यापक सर्वेक्षण किया जाए।
  • अतिक्रमणकारियों, विशेषकर सरकारी संस्थाओं द्वारा किए गए अतिक्रमण को हटाने के लिए एक समयबद्ध कार्य योजना विकसित की जाए और उसे सख्ती से लागू किया जाए।
  • वन विभाग, स्थानीय प्रशासन, बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद (BTC) और अन्य संबंधित विभागों के बीच प्रभावी समन्वय तंत्र स्थापित किया जाए।
  • मानस टाइगर रिजर्व में कर्मचारियों की कमी को दूर किया जाए और उन्हें अतिक्रमण से निपटने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण और उपकरण प्रदान किए जाएं।
  • स्थानीय समुदायों को पर्यावरण संरक्षण के महत्व के बारे में शिक्षित किया जाए और उन्हें वैकल्पिक आजीविका के अवसर प्रदान किए जाएं ताकि वे अतिक्रमण से दूर रहें।
  • अतिक्रमण के मामलों में त्वरित और प्रभावी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि भविष्य में ऐसे कृत्यों को रोका जा सके।
  • संरक्षित क्षेत्रों के लिए एक मजबूत भूमि उपयोग योजना और प्रबंधन रणनीति विकसित की जाए, जिसमें अतिक्रमण की रोकथाम और निगरानी के उपाय शामिल हों।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

मानस राष्ट्रीय उद्यान · बाघ अभयारण्य · अतिक्रमण · गौहाटी उच्च न्यायालय · जनहित याचिका · पर्यावरण संरक्षण · जैव विविधता · वन्यजीव संरक्षण अधिनियम · यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल · बोधोलैंड प्रादेशिक परिषद · राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण · पारिस्थितिक संतुलन

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और सुधार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A(g)’, ‘note’: ‘वन्यजीवों की रक्षा का कर्तव्य’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 226’, ‘note’: ‘उच्च न्यायालय की रिट जारी करने की शक्ति’}

अवधारणा प्रवाह

मानस टाइगर रिजर्व में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण  →  पर्यावरण कार्यकर्ता द्वारा जनहित याचिका (PIL) दायर  →  गौहाटी उच्च न्यायालय द्वारा ‘यथास्थिति’ का आदेश  →  अतिक्रमण हटाने और भविष्य में रोकने का निर्देश  →  संरक्षित क्षेत्र की अखंडता और जैव विविधता का संरक्षण

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मानस राष्ट्रीय उद्यान एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है।
2. यह असम में स्थित है और भूटान के साथ सीमा साझा करता है।
3. राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) भारत में बाघ संरक्षण के लिए एक सांविधिक निकाय है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि मानस राष्ट्रीय उद्यान वास्तव में एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है। कथन 2 भी सही है क्योंकि यह असम में स्थित है और भूटान के साथ अपनी सीमा साझा करता है। कथन 3 भी सही है क्योंकि NTCA वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत गठित एक सांविधिक निकाय है।

Q2. जनहित याचिका (PIL) के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
1. जनहित याचिका केवल पीड़ित पक्ष द्वारा ही दायर की जा सकती है।
2. यह न्यायिक सक्रियता का एक उपकरण है जिसने न्याय तक पहुंच को आसान बनाया है।
3. जनहित याचिका के माध्यम से, न्यायालय सार्वजनिक महत्व के मामलों में स्वतः संज्ञान ले सकता है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 2 और 3 — कथन 1 गलत है क्योंकि जनहित याचिका किसी भी व्यक्ति या संगठन द्वारा दायर की जा सकती है जो सार्वजनिक हित में कार्य कर रहा हो, न कि केवल पीड़ित पक्ष द्वारा। कथन 2 सही है क्योंकि जनहित याचिका न्यायिक सक्रियता का एक महत्वपूर्ण उपकरण है। कथन 3 भी सही है क्योंकि न्यायालय जनहित याचिका के माध्यम से या स्वयं सार्वजनिक महत्व के मामलों में स्वतः संज्ञान ले सकता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ मानस राष्ट्रीय उद्यान में अतिक्रमण के हालिया मामले के आलोक में, भारत में संरक्षित क्षेत्रों के समक्ष आने वाली प्रमुख चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इन चुनौतियों से निपटने में न्यायिक हस्तक्षेप की भूमिका पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** मानस राष्ट्रीय उद्यान में अतिक्रमण के हालिया मामले का संक्षिप्त उल्लेख करते हुए भारत में संरक्षित क्षेत्रों के महत्व और उनके समक्ष चुनौतियों का परिचय दें।
2. **संरक्षित क्षेत्रों के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ:**
* **अतिक्रमण:** कृषि, आवास और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए भूमि पर अवैध कब्जा (मानस मामले का उदाहरण)।
* **मानव-वन्यजीव संघर्ष:** संरक्षित क्षेत्रों के पास बढ़ती मानव आबादी के कारण संघर्ष।
* **अवैध शिकार और वन्यजीव व्यापार:** बाघ, हाथी आदि जैसी प्रजातियों के लिए खतरा।
* **संसाधनों का अत्यधिक दोहन:** वन उत्पादों, जल और खनिजों का अवैध निष्कर्षण।
* **पर्याप्त स्टाफ और धन की कमी:** वन विभागों में कर्मचारियों की कमी और वित्तीय संसाधनों का अभाव।
* **जलवायु परिवर्तन:** आवासों का विखंडन और प्रजातियों पर प्रतिकूल प्रभाव।
* **शासन और प्रबंधन के मुद्दे:** विभिन्न सरकारी विभागों के बीच समन्वय की कमी, भ्रष्टाचार।
3. **न्यायिक हस्तक्षेप की भूमिका:**
* **जनहित याचिका (PIL) का महत्व:** पर्यावरण संरक्षण के लिए एक शक्तिशाली उपकरण (गौहाटी उच्च न्यायालय के आदेश का संदर्भ)।
* **अतिक्रमण हटाने के निर्देश:** न्यायालयों द्वारा अवैध कब्जों को हटाने और यथास्थिति बनाए रखने के आदेश।
* **नीतिगत सुधारों को बढ़ावा:** न्यायालयों द्वारा सरकारों को पर्यावरण नीतियों को मजबूत करने और लागू करने के निर्देश।
* **जवाबदेही तय करना:** संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना।
* **पर्यावरण कानूनों का प्रवर्तन:** वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, वन (संरक्षण) अधिनियम जैसे कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करना।
4. **निष्कर्ष:** संरक्षित क्षेत्रों के संरक्षण में एक समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दें, जिसमें मजबूत कानूनी ढांचा, प्रभावी प्रवर्तन, सामुदायिक भागीदारी और न्यायिक सक्रियता शामिल हो।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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