28 Oct गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग में विशेष अभियान 6: डिजिटलीकरण एवं स्वच्छता पर जोर
✎ विशेष अभियान 6 के अंतर्गत भौतिक फाइलों का डिजिटलीकरण (लगभग 90 प्रतिशत पूर्ण), अभिलेख प्रतिधारण योजना के अनुसार निस्तारण और डिजिटल कार्य-संस्कृति को बढ़ावा देना प्रमुख उद्देश्य है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन (Governance): ई-गवर्नेंस, प्रशासनिक सुधार और सार्वजनिक सेवा वितरण में डिजिटल पहल | GS Paper II — राजव्यवस्था (Polity): संघ की राजभाषा से संबंधित संवैधानिक उपबंध (अनुच्छेद 343 से 351) और राजभाषा नीति का क्रियान्वयन
- Prelims: राजभाषा विभाग (Department of Official Language), गृह मंत्रालय, अनुच्छेद 343 — संघ की राजभाषा, अनुच्छेद 344 — राजभाषा आयोग और संसदीय समिति, अनुच्छेद 351 — हिन्दी भाषा के विकास का दायित्व, राजभाषा अधिनियम, 1963 और राजभाषा नियम, 1976 (क्षेत्र क, ख और ग), लोक अभिलेख अधिनियम, 1993 (Public Records Act, 1993), राष्ट्रीय अभिलेखागार (National Archives of India), ई-ऑफिस (e-Office) और डिजिटल इंडिया कार्यक्रम
- Essay: कागज़विहीन प्रशासन की ओर: सुशासन में अभिलेखों के डिजिटलीकरण की भूमिका और चुनौतियाँ, सरकारी कार्यालयों में कार्य-संस्कृति का रूपांतरण: स्वच्छता, दक्षता और पारदर्शिता का संबंध
त्वरित पुनरावृत्ति: विशेष अभियान 6 के अंतर्गत भौतिक फाइलों का डिजिटलीकरण (लगभग 90 प्रतिशत पूर्ण), अभिलेख प्रतिधारण योजना के अनुसार निस्तारण और डिजिटल कार्य-संस्कृति को बढ़ावा देना प्रमुख उद्देश्य है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग ने विशेष अभियान 6 के अंतर्गत कार्यालयों की कार्यप्रणाली को सुव्यवस्थित, पारदर्शी और दक्ष बनाने के लिए तीन मुख्य कार्य चिह्नित किए हैं: लंबित मामलों का समयबद्ध निस्तारण, भौतिक फाइलों का डिजिटलीकरण और कार्यालय परिसरों की स्वच्छता। सूचना के अनुसार विभाग में भौतिक फाइलों की स्कैनिंग कर उन्हें ई-फाइल में बदलने का कार्य उल्लेखनीय प्रगति पर है और अब तक लगभग 90 प्रतिशत भौतिक फाइलों को ई-फाइल में परिवर्तित किया जा चुका है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), गृह मंत्रालय (MHA) और राष्ट्रपति सचिवालय से प्राप्त संदर्भों के निपटारे को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया है। सभी अनुभागों और अधीनस्थ कार्यालयों को भौतिक फाइलों की समीक्षा करने, उपयोगी अभिलेखों को डिजिटल रूप में संरक्षित करने और निर्धारित अभिलेख प्रतिधारण योजना (Record Retention Plan) के अनुसार पुरानी फाइलों का निस्तारण करने के निर्देश दिए गए हैं। यह पहल 28 अक्टूबर 2026 को पीआईबी (PIB) के माध्यम से सार्वजनिक की गई।
पृष्ठभूमि
- संविधान के भाग XVII (अनुच्छेद 343 से 351) में संघ की राजभाषा, राजभाषा आयोग और हिन्दी के विकास से संबंधित व्यवस्था की गई है। सरकारी कार्यों में हिन्दी के प्रयोग को बढ़ाने का लक्ष्य इन्हीं उपबंधों से जुड़ा है।
- राजभाषा अधिनियम, 1963 ने संघ के सरकारी कार्यों में अंग्रेज़ी के प्रयोग को एक सीमा तक जारी रखने की व्यवस्था की और राजभाषा नियम, 1976 के द्वारा देश को तीन क्षेत्रों (क, ख और ग) में बाँटकर हिन्दी के प्रयोग के लिए अलग-अलग दायित्व निर्धारित किए गए।
- लोक अभिलेख अधिनियम, 1993 केंद्र सरकार के अभिलेखों के प्रबंधन, संरक्षण और निस्तारण से संबंधित विधिक ढांचा प्रदान करता है। इसी ढांचे में अभिलेखों की सुरक्षा और उनके उचित निपटान की व्यवस्था है।
- भारत में ई-गवर्नेंस की दिशा में राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना (NeGP) (2006) और डिजिटल इंडिया कार्यक्रम (2015) प्रमुख पहलें रही हैं। सरकारी कार्यालयों में ई-ऑफिस (e-Office) जैसे मंचों के माध्यम से फाइल प्रबंधन को कागज़ रहित बनाने के प्रयास चल रहे हैं।
- भारी मात्रा में जमा भौतिक फाइलें भंडारण की जगह घेरती हैं, खोजने में समय लगता है और उनके रख-रखाव में व्यय होता है। इसी समस्या के समाधान के लिए अभिलेख प्रतिधारण अनुसूची का पालन और पुरानी फाइलों का व्यवस्थित निस्तारण आवश्यक माना जाता है।
विशेष अभियान 6 और अभिलेख प्रबंधन का डिजिटल ढांचा क्या है?
- विशेष अभियान 6 राजभाषा विभाग द्वारा चलाई जा रही एक प्रशासनिक पहल है, जिसका उद्देश्य कार्यालयों की प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनाना है।
- डिजिटलीकरण (Digitisation) का अर्थ है भौतिक अभिलेखों को स्कैनिंग द्वारा इलेक्ट्रॉनिक रूप में बदलना। इससे फाइलों तक पहुँच सरल होती है और कागज़ी अभिलेखों पर निर्भरता घटती है।
- ई-फाइल (e-File) वह डिजिटल फाइल है जिसमें दस्तावेज़, टिप्पणियाँ और कार्रवाई का रिकॉर्ड इलेक्ट्रॉनिक रूप में सुरक्षित रहता है।
- अभिलेख प्रतिधारण योजना (Record Retention Plan) वह अनुसूची है जिसमें हर प्रकार के अभिलेख को कितने समय तक रखना है और कब उसका निस्तारण करना है, यह तय होता है। पुरानी फाइलों का निस्तारण इसी के अनुसार किया जाता है।
- निस्तारण का अर्थ केवल फाइल हटाना नहीं है, बल्कि अनुपयोगी अभिलेखों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार समाप्त करना है, जबकि उपयोगी अभिलेखों को डिजिटल रूप में संरक्षित किया जाता है।
- लंबित मामलों का समयबद्ध निस्तारण और प्रधानमंत्री कार्यालय, गृह मंत्रालय तथा राष्ट्रपति सचिवालय से प्राप्त संदर्भों को प्राथमिकता देना प्रशासनिक उत्तरदायित्व और सेवा-वितरण की गुणवत्ता से जुड़ा पहलू है।
- स्वच्छता, व्यवस्थित कार्यस्थल और डिजिटल कार्य-संस्कृति को बढ़ावा देना इस अभियान का व्यापक लक्ष्य है। इसका संबंध सार्वजनिक प्रशासन में दक्षता और पारदर्शिता के सिद्धांतों से है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| विशेष अभियान 6 (Vishesh Abhiyan 6) | गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग (Department of Official Language) द्वारा चलाया जा रहा एक केंद्रित अभियान, जिसमें लंबित मामलों का निस्तारण, अभिलेख प्रबंधन, डिजिटलीकरण और स्वच्छता को एक साथ लक्ष्य बनाया गया है। |
| भौतिक फाइलों का ई-फाइल में रूपांतरण | लगभग 90 प्रतिशत भौतिक फाइलों को स्कैन कर ई-फाइल में बदला जा चुका है, जिससे फाइलों तक पहुँच सरल हुई है और कागज़ी अभिलेखों पर निर्भरता घटी है। |
| लंबित संदर्भों की प्राथमिकता | प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), गृह मंत्रालय (MHA) और राष्ट्रपति सचिवालय से प्राप्त संदर्भों के निपटारे को प्राथमिकता दी गई है, जिससे उच्च स्तरीय मामलों में समयबद्धता आती है। |
| अभिलेख प्रतिधारण योजना (Record Retention Plan) | इस योजना के अनुसार पुरानी और उपयोगहीन फाइलों का निस्तारण किया जाता है, जिससे अभिलेखों का संचय नियंत्रित रहता है और उपयोगी अभिलेख सुरक्षित रहते हैं। |
| कार्यालय परिसरों की स्वच्छता | अनावश्यक कागज़ी अभिलेखों को हटाने से कार्यस्थल पर सुव्यवस्था बनी है और स्वच्छ, व्यवस्थित कार्य-संस्कृति को बढ़ावा मिला है। |
| अधीनस्थ कार्यालयों के लिए निर्देश | सभी अनुभागों और अधीनस्थ कार्यालयों को भौतिक फाइलों की समीक्षा, उपयोगी अभिलेखों के डिजिटल संरक्षण और पुरानी फाइलों के निस्तारण के निर्देश दिए गए हैं, जिससे नीति का समान क्रियान्वयन सुनिश्चित होता है। |
महत्व
प्रशासनिक दक्षता
- फाइलों की खोज और उन तक पहुँच आसान होने से निर्णय-प्रक्रिया की गति बढ़ती है।
- लंबित मामलों का समयबद्ध निस्तारण सरकारी कार्यों में जवाबदेही को सुदृढ़ करता है।
- कार्यप्रणाली को सरल और प्रभावी बनाने का लक्ष्य सीधे शासन की गुणवत्ता से जुड़ा है।
अभिलेख प्रबंधन और पारदर्शिता
- डिजिटल अभिलेख खोज, प्रमाणीकरण और लेखापरीक्षा को सरल बनाते हैं।
- सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (Right to Information Act, 2005) के अंतर्गत अभिलेखों को सूचीबद्ध और अनुक्रमित रखने की अपेक्षा को व्यवहार में सहायता मिलती है।
- अभिलेखों के सुरक्षित संरक्षण से संस्थागत स्मृति बनी रहती है।
संसाधन उपयोग और कार्य-संस्कृति
- भौतिक भंडारण की जगह और रख-रखाव का व्यय घटता है।
- कागज़ पर निर्भरता कम होने से संसाधनों के उपयोग में मितव्ययिता आती है।
- स्वच्छ और डिजिटल कार्य-संस्कृति सरकारी तंत्र की आधुनिकता का संकेत देती है।
चुनौतियाँ
1. डिजिटल अभिलेखों की प्रामाणिकता और सुरक्षा
- स्कैन की गई प्रति की मूल प्रति से प्रामाणिकता कैसे सिद्ध हो, यह एक व्यावहारिक प्रश्न है।
- ई-फाइल प्रणाली पर साइबर सुरक्षा, पहुँच-नियंत्रण और डेटा के बैकअप की आवश्यकता है।
- सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 4 इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों को कानूनी मान्यता देती है, पर उनकी विश्वसनीयता बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: साइबर सुरक्षा, ई-शासन और डिजिटल अवसंरचना
2. निस्तारण में कानूनी और प्रक्रियागत सावधानी
- पुरानी फाइलों का निस्तारण अभिलेख प्रतिधारण योजना और लोक अभिलेख अधिनियम, 1993 (Public Records Act, 1993) के प्रावधानों के अनुरूप होना चाहिए।
- ऐतिहासिक या नीतिगत महत्व के अभिलेख गलती से नष्ट न हों, इसके लिए पहचान की स्पष्ट कसौटी आवश्यक है।
- राष्ट्रीय अभिलेखागार (National Archives of India) जैसे संस्थानों के साथ समन्वय से निस्तारण का निर्णय वैज्ञानिक बनता है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: प्रशासनिक सुधार, लोक सेवा प्रक्रिया और अभिलेख प्रबंधन
3. पुराने ढाँचे और कार्मिक-क्षमता की सीमा
- लंबे समय से चली आ रही कागज़ी कार्य-पद्धति में बदलाव के लिए कर्मचारियों का प्रशिक्षण आवश्यक है।
- स्कैनिंग और वर्गीकरण का कार्य बड़े पैमाने पर श्रम और समय माँगता है, जिससे नियमित कार्य प्रभावित हो सकता है।
- अधीनस्थ कार्यालयों में तकनीकी संसाधनों की असमानता से एकरूप क्रियान्वयन कठिन होता है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: लोक सेवा में क्षमता निर्माण और प्रशासनिक सुधार
4. राजभाषा नीति के साथ समन्वय
- राजभाषा विभाग की भूमिका में अभिलेखों का द्विभाषी स्वरूप और हिन्दी में कार्य का प्रोत्साहन शामिल है।
- डिजिटल अभिलेखों में हिन्दी और अंग्रेज़ी दोनों रूपों के मानकीकृत प्रबंधन की व्यवस्था आवश्यक है।
- राजभाषा अधिनियम, 1963 के प्रावधानों का पालन डिजिटल प्रणाली में भी सुनिश्चित होना चाहिए।
यूपीएससी लिंक: GS-2: संवैधानिक प्रावधान, राजभाषा नीति और भाषायी प्रशासन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| प्रामाणिकता | स्कैन और ई-फाइल की वैधता तथा मूल अभिलेख से तुलना की प्रक्रिया स्पष्ट होनी चाहिए। |
| डेटा सुरक्षा | डिजिटल अभिलेखों पर अनधिकृत पहुँच और डेटा हानि का जोखिम बना रहता है। |
| गलत निस्तारण | उपयोगी या ऐतिहासिक अभिलेख भी पुरानी फाइलों के साथ नष्ट होने का खतरा रहता है। |
| क्षमता और संसाधन | सभी अधीनस्थ कार्यालयों में प्रशिक्षित कर्मचारी और तकनीकी ढाँचा समान रूप से उपलब्ध नहीं हो सकता। |
| निरंतरता | अभियान की समाप्ति के बाद भी डिजिटल प्रणाली और नियमित समीक्षा जारी रहना आवश्यक है। |
आगे की राह
- डिजिटल अभिलेखों की प्रामाणिकता के लिए स्कैनिंग, सत्यापन और ऑडिट ट्रेल की मानक प्रक्रिया तय की जाए।
- ई-फाइल प्रणाली में साइबर सुरक्षा, पहुँच-नियंत्रण और नियमित बैकअप की व्यवस्था सुदृढ़ की जाए।
- पुरानी फाइलों के निस्तारण से पहले ऐतिहासिक और नीतिगत महत्व के अभिलेखों की पहचान हेतु स्पष्ट मानदंड बनाए जाएँ।
- अभिलेख प्रतिधारण योजना की समीक्षा नियमित अंतराल पर हो और उसे बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप अद्यतन किया जाए।
- अधीनस्थ कार्यालयों के कर्मचारियों के लिए अभिलेख प्रबंधन और डिजिटल उपकरणों का प्रशिक्षण अनिवार्य किया जाए।
- लंबित संदर्भों की निगरानी के लिए समयसीमा और प्रगति-रिपोर्टिंग की प्रणाली अपनाई जाए।
- राजभाषा नीति के अनुरूप द्विभाषी डिजिटल अभिलेख मानकों को प्रणाली के डिज़ाइन में शामिल किया जाए।
- अभियान के परिणामों का स्वतंत्र मूल्यांकन कर सर्वोत्तम पद्धतियों को अन्य विभागों तक पहुँचाया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
ई-फाइल (e-File) · अभिलेख प्रबंधन (Record Management) · अभिलेख प्रतिधारण योजना (Record Retention Plan) · लोक अभिलेख अधिनियम, 1993 (Public Records Act, 1993) · सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (Right to Information Act, 2005) · सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (Information Technology Act, 2000) · डिजिटल इंडिया (Digital India) · ई-शासन (e-Governance) · डिजिटल अभिलेखों की प्रामाणिकता · नौकरशाही और लिखित दस्तावेज़ (Weberian Bureaucracy) · राष्ट्रीय अभिलेखागार (National Archives of India) · कार्यालयी दक्षता और पारदर्शिता
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 343: संघ की राजभाषा देवनागरी लिपि में हिन्दी, राजभाषा नीति का आधार।
- अनुच्छेद 351: हिन्दी के प्रसार और विकास का संघ का कर्तव्य।
- अनुच्छेद 77: भारत सरकार के कार्य-संचालन और फाइलों की प्रक्रिया का संवैधानिक आधार।
अवधारणा प्रवाह
भौतिक फाइलों की समीक्षा और उपयोगिता का आकलन → उपयोगी अभिलेखों की स्कैनिंग और ई-फाइल में रूपांतरण → लंबित संदर्भों (PMO, MHA, राष्ट्रपति सचिवालय) का प्राथमिकता से निस्तारण → अभिलेख प्रतिधारण योजना के अनुसार पुरानी फाइलों का निस्तारण → कागज़ी भंडार में कमी, कार्यालय परिसर की स्वच्छता और सुव्यवस्था → सुलभ अभिलेख, तीव्र निर्णय और स्वच्छ, डिजिटल कार्य-संस्कृति
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अनुच्छेद 343 के अंतर्गत देवनागरी लिपि में लिखित हिन्दी संघ की राजभाषा है।
2. अनुच्छेद 344 के अंतर्गत राजभाषा के संबंध में संसद की एक समिति का प्रावधान किया गया है, जिसमें कुल 30 सदस्य होते हैं।
3. अनुच्छेद 348 के अनुसार उच्चतम न्यायालय की समस्त कार्यवाही की भाषा हिन्दी होगी।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: अनुच्छेद 343 देवनागरी लिपि में हिन्दी को संघ की राजभाषा घोषित करता है। कथन 2 सही है: अनुच्छेद 344 के अंतर्गत राजभाषा आयोग तथा संसद की 30 सदस्यीय समिति (20 लोकसभा और 10 राज्यसभा से) का प्रावधान है। कथन 3 गलत है: अनुच्छेद 348 के अनुसार उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों की कार्यवाही की भाषा अंग्रेज़ी ही रहती है, जब तक संसद विधि द्वारा अन्यथा उपबंध न करे।
Q2. अभिकथन (A) : सरकारी कार्यालयों की डिजिटल ई-फाइलें विधिक रूप से मान्य अभिलेख मानी जा सकती हैं।
कारण (R) : सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 4 के अंतर्गत यदि सूचना इलेक्ट्रॉनिक रूप में उपलब्ध हो और बाद के संदर्भ के लिए प्रयोग योग्य हो, तो वह लिखित रूप की आवश्यकता पूरी करती है।
सही उत्तर चुनिए:
- (a) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है
- (b) A और R दोनों सही हैं, किंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है
- (c) A सही है, किंतु R गलत है
- (d) A गलत है, किंतु R सही है
उत्तर: (a) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है — सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 4 इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों को विधिक मान्यता देती है, जब वे बाद के संदर्भ हेतु सुलभ और प्रयोग योग्य हों। इसी विधिक मान्यता के कारण डिजिटल ई-फाइलें वैध अभिलेख मानी जाती हैं, अतः R, A की सही व्याख्या है।
Q3. निम्नलिखित सुमेलन पर विचार कीजिए:
सूची-I (अधिनियम/प्रावधान)
A. लोक अभिलेख अधिनियम, 1993
B. सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005
C. सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000
D. राजभाषा अधिनियम, 1963
सूची-II (विषय)
i. केंद्र सरकार के सार्वजनिक अभिलेखों का प्रबंधन और संरक्षण
ii. सार्वजनिक प्राधिकारियों द्वारा अभिलेखों का सूचीकरण और अनुक्रमण
iii. इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों और डिजिटल हस्ताक्षर को विधिक मान्यता
iv. केंद्र सरकार के कार्यों में हिन्दी और अंग्रेज़ी का प्रयोग
सही सुमेलन का चयन कीजिए:
- A-i, B-ii, C-iii, D-iv
- A-ii, B-i, C-iv, D-iii
- A-iii, B-iv, C-i, D-ii
- A-iv, B-iii, C-ii, D-i
उत्तर: A-i, B-ii, C-iii, D-iv — लोक अभिलेख अधिनियम, 1993 केंद्र सरकार और संघ राज्यक्षेत्रों के सार्वजनिक अभिलेखों के प्रबंधन से संबंधित है (A-i)। सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 4(1)(क) अभिलेखों के सूचीकरण और अनुक्रमण की बाध्यता देती है (B-ii)। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों को मान्यता देता है (C-iii)। राजभाषा अधिनियम, 1963 सरकारी कार्यों में हिन्दी और अंग्रेज़ी के प्रयोग से संबंधित है (D-iv)।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भौतिक फाइलों के डिजिटलीकरण को कार्यालयी दक्षता और पारदर्शिता का सशक्त साधन माना जाता है, किंतु दीर्घकालिक अभिलेख संरक्षण की चुनौतियाँ भी उतनी ही वास्तविक हैं। भारत में लोक अभिलेख प्रबंधन की विधिक एवं संस्थागत व्यवस्था का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही बताइए कि डिजिटल अभिलेखों की प्रामाणिकता और दीर्घकालिक सुलभता सुनिश्चित करने के लिए कौन-से उपाय आवश्यक हैं। (15 Marks)
रूपरेखा: 1. भूमिका: राजभाषा विभाग (गृह मंत्रालय) के विशेष अभियान 6 में लगभग 90 प्रतिशत भौतिक फाइलों का ई-फाइल में रूपांतरण, लंबित संदर्भों (PMO, MHA, राष्ट्रपति सचिवालय) का निस्तारण, तथा अभिलेख प्रतिधारण योजना के अनुसार पुरानी फाइलों का निस्तारण, इसे आधार बनाएँ। मैक्स वेबर के आदर्श नौकरशाही मॉडल में लिखित अभिलेख (Akten) को प्रशासन की रीढ़ माना गया है, इसका संदर्भ दें।
2. विधिक ढाँचा: (क) लोक अभिलेख अधिनियम, 1993 (केंद्र सरकार के सार्वजनिक अभिलेखों का प्रबंधन, राष्ट्रीय अभिलेखागार की भूमिका; यह संस्था संस्कृति मंत्रालय के अधीन है); (ख) सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 4(1)(क) (अभिलेखों का सूचीकरण और अनुक्रमण); (ग) सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 4 (इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों की विधिक मान्यता) और धारा 5 (डिजिटल हस्ताक्षर); (घ) भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65B का स्थान अब भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (भारतीय न्याय संहिता के साथ लागू) की धारा 63 ने लिया है; इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य की स्वीकार्यता का उल्लेख करें; (ङ) डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 (व्यक्तिगत डेटा युक्त फाइलों की सुरक्षा)।
3. संस्थागत ढाँचा: डिजिटल इंडिया कार्यक्रम (2015); ई-ऑफिस प्रणाली (राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र द्वारा विकसित); मंत्रालय का कार्यालय प्रक्रिया नियमावली (Manual of Office Procedure); द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (2005) की ई-शासन और नागरिक-केंद्रित प्रशासन संबंधी अनुशंसाएँ।
4. समालोचनात्मक विश्लेषण: (क) दक्षता के पक्ष में तर्क: त्वरित पुनर्प्राप्ति, स्थान की बचत, समयबद्ध निस्तारण, पारदर्शिता; (ख) चुनौतियाँ: डेटा की भंगुरता और फॉर्मेट अप्रचलन (obsolescence), साइबर सुरक्षा और अनधिकृत पहुँच, स्कैनिंग में प्रामाणिकता का प्रश्न, प्रशिक्षण और संसाधनों की कमी, मूल भौतिक अभिलेखों का ऐतिहासिक मूल्य; (ग) डिजिटल विभाजन और सुलभता के प्रश्न; (घ) ‘निस्तारण’ बनाम ‘संरक्षण’ का द्वंद्व: अभिलेख प्रतिधारण योजना के अनुसार नष्ट करने की प्रक्रिया में ऐतिहासिक महत्व के अभिलेखों की पहचान कैसे हो।
5. उपाय: अभिलेखों का डिजिटल बैकअप और माइग्रेशन नीति; मानक फॉर्मेट अपनाना; डिजिटल हस्ताक्षर द्वारा प्रामाणिकता; स्थायी (permanent) अभिलेखों की पहचान हेतु स्पष्ट मानदंड; कर्मचारियों का क्षमता-विकास; साइबर सुरक्षा ढाँचा; राष्ट्रीय अभिलेखागार के साथ समन्वय।
6. निष्कर्ष: प्रशासनिक सुधार को केवल स्कैनिंग तक सीमित न रखकर विधिक, तकनीकी और ऐतिहासिक विवेक के संतुलन के रूप में देखना; संतुलित व्यवस्था की आवश्यकता पर बल।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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