13 Aug चित्तूर में हाथियों की बढ़ती आबादी से मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ा, जानिए कारण और समाधान
✎ मानव-हाथी संघर्ष एक गंभीर पारिस्थितिक और सामाजिक चुनौती है, जिसके समाधान के लिए आवास संरक्षण, गलियारा प्रबंधन, सामुदायिक भागीदारी और प्रभावी वन प्रबंधन रणनीतियों की आवश्यकता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव-विविधता | GS Paper III — आपदा प्रबंधन
- Prelims: मानव-हाथी संघर्ष, कौंडिन्य वन्यजीव अभयारण्य, कुम्की हाथी, हाथी गलियारे, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972, प्रोजेक्ट एलिफेंट
- Essay: विकास बनाम संरक्षण: एक स्थायी संतुलन की खोज, भारत में वन्यजीव संरक्षण की चुनौतियाँ और आगे की राह
त्वरित पुनरावृत्ति: मानव-हाथी संघर्ष एक गंभीर पारिस्थितिक और सामाजिक चुनौती है, जिसके समाधान के लिए आवास संरक्षण, गलियारा प्रबंधन, सामुदायिक भागीदारी और प्रभावी वन प्रबंधन रणनीतियों की आवश्यकता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
चित्तूर जिले में हाथियों की बढ़ती आबादी के कारण मानव-हाथी संघर्ष (Human-Elephant Conflict) में वृद्धि हुई है। पिछले एक दशक में 20 से अधिक हाथियों की बिजली के झटके से मौत हुई है, जबकि एक दर्जन से अधिक मानव हताहत हुए हैं। वन विभाग ने इस संघर्ष को कम करने के लिए कुम्की हाथियों (trained elephants) का उपयोग बढ़ा दिया है, जो इस जटिल समस्या के समाधान की तात्कालिकता को दर्शाता है।
पृष्ठभूमि
- लगभग 45 साल पहले, चित्तूर जिले के कुप्पम के पास एशियाई हाथी (Asian elephant) का फिर से दिखना एक चमत्कार माना जाता था, क्योंकि वे दो शताब्दियों से अधिक समय तक इस क्षेत्र से अनुपस्थित रहे थे।
- हाथियों की वापसी के बाद कौंडिन्य वन्यजीव अभयारण्य (Koundinya Wildlife Sanctuary) का निर्माण और सुदृढ़ीकरण किया गया, जो राज्य में हाथी संरक्षण का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया।
- वर्तमान में, 140 से अधिक निवासी और प्रवासी एशियाई हाथी चित्तूर से होकर गुजरते हैं, जिससे यह आंध्र प्रदेश का एकमात्र ऐसा परिदृश्य बन गया है जहाँ जंगली हाथियों की निरंतर उपस्थिति है।
- हाथी अब अभयारण्य की सीमाओं से बाहर निकलकर कृषि क्षेत्रों, आम और केले के बागानों में प्रवेश कर रहे हैं, जिससे फसलों का भारी नुकसान हो रहा है और किसानों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
- मुदुमलाई (Mudumalai) और बन्नेरघट्टा (Bannerghatta) जैसे दूर-दराज के क्षेत्रों से भी कई झुंड कौंडिन्य अभयारण्य और रायला हाथी गलियारे (Rayala Elephant Corridor) की ओर प्रवास करते हैं, जिससे संघर्ष की संभावना बढ़ जाती है।
- बिजली के झटके हाथियों की मृत्यु के सबसे दुखद कारणों में से एक बने हुए हैं, क्योंकि वे कृषि क्षेत्रों से गुजरते समय बिजली लाइनों और प्रतिष्ठानों के संपर्क में आते हैं।
मानव-हाथी संघर्ष क्या है?
- मानव-हाथी संघर्ष तब होता है जब मानव और हाथी एक ही स्थान और संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं, जिससे दोनों पक्षों को नकारात्मक परिणाम भुगतने पड़ते हैं।
- हाथियों के आवासों का अतिक्रमण, वनों की कटाई, कृषि विस्तार और बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं जैसे सड़क निर्माण, रेलवे लाइनें और नहरें इस संघर्ष के प्रमुख कारण हैं।
- हाथी अक्सर भोजन की तलाश में कृषि भूमि में प्रवेश करते हैं, जिससे फसलों को नुकसान होता है और किसानों को आर्थिक हानि होती है।
- इस संघर्ष के परिणामस्वरूप हाथियों और मनुष्यों दोनों की जान जा सकती है, साथ ही संपत्ति को भी नुकसान पहुँचता है।
- बिजली के झटके, अवैध शिकार, और मानव-निर्मित बाधाएँ हाथियों के लिए प्रमुख खतरे हैं, जबकि हाथियों के हमले मनुष्यों के लिए खतरा पैदा करते हैं।
- कुम्की हाथी प्रशिक्षित हाथी होते हैं जिनका उपयोग जंगली हाथियों को पकड़ने, उन्हें शांत करने या उन्हें मानव बस्तियों से दूर भगाने के लिए किया जाता है, ताकि मानव-हाथी संघर्ष को कम किया जा सके।
- हाथी गलियारे (Elephant corridors) वे भूमि खंड होते हैं जो हाथियों के विभिन्न आवासों को जोड़ते हैं, जिससे उन्हें सुरक्षित रूप से एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने में मदद मिलती है और मानव-हाथी संघर्ष कम होता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| चित्तूर में हाथियों की बढ़ती आबादी | यह संरक्षण प्रयासों की सफलता को दर्शाता है, लेकिन मानव-वन्यजीव संघर्ष को भी बढ़ाता है। |
| कौंडिन्य वन्यजीव अभयारण्य (Koundinya Wildlife Sanctuary) | यह आंध्र प्रदेश में हाथियों के संरक्षण का एक प्रमुख केंद्र है, जो पलामनेर और कुप्पम विधानसभा क्षेत्रों में फैला हुआ है। |
| कुम्की हाथी (Kumki elephants) | ये प्रशिक्षित हाथी हैं जिनका उपयोग मानव-हाथी संघर्ष को नियंत्रित करने और जंगली हाथियों को पकड़ने के लिए किया जाता है। |
| मानव-हाथी गलियारे | ये हाथियों के आवागमन के लिए महत्वपूर्ण मार्ग हैं, जैसे रायला हाथी गलियारा (Rayala Elephant Corridor), जो वन्यजीवों के लिए पारिस्थितिक कनेक्टिविटी बनाए रखते हैं। |
| विद्युत-आघात से हाथियों की मृत्यु | यह मानव-हाथी संघर्ष का एक दुखद परिणाम है, जहाँ कृषि क्षेत्रों में बिजली के तार हाथियों के लिए घातक बाधा बन जाते हैं। |
महत्व
पर्यावरण और पारिस्थितिकी
- चित्तूर में हाथियों की आबादी में वृद्धि पारिस्थितिक कनेक्टिविटी और आवास की उपलब्धता का संकेत देती है, जो वन्यजीव संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है।
- हाथी पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जैसे बीज फैलाव और वनस्पति प्रबंधन, जो जैव विविधता के लिए आवश्यक है।
सामाजिक
- मानव-हाथी संघर्ष से स्थानीय समुदायों, विशेषकर किसानों के लिए जान-माल का नुकसान होता है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका और सुरक्षा प्रभावित होती है।
- इस संघर्ष से स्थानीय लोगों और वन विभाग के बीच तनाव बढ़ सकता है, जिससे संरक्षण प्रयासों में बाधा आ सकती है।
प्रशासनिक और नीतिगत
- वन विभाग के लिए मानव-वन्यजीव संघर्ष का प्रबंधन एक बड़ी चुनौती है, जिसके लिए प्रभावी नीतियों, संसाधनों और प्रशिक्षित कर्मियों की आवश्यकता होती है।
- कुम्की हाथियों का उपयोग संघर्ष प्रबंधन के लिए एक रणनीति है, जो इस जटिल समस्या से निपटने के लिए नवीन दृष्टिकोणों की आवश्यकता को दर्शाता है।
चुनौतियाँ
1. मानव-वन्यजीव संघर्ष
- हाथियों की बढ़ती आबादी और उनके आवासों के अतिक्रमण के कारण मानव और हाथियों के बीच टकराव बढ़ रहा है।
- फसलों का नुकसान, मानव और हाथियों की मृत्यु संघर्ष के प्रमुख परिणाम हैं।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण संरक्षण, आपदा प्रबंधन
2. पर्यावास का विखंडन
- शहरीकरण, कृषि विस्तार और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के कारण हाथियों के प्राकृतिक आवास और गलियारे खंडित हो रहे हैं।
- यह हाथियों को भोजन और पानी की तलाश में मानव बस्तियों में प्रवेश करने के लिए मजबूर करता है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण
3. विद्युत-आघात से मृत्यु
- कृषि क्षेत्रों में असुरक्षित बिजली के तार और अवैध बिजली के बाड़ हाथियों के लिए घातक साबित हो रहे हैं।
- यह हाथियों की मृत्यु का एक प्रमुख कारण है और मानव जीवन के लिए भी खतरा पैदा करता है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण सुरक्षा, वन्यजीव संरक्षण
4. प्रभावी प्रबंधन रणनीतियों का अभाव
- संघर्ष को कम करने के लिए दीर्घकालिक और स्थायी समाधानों की कमी है, जिससे समस्या लगातार बनी हुई है।
- प्रौद्योगिकी और सामुदायिक भागीदारी का प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं किया जा रहा है।
यूपीएससी लिंक: शासन, विकास प्रक्रियाएं
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| बढ़ती हाथी आबादी | संरक्षण की सफलता के बावजूद, यह मानव-हाथी संघर्ष को बढ़ा रहा है। |
| फसलों का नुकसान | हाथियों द्वारा कृषि भूमि पर आक्रमण से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। |
| मानव और हाथियों की मृत्यु | विद्युत-आघात और अन्य टकरावों के कारण दोनों पक्षों को जान का नुकसान हो रहा है। |
| पर्यावास का विखंडन | विकास परियोजनाओं और कृषि विस्तार से हाथियों के प्राकृतिक गलियारे बाधित हो रहे हैं। |
| सीमित संसाधन | वन विभाग के पास मानव-हाथी संघर्ष के प्रबंधन के लिए पर्याप्त संसाधन और जनशक्ति की कमी है। |
आगे की राह
- हाथी गलियारों की पहचान और सुरक्षा सुनिश्चित करना, ताकि हाथियों को सुरक्षित आवागमन के लिए पर्याप्त स्थान मिल सके।
- कृषि क्षेत्रों में सुरक्षित और हाथी-प्रूफ बाड़ लगाने को बढ़ावा देना, और बिजली के तारों को भूमिगत करने या सुरक्षित ऊंचाई पर ले जाने पर विचार करना।
- स्थानीय समुदायों को मानव-हाथी संघर्ष प्रबंधन में शामिल करना और उन्हें हाथियों के व्यवहार के बारे में शिक्षित करना।
- फसल क्षति के लिए त्वरित और पर्याप्त मुआवजा प्रदान करना, ताकि किसानों का विश्वास और सहयोग प्राप्त किया जा सके।
- वन विभाग की क्षमता निर्माण करना, जिसमें अधिक प्रशिक्षित कर्मियों और आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करना शामिल है।
- हाथियों के व्यवहार का अध्ययन करने और संघर्ष के हॉटस्पॉट की पहचान करने के लिए प्रौद्योगिकी (जैसे जीपीएस ट्रैकिंग) का उपयोग करना।
- मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए दीर्घकालिक भूमि उपयोग योजनाएँ विकसित करना, जिसमें वन्यजीव आवासों और मानव बस्तियों के बीच बफर जोन बनाना शामिल है।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
मानव-वन्यजीव संघर्ष · हाथी संरक्षण · पर्यावास विखंडन · वन्यजीव गलियारे · कुम्की हाथी · कौंडिन्य वन्यजीव अभयारण्य · संरक्षण चुनौतियाँ · पर्यावरणीय कनेक्टिविटी · एशियाई हाथी · विद्युत-आघात से मृत्यु
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A (g)’, ‘note’: ‘प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार’}
अवधारणा प्रवाह
चित्तूर में हाथियों की आबादी में वृद्धि → हाथियों का अभयारण्य से बाहर निकलना → कृषि क्षेत्रों और मानव बस्तियों में प्रवेश → फसलों का नुकसान और विद्युत-आघात → मानव और हाथियों के बीच संघर्ष में वृद्धि → वन विभाग द्वारा कुम्की हाथियों का उपयोग
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कौंडिन्य वन्यजीव अभयारण्य आंध्र प्रदेश में स्थित है और एशियाई हाथियों के संरक्षण के लिए जाना जाता है।
2. कुम्की हाथी प्रशिक्षित हाथी होते हैं जिनका उपयोग मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए किया जाता है।
3. भारत में हाथियों की सबसे अधिक आबादी कर्नाटक राज्य में पाई जाती है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीनों
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीनों — कथन 1 सही है। कौंडिन्य वन्यजीव अभयारण्य आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में स्थित है और यह राज्य में जंगली हाथियों की एकमात्र स्थायी उपस्थिति वाला क्षेत्र है। कथन 2 भी सही है। कुम्की हाथी प्रशिक्षित हाथी होते हैं जिनका उपयोग जंगली हाथियों को पकड़ने, खदेड़ने या शांत करने के लिए किया जाता है, जिससे मानव-हाथी संघर्ष का प्रबंधन किया जा सके। कथन 3 गलत है। नवीनतम हाथी जनगणना (2017) के अनुसार, कर्नाटक में हाथियों की संख्या सबसे अधिक है, लेकिन यह कथन सामान्य ज्ञान के लिए है और दिए गए समाचार से सीधे संबंधित नहीं है, फिर भी यह एक सामान्य तथ्य है।
Q2. अभिकथन (A): चित्तूर जिले में हाथियों की बढ़ती आबादी मानव-वन्यजीव संघर्ष का एक प्रमुख कारण बन गई है।
कारण (R): जंगली हाथी अक्सर भोजन और पानी की तलाश में कृषि क्षेत्रों और मानव बस्तियों में प्रवेश करते हैं, जिससे फसल का नुकसान होता है और जान-माल का खतरा होता है।
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है, जैसा कि समाचार में बताया गया है कि चित्तूर में हाथियों की आबादी बढ़ने से संघर्ष बढ़ रहा है। कारण (R) भी सही है, क्योंकि हाथी अपने प्राकृतिक पर्यावास से बाहर निकलकर कृषि भूमि में प्रवेश करते हैं, जिससे संघर्ष होता है। कारण (R) अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ मानव-वन्यजीव संघर्ष, विशेषकर मानव-हाथी संघर्ष, भारत में संरक्षण प्रयासों के लिए एक गंभीर चुनौती प्रस्तुत करता है। इस कथन के आलोक में, मानव-हाथी संघर्ष के कारणों का विश्लेषण कीजिए और इसके समाधान हेतु सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों पर चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** मानव-वन्यजीव संघर्ष की संक्षिप्त परिभाषा और भारत में इसकी बढ़ती प्रासंगिकता, विशेषकर मानव-हाथी संघर्ष के संदर्भ में। चित्तूर जिले के उदाहरण का उल्लेख किया जा सकता है।
2. **मानव-हाथी संघर्ष के कारण:**
* **पर्यावास विखंडन और अतिक्रमण:** वनों की कटाई, कृषि विस्तार, शहरीकरण और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के कारण हाथियों के प्राकृतिक पर्यावास का सिकुड़ना।
* **वन्यजीव गलियारों का अवरोध:** हाथियों के पारंपरिक प्रवास मार्गों पर मानव गतिविधियों का अतिक्रमण।
* **फसल क्षति:** हाथियों द्वारा कृषि फसलों को नुकसान, जिससे किसानों को आर्थिक हानि होती है।
* **पानी और भोजन की कमी:** वनों में संसाधनों की कमी के कारण हाथियों का मानव बस्तियों की ओर पलायन।
* **विद्युत-आघात:** अवैध रूप से लगाई गई बाड़ या ढीली बिजली लाइनों से हाथियों की मृत्यु।
* **जनसंख्या वृद्धि:** कुछ क्षेत्रों में हाथियों की आबादी में वृद्धि, जिससे संसाधनों पर दबाव बढ़ता है।
3. **सरकार द्वारा उठाए गए कदम/समाधान:**
* **परियोजना हाथी (Project Elephant):** 1992 में शुरू की गई, इसका उद्देश्य हाथियों, उनके पर्यावास और गलियारों की सुरक्षा करना है।
* **वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972:** हाथियों को अनुसूची I में रखकर उच्चतम कानूनी संरक्षण प्रदान करना।
* **हाथी गलियारों का सीमांकन और संरक्षण:** ‘एलिफेंट कॉरिडोर ऑफ इंडिया’ रिपोर्ट जैसे प्रयासों के माध्यम से गलियारों की पहचान और सुरक्षा।
* **कुम्की हाथियों का उपयोग:** संघर्ष वाले क्षेत्रों में जंगली हाथियों को नियंत्रित करने के लिए प्रशिक्षित हाथियों का उपयोग।
* **क्षतिपूर्ति योजनाएं:** फसल क्षति और जान-माल के नुकसान के लिए किसानों/पीड़ितों को मुआवजा प्रदान करना।
* **जागरूकता कार्यक्रम:** स्थानीय समुदायों को संघर्ष प्रबंधन और सह-अस्तित्व के बारे में शिक्षित करना।
* **प्रौद्योगिकी का उपयोग:** प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों, सौर बाड़ और अन्य निवारक उपायों का उपयोग।
* **अंतर-राज्यीय समन्वय:** प्रवासी हाथियों के प्रबंधन के लिए राज्यों के बीच सहयोग।
4. **निष्कर्ष:** मानव-हाथी संघर्ष के स्थायी समाधान के लिए संरक्षण, सामुदायिक भागीदारी और सतत विकास के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता पर बल। पर्यावरणीय कनेक्टिविटी बनाए रखने का महत्व।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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