26 Sep डीसीपीसी का विशेष अभियान 6.0: ई-कचरा प्रबंधन और कार्यस्थल दक्षता पर नया फोकस
✎ विशेष अभियान 6.0 का लक्ष्य ई-कचरा प्रबंधन और कार्यस्थल दक्षता में सुधार के माध्यम से सरकारी कार्यालयों में स्वच्छ, कुशल और जवाबदेह शासन सुनिश्चित करना है, जो ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 के अनुरूप है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पहलू | GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी, प्रदूषण और अवक्रमण
- Prelims: विशेष अभियान 6.0, ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022, रसायन एवं पेट्रो-रसायन विभाग, स्वच्छता अभियान, कार्यस्थल दक्षता, CPGRAMS
- Essay: स्वच्छता, सुशासन और सतत विकास, डिजिटल युग में ई-कचरा प्रबंधन की चुनौतियाँ और समाधान
त्वरित पुनरावृत्ति: विशेष अभियान 6.0 का लक्ष्य ई-कचरा प्रबंधन और कार्यस्थल दक्षता में सुधार के माध्यम से सरकारी कार्यालयों में स्वच्छ, कुशल और जवाबदेह शासन सुनिश्चित करना है, जो ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 के अनुरूप है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
रसायन और उर्वरक मंत्रालय का रसायन एवं पेट्रो-रसायन विभाग (DCPC) 2 से 31 अक्टूबर 2026 तक ‘विशेष अभियान 6.0’ शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इस अभियान का मुख्य फोकस स्वच्छता, ई-कचरे के निपटान, स्थान प्रबंधन और कार्यस्थल दक्षता में सुधार पर रहेगा। यह अभियान ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 के अनुपालन पर विशेष जोर देगा, जो प्रभावी ई-कचरा संग्रह, पृथक्करण और निपटान को सुनिश्चित करेगा।
पृष्ठभूमि
- भारत सरकार विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में प्रशासनिक दक्षता और सार्वजनिक सेवा वितरण में सुधार के लिए नियमित रूप से अभियान चलाती है।
- विशेष अभियान श्रृंखला इसी दिशा में एक पहल है, जिसका उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता, रिकॉर्ड प्रबंधन, कबाड़ निपटान और कार्यस्थल अनुकूलन को बढ़ावा देना है।
- पिछले ‘विशेष अभियान 5.0’ (2025) में विभाग ने कबाड़ निपटान से 9.18 लाख रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त किया और 7,156 वर्ग फुट का क्षेत्र खाली कराया, जिससे कार्यालय स्थान का बेहतर उपयोग संभव हुआ।
- अभिलेख प्रबंधन के तहत, 4,792 भौतिक फाइलों की समीक्षा की गई और 237 को अनावश्यक घोषित किया गया, जबकि 1,275 ई-फाइलों की समीक्षा कर 170 को बंद किया गया।
- इस अभियान के दौरान जनता से प्राप्त छह शिकायतों का भी समयबद्ध तरीके से निपटारा किया गया, जो जनसेवा वितरण के प्रति विभाग की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- विभाग के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और स्वायत्त संस्थानों जैसे CIPET, IPFT, HOCL और HIL ने भी इन अभियानों में सक्रिय रूप से भाग लिया है।
विशेष अभियान 6.0 क्या है?
- विशेष अभियान 6.0 रसायन एवं पेट्रो-रसायन विभाग द्वारा आयोजित एक मासिक अभियान है, जो 2 से 31 अक्टूबर 2026 तक चलेगा।
- इसका मुख्य उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता, ई-कचरा निपटान, स्थान प्रबंधन और कार्यस्थल दक्षता में सुधार लाना है।
- अभियान का इस वर्ष का विषय ‘ई-कचरे का प्रभावी संग्रह, पृथक्करण और निपटान’ है, जो ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 के अनुरूप है।
- इसमें कार्यालय स्थान के अनुकूलन, स्क्रैप और अनावश्यक वस्तुओं के निपटान, रिकॉर्ड प्रबंधन और समग्र कार्यस्थल वातावरण में सुधार पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
- अभियान के तहत लंबित संसदीय आश्वासनों, सार्वजनिक शिकायतों (CPGRAMS के माध्यम से प्राप्त) और अंतर-मंत्रालयी संदर्भों की समीक्षा और समयबद्ध निपटान भी किया जाएगा।
- यह प्रशासनिक दक्षता में सुधार के लिए नियमों और प्रक्रियाओं की समीक्षा और सरलीकरण पर भी जोर देगा।
- पुराने भौतिक फाइलों की समीक्षा, रिकॉर्डिंग और छंटाई के माध्यम से तथा ई-फाइलों को बंद करके अभिलेख प्रबंधन को सुदृढ़ करना भी इसका एक महत्वपूर्ण पहलू है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| ई-कचरा निपटान पर विशेष जोर | ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 के अनुपालन और पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण। |
| कार्यस्थल दक्षता में सुधार | सरकारी कार्यालयों में उत्पादकता बढ़ाने और संसाधनों के बेहतर उपयोग को सुनिश्चित करने में सहायक। |
| स्थान प्रबंधन और अनुकूलन | उपलब्ध कार्यालय स्थान का प्रभावी ढंग से उपयोग करने और अनावश्यक वस्तुओं को हटाने से कार्यस्थल का सौंदर्यीकरण होता है। |
| रिकॉर्ड प्रबंधन का सुदृढ़ीकरण | भौतिक और इलेक्ट्रॉनिक दोनों तरह के रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने से पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ती है। |
| सार्वजनिक शिकायतों का समयबद्ध निपटान | नागरिक-केंद्रित शासन और प्रभावी जनसेवा वितरण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। |
महत्व
प्रशासनिक महत्व
- यह अभियान सरकारी विभागों में स्वच्छ, कुशल, पारदर्शी और उत्तरदायी शासन के व्यापक उद्देश्य को प्राप्त करने में सहायक है।
- यह प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और कार्यस्थल के वातावरण में सुधार करने पर केंद्रित है, जिससे कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ती है।
पर्यावरणीय महत्व
- ई-कचरे के उचित निपटान पर विशेष जोर पर्यावरणीय प्रदूषण को कम करने और संसाधनों के स्थायी प्रबंधन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- यह ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करता है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को बल मिलता है।
आर्थिक महत्व
- कबाड़ निपटान से राजस्व सृजन होता है, जैसा कि विशेष अभियान 5.0 के दौरान 9.18 लाख रुपये से अधिक की प्राप्ति से स्पष्ट है।
- स्थान के अनुकूलन से कार्यालय स्थान का बेहतर उपयोग होता है, जिससे किराए या रखरखाव पर होने वाले खर्च में संभावित बचत हो सकती है।
सामाजिक महत्व
- सार्वजनिक शिकायतों के समयबद्ध निपटान से नागरिकों का सरकार पर विश्वास बढ़ता है और जनसेवा वितरण में सुधार होता है।
- स्वच्छ और व्यवस्थित कार्यस्थल कर्मचारियों के मनोबल और कल्याण में सुधार करते हैं।
चुनौतियाँ
1. ई-कचरा प्रबंधन
- ई-कचरे की बढ़ती मात्रा और उसके उचित संग्रह, पृथक्करण तथा निपटान के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे की कमी।
- ई-कचरा प्रबंधन नियमों के बारे में जागरूकता की कमी और अनौपचारिक क्षेत्र में इसके निपटान की समस्या।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण और पारिस्थितिकी, प्रदूषण नियंत्रण
2. रिकॉर्ड प्रबंधन
- पुराने भौतिक रिकॉर्ड की बड़ी संख्या और उनके डिजिटलीकरण तथा भंडारण की चुनौती।
- ई-फाइलों के प्रबंधन और उनके सुरक्षित भंडारण के लिए तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता।
यूपीएससी लिंक: शासन, ई-शासन
3. संसाधन अनुकूलन
- अनावश्यक वस्तुओं और स्क्रैप की पहचान तथा उनके निपटान में नौकरशाही बाधाएं।
- उपलब्ध कार्यालय स्थान के अधिकतम उपयोग के लिए प्रभावी योजना और कार्यान्वयन की आवश्यकता।
यूपीएससी लिंक: शासन, सार्वजनिक प्रशासन
4. अंतर-विभागीय समन्वय
- विभिन्न सरकारी विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के बीच अभियान के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए समन्वय स्थापित करना।
- अभियान की सफलता के लिए सभी हितधारकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना।
यूपीएससी लिंक: शासन, सार्वजनिक प्रशासन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| ई-कचरा निपटान | पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव और स्वास्थ्य जोखिम यदि ठीक से प्रबंधित न किया जाए। |
| कार्यस्थल दक्षता | अव्यवस्थित कार्यस्थल से उत्पादकता में कमी और संसाधनों का अक्षम उपयोग। |
| रिकॉर्ड प्रबंधन | पुराने और अव्यवस्थित रिकॉर्ड से पारदर्शिता की कमी और निर्णय लेने में देरी। |
| सार्वजनिक शिकायतें | लंबित शिकायतों से नागरिकों का असंतोष और शासन में विश्वास की कमी। |
| संसाधन सृजन | स्क्रैप निपटान से राजस्व क्षमता का पूरी तरह से दोहन न होना। |
आगे की राह
- ई-कचरा प्रबंधन के लिए एक केंद्रीकृत प्रणाली विकसित की जाए, जिसमें संग्रह, पृथक्करण और पुनर्चक्रण के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश हों।
- सरकारी कर्मचारियों के लिए ई-कचरा प्रबंधन और रिकॉर्ड डिजिटलीकरण पर नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
- कार्यस्थल दक्षता में सुधार के लिए आधुनिक कार्यालय प्रबंधन तकनीकों और डिजिटल उपकरणों को अपनाया जाए।
- सार्वजनिक शिकायतों के त्वरित और प्रभावी निपटान के लिए एक मजबूत निगरानी तंत्र स्थापित किया जाए।
- अभियान की प्रगति और उपलब्धियों की नियमित समीक्षा की जाए तथा सर्वोत्तम प्रथाओं को अन्य विभागों के साथ साझा किया जाए।
- पर्यावरण-अनुकूल खरीद नीतियों को बढ़ावा दिया जाए ताकि ई-कचरे की उत्पत्ति को कम किया जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
ई-कचरा प्रबंधन · स्वच्छता अभियान · कार्यस्थल दक्षता · रिकॉर्ड प्रबंधन · जन शिकायत निवारण · स्थान अनुकूलन · सरकारी प्रक्रिया सुधार · सतत विकास · ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 · रसायन एवं पेट्रो-रसायन विभाग
अवधारणा प्रवाह
विशेष अभियान 6.0 की तैयारी → ई-कचरा निपटान, स्वच्छता पर ध्यान → कार्यस्थल दक्षता में सुधार → रिकॉर्ड प्रबंधन का सुदृढ़ीकरण → सार्वजनिक शिकायतों का निपटान → स्वच्छ, कुशल, पारदर्शी शासन
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विशेष अभियान 6.0 का प्राथमिक उद्देश्य ई-कचरा निपटान और कार्यस्थल दक्षता में सुधार करना है।
2. यह अभियान केवल केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों तक ही सीमित है, इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम शामिल नहीं हैं।
3. विशेष अभियान 5.0 के दौरान स्क्रैप निपटान से प्राप्त राजस्व का उपयोग ई-कचरा प्रबंधन के लिए किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल एक — कथन 1 सही है क्योंकि विशेष अभियान 6.0 का मुख्य फोकस ई-कचरा निपटान, स्वच्छता और कार्यस्थल दक्षता में सुधार पर है। कथन 2 गलत है क्योंकि विभाग के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और स्वायत्त संस्थानों ने भी अभियान में सक्रिय रूप से भाग लिया है। कथन 3 गलत है क्योंकि स्क्रैप निपटान से राजस्व प्राप्त हुआ था, लेकिन यह नहीं बताया गया है कि इसका उपयोग विशेष रूप से ई-कचरा प्रबंधन के लिए किया गया था।
Q2. ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
- ये नियम केवल औद्योगिक ई-कचरे के निपटान से संबंधित हैं।
- ये नियम ई-कचरे के संग्रह, पृथक्करण और निपटान के लिए विस्तृत दिशानिर्देश प्रदान करते हैं।
- इन नियमों को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा अधिसूचित नहीं किया गया है।
- ये नियम पहली बार 2026 में लागू किए गए थे।
उत्तर: ये नियम ई-कचरे के संग्रह, पृथक्करण और निपटान के लिए विस्तृत दिशानिर्देश प्रदान करते हैं। — ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 ई-कचरे के संग्रह, पृथक्करण और निपटान के लिए विस्तृत दिशानिर्देश प्रदान करते हैं, जैसा कि विशेष अभियान 6.0 के फोकस क्षेत्र में भी उल्लेख किया गया है। ये नियम व्यापक हैं और केवल औद्योगिक कचरे तक सीमित नहीं हैं। इन्हें पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा अधिसूचित किया गया है और ये 2022 में लागू हुए थे।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में ई-कचरा प्रबंधन की चुनौतियों पर चर्चा कीजिए और सरकारी कार्यालयों में ‘विशेष अभियान 6.0’ जैसे पहल इस दिशा में कैसे योगदान कर सकते हैं, स्पष्ट कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: ई-कचरा प्रबंधन की चुनौतियाँ: ई-कचरे की बढ़ती मात्रा, अनौपचारिक क्षेत्र का प्रभुत्व, अपर्याप्त बुनियादी ढाँचा, जागरूकता की कमी, स्वास्थ्य और पर्यावरणीय खतरे, सीमा-पार अवैध व्यापार।
सरकारी पहल: ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 का उल्लेख।
‘विशेष अभियान 6.0’ का योगदान: ई-कचरे की पहचान और निपटान पर विशेष जोर, कार्यस्थल में ई-कचरे का प्रभावी संग्रह और पृथक्करण, सरकारी विभागों में जागरूकता बढ़ाना, ‘उत्पादक उत्तरदायित्व विस्तार’ (Extended Producer Responsibility – EPR) के सिद्धांतों को बढ़ावा देना, स्वच्छ और कुशल कार्यस्थल के माध्यम से उदाहरण प्रस्तुत करना, अन्य कचरा प्रबंधन पहलुओं (स्क्रैप, रिकॉर्ड) के साथ एकीकृत दृष्टिकोण।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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